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Hindi - Chapter 16 - An-Nahl

Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink

Verse 1 — Surah An-Nahl 16:1

अल्लाह का आदेश आ गया है। अतः (हे काफ़िरो!) उसके शीघ्र आने की माँग न करो। वह (अल्लाह) पवित्र तथा उस शिर्क (मिश्रणवाद) से ऊँचा है, जो वे कर रहे हैं।

Verse 2 — Surah An-Nahl 16:2

वह फ़रिश्तों को वह़्यी के साथ, अपने आदेश से, अपने जिस भक्त पर चाहता है, उतारता है कि (लोगों को) सावधान करो कि मेरे सिवा कोई पूज्य नहीं है, अतः मुझसे ही डरो।

Verse 3 — Surah An-Nahl 16:3

उसने आकाशों तथा धरती की उत्पत्ति सत्य के साथ की है, वह उनके शिर्क से बहुत ऊँचा है।

Verse 4 — Surah An-Nahl 16:4

उसने मनुष्य की उत्पत्ति वीर्य से की है, फिर वह अकस्मात् खुला झगड़ालू बन गया।

Verse 5 — Surah An-Nahl 16:5

तथा चौपायों की उत्पत्ति की, जिनमें तुम्हारे लिए गर्मी[1] और बहुत-से लाभ हैं और उनमें से कुछको खाते हो।

Verse 6 — Surah An-Nahl 16:6

तथा उनमें तुम्हारे लिए एक शोभा है, जिस समय संध्या को चराकर लाते हो और जब प्रातः चराने ले जाते हो।

Verse 7 — Surah An-Nahl 16:7

और वे तुम्हारे बोझ, उन नगरों तक लादकर ले जाते हैं, जिनतक तुम बिना कड़े परिश्रम के नहीं पहुँच सकते। वास्तव में, तुम्हारा पालनहार अति करुणामय, दयावान् है।

Verse 8 — Surah An-Nahl 16:8

तथा घोड़े, खच्चर और गधे पैदा किये, ताकि उनपर सवारी करो और (वे) शोभा (बनें) और (अल्लाह) ऐसी चीज़ों की उत्पत्ति करेगा, जिन्हें (अभी) तुम नहीं जानते हो[1]।

Verse 9 — Surah An-Nahl 16:9

और अल्लाह पर, सीधी राह बताना है और उनमें से कुछ[1] टेढ़े हैं तथा यदि अल्लाह चाहता, तो तुमसभी को सीधी राह दिखा देता।

Verse 10 — Surah An-Nahl 16:10

वही है, जिसने आकाश से जल बरसाया, जिसमें से कुछ तुम पीते हो तथा कुछसे वृक्ष उपजते हैं, जिसमें तुम (पशुओं को) चराते हो।

Verse 11 — Surah An-Nahl 16:11

और तुम्हारे लिए उससे खेती उपजाता है और ज़ैतून, खजूर, अंगूर और प्रत्येक प्रकार के फल। वास्तव में इस, में एक बड़ी निशानी है, उन लोगों के लिए, जो सोच-विचार करते हैं।

Verse 12 — Surah An-Nahl 16:12

और उसने तुम्हारे लिए रात्रि तथा दिवस को सेवा में लगा रखा है तथा सूर्य और चाँद को और (हाँ!) सितारे उसके आदेश के अधीन हैं। वास्तव में, इसमें कई निशानियाँ (लक्षण) हैं, उन लोगों के लिए, जो समझ-बूझ रखते हैं।

Verse 13 — Surah An-Nahl 16:13

(तथा जो तुम्हारे लिए धरती में विभिन्न रंगों की चीजें उत्पन्न की हैं, वास्तव में, इसमें एक बड़ी निशानी लक्षण) है, उन लोगों के लिए, जो शिक्षा ग्रहण करते हैं।

Verse 14 — Surah An-Nahl 16:14

और वही है, जिसने सागर को वश में कर रखा है, ताकि तुम उससे ताज़ा[1] मांस खाओ और उससे अलंकार[2] निकालो, जिसे पहनते हो तथा तुम नौकाओं को देखते हो कि सागर में (जल को) फाड़ती हुई चलती हैं और इसलिए ताकि तुम उस अल्लाह के अनुग्रह[3] की खोज करो और ताकि कृतज्ञ बनो।

Verse 15 — Surah An-Nahl 16:15

और उसने धरती में पर्वत गाड़ दिये, ताकि तुम्हें लेकर डोलने न लगे तथा नदियाँ और राहें, ताकि तुम राह पाओ।

Verse 16 — Surah An-Nahl 16:16

तथा बहुत-से चिन्ह (बना दिये) और वे सितारों से (भी) राह[1] पाते हैं।

Verse 17 — Surah An-Nahl 16:17

तो क्या, जो उत्पत्ति करता है, उसके समान है, जो उत्पत्ति नहीं करता? क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते

Verse 18 — Surah An-Nahl 16:18

और यदि तुम अल्लाह के पुरस्कारों की गणना करना चाहो, तो कभी नहीं कर सकते। वास्तव में, अल्लाह बड़ा क्षमा तथा दया करने वाला है।

Verse 19 — Surah An-Nahl 16:19

तथा अल्लाह जानता है, जो तुम छुपाते हो और जो तुम व्यक्त करते हो।

Verse 20 — Surah An-Nahl 16:20

और जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पुकारते हैं, वे किसी चीज़ की उत्पत्ति नहीं कर सकते। जबकि वे स्वयं उत्पन्न किये जाते हैं।

Verse 21 — Surah An-Nahl 16:21

वे निर्जीव प्राणहीन हैं और (ये भी) नहीं जानते कि कब पुनः जीवित किये जायेंगे।

Verse 22 — Surah An-Nahl 16:22

तुम्हारा पूज्य बस एक है, फिर जो लोग परलोक पर ईमान नहीं लाते, उनके दिल निवर्ती (विरोधी) हैं और वे अभिमानी हैं।

Verse 23 — Surah An-Nahl 16:23

जो कुछ वे छुपाते तथा व्यक्त करते हैं, निश्चय अल्लाह उसे जानता है। वास्तव में, वह अभिमानियों से प्रेम नहीं करता।

Verse 24 — Surah An-Nahl 16:24

और जब उनसे पूछा जाये कि तुम्हारे पालनहार ने क्या उतारा है[1]? तो कहते हैं कि पूर्वजों की कल्पित कथाएँ हैं।

Verse 25 — Surah An-Nahl 16:25

ताकि वे अपने (पापों का) पूरा बोझ प्रलय के दिन उठायें तथा कुछ उन लोगों का बोझ (भी), जिन्हें बिना ज्ञान के कुपथ कर रहे थे, सावधान! वे कितना बुरा बोझ उठायेंगे

Verse 26 — Surah An-Nahl 16:26

इनसे पहले के लोग भी षड्यंत्र रचते रहे, तो अल्लाह ने उनके षड्यंत्र के भवन का उनमूलन कर दिया, फिर ऊपर से उनपर छत गिर पड़ी और उनपर ऐसी दिशा से यातना आ गई, जिसे वे सोच भी नहीं रहे थे।

Verse 27 — Surah An-Nahl 16:27

फिर प्रलय के दिन उन्हें अपमानित करेगा और कहेगा कि मेरे वह साझी कहाँ हैं, जिनके लिए तुम झगड़ रहे थे? वे कहेंगेः जिन्हें ज्ञान दिया गया है कि वास्तव में, आज अपमान तथा बुराई (यातना) काफ़िरों के लिए है।

Verse 28 — Surah An-Nahl 16:28

जिनके प्राण फ़रिश्ते निकालते हैं, इस दशा में कि वे अपने ऊपर अत्याचार करने वाले हैं, तो वे आज्ञाकारी बन जाते[1] हैं, (कहते हैं कि) हम कोई बुराई (शिर्क) नहीं कर रहे थे। क्यों नहीं? वास्तव में, अल्लाह तुम्हारे कर्मों से भली-भाँति अवगत है।

Verse 29 — Surah An-Nahl 16:29

तो नरक के द्वारों में प्रवेश कर जाओ, उसमें सदावासी रहोगे, अतः क्या ही बुरा है अभिमानों का निवास स्थान

Verse 30 — Surah An-Nahl 16:30

और उनसे पूछा गया, जो अपने पालनहार से डरे कि तुम्हारे पालनहार ने क्या उतारा है? तो उन्होंने कहाः अच्छी चीज़ उतारी है। उनके लिए जिन्होंने इस लोक में सदाचार किये, बड़ी भलाई है और वास्तव में, परलोक का घर (स्वर्ग) अति उत्तम है और आज्ञाकारियों का आवास कितना अच्छा है

Verse 31 — Surah An-Nahl 16:31

सदा रहने के स्वर्ग जिसमें प्रवेश करेंगे, जिनमें नहरें बहती होंगी, उनके लिए उसमें जो चाहेंगे (मिलेगा)। इसी प्रकार, अल्लाह आज्ञाकारियों को प्रतिफल (बदला) देता है।

Verse 32 — Surah An-Nahl 16:32

जिनके प्राण फ़रिश्ते इस दशा में निकालते हैं कि वे स्वच्छ-पवित्र हैं, तो कहते हैं: "तुमपर शान्ति हो।" तुम अपने सुकर्मों के बदले स्वर्ग में प्रवेश कर जाओ।

Verse 33 — Surah An-Nahl 16:33

क्या वे इसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं कि उनके पास फ़रिश्ते[1] आ जायें अथवा आपके पालनहार का आदेश[2] आ पहुँचे? ऐसे ही, उनसे पूर्व के लोगों ने किया और अल्लाह ने उनपर अत्याचार नहीं किया, परन्तु वे स्वयं अपने ऊपर अत्याचार कर रहे थे।

Verse 34 — Surah An-Nahl 16:34

तो उनके कुकर्मों की बुराईयाँ[1] उनपर आ पड़ीं और उन्हें उसी (यातना) ने घेर लिया, जिसका वे परिहास कर रहे थे।

Verse 35 — Surah An-Nahl 16:35

और कहा, जिन लोगों ने शिर्क (मिश्रणवाद) कियाः यदि अल्लाह चाहता, तो हम उसके सिवा किसी चीज़ की इबादत (वंदना) न करते, न हम और न हमारे बाप-दादा और न उसके आदेश के बिना किसी चीज़ को ह़राम (वर्जित) करते। ऐसे ही, इनसे पूर्व वाले लोगों ने किया। तो रसूलों पर केवल खुले रूप से उपदेश पहुँचा देना है।

Verse 36 — Surah An-Nahl 16:36

और हमने प्रत्येक समुदाय में एक रसूल भेजा कि अल्लाह की इबादत (वंदना) करो और ताग़ूत (असुर- अल्लाह के सिवा पूज्यों) से बचो, तो उनमें से कुछ को, अल्लाह ने सुपथ दिखा दिया और कुछ पर कुपथ सिध्द हो गया। तो धरती में चलो-फिरो, फिर देखो कि झुठलाने वालों का अन्त कैसा रहा

Verse 37 — Surah An-Nahl 16:37

(हे नबी!) आप ऐसे लोगों को सुपथ दिखाने पर लोलुप हों, तो भी अल्लाह उसे सुपथ नहीं दिखायेगा, जिसे कुपथ कर दे और न उनका कोई सहायक होगा।

Verse 38 — Surah An-Nahl 16:38

और उन (काफ़िरों) ने अल्लाह की भरपूर शपथ ली कि अल्लाह उसे पुनः जीवित नहीं करेगा, जो मर जाता है। क्यों नहीं? ये तो अल्लाह का अपने ऊपर सत्य वचन है, परन्तु अधिक्तर लोग नहीं जानते।

Verse 39 — Surah An-Nahl 16:39

(ऐसा करना इसलिए आवश्यक है) ताकि अल्लाह उस तथ्य को उजागर कर दे, जिसमें[1] वे विभेद कर रहे थे और ताकि काफ़िर जान लें कि वही झूठे थे।

Verse 40 — Surah An-Nahl 16:40

हमारा कथन, जब हम किसी चीज़ को अस्तित्व प्रदान करने का निश्चय करें, तो इसके सिवा कुछ नहीं होता कि उसे आदेश दें कि "हो जा" और वह हो जाती है।

Verse 41 — Surah An-Nahl 16:41

तथा जो लोग अल्लाह के लिए हिजरत (प्रस्थान) कर गये, अत्याचार सहने के पश्चात्, तो हम उन्हें संसार में अच्छा निवास्-स्थान देंगे और परलोक का प्रतिफल तो बहुत बड़ा है, यदि वे[1] जानते।

Verse 42 — Surah An-Nahl 16:42

जिन लोगों ने धैर्य धारण किया तथा अपने पालनहार पर ही वे भरोसा करते हैं।

Verse 43 — Surah An-Nahl 16:43

और (हे नबी!) हमने आपसे पहले जो भी रसूल भेजे, वे सभी मानव-पुरुष थे। जिनकी ओर हम वह़्यी (प्रकाशना) करते रहे। तो तुम ज्ञानियों से पूछ लो, यदि (स्वयं) नहीं[1] जानते।

Verse 44 — Surah An-Nahl 16:44

प्रत्यक्ष (खुले) प्रमाणों तथा पुस्तकों के साथ (उन्हें भेजा) और आपकी ओर ये शिक्षा (क़ुर्आन) अवतरित की, ताकि आप उसे सर्वमानव के लिए उजागर कर दें, जो कुछ उनकी ओर उतारा गया है, ताकि वे सोच-विचार करें।

Verse 45 — Surah An-Nahl 16:45

तो क्या वे निर्भय हो गये हैं, जिन्होंने बुरे षड्यंत्र रचे हैं कि अल्लाह उन्हें धरती में धंसा दे? अथवा उनपर यातना ऐसी दिशा से आ जाये, जिसे वे सोचते भी न हों

Verse 46 — Surah An-Nahl 16:46

या उन्हें चलते-फिरते पकड़ ले, तो वे (अल्लाह को) विवश करने वाले नहीं हैं।

Verse 47 — Surah An-Nahl 16:47

अथवा उन्हें भय की दशा में पकड़[1] ले? निश्चय तुम्हारा पालनहार अति करुणामय दयावान् है।

Verse 48 — Surah An-Nahl 16:48

क्या अल्लाह की उत्पन्न की हुई किसी चीज़ को उन्होंने नहीं देखा? जिसकी छाया दायें तथा बायें झुकती है, अल्लाह को सज्दा करते हुए? और वे सर्व विनयशील हैं।

Verse 49 — Surah An-Nahl 16:49

तथा अल्लाह ही को सज्दा करते हैं, जो आकाशों में तथा धरती में चर (जीव) तथा फ़रिश्ते हैं और वे अहंकार नहीं करते।

Verse 50 — Surah An-Nahl 16:50

वे[1] अपने पालनहार से डरते हैं, जो उनके ऊपर है और वही करते हैं, जो आदेश दिये जाते हैं।

Verse 51 — Surah An-Nahl 16:51

और अल्लाह ने कहाः दो पूज्य न बनाओ, वही अकेला पूज्य है। अतः तुम मुझी से डरो।

Verse 52 — Surah An-Nahl 16:52

और उसी का है, जो कुछ आकाशों तथा धरती में है और उसी की वंदना स्थायी है, तो क्या तुम अल्लाह के सिवा दूसरे से डरते हो

Verse 53 — Surah An-Nahl 16:53

तुम्हें, जोभी सुख-सुविधा प्राप्त है, वह अल्लाह ही की ओर से है। फिर जब तुम्हें दुःख पहुँचता है, तो उसी को पुकारते हो।

Verse 54 — Surah An-Nahl 16:54

फिर जब तुमसे दुःख दूर कर देता है, तो तुम्हारा एक समुदाय अपने पालनहार का साझी बनाने लगता है।

Verse 55 — Surah An-Nahl 16:55

ताकि हमने उन्हें, जो कुछ प्रदान किया है, उसके प्रति कृतघ्न हों, तो आनन्द ले लो, तुम्हें शीघ्र ही ज्ञान हो जायेगा।

Verse 56 — Surah An-Nahl 16:56

और वे जिन्हें जानते[1] तक नहीं, उनका एक भाग, उसमें से बनाते हैं, जो जीविका हमने उन्हें दी है। तो अल्लाह की शपथ! तुमसे अवश्य पूछा जायेगा, उसके विषय में, जो तुम झूठी बातें बना रहे थे

Verse 57 — Surah An-Nahl 16:57

और वे अल्लाह के लिए पुत्रियाँ बनाते[1] हैं, वह पवित्र है! और उनके लिए वह[2] है, जो वे स्वयं चाहते हों

Verse 58 — Surah An-Nahl 16:58

और जब उनमें से किसी को पुत्री (के जन्म) की शुभसूचना दी जाये, तो उसका मुख काला हो जाता है और वह शोकपूर्ण हो जाता है।

Verse 59 — Surah An-Nahl 16:59

और लोगों से छुपा फिरता है, उस बुरी सूचना के कारण, जो उसे दी गयी है। (सोचता है कि) क्या[1] उसे अपमान के साथ रोक ले अथवा भूमि में गाड़ दे? देखो! वे कितना बुरा निर्णय करते हैं।

Verse 60 — Surah An-Nahl 16:60

उन्हीं के लिए जो आख़िरत (परलोक) पर ईमान नहीं रखते अपगुण है और अल्लाह के लिए सदगुण हैं तथा वह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।

Verse 61 — Surah An-Nahl 16:61

और यदि अल्लाह, लोगों को उनके अत्याचार[1] पर (तत्क्षण) धरने लगे, तो धरती में किसी जीव को न छोड़े। परन्तु वह एक निर्धारित अवधि तक निलम्बित करता[2] है और जब उनकी अवधि आ जायेगी, तो एक क्षण न पीछे होंगे, न पहले।

Verse 62 — Surah An-Nahl 16:62

वह अल्लाह के लिए उसे[1] बनाते हैं, जिसे स्वयं अप्रिय समझते हैं तथा उनकी ज़ुबानें झूठ बोलती हैं कि उन्हीं के लिए भलाई है। निश्चय उन्हीं के लिए नरक है और वही सबसे पहले (नरक में) झोंके जायेंगे।

Verse 63 — Surah An-Nahl 16:63

अल्लाह की शपथ! (हे नबी!) आपसे पहले हमने बहुत-से समुदायों की ओर रसूल भेजे। तो उनके लिए शैतान ने उनके कुकर्मों को सुसज्जित बना दिया। अतः वही आज उनका सहायक है और उन्हीं के लिए दुःखदायी यातना है।

Verse 64 — Surah An-Nahl 16:64

और हमने आपपर ये पुस्तक (क़ुर्आन) इसी लिए उतारी है, ताकि आप उनके लिए उसे उजागर कर दें, जिसमें वे विभेद कर रहे हैं तथा मार्गदर्शन और दया है, उन लोगों के लिए, जो ईमान (विश्वास) रखते हैं।

Verse 65 — Surah An-Nahl 16:65

और अल्लाह ने ही आकाश से जल बरसाया, फिर उसने निर्जीव धरती को जीवित कर दिया। निश्चय इसमें उन लोगों के लिए एक निशानी है, जो सुनते हैं।

Verse 66 — Surah An-Nahl 16:66

तथा वास्तव में, तुम्हारे लिए पशुओं में एक शिक्षा है। हम तुम्हें उससे, जो उसके भीतर है, गोबर तथा रक्त के बीच से शुध्द दूध पिलाते हैं, जो पीने वालों के लिए रुचिकर होता है।

Verse 67 — Surah An-Nahl 16:67

तथा खजूरों और अंगूरों के फलों से, जिससे तुम मदिरा बना लेते हो तथा उत्तम जीविका भी, वास्तव में, इसमें एक निशानी (लक्षण) है, उन लोगों के लिए, जो समझ-बूझ रखते हैं।

Verse 68 — Surah An-Nahl 16:68

और हमने मधुमक्खी को प्रेरणा दी कि पर्वतों में घर (छत्ते) बना तथा वृक्षों में और लोगों की बनायी छतों में।

Verse 69 — Surah An-Nahl 16:69

फिर प्रत्येक फलों का रस चूस और अपने पालनहार की सरल राहों पर चलती रह। उसके भीतर से एक पेय निकलता है, जो विभिन्न रंगों का होता है, जिसमें लोगों के लिए आरोग्य है। वास्तव में, इसमें एक निशानी (लक्षण) है, उन लोगों के लिए, जो सोच-विचार करते हैं।

Verse 70 — Surah An-Nahl 16:70

और अल्लाह ही ने तुम्हारी उत्पत्ति की है, फिर तुम्हें मौत देता है और तुममें से कुछको अबोध आयु तक पहुँचा दिया जाता है, ताकि जानने के पश्चात् कुछ न जाने। वास्तव में, अल्लाह सर्वज्ञ, सर्व सामर्थ्यवान्[1] है।

Verse 71 — Surah An-Nahl 16:71

और अल्लाह ने तुममें से कुछ को, कुछ पर जीविका में प्रधानता दी है, तो जिन्हें प्रधानता दी गयी है, वे अपनी जीविका अपने दासों की ओर फेरने वाले नहीं कि वे उसमें बराबर हो जायें, तो क्या वे अल्लाह के उपकारों को नहीं मानते हैं

Verse 72 — Surah An-Nahl 16:72

और अल्लाह ने तुम्हारे लिए तुम्हीं में से पत्नियाँ बनायीं और तुम्हारे लिए तुम्हारी पत्नियों से पुत्र तथा पौत्र बनाये और तुम्हें स्वच्छ चीज़ों से जीविका प्रदान की। तो क्या वे असत्य पर विश्वास रखते हैं और अल्लाह के पुरस्कारों के प्रति अविश्वास रखते हैं

Verse 73 — Surah An-Nahl 16:73

और अल्लाह के सिवा उनकी वंदना करते हैं, जो उनके लिए आकाशों तथा धरती से कुछ भी जीविका देने का अधिकार नहीं रखते और न इसका सामर्थ्य रखते हैं।

Verse 74 — Surah An-Nahl 16:74

और अल्लाह के लिए उदाहरण न दो। वास्तव में, अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते[1]।

Verse 75 — Surah An-Nahl 16:75

अल्लाह ने एक उदाहरण[1] दिया है; एक प्राधीन दास है, जो किसी चीज़ का अधिकार नहीं रखता और दूसरा (स्वाधीन) व्यक्ति है, जिसे हमने अपनी ओर से उत्तम जीविका प्रदान की है और वह उसमें छुपे और खुले व्यय करता है। क्या वे दोनों समान हो जायेंगे? सब प्रशंसा अल्लाह[2] के लिए है। बल्कि अधिक्तर लोग (ये बात) नहीं जानते।

Verse 76 — Surah An-Nahl 16:76

तथा अल्लाह ने दो व्यक्तियों का उदाहरण दिया है; दोनों में से एक गूँगा है, वह किसी चीज़ का अधिकार नहीं रखता, वह अपने स्वामी पर बोझ है, वह उसे जहाँ भेजता है, कोई भलाई नहीं लाता। तो क्या वह और जो न्याय का आदेश देता हो और स्वयं सीधी[1] राह पर हो, बराबर हो जायेंगे

Verse 77 — Surah An-Nahl 16:77

और अल्लाह ही को आकाशों तथा धरती के परोक्ष[1] का ज्ञान है और प्रलय (क़्यामत) का विषय तो बस पलक झपकने जैसा[2] होगा अथवा उससे भी अधिक शीघ्र। वास्तव में, अल्लाह जो चाहे, कर सकता है।

Verse 78 — Surah An-Nahl 16:78

और अल्लाह ही ने तुम्हें तुम्हारी माताओं के गर्भों से निकाला, इस दशा में कि तुम कुछ नहीं जानते थे और तुम्हारे कान और आँख तथा दिल बनाये, ताकि तुम (उसका) उपकार मानो।

Verse 79 — Surah An-Nahl 16:79

क्या वे पक्षियों को नहीं देखते कि वे अंतरिक्ष में कैसे वशीभूत हैं? उन्हें अल्लाह ही थामता[1] है। वास्तव में, इसमें बहुत-सी निशानियाँ हैं, उन लोगों के लिए, जो ईमान लाते हैं।

Verse 80 — Surah An-Nahl 16:80

और अल्लाह ही ने तुम्हारे घरों को निवास स्थान बनाया और पशुओं की खालों से तुम्हारे लिए ऐसे घर[1] बनाये, जिन्हें तुम अपनी यात्रा तथा अपने विराम के दिन हल्का (अल्पभार) पाते हो और उनकी ऊन और रोम तथा बालों से उपक्रण और लाभ के सामान, जीवन की निश्चित अवधि तक के लिए (बनाये)।

Verse 81 — Surah An-Nahl 16:81

और अल्लाह ही ने तुम्हार लिए उस चीज़ में से, जो उत्पन्न की है, छाया बनायी है और तुम्हारे लिए पर्वतों में गुफाएँ बनायी हैं और तुम्हारे लिए ऐसे वस्त्र बनाये हैं, जो तुम्हे धूप से बचायें[1]। इसी प्रकार, वह तुमपर अपना उपकार पूरा करता है, ताकि तुम आज्ञाकारी बनो।

Verse 82 — Surah An-Nahl 16:82

फिर यदि वे विमुख हों, तो आपपर बस प्रत्यक्ष (खुला) उपदेश पहुँचा देना है।

Verse 83 — Surah An-Nahl 16:83

वे अल्लाह के उपकार पहचानते हैं, फिर उसका इन्कार करते हैं और उनमें अधिक्तर कृतघ्न हैं।

Verse 84 — Surah An-Nahl 16:84

और जिस[1] दिन, हम प्रत्येक समुदाय से एक साक्षी (गवाह) खड़ा[2] करेंगे, फिर काफ़िरों को बात करने की अनुमति नहीं दी जायेगी और न उनसे क्षमा याचना की माँग की जायेगी।

Verse 85 — Surah An-Nahl 16:85

और जब अत्याचारी यातना देखेंगे, उनकी यातना कुछ कम नहीं की जायेगी और न उन्हें अवकाश दिया[1] जायेगा।

Verse 86 — Surah An-Nahl 16:86

और जब मुश्रिक अपने (बनाये हुए) साझियों को देखेंगे, तो कहेंगेः हे हमारे पालनहार! यही हमारे साझी हैं, जिन्हें हम, तुझे छोड़कर पुकार रहे थे। तो वे (पूज्य) बोलेंगे कि निश्चय तुम सब मिथ्यावादी (झूठे) हो।

Verse 87 — Surah An-Nahl 16:87

उस दिन, वे अल्लाह के आगे झुक जायेंगे और उनसे खो जायेँगी, जो मिथ्या बातें वे बनाते थे।

Verse 88 — Surah An-Nahl 16:88

जो लोग काफिर हो गये और (दूसरों को भी) अल्लाह की डगर (इस्लाम) से रोक दिये, उन्हें हम यातना पर यातना देंगे, उस उपद्रव के बदले, जो वे कर रहे थे।

Verse 89 — Surah An-Nahl 16:89

और जिस दिन, हम प्रत्येक समुदाय से एक साक्षी उनके विरुध्द उन्हीं में से खड़ा कर देंगे और (हे नबी!) हम आपको उनपर साक्षी (गवाह) बनायेंगे[1] और हमने आपपर ये पुस्तक (क़ुर्आन) अवतरित की है, जो प्रत्येक विषय का खुला विवरण है, मार्गदर्शन दया तथा शुभ सूचना है आज्ञाकारियों के लिए।

Verse 90 — Surah An-Nahl 16:90

वस्तुतः, अल्लाह तुम्हें न्याय, उपकार और समीपवर्तियों को देने का आदेश दे रहा है और निर्लज्जा, बुराई और विद्रोह से रोक रहा है और तुम्हें सिखा रहा है, ताकि तुम शिक्षा ग्रहण करो।

Verse 91 — Surah An-Nahl 16:91

और जब अल्लाह से कोई वचन करो, तो उसे पूरा करो और अपनी शपथों को सुदृढ़ करने के पश्चात् भंग न करो, जब तुमने अल्लाह को अपने ऊपर गवाह बनाया है। निश्चय अल्लाह जो कुछ तुम करते हो, उसे जानता है।

Verse 92 — Surah An-Nahl 16:92

और तुम्हारी दशा उस स्त्री जैसी न हो जाये, जिसने अपना सूत कातने के पश्चात् उधेड़ दिया। तुम अपनी शपथों को आपस में विश्वासघात का साधन बनाते हो, ताकि एक समुदाय दूसरे समुदाय से अधिक लाभ प्राप्त करे। अल्लाह इस[1] (वचन) के द्वारा तुम्हारी परीक्षा ले रहा है और प्रलय के दिन तुम्हारे लिए अवश्य उसे उजागर कर देगा, जिसमें तुम विभेद कर रहे थे।

Verse 93 — Surah An-Nahl 16:93

और यदि अल्लाह चाहता, तो तुम्हें एक समुदाय बना देता। परन्तु वह जिसे चाहता है, कुपथ कर देता है और जिसे चाहता है, सुपथ दर्शा देता है और तुमसे उसके बारे में अवश्य पूछा जायेगा, जो तुम कर रहे थे।

Verse 94 — Surah An-Nahl 16:94

और अपनी शपथों को आपस में विश्वासघात का साधन न बनाओ, ऐसा न हो कि कोई पग अपने स्थिर (दृढ़) होने के पश्चात् (ईमान से) फिसल[1] जाये और तुम उसके बदले बुरा परिणाम चखो कि तुमने अल्लाह की राह से रोका है और तुम्हारे लिए बड़ी यातना हो।

Verse 95 — Surah An-Nahl 16:95

और अल्लाह से किये हुए वचन को तनिक मूल्य के बदले न बेचो[1]। वास्तव में, जो अल्लाह के पास है, वही तुम्हारे लिए उत्तम है, यदि तुम जानो।

Verse 96 — Surah An-Nahl 16:96

जो तुम्हारे पास है, वह व्यय (ख़र्च) हो जायेगा और जो अल्लाह के पास है, वह शेष रह जाने वाला है और हम, जो धैर्य धारण करते हैं, उन्हें अवश्य उनका पारिश्रमिक (बदला) उनके उत्तम कर्मों के अनुसार प्रदान करेंगे।

Verse 97 — Surah An-Nahl 16:97

जो भी सदाचार करेगा, वह नर हो अथवा नारी और ईमान वाला हो, तो हम उसे स्वच्छ जीवन व्यतीत करायेंगे और उन्हें उनका पारिश्रमिक उनके उत्तम कर्मों के अनुसार अवश्य प्रदान करेंगे।

Verse 98 — Surah An-Nahl 16:98

तो (हे नबी!) जब आप क़ुर्आन का अध्ययन करें, तो धिक्कारे हुए शैतान से अललाह की शरण[1] माँग लिया करें।

Verse 99 — Surah An-Nahl 16:99

वस्तुतः, उसका वश उनपर नहीं है, जो ईमान लाये हैं और अपने पालनहार ही पर भरोसा करते हैं।

Verse 100 — Surah An-Nahl 16:100

उसका वश तो केवल उनपर चलता है, जो उसे अपना संरक्षक बनाते हैं और जो मिश्रणवादी (मुश्रिक) हैं।

Verse 101 — Surah An-Nahl 16:101

और जब हम किसी आयत (विधान) के स्थान पर कोई आयत बदल देते हैं और अल्लाह ही अधिक जानता है उसे, जिसे वह उतारता है, तो कहते हैं कि आप तो केवल घड़ लेते हैं, बल्कि उनमें अधिक्तर जानते ही नहीं।

Verse 102 — Surah An-Nahl 16:102

आप कह दें कि इसे (रूह़ुल कुदुस)[1] ने आपके पालनहार की ओर से सत्य के साथ क्रमशः उतारा है, ताकि उन्हें सुदृढ़ कर दे, जो ईमान लाये हैं तथा मार्गदर्शन और शुभ सूचना है, आज्ञाकारियों के लिए।

Verse 103 — Surah An-Nahl 16:103

तथा हम जानते हैं कि वे (काफ़िर) कहते हैं कि उसे (नबी को) कोई मनुष्य सिखा रहा[1] है। जबकी उसकी भाषा जिसकी ओर संकेत करते हैं, विदेशी है और ये[2] स्पष्ट अरबी भाषा है।

Verse 104 — Surah An-Nahl 16:104

वास्तव में, जो अल्लाह की आयतों पर ईमान नहीं लाते, उन्हें अल्लाह सुपथ नहीं दर्शाता और उन्हीं के लिए दुःखदायी यातना है।

Verse 105 — Surah An-Nahl 16:105

झूठ केवल वही घड़ते हैं, जो अल्लाह की आयतों पर ईमान नहीं लाते और वही मिथ्यावादी (झूठे) हैं।

Verse 106 — Surah An-Nahl 16:106

जिसने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, अपने ईमान लाने के पश्चात्, परन्तु जो बाध्य कर दिया गया हो, इस दशा में कि उसका दिल ईमान से संतुष्ट हो, (उसके लिए क्षमा है)। परन्तु जिसने कुफ़्र के साथ सीना खोल दिया[1] हो, तो उन्हीं पर अल्लाह का प्रकोप है और उन्हीं के लिए महा यातना है।

Verse 107 — Surah An-Nahl 16:107

ये इसलिए कि उन्होंने सांसारिक जीवन को प्रलोक पर प्राथमिकता दी है और वास्तव में अल्लाह, काफ़िरों को सुपथ नहीं दिखाता।

Verse 108 — Surah An-Nahl 16:108

वही लोग हैं, जिनके दिलों, कानों और आँखों पर अल्लाह ने मुहर लगा दी है तथा यही लोग अचेत हैं।

Verse 109 — Surah An-Nahl 16:109

निश्चय वही लोग, प्रलोक में क्षतिग्रस्त होने वाले हैं।

Verse 110 — Surah An-Nahl 16:110

फिर वास्तव में, आपका पालनहार उन लोगों[1] के लिए जिन्होंने हिजरत (प्रस्थान) की और उसके पश्चात् परीक्षा में डाले गये, फिर जिहाद किया और सहनशील रहे, वास्तव में, आपका पालनहार इस (परीक्षा) के पश्चात् बड़ा क्षमाशील, दयावान् है।

Verse 111 — Surah An-Nahl 16:111

जिस दिन प्रत्येक प्राणी को अपने बचाव की चिन्ता होगी और प्रत्येक प्राणी को उसके कर्मों का पूरा बदला दिया जायेगा और उनपर अत्याचार नहीं किया जायेगा।

Verse 112 — Surah An-Nahl 16:112

अल्लाह ने एक बस्ती का उदाहरण दिया है, जो शान्त संतुष्ट थी, उसकी जीविका प्रत्येक स्थान से प्राचूर्य के साथ पहुँच रही थी, तो उसने अल्लाह के उपकारों के साथ कुफ़्र किया। तब अल्ल्लाह ने उसे भूख और भय का वस्त्र चखा[1] दिया, उसके बदले जो वह[2] कर रहे थे।

Verse 113 — Surah An-Nahl 16:113

और उनके पास एक[1] रसूल उन्हीं में से आया, तो उन्होंने उसे झुठला दिया। अतः उन्हें यातना ने पकड़ लिया और वे अत्याचारी थे।

Verse 114 — Surah An-Nahl 16:114

अतः उसमें से खाओ, जो अल्लाह ने तुम्हें ह़लाल (वैध) स्वच्छ जीविका प्रदान की है और अल्लाह का उपकार मानो, यदि तुम उसी की इबादत (वंदना) करते हो।

Verse 115 — Surah An-Nahl 16:115

जो कुछ उसने तुमपर ह़राम (अवैध) किया है, वह मुर्दार, रक्त और सुअर का मांस है और जिसपर अल्लाह के सिवा दूसरे का नाम लिया गया[1] हो, फिर जो भूख से आतुर हो जाये, इस दशा में कि वह नियम न तोड़ रहा[2] हो और न आवश्यक्ता से अधिक खाये, तो वास्तव में, अल्लाह अति क्षमाशील, दयावान् है।

Verse 116 — Surah An-Nahl 16:116

और मत कहो -उस झूठ के कारण, जो तुम्हारी ज़ुबानों पर आ जाये- कि ये ह़लाल (वैध) है और ये ह़राम (अवैध) है, ताकि अल्लाह पर मिथ्यारोप[1] करो। वास्तव में, जो लोग अल्लाह पर मिथ्यारोप करते हैं, वे (कभी) सफल नहीं होते।

Verse 117 — Surah An-Nahl 16:117

(इस मिथ्यारोपन का) लाभ तो थोड़ा है और उन्हीं के लिए (परलोक में) दुःखदायी यातना है।

Verse 118 — Surah An-Nahl 16:118

और उनपर, जो यहूदी हो गये, हमने उसे ह़राम (अवैध) कर दिया, जिसका वर्णन हमने इस[1] से पहले आपसे कर दिया है और हमने उनपर अत्याचार नहीं किया, परन्तु वे स्वयं अपने ऊपर अत्याचार कर रहे थे।

Verse 119 — Surah An-Nahl 16:119

फिर वास्तव में, आपका पालनहार उन्हें, जो अज्ञानता के कारण बुराई कर बैठे, फिर उसके पश्चात् क्षमा याचना कर ली और अपना सुधार कर लिया, वास्तव में, आपका पालनहार इसके पश्चात् अति क्षमी, दयावान् है।

Verse 120 — Surah An-Nahl 16:120

वास्तव में, इब्राहीम एक समुदाय[1] था, अल्लाह का आज्ञाकारी एकेश्वरवादी था और मिश्रणवादियों (मुश्रिकों) में से नहीं था।

Verse 121 — Surah An-Nahl 16:121

उसके उपकारों को मानता था, उसने उसे चुन लिया और उसे सीधी राह दिखा दी।

Verse 122 — Surah An-Nahl 16:122

और हमने उसे संसार में भलाई दी और वास्तव में वह परलोक में सदाचारियों में से होगा।

Verse 123 — Surah An-Nahl 16:123

फिर हमने (हे नबी!) आपकी और वह़्यी की कि एकेश्वरवादी इब्राहीम के धर्म का अनुसरण करो और वह मिश्रणवादियों में से नहीं था।

Verse 124 — Surah An-Nahl 16:124

सब्त[1] (शनिवार का दिन) तो उन्हीं पर, निर्धारित किया गया, जिन्होंने उसमें विभेद किया। और वस्तुतः, आपका पालनहार उनके बीच उसमें निर्णय कर देगा, जिसमें वे विभेद कर रहे थे।

Verse 125 — Surah An-Nahl 16:125

(हे नबी!) आप उन्हें अपने पालनहार की राह (इस्लाम) की ओर तत्वदर्शिता तथा सदुपदेश के साथ बुलाएँ और उनसे ऐसे अंदाज़ में शास्त्रार्थ करें, जो उत्तम हो। वास्तव में, अल्लाह उसे अधिक जानता है, जो उसकी राह से विचलित हो गया और वही सुपथों को भी अधिक जानता है।

Verse 126 — Surah An-Nahl 16:126

और यदि तुम लोग बदला लो, तो उतना ही लो, जितना तुम्हें सताया गया हो और यदि सहन कर जाओ, तो सहनशीलों के लिए यही उत्त्म है।

Verse 127 — Surah An-Nahl 16:127

और (हे नबी!) आप सहन करें और आपका सहन करना अल्लाह ही की सहायता से है और उनके (दुर्व्यवहार) पर शोक न करें और न उनके षड्यंत्र से तनिक भी संकुचित हों।

Verse 128 — Surah An-Nahl 16:128

वास्तव में, अल्लाह उन लोगों के साथ है, जो सदाचारी हैं और जो उपकार करने वाले हैं।