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Hindi - Chapter 23 - Al-Muminun
Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink
Verse 1 — Surah Al-Muminun 23:1
सफल हो गये ईमान वाले।
Verse 2 — Surah Al-Muminun 23:2
जो अपनी नमाज़ों में विनीत रहने वाले हैं।
Verse 3 — Surah Al-Muminun 23:3
और जो व्यर्थ[1] से विमुख रहने वाले हैं।
Verse 4 — Surah Al-Muminun 23:4
तथा जो ज़कात देने वाले हैं।
Verse 5 — Surah Al-Muminun 23:5
और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करने वाले हैं।
Verse 6 — Surah Al-Muminun 23:6
परन्तु अपनी पत्नियों तथा अपने स्वामित्व में आयी दासियों से, तो वही निन्दित नहीं हैं।
Verse 7 — Surah Al-Muminun 23:7
फिर जो इसके अतिरिक्त चाहें, तो वही उल्लंघनकारी हैं।
Verse 8 — Surah Al-Muminun 23:8
और जो अपनी धरोहरों तथा वचन का पालन करने वाले हैं।
Verse 9 — Surah Al-Muminun 23:9
तथा जो अपनी नमाज़ों की रक्षा करने वाले हैं।
Verse 10 — Surah Al-Muminun 23:10
यही उत्तराधिकारी हैं।
Verse 11 — Surah Al-Muminun 23:11
जो उत्तराधिकारी होंगे फ़िर्दौस[1] के, जिसमें वे सदावासी होंगे।
Verse 12 — Surah Al-Muminun 23:12
और हमने उत्पन्न किया है मनुष्य को मिट्टी के सार[1] से।
Verse 13 — Surah Al-Muminun 23:13
फिर हमने उसे वीर्य बनाकर रख दिया एक सुरक्षित स्थान[1] में।
Verse 14 — Surah Al-Muminun 23:14
फिर बदल दिया वीर्य को जमे हुए रक्त में, फिर हमने उसे मांस का लोथड़ा बना दिया, फिर हमने लोथड़े में हड्डियाँ बनायीं, फिर हमने पहना दिया हड्डियों को मांस, फिर उसे एक अन्य रूप में उत्पन्न कर दिया। तो शुभ है अल्लाह, जो सबसे अच्छी उत्पत्ति करने वाला है।
Verse 15 — Surah Al-Muminun 23:15
फिर तुमसब इसके पश्चात् अवश्य मरने वाले हो।
Verse 16 — Surah Al-Muminun 23:16
फिर निश्चय तुमसब (प्रलय) के दिन जीवित किये जाओगे।
Verse 17 — Surah Al-Muminun 23:17
और हमने बना दिये तुम्हारे ऊपर सात आकाश और हम उत्पत्ति से अचेत नहीं[1] हैं।
Verse 18 — Surah Al-Muminun 23:18
और हमने आकाश से उचित मात्रा में पानी बरसाया और उसे धरती में रोक दिया तथा हम उसे विलुप्त कर देने पर निश्चय सामर्थ्यवान हैं।
Verse 19 — Surah Al-Muminun 23:19
फिर हमने उपजा दिये तुम्हारे लिए उस (पानी) के द्वारा खजूरों तथा अंगूरों के बाग़, तुम्हारे लिए उसमें बहुत-से फल हैं और उसीमें से तुम खाते हो।
Verse 20 — Surah Al-Muminun 23:20
तथा वृक्ष जो निकलता है सैना पर्वत से, जो तेल लिए उगता है तथा सालन है खाने वालों के लिए।
Verse 21 — Surah Al-Muminun 23:21
और वास्तव में, तुम्हारे लिए पशुओं में एक शिक्षा है, हम तुम्हें पिलाते हैं, उसमें से, जो उनके पेटों में[1] है तथा तुम्हारे लिए उनमें अन्य बहुत-से लाभ हैं और उनमें से कुछ को तुम खाते हो।
Verse 22 — Surah Al-Muminun 23:22
तथा उनपर और नावों पर तुम सवार किये जाते हो।
Verse 23 — Surah Al-Muminun 23:23
तथा हमने भेजा नूह़[1] को उसकी जाति की ओर, उसने कहाः हे मेरी जाति को लोगो! इबादत (वंदना) अल्लाह की करो, तुम्हारा कोई पूज्य नहीं है उसके सिवा, तो क्या तुम डरते नहीं हो
Verse 24 — Surah Al-Muminun 23:24
तो उन प्रमुखों ने कहा, जो काफ़िर हो गये उसकी जाति में से, ये तो एक मनुष्य है, तुम्हारे जैसा, ये तुमपर प्रधानता चाहता है और यदि अल्लाह चाहता, तो किसी फ़रिश्ते को उतारता, हमने तो इसे[1] सुना ही नहीं अपने पूर्वजों में।
Verse 25 — Surah Al-Muminun 23:25
ये बस एक ऐसा पुरुष है, जो पागल हो गया है, तो तुम उसकी प्रतीक्षा करो कुछ समय तक।
Verse 26 — Surah Al-Muminun 23:26
नूह़ ने कहाः हे मेरे पालनहार! मेरी सहायता कर, उनके मुझे झुठलाने पर।
Verse 27 — Surah Al-Muminun 23:27
तो हमने उसकी ओर वह़्यी की कि नाव बना हमारी रक्षा में हमारी वह्यी के अनुसार और जब हमारा आदेश आ जाये तथा तन्नूर उबल पड़े, तो रख ले प्रत्येक जीव के एक-एक जोड़े तथा अपने परिवार को, उसके सिवा जिसपर पहले निर्णय हो चुका है उनमें से, और मुझे संबोधित न करना उनके विषय में जिन्होंने अत्याचार किये हैं, निश्चय वे डुबो दिये जायेंगे।
Verse 28 — Surah Al-Muminun 23:28
और जब स्थिर हो जाये तू और जो तेरे साथी हैं नाव पर, तो कहः सब प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जिसने हमें मुक्त किया अत्याचारी लोगों से।
Verse 29 — Surah Al-Muminun 23:29
तथा कहः हे मेरे पालनहार! मुझे शुभ स्थान में उतार और तू उत्तम स्थान देने वाला है।
Verse 30 — Surah Al-Muminun 23:30
निश्चय इसमें कई निशानियाँ हैं तथा निःसंदेह हम परीक्ष लेने[1] वाले हैं।
Verse 31 — Surah Al-Muminun 23:31
फिर हमने पैदा किया उनके पश्चात् दूसरे समुदाय को।
Verse 32 — Surah Al-Muminun 23:32
फिर हमने भेजा उनमें रसूल उन्हीं में से कि तुम इबादत (वंदना) करो अल्लाह की, तुम्हारा कोई ( सच्चा) पूज्य नहीं है उसके सिवा, तो क्या तुम डरते नहीं हो
Verse 33 — Surah Al-Muminun 23:33
और उसकी जाति के प्रमुखों ने कहा, जो काफ़िर हो गये तथा आख़िरत (परलोक) का सामना करने को झुठला दिया तथा हमने उन्हें सम्पन्न किया था, सांसारिक जीवन में: ये तो बस एक मनुष्य है तुम्हारे जैसा, खाता है, जो तुम खाते हो और पीता है, जो तुम पीते हो।
Verse 34 — Surah Al-Muminun 23:34
और यदि तुमने मान लिया अपने जैसे एक मनुज को, तो निश्चय तुम क्षतिग्रस्त हो।
Verse 35 — Surah Al-Muminun 23:35
क्या वह तुम्हें वचन देता है कि जब तुम मर जाओगे और धूल तथा हड्डियाँ हो जाओगे, तो तुम, फिर जीवित निकाले जाओगे
Verse 36 — Surah Al-Muminun 23:36
बहुत दूर की बात है, जिसका तुम्हें वचन दिया जा रहा है।
Verse 37 — Surah Al-Muminun 23:37
जीवन तो बस सांसारिक जीवन है, हम मरते-जीते हैं और हम फिर जीवित नहीं किये जायेंगे।
Verse 38 — Surah Al-Muminun 23:38
ये तो बस एक व्यक्ति है, जिसने अल्लाह पर एक झूठ घड़ लिया है और हम उसका विश्वास करने वाले नहीं हैं।
Verse 39 — Surah Al-Muminun 23:39
नबी ने प्रार्थना कीः मेरे पालनहार! मेरी सहायता कर, उनके झुठलाने पर मुझे।
Verse 40 — Surah Al-Muminun 23:40
(अल्लाह ने) कहाः शीघ्र ही वे (अपने किये पर) पछतायेंगे।
Verse 41 — Surah Al-Muminun 23:41
अन्ततः पकड़ लिया उन्हें कोलाहल ने सत्यानुसार और हमने उन्हें कचरा बना दिया, तो दूरी हो अत्याचारियों के लिए।
Verse 42 — Surah Al-Muminun 23:42
फिर हमने पैदा किया उनके पश्चात् दूसरे युग के लोगों को।
Verse 43 — Surah Al-Muminun 23:43
नहीं आगे होती है, कोई जाति अपने समय से और न पीछे[1]।
Verse 44 — Surah Al-Muminun 23:44
फिर, हमने भेजा अपने रसूलों को निरन्तर, जब-जबकिसी समुदाय के पास उसका रसूल आया, उन्होंने उसे झुठला दिया, तो हमने पीछे लगा[1] दिया उनके, एक को दूसरे के और उन्हें कहानी बना दिया। तो दूरी है उनके लिए, जो ईमान नहीं लाते।
Verse 45 — Surah Al-Muminun 23:45
फिर हमने भेजा मूसा तथा उसके भाई हारून को अपनी निशानियों तथा खुले तर्क के साथ।
Verse 46 — Surah Al-Muminun 23:46
फ़िरऔन और उसके प्रमुखों की ओर, तो उन्होंने गर्व किया तथा वे थे ही अभिमानी लोग।
Verse 47 — Surah Al-Muminun 23:47
उन्होंने कहाः क्या हम ईमान लायें अपने जैसे दो व्यक्तियों पर, जबकि उन दोनों की जाति हमारे अधीन है
Verse 48 — Surah Al-Muminun 23:48
तो उन्होंने दोनों को झुठला दिय, तथा हो गये विनाशों में।
Verse 49 — Surah Al-Muminun 23:49
और हमने प्रदान की मूसा को पुस्तक[1], ताकि वे मार्गदर्शन पा जायें।
Verse 50 — Surah Al-Muminun 23:50
और हमने बना दिया मर्यम के पुत्र तथा उसकी माँ को एक निशानी तथा दोनों को शरण दी एक उच्च बसने योग्य तथा प्रवाहित स्रोत के स्थान की ओर[1]।
Verse 51 — Surah Al-Muminun 23:51
हे रसूलो! खाओ स्वच्छ[1] चीज़ों में से तथा अच्छे कर्म करो, वास्तव में, मैं उससे, जो तुम कर रहे हो, भली-भाँति अवगत हूँ।
Verse 52 — Surah Al-Muminun 23:52
और वास्तव में, तुम्हारा धर्म एक ही धर्म है और मैं ही तुम सबका पालनहार हूँ, अतः मुझी से डरो।
Verse 53 — Surah Al-Muminun 23:53
तो उन्होंने खण्ड कर लिया, अपने धर्म का, आपस में कई खण्ड, प्रत्येक सम्प्रदाय उसीमें जो उनके पास[1] है, मगन है।
Verse 54 — Surah Al-Muminun 23:54
अतः (हे नबी!) आप उन्हें छोड़ दें, उनकी अचेतना में कुछ समय तक।
Verse 55 — Surah Al-Muminun 23:55
क्या वे समझते हैं कि हम, जो सहायता कर रहे हैं उनकी धन तथा संतान से।
Verse 56 — Surah Al-Muminun 23:56
शीघ्रता कर रहे हैं उनके लिए भलाईयों में? बल्कि वे समझते नहीं हैं[1]।
Verse 57 — Surah Al-Muminun 23:57
वास्तव में, जो अपने पालनहार के भय से डरने वाले हैं।
Verse 58 — Surah Al-Muminun 23:58
और जो अपने पालनहार की आयतों पर ईमान रखते हैं।
Verse 59 — Surah Al-Muminun 23:59
और जो अपने पालनहार का साझी नहीं बनाते हैं।
Verse 60 — Surah Al-Muminun 23:60
और जो करते हैं, जो कुछ भी करें और उनके दिल काँपते रहते हैं कि वे अपने पालनहार की ओर फिरकर जाने वाले हैं।
Verse 61 — Surah Al-Muminun 23:61
वही शीघ्रता कर रहे हैं भलाईयों में तथा वही उनके लिए अग्रसर हैं।
Verse 62 — Surah Al-Muminun 23:62
और हम बोझ नहीं रखते किसी प्राणी पर, परन्तु उसके सामर्थ्य के अनुसार तथा हमारे पास एक पुस्तक है, जो सत्य बोलती है और उनपर अत्याचार नहीं किया[1] जायेगा।
Verse 63 — Surah Al-Muminun 23:63
बल्कि उनके दिल अचेत हैं इससे तथा उनके बहुत-से कर्म हैं इसके सिवा, जिन्हें वे करने वाले हैं।
Verse 64 — Surah Al-Muminun 23:64
यहाँतक कि जब हम पकड़ लेंगे उनके सुखियों को यातना में, तो वे विलाप करने लगेंगे।
Verse 65 — Surah Al-Muminun 23:65
आज विलाप न करो, निःसंदेह तुम हमारी ओर से सहायता नहीं दिये जाओगे।
Verse 66 — Surah Al-Muminun 23:66
मेरी आयतें तुम्हें सुनायी जाती रहीं, तो तुम एड़ियों के बल फिरते रहे।
Verse 67 — Surah Al-Muminun 23:67
अभिमान करते हुए, उसे कथा बनाकर बकवास करते रहे।
Verse 68 — Surah Al-Muminun 23:68
क्या उन्होंने इस कथन (क़ुर्आन) पर विचार नहीं किया अथवा इनके पास वह[1] आ गया, जो उनके पूर्वजों के पास नहीं आया
Verse 69 — Surah Al-Muminun 23:69
अथवा वह अपने रसूल से परिचित नहीं हुए, इसलिए वे उसका इन्कार कर रहे[1] हैं
Verse 70 — Surah Al-Muminun 23:70
अथवा वे कहते हैं कि वह पागल है? बल्कि वह तो उनके पास सत्य लाये हैं और उनमें से अधिक्तर को सत्य अप्रिय है।
Verse 71 — Surah Al-Muminun 23:71
और यदि अनुसरण करने लगे सत्य उनकी मनमानी का, तो अस्त-व्यस्त हो जाये आकाश तथा धरती और जो उनके बीच है, बल्कि हमने दे दी है उन्हें उनकी शिक्षा, फिर (भी) वे अपनी शिक्षा से विमुख हो रहे हैं।
Verse 72 — Surah Al-Muminun 23:72
(हे नबी!) क्या आप उनसे कुछ धन माँग रहे हैं? आपके लिए तो आपके पालनहार का दिया हुआ ही उत्तम है और वह सर्वोत्तम जीविका देने वाला है।
Verse 73 — Surah Al-Muminun 23:73
निश्चय आप तो उन्हें सुपथ की ओर बुला रहे हैं।
Verse 74 — Surah Al-Muminun 23:74
और जो आख़िरत (परलोक) पर ईमान नहीं रखते, वे सुपथ से कतराने वाले हैं।
Verse 75 — Surah Al-Muminun 23:75
और यदि हम उनपर दया करें और दूर करें, जो दुःख उनके साथ है,[1] तो वे अपने कुकर्मों में और अधिक बहकते जायेंगे।
Verse 76 — Surah Al-Muminun 23:76
और हमने उन्हें यातना में ग्रस्त (भी) किया, तो अपने पालनहार के समक्ष नहीं झुके और न विनय करते हैं।
Verse 77 — Surah Al-Muminun 23:77
यहाँतक कि जब हम उनपर खोल देंगे कड़ी यातना के[1] द्वार, तो सहसा वे उस समय निराश हो जायेंगे[2]।
Verse 78 — Surah Al-Muminun 23:78
वही है, जिसने बनाये हैं तुम्हारे लिए कान तथा आँखें और दिल[1], (फिर भी) तुम बहुत कम कृतज्ञ होते हो।
Verse 79 — Surah Al-Muminun 23:79
और उसीने तुम्हें धरती में फैलाया है और उसी की ओर एकत्र किये जाओगे।
Verse 80 — Surah Al-Muminun 23:80
तथा वही है, जो जीवन देता और मारता है और उसी के अधिकार में है रात्रि तथा दिन का फेर-बदल, तो क्या तुम समझ नहीं रखते
Verse 81 — Surah Al-Muminun 23:81
बल्कि उन्होंने वही बात कही, जो अगलों ने कही।
Verse 82 — Surah Al-Muminun 23:82
उन्होंने कहाः क्या जब हम मर जायेंगे और मिट्टी तथा हड्डियाँ हो जायेंगे, तो क्या हम फिर अवश्य जीवित किये जायेंगे
Verse 83 — Surah Al-Muminun 23:83
हमें तथा हमारे पूर्वजों को इससे पहले यही वचन दिया जा चुका है, ये तो बस अगलों की कल्पित कथाएँ हैं।
Verse 84 — Surah Al-Muminun 23:84
(हे नबी!) उनसे कहोः किसकी है धरती और जो उसमें है, यदि तुम जानते हो
Verse 85 — Surah Al-Muminun 23:85
वे कहेंगे कि अल्लाह की। आप कहिएः फिर तुम क्यों शिक्षा ग्रहण नहीं करते
Verse 86 — Surah Al-Muminun 23:86
आप पूछिए कि कौन है सातों आकाशों का स्वामी तथा महा सिंहासन का स्वामी
Verse 87 — Surah Al-Muminun 23:87
वे कहेंगेः अल्लाह है। आप कहिएः फिर तुम उससे डरते क्यों नहीं हो
Verse 88 — Surah Al-Muminun 23:88
आप उनसे कहिए कि किसके हाथ में है, प्रत्येक वस्तु का अधिकार? और वह शरण देता है और उसे कोई शरण नहीं दे सकता, यदि तुम ज्ञान रखते हो
Verse 89 — Surah Al-Muminun 23:89
वे अवश्य कहेंगे कि (ये सब गुण) अल्लाह ही के हैं। आप कहिएः फिर तुमपर कहाँ से जादू[1] हो जाता है
Verse 90 — Surah Al-Muminun 23:90
बल्कि हमने उन्हें सत्य पहुँचा दिया है और निश्चय यही मिथ्यावादी हैं।
Verse 91 — Surah Al-Muminun 23:91
अल्लाह ने नहीं बनाया है अपनी कोई संतान और न उसके साथ कोई अन्य पूज्य है। यदि ऐसा होता, तो प्रत्येक पूज्य अलग हो जाता अपनी उत्पत्ति को लेकर और एक-दूसरे पर चढ़ दौड़ता। पवित्र है अल्लाह उन बातों से, जो ये सब लोग बनाते हैं।
Verse 92 — Surah Al-Muminun 23:92
वह परोक्ष (छुपे) तथा प्रत्यक्ष (खुले) का ज्ञानी है तथा उच्च है, उस शिर्क से, जो वे करते हैं।
Verse 93 — Surah Al-Muminun 23:93
(हे नबी!) आप प्रार्थना करें कि हे मेरे पालनहार! यदि तू मुझे वह दिखाये, जिसकी उन्हें धमकी दी जा रही है।
Verse 94 — Surah Al-Muminun 23:94
तो मेरे पालनहार! मुझे इन अत्याचारियों में सम्मिलित न करना।
Verse 95 — Surah Al-Muminun 23:95
तथा वास्तव में, हम आपको उसे दिखाने पर, जिसकी उन्हें धमकी दी जा रही है, अवश्य सामर्थ्यवान हैं।
Verse 96 — Surah Al-Muminun 23:96
(हे नबी!) आप दूर करें उस (व्यवहार) से जो उत्तम हो, बुराई को। हम भली-भाँति अवगत हैं, उन बातों से जो वे बनाते हैं।
Verse 97 — Surah Al-Muminun 23:97
तथा आप प्रार्थना करें कि हे मेरे पालनहार! मैं तेरी शरण माँगता हूँ, शैतानों की शंकाओं से।
Verse 98 — Surah Al-Muminun 23:98
तथा मैं तेरी शरण माँगता हूँ, मेरे पालनहार! कि वे मेरे पास आयें।
Verse 99 — Surah Al-Muminun 23:99
यहाँतक कि जब उनमें किसी की मौत आने लगे, तो कहता हैः मेरे पालनहार! मुझे (संसार में) वापस कर दे[1]।
Verse 100 — Surah Al-Muminun 23:100
संभवतः, मैं अच्छा कर्म करूँगा, उस (संसार में) जिसे छोड़ आया हूँ! कदापि ऐसा नहीं होगा! वह केवल एक कथन है, जिसे वह कह रहा[1] है और उनके पीछे एक आड़[2] है, उनके पुनः जीवित किये जाने के दिन तक।
Verse 101 — Surah Al-Muminun 23:101
तो जब नरसिंघा में फूँक दिया जायेगा, तो कोई संबन्ध नहीं होगा, उनके बीच, उस[1] दिन और न वे एक-दूसरे को पूछेंगे।
Verse 102 — Surah Al-Muminun 23:102
फिर जिसके पलड़े भारी होंगे, वही सफल होने वाले हैं।
Verse 103 — Surah Al-Muminun 23:103
और जिसके पलड़े हल्क होंगे, तो उन्होंने ही स्वयं को क्षतिग्रस्त कर लिया, (तथा वे) नरक में सदावासी होंगे।
Verse 104 — Surah Al-Muminun 23:104
झुलसा देगी उनके चेहरों को अग्नि तथा उसमें उनके जबड़े (झुलसकर) बाहर निकले होंगे।
Verse 105 — Surah Al-Muminun 23:105
(उनसे कहा जायेगाः) क्या जब मेरी आयतें तुम्हें सुनाई जाती थीं, तो तुम उनको झुठलाते नहीं थे
Verse 106 — Surah Al-Muminun 23:106
वे कहेंगेःहमारे पालनहार! हमरा दुर्भाग्य हमपर छा गया[1] और वास्तव में, हम कुपथ थे।
Verse 107 — Surah Al-Muminun 23:107
हमारे पालनहार! हमें इससे निकाल दे, यदि अब हम ऐसा करें, तो निश्चय हम अत्याचारी होंगे।
Verse 108 — Surah Al-Muminun 23:108
वह (अल्लाह) कहेगाः इसीमें अपमानित होकर पड़े रहो और मुझसे बात न करो।
Verse 109 — Surah Al-Muminun 23:109
मेरे भक्तों में एक समुदाय था, जो कहता था कि हमारे पालनहार! हम ईमान लाये। तू हमें क्षमा कर दे और हमपर दया कर और तू सब दयावानों से उत्तम है।
Verse 110 — Surah Al-Muminun 23:110
तो तुमने उनका उपहास किया, यहाँ तक कि उन्होंने तुम्हें मेरी याद भुला दी और तुम उनपर हँसते रहे।
Verse 111 — Surah Al-Muminun 23:111
मैंने उन्हें आज बदला (प्रतिफल) दे दिया है उनके धैर्य का, वास्तव में, वही सफल हैं।
Verse 112 — Surah Al-Muminun 23:112
(अल्लाह) उनसे कहेगाः तुम धरती में कितने वर्ष रहे
Verse 113 — Surah Al-Muminun 23:113
वे कहेंगेः हम एक दिन या दिन के कुछ भाग रहे। तो गणना करने वालों से पूछ लें।
Verse 114 — Surah Al-Muminun 23:114
वह कहेगाः तुम नहीं रहे, परन्तु बहुत कम। क्या ही अच्छा होता कि तुमने (पहले ही) जान लिया[1] होता।
Verse 115 — Surah Al-Muminun 23:115
क्या तुमने समझ रखा है कि हमने तुम्हें व्यर्थ पैदा किया है और तुम हमारी ओर फिर नहीं लाये[1] जाओगे
Verse 116 — Surah Al-Muminun 23:116
तो सर्वोच्च है अल्लाह वास्तविक अधिपति। नहीं है कोई सच्चा पूज्य, परन्तु वही महिमावान अर्श (सिंहासन) का स्वामी।
Verse 117 — Surah Al-Muminun 23:117
और जो (भी) पुकारेगा अल्लाह के साथ किसी अन्य पूज्य को, जिसके लिए उसके पास कोई प्रमाण नहीं, तो उसका ह़िसाब केवल उसके पालनहार के पास है, वास्तव में, काफ़िर सफव नहीं[1] होंगे।
Verse 118 — Surah Al-Muminun 23:118
तथा आप प्रार्थना करें कि मेरे पालनहार! तू क्षमा कर तथा दया कर और तू ही सब दयावानों से उत्तम (दयावान्) है।