वास्तव में, फ़िरऔन ने उपद्रव किया धरती में और कर दिया उसके निवासियों को कई गिरोह। वह निर्बल बना रहा था एक गिरोह को उनमें से, वध कर रहा था उनके पुत्रों को और जीवित रहने देता था उनकी स्त्रियों को। निश्चय वह उपद्रवियों में से था।
और हमने वह़्यी[1] की मूसा की माता की ओर कि उसे दूध पिलाती रह और जब तुझे उसपर भय हो, तो उसे सागर में डाल दे और भय न कर और न चिन्ता कर, निःसंदेह, हम वापस लायेंगे उसे तेरी ओर और बना देंगे उसे रसूलों में से।
और फ़िरऔन की पत्नि ने कहाः ये मेरी तथा आपकी आँखों की ठण्डक है। इसे वध न कीजिये, संभव है हमें लाभ पहुँचाये या उसे हम पुत्र बना लें और वे समझ नहीं रहे थे।
और हमने अवैध (निषेध) कर दिया उस (मूसा) पर दाइयों को इससे[1] पूर्व। तो उस (की बहन) ने कहाः क्या मैं तुम्हें न बताऊँ ऐसा घराना, जो पालनपोषण करें इसका तुम्हारे लिए तथा वे उसके शुभचिनतक हों
तो हमने फेर दिया उसे उसकी माँ की ओर, ताकि ठण्डी हो उसकी आँख और चिन्ता न करे और ताकि उसे विश्वास हो जाये कि अल्लाह का वचन सच है, परन्तु अधिक्तर लोग विश्वास नहीं रखते।
और उसने प्रवेश किया नगर में उसके वासियों की अचेतना के समय और उसमें दो व्यक्तियों को लड़ते हुए पाया, ये उसके गिरोह से था और दूसरा उसके शत्रु में[1] से। तो पुकारा उसने, जो उसके गिरोह से था, उसके विरुध्द, जो उसके शत्रु में से था। जिसपर मूसा ने उसे घूँसा मारा और वह मर गया। मूसा ने कहाः ये शैतानी कर्म है। वास्तव में, वह शत्रु है खुला, कुपथ करने वाला।
उसने कहाः हे मेरे पालनहार! मैंने अपने ऊपर अत्याचार कर लिया, तू मुझे क्षमा कर दे। फिर अल्लाह ने उसे क्षमा कर दिया। वास्तव में, वह क्षमाशील, अति दयावान् है।
फिर प्रातः वह नगर में डरता हुआ समाचार लेने गया, तो सहसा वही जिसने उससे कल सहायता माँगी थी, उसे पुकार रहा है। मूसा ने उससे कहाः वास्तव में, तूही खुला कुपथ है।
फिर जब पकड़ना चाहा उसे, जो उन दोनों का शत्रु था, तो उसने कहाः हे मूसा! क्या तू मुझे मार देना चाहता है, जैसे मार दिया एक व्यक्ति को कल? तू तो चाहता है कि बड़ा उपद्रवी बनकर रहे इस धरती में और तू नहीं चाहता कि सुधार करने वालों में से हो।
और आया एक पुरुष नगर के किनारे से दौड़ता हुआ, उसने कहाः हे मूसा! (राज्य के) प्रमुख प्रामर्श कर रहे हैं तेरे विषय में कि तुझे वध कर दें, अतः तू निकल जा। वास्तव में, मैं तेरे शुभचिन्तकों में से हूँ।
और जब उतरा मद्यन के पानी पर, तो पाया उसपर लोगों का एक समूह, जो (अपने पशुओं को) पानी पिला रहा था तथा पाया उसके पीछे दो स्त्रियों को (अपने पशुओं को) रोकती हुईं। उसने कहाः तुम्हारी समस्या क्या है? दोनों ने कहाः हम पानी नहीं पिलातीं, जब तक चरवाहे चले न जायें और हमारे पिता बहुत बूढ़े हैं।
तो आई उसके पास दोनों में से एक स्त्री चलती हुई लज्जा के साथ, उसने कहाः मेरे पिता[1] आपको बुला रहे हैं। ताकि आपको उसका पारिश्रमिक दें, जो आपने पानी पिलाया है हमारे लिए। फिर जब (मूसा) उसके पास पहुँचा और पूरी कथा उसे सुनाई, तो उसने कहाः भय न कर। तू मुक्त हो गया अत्याचारी[2] जाति से।
उसने कहाः मैं चाहता हूँ कि विवाह दूँ तुम्हें अपनी इन दो पुत्रियों में से एक से, इसपर कि मेरी सेवा करोगे आठ वर्ष, फिर यदि तुम पूरा कर दो दस (वर्ष) तो ये तुम्हारी इच्छा है। मैं नहीं चाहता कि तुमपर बोझ डालूँ और तुम मुझे पाओगे यदि अल्लाह ने चाहा, तो सदाचारियों में से।
मूसा ने कहाः ये मेरे और आपके बीच (निश्चित) है। मैं दो में से जो भी अवधि पूरी कर दूँ, मुझपर कोई अत्याचार न हो और अल्लाह उसपर, जो हम कह रहे हैं निरीक्षक है।
फिर जब पूरी कर ली मूसा ने अवधि और चला अपने परिवार के साथ, तो उसने देखी तूर (पर्वत) की ओर एक अग्नि। उसने अपने परिवार से कहाः रुको मैंने देखी है एक अग्नि, संभव है तुम्हारे पास लाऊँ वहाँ से कोई समाचार अथवा कोई अंगार अग्नि का, ताकि तुम ताप लो।
और फेंक दो अपनी लाठी, फिर जब उसे देखा कि रेंग रही है, मानो वह कोई सर्प हो, तो भागने लगा पीठ फेरकर और पीछे फिरकर नहीं देखा। हे मूसा! आगे आ तथा भय न कर, वास्तव में, तू सुरक्षितों में से है।
डाल अपना हाथ अपनी जेब में, वह निकलेगा उज्ज्वल होकर बिना किसी रोग के और चिमटा ले अपनी ओर अपनी भुजा, भय दूर करने के लिए, तो ये दो खुली निशानियाँ हैं तेरे पालनहार की ओर से फ़िरऔन तथा उसके प्रमुखों के लिए, वास्तव में, वह उल्लंघनकारी जाति हैं।
उसने कहाः हम तुझे बाहुबल प्रदान करेंगे तेरे भाई द्वारा और बनायेंगे तुम दोनों के लिए ऐसा प्रभाव कि वे तुम दोनों तक नहीं पहुँच सकेंगे अपनी निशानियों द्वारा, तुम दोनों तथा तुम्हारे अनुयायी ही ऊपर रहेंगे।
फिर जब मूसा उनके पास हमारी खुली निशानियाँ लाया, तो उन्होंने कह दिया कि ये तो केवल घड़ा हुआ जादू है और हमने कभी नहीं सुनी ये बात अपने पूर्वजों के युग में।
तथा फ़िरऔन ने कहाः हे प्रमुखो! मैं नहीं जानता तुम्हारा कोई पूज्य अपने सिवा। तो हे हामान! ईंटें पकवाकर मेरे लिए एक ऊँचा भवन बना दे। संभव है, मैं झाँककर देख लूँ मूसा के पूज्य को और निश्चय मैं उसे समझता हूँ झूठों में से।
और हमने मूसा को पुस्तक प्रदान की इसके पश्चात् कि हमने विनाश कर दिया प्रथम समुदायों का, ज्ञान का साधन बनाकर लोगों के लिए तथा मार्गदर्शन और दया, ताकि वे शिक्षा लें।
परन्तु (आपके समय तक) हमने बहुत-से समुदायों को पैदा किया, फिर उनपर लम्बी अवधि बीत गयी तथा आप उपस्थित न थे मद्यन के वासियों में कि सुनाते उन्हें हमारी आयतें और परन्तु हमभी रसूलों को भेजने[1] वाले हैं।
तथा नहीं थे आप तूर के अंचल में, जब हमने उसे पुकारा, परन्तु आपके पालनहार की दया है, ताकि आप सतर्क करें जिनके पास नहीं आया कोई सचेत करने वाला आपसे पूर्व, ताकि वे शिक्षा ग्रहण करें।
तथा यदि ये बात न होती कि उनपर कोई आपदा आ जाती उनके करतूतों के कारण, तो कहते कि हमारे पालनहार! तूने क्यों नहीं भेजा हमारे पास कोई रसूल कि हम पालन करते तेरी आयतों का और हो जाते ईमान वालों में से[1]।
फिर जब आ गया उनके पास सत्य हमारे पास से, तो कह दिया कि क्यों नहीं दिया गया उसे वही, जो मूसा को (चमत्कार) दिया गया? तो क्या उन्होंने कुफ़्र (इन्कार) नहीं किया उसका, जो मूसा दिये गये इससे पूर्व? उन्होंने कहाः दो[1] जादूगर हैं, दोनो एक-दूसरे के सहायक हैं और कहाः हम किसी को नहीं मानते।
फिर यदि वे पूरी न करें आपकी माँग, तो आप जान लें कि वे मनमानी कर रहे हैं और उससे अधिक कुपथ कौन है, जो अपनी मनमानी करे, अल्लाह की ओर से बिना किसी मार्गदर्शन के? वास्तव में, अल्लाह सुपथ नहीं दिखाता है अत्याचारी लोगों को।
तथा जब उन्हें सुनाया जाता है, तो कहते हैं: हम इस (क़ुर्आन) पर ईमान लाये, वास्तव में, ये सत्य है, हमारे पालनहार की ओर से, हम तो इसके (उतरने के) पहले ही से मुस्लिम हैं[1]।
यही दिये जायेंगे अपना बदला दुहरा,[1] अपने धैर्य के कारण और वे दूर करते हैं अच्छाई के द्वारा बुराई को और उसमें से, जो हमने उन्हें दिया है, दान करते हैं।
और जब वह सुनते हैं व्यर्थ बात, तो विमुख हो जाते हैं, उससे तथा कहते हैं: हमारे लिए हमारे कर्म हैं और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म। सलाम है तुमपर, हम (उलझना) नहीं चाहते अज्ञानों से ।
तथा उन्होंने कहाः यदि हम अनुसरण करें मार्गदर्शन का आपके साथ, तो अपनी धरती से उचक[1] लिए जायेंगे। क्या हमने निवास स्थान नहीं बनाया है भयरहित "ह़रम"[2] को उनके लिए, खिंचे चले आ रहे हैं जिसकी ओर प्रत्येक प्रकार के फल, जीविका स्वरूप, हमारे पास से? और परन्तु उनमें से अधिक्तर लोग नहीं जानते।
और हमने विनाश कर दिया बहुत-सी बस्तियों का, इतराने लगी जिनकी जीविका। तो ये हैं उनके घर, जो आबाद नहीं किये गये उनके पश्चात्, परन्तु बहुत थोड़े और हम ही उत्तराधिकारी रह गये।
और नहीं है आपका पालनहार विनाश करने वाला बस्तियों को, जब तक उनके केंद्र में कोई रसूल नहीं भेजता, जो पढ़कर सुनायें उनके समक्ष हमारी आयतें और हम बस्तियों का विनाश करने वाले नहीं हैं, परन्तु जब उसके निवासी अत्याचारी हों।
तो क्या जिसे हमने वचन दिया है एक अच्छा वचन और वह पाने वाला हो उसे, उसके जैसा हो सकता है, जिसे हमने दे रखा है सांसारिक जीवन का सामान, फिर वह प्रलय के दिन उपस्थित किये लोगों में होगा
कहेंगे वे जिनपर सिध्द हो चुकी है ये बातः[1] हे हमारे पालनहार! यही हैं, जिन्हें हमने बहका दिया और हमने इन्हें बहकाया, जैसे हम बहके, हम उनसे अलग हो रहे हैं तेरे समक्ष, ये हमारी पूजा[2] नहीं कर रहे थे।
तथा कहा जायेगाः पुकारो अपने साझियों को। तो वे पुकारेंगे और वे उन्हें उत्तर तक नहीं देंगे तथा वे यातना देख लेंगे, तो कामना करेंगे कि उन्होंने सुपथ अपनाया होता।
तथा वही अल्लाह[1] है, कोई वन्दनीय (सत्य पूज्य) नहीं है उसके सिवा, उसी के लिए सब प्रशंसा है लोक तथा परलोक में तथा उसी के लिए शासन है और तुम उसी की ओर फेरे[2] जाओगो।
(हे नबी!) आप कहियेः तुम बताओ कि यदि बना दे तुमपर रात्रि को निरन्तर क़्यामत के दिन तक, तो कौन पूज्य है अल्लाह कि सिवा, जो ले आये तुम्हारे पास प्रकाश? तो क्या तुम सुनते नहीं हो
आप कहियेः तुम बताओ, यदि अल्लाह कर दे तुमपर दिन को निरन्तर क़्यामत के दिन तक, तो कौन पूज्य है अल्लाह के सिवा, जो ले आये तुम्हारे लिए रात्रि, जिसमें तुम शान्ति प्राप्त करो, तो क्या तुम देखते नहीं[1] हो
तथा अपनी दया ही से उसने बनाये हैं तुम्हारे लिए रात्रि तथा दिन, ताकि तुम शान्ति प्राप्त करो उसमें और ताकि तुम खोज करो उसके अनुग्रह (जीविका) की और ताकि तुम उसके कृतज्ञ बनो।
और हम निकाल लायेंगे प्रत्येक समुदाय से एक गवाह, फिर कहेंगेः लाओ अपने[1] तर्क? तो उन्हें ज्ञान हो जायेगा कि सत्य अल्लाह ही की ओर है और उनसे खो जायेंगी, जो बातें वे घड़ रहे थे।
क़ारून[1] था मूसा की जाति में से। फिर उसने अत्याचार किया उनपर और हमने उसे प्रदान किया इतने कोष कि उसकी कुंजियाँ भारी थीं एक शक्तिशाली समुदाय पर। जब कहा उससे उसकी जाति नेः मत इतरा, वास्तव में, अल्लाह प्रेम नहीं करता है इतराने वालों से।
तथा खोजकर उससे, जो दिया है अल्लाह ने तुझे आख़िरत (परलोक) का घर और मत भूल अपना सांसारिक भाग और उपकार कर, जैसे अल्लाह ने तुझपर उपकार किया है तथा मत खोज कर धरती में उपद्रव की, निश्चय अल्लाह प्रेम नहीं करता है उपद्रवियों से।
उसने कहाः मैं तो उसे दिया गया हूँ बस अपने ज्ञान के कारण। क्या उसे ये ज्ञान नहीं हुआ कि अल्लाह ने विनाश किया है उससे पहले बहुत-से समुदायों को, जो उससे अधिक थे धन तथा समूह में और प्रश्न नहीं किया जाता[1] अपने पापों के संबन्ध में अपराधियों से।
एक दिन, वह निकला अपनी जाति पर, अपनी शोभा में, तो कहा उन लोगों ने, जो चाहते थे सांसारिक जीवनः क्या ही अच्छा होता कि हमारे लिए (भी) उसी के समान (धन-धान्य) होता, जो दिया गया है क़ारून को! वास्तव में, वह बड़ा सौभाग्यशाली है।
तथा उन्होंने कहा जिन्हें ज्ञान दिया गयाः तुम्हारा बुरा हो! अल्लाह का प्रतिकार उसके लिए उत्तम है, जो ईमान लाये तथा सदाचार करे और ये सोच, धैर्यवानों ही को मिलती है।
और जो कामना कर रहे थे उसके स्थान की कल, कहन लगेः क्या तुम देखते नहीं कि अल्लाह अधिक कर देता है जीविका, जिसके लिए चाहता हो अपने दासों में से और नापकर देता है (जिसे चाहता है)। यदि हमपर उपकार न होता अल्लाह का, तो हमें भी धंसा देता। क्या तुम देखते नहीं कि काफ़िर (कृतघ्न) सफल नहीं होते
ये परलोक का घर (स्वर्ग) है, हम उसे विशेष कर देंगे उनके लिए, जो नहीं चाहते बड़ाई करना धरती में और न उपद्रव करना और अच्छा परिणाम अज्ञाकारियों[1] के लिए है।
और (हे नबी!) जिसने आपपर क़ुर्आन उतारा है, वह आपको लौटाने वाला है आपके नगर (मक्का) की[1] ओर। आप कह दें कि मेरा पालनहर भली-भाँति जानने वाला है कि कौन मार्गदरशन लाया है और कौन खुले कुपथ में है
और आप न पुकारें किसी अन्य पूज्य को अल्लाह के साथ, नहीं है कोई वंदनीय (सत्य पूज्य) उस (अल्लाह) के सिवा। प्रत्येक वस्तु नाशवान है सिवाय उसके स्वरूप के। उसी का शासन है और उसी की ओर तुमसब फेरे[1] जाओगे।