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Hindi - Chapter 3 - Al-Imran

Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink

Verse 165 — Surah Al-Imran 3:165

तथा जब तुम्हें एक दुःख पहुँचा,[1] जबकि इसके दुगना (दुःख) तुमने (उन्हें) पहुँचाया है[2], तो तुमने कह दिया कि ये कहाँ से आ गया? (हे नबी!) कह दोः ये तुम्हारे पास से[3] आया है। वास्तव में, अल्लाह जो चाहे, कर सकता है।