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Hindi - Chapter 43 - Az-Zukhruf

Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink

Verse 1 — Surah Az-Zukhruf 43:1

ह़ा मीम।

Verse 2 — Surah Az-Zukhruf 43:2

शपथ है प्रत्यक्ष (खुली) पुस्तक की।

Verse 3 — Surah Az-Zukhruf 43:3

इसे हमने बनाया है अरबी क़ुर्आन, ताकि वे इसे समझ सकें।

Verse 4 — Surah Az-Zukhruf 43:4

तथा वह मूल पुस्तक[1] में है, हमारे पास, बड़ा उच्च तथा ज्ञान से परिपूर्ण है।

Verse 5 — Surah Az-Zukhruf 43:5

तो क्या हम फेर दें, इस शिक्षा को, तुमसे, इसलिए कि तुम उल्लंघनकारी लोग हो

Verse 6 — Surah Az-Zukhruf 43:6

तथा हमने भेजे हैं बहुत-से नबी (गुज़री हुयी) जातियों में।

Verse 7 — Surah Az-Zukhruf 43:7

और नहीं आता रहा उनके पास कोई नबी, परन्तु वे उसके साथ उपहास करते रहे।

Verse 8 — Surah Az-Zukhruf 43:8

तो हमने विनाश कर दिया इनसे[1] अधिक शक्तिवानों का तथा ग़ुज़र चुका है अगलों का उदाहरण।

Verse 9 — Surah Az-Zukhruf 43:9

और यदि आप प्रश्न करें उनसे कि किसने पैदा किया है आकाशों तथा धरती को? तो अवश्य कहेंगेः उन्हें पैदा किया है बड़े प्रभावशाली, सब कुछ जानने वाले ने।

Verse 10 — Surah Az-Zukhruf 43:10

जिसने बनाया तुमहारे लिए धरती को पालना और बनाये उसमें तुम्हारे लिए मार्ग, ताकि तुम मार्ग पा सको।

Verse 11 — Surah Az-Zukhruf 43:11

तथा जिसने उतारा आकाश से जल, एक विशेष मात्रा में। फिर जीवित कर दिया उसके दवारा मुर्दा भूमि को। इसी प्रकार, तुम (धरती से) निकाले जाओगे।

Verse 12 — Surah Az-Zukhruf 43:12

तथा जिसने पैदा किये सब प्रकार के जोड़े तथा बनाईं तुम्हारे लिए नौकायें तथा पशु जिनपर तुम सवार होते हो।

Verse 13 — Surah Az-Zukhruf 43:13

ताकि तुम सवार हो उनके ऊपर, फिर याद करो अपने पालनहार के प्रदान को, जब सवार हो जाओ उसपर और ये[1] कहोः पवित्र है वह, जिसने वश में कर दिया हमारे लिए इसे। अन्यथा हम इसे वश में नहीं कर सकते थे।

Verse 14 — Surah Az-Zukhruf 43:14

तथा हम अवश्य ही अपने पालनहार ही की ओर फिरकर जाने वाले हैं।

Verse 15 — Surah Az-Zukhruf 43:15

और बना लिया उन्होंने[1] उसके भक्तों में से कुछ को उसका अंश। वास्तव में, मनुष्य खुला कृतघ्न है।

Verse 16 — Surah Az-Zukhruf 43:16

क्या अल्लाह ने उसमें से, जो पैदा करता है, पुत्रियाँ बना ली हैं तथा तुम्हें विशेष कर दिया है पुत्रों के साथ

Verse 17 — Surah Az-Zukhruf 43:17

जबकि उनमें से किसी को शुभ सूचना दी जाये उस (के जन्म लेने) की, जिसका उसने उदाहरण दिया है अत्यंत कृपाशील के लिए, तो उसका मुख काला[1] हो जाता है और शोक से भर जाता है।

Verse 18 — Surah Az-Zukhruf 43:18

क्या (अल्लाह के लिए) वह है, जिसका पालनपोषण आभूषण में किया जाता है तथा वह विवाद में खुलकर बात नहीं कर सकती

Verse 19 — Surah Az-Zukhruf 43:19

और उन्होंने बना दिया फ़रिश्तों को, जो अत्यंत कृपाशील के भक्त हैं, पुत्रियाँ। क्या वे उपस्थित थे उनकी उत्पत्ति के समय? लिख ली जायेगी उनकी गवाही और उनसे पूछ होगी।

Verse 20 — Surah Az-Zukhruf 43:20

तथा उन्होंने कहा कि यदि अत्यंत कृपाशील चाहता, तो हम उनकी इबादत नहीं करते। उन्हें इसका कोई ज्ञान नहीं। वह केवल तीर-तुक्के चला रहे हैं।

Verse 21 — Surah Az-Zukhruf 43:21

क्या हमने उन्हें प्रदान की है कोई पुस्तक इससे पहले, जिसे वे दृढ़ता से पकड़े हुए हैं

Verse 22 — Surah Az-Zukhruf 43:22

बल्कि, ये कहते हैं कि हमने पाया है अपने पूर्वजों को एक रीति पर और हम उन्हीं के पद्चिन्हों पर चल रहे हैं।

Verse 23 — Surah Az-Zukhruf 43:23

तथा (हे नबी!) इसी प्रकार, हमने नहीं भेजी आपसे पूर्व किसी बस्ती में कोई सावधान करने वाला, परन्तु कहा उसके सुखी लोगों नेः हमने पाया है अपने पूर्वजों को एक रीति पर और हम निश्चय उन्हीं के पद्चिन्हों पर चल रहे हैं।

Verse 24 — Surah Az-Zukhruf 43:24

नबी ने कहाः क्या (तुम उन्हीं का अनुगमन करोगे) यद्पि मैं लाया हूँ तुम्हारे पास उससे अधिक सीधा मार्ग, जिसपर तुमने पाया है अपने पूर्वजों को? तो उन्होंने कहाः हम, जिस (धर्म) के साथ तुम भेजे गये हो, उसे मानने वाले नहीं है।

Verse 25 — Surah Az-Zukhruf 43:25

अन्ततः, हमने बदला चुका लिया उनसे। तो देखो कि कैसा रहा झुठलाने वालों का दुष्परिणाम।

Verse 26 — Surah Az-Zukhruf 43:26

तथा याद करो, जब कहा इब्राहीम ने अपने पिता तथा अपनी जाति सेः निश्चय मैं विरक्त हूँ उससे, जिसकी वंदना तुम करते हो।

Verse 27 — Surah Az-Zukhruf 43:27

उसके अतिरिक्त, जिसने मुझे पैदा किया है। वही मुझे राह दिखायेगा।

Verse 28 — Surah Az-Zukhruf 43:28

तथा छोड़ गया वह इस बात (एकेश्वरवाद) को[1] अपनी संतान में, ताकि वे शिर्क से बचते रहें।

Verse 29 — Surah Az-Zukhruf 43:29

बल्कि, मैंने इन्हें तथा इनके बाप-दादा को जीवन का सामान दिया। यहाँ तक कि आ गया उनके पास सत्य (क़ुर्आन) और एक खुला रसूल।

Verse 30 — Surah Az-Zukhruf 43:30

तथा जब आ गया उनके पास सत्य, तो उन्होंने कह दिया कि ये जादू है तथा हम, इसे मानने वाले नहीं हैं।

Verse 31 — Surah Az-Zukhruf 43:31

तथा उन्होंने कहा कि क्यों नहीं उतारा[1] गया ये क़ुर्आन, दो बस्तियों में से किसी बड़े व्यक्ति पर

Verse 32 — Surah Az-Zukhruf 43:32

कया वही बाँटते[1] हैं आपके पालनहार की दया? हमने बाँटी है, उनके बीच, उनकी जीविका सांसारिक जीवन में तथा हमने उच्च किया है, उनमें से एक को दूसरे पर, कई श्रेणियाँ। ताकि एक-दूसरे से सेवा कार्य लें तथा आपके पालनहार की दया[1] उससे उत्तम है, जिसे वे इकट्ठा कर रहे हैं।

Verse 33 — Surah Az-Zukhruf 43:33

और यदि ये बात न होती कि सभी लोग एक ही नीति पर हो जाते, तो हम अवश्य बना देते उनके लिए, जो कुफ्र करते हैं अत्यंत कृपाशील के साथ, उनके घरों की छतें चाँदी की तथा सीढ़ियाँ जिनपर वे चढ़ते हैं।

Verse 34 — Surah Az-Zukhruf 43:34

तथा उनके घरों के द्वार और तख़्त जिनपर वे तकिये लगाये[1] रहते हैं।

Verse 35 — Surah Az-Zukhruf 43:35

तथा बना देते शोभा। नहीं हैं ये सब कुछ, परन्तु सांसारिक जीवन के सामान तथा आख़िरत[1] (परलोक) आपके पालनहार के यहाँ केवल आज्ञाकारियों के लिए है।

Verse 36 — Surah Az-Zukhruf 43:36

और जो व्यक्ति अत्यंत कृपाशील (अल्लाह) के स्मरण से अंधा हो जाता है, तो हम उसपर एक शैतान नियुक्त कर देते हैं, जो उसका साथी हो जाता है।

Verse 37 — Surah Az-Zukhruf 43:37

और वे (शैतान) उन्हें रोकते हैं सीधी राह से तथा वे समझते हैं कि वे सीधी राह पर हैं।

Verse 38 — Surah Az-Zukhruf 43:38

यहाँ तक कि जब वह हमारे पास आयेगा, तो ये कामना करेगा कि मेरे तथा तेरे (शैतान के) बीच पश्चिम तथा पूर्व की दूरी होती। तू बुरा साथी है।

Verse 39 — Surah Az-Zukhruf 43:39

(उनसे कहा जायेगाः) और तुम्हें कदापि कोई लाभ नहीं होगा आज, जबकि तुमने अत्याचार कर लिया है। वास्तव में, तुम सब यातना में साझी रहोगे।

Verse 40 — Surah Az-Zukhruf 43:40

तो (हे नबी!) क्या आप सुना लेंगे बहरों को या सीधी राह दिखा देंगे अंधों को तथा उन्हें, जो खुले कुपथ[1] में हों

Verse 41 — Surah Az-Zukhruf 43:41

फिर यदि हम आपको (संसार से) ले जायें, तो भी हम उनसे बदला लेने वाले हैं।

Verse 42 — Surah Az-Zukhruf 43:42

अथवा आपको दिखा दें, जिस (यातना) का हमने उनको वचन दिया है, तो निश्चय हम उनपर सामर्थ्य रखने वाले हैं।

Verse 43 — Surah Az-Zukhruf 43:43

तो (हे नबी!) आप दृढ़ता से पकड़े रहें उसे, जो हम आपकी ओर वह़्यी कर रहे हैं। वास्तव में, आप सीधी राह पर हैं।

Verse 44 — Surah Az-Zukhruf 43:44

निश्चय ये क़ुर्आन, आपके लिए तथा आपकी जाति के लिए एक शिक्षा[1] है और जल्द ही तुमसे प्रश्न[2] किया जायेगा।

Verse 45 — Surah Az-Zukhruf 43:45

तथा हे नबी! आप पूछ लें उनसे जिन्हें हमने भेजा है, आपसे पहले, अपने रसूलों में से कि क्या हमने बनाये हैं अत्यंत कृपाशील के अतिरिक्त वंदनीय, जिनकी वंदना की जाये

Verse 46 — Surah Az-Zukhruf 43:46

तथा हमने भेजा मूसा को अपनी निशानियों के साथ फ़िरऔन और उसके प्रमुखों की ओर। तो उसने कहाः वास्तव में, मैं सर्वलोक के पालनहार का रसूल हूँ।

Verse 47 — Surah Az-Zukhruf 43:47

और जब वह उनके पास लाया हमारी निशानियाँ, तो सहसा वे उनकी हँसी उड़ाने लगे।

Verse 48 — Surah Az-Zukhruf 43:48

तथा हम उन्हें एक से बढ़ कर एक निशानी दिखाते रहे और हमने पकड़ लिया उन्हें यातना में, ताकि वे (ठट्ठा) से रुक जायें।

Verse 49 — Surah Az-Zukhruf 43:49

और उन्होंने कहाः हे जादूगर! प्रार्थना कर हमारे लिए अपने पालनहार से, उस वचन के आधार पर, जो तुझसे किया है। वास्तव में, हम सीधी राह पर आ जायेंगे।

Verse 50 — Surah Az-Zukhruf 43:50

तो जैसे ही हमने दूर की उनसे यातना, तो वे सहसा वचन तोड़ने लगे।

Verse 51 — Surah Az-Zukhruf 43:51

तथा पुकारा फ़िरऔन ने अपनी जाति में। उसने कहाः हे मेरी जाति! क्या नहीं है मेरे लिए मिस्र का राज्य तथा ये नहरें, जो बह रही हैं मेरे नीचे से? तो क्या तुम देख नहीं रहे हो

Verse 52 — Surah Az-Zukhruf 43:52

मैं अच्छा हूँ या वह जो अपमानित (हीन) है और खुलकर बोल भी नहीं सकता

Verse 53 — Surah Az-Zukhruf 43:53

क्यों नहीं उतारे गये उसपर सोने के कंगन अथवा आये फ़रिश्ते उसके साथ पंक्ति बाँधे हुए

Verse 54 — Surah Az-Zukhruf 43:54

तो उसने झाँसा दे दिया अपनी जाति को और सबने उसकी बात मान ली। वास्तव में, वे थे ही अवज्ञाकारी लोग।

Verse 55 — Surah Az-Zukhruf 43:55

फिर जब उन्होंने हमें क्रोधित कर दिया, तो हमने उनसे बदला ले लिया और सबको डुबो दिया।

Verse 56 — Surah Az-Zukhruf 43:56

और बना दिया हमने उनको गया-गुज़रा और एक उदाहरण, पश्चात् के लोगों के लिए।

Verse 57 — Surah Az-Zukhruf 43:57

तथा जब दिया गया मर्यम के पुत्र का[1] उदाहरण, तो सहसा आपकी जाति उससे प्रसन्न होकर शोर मचाने लगी।

Verse 58 — Surah Az-Zukhruf 43:58

तथा मुश्रिकों ने कहा कि हमारे देवता अच्छे हैं या वे? उन्होंने नहीं दिया ये (उदाहरण) आपको, परन्तु कुतर्क (झगड़ने) के लिए। बल्कि, वे हैं ही बड़े झगड़ालू लोग।

Verse 59 — Surah Az-Zukhruf 43:59

नहीं है वह[1] (ईसा), परन्तु एक भक्त (दास) जिसपर हमने उपकार किया तथा उसे इस्राईल की संतान के लिए एक आदर्श बनाया।

Verse 60 — Surah Az-Zukhruf 43:60

और यदि हम चाहते, तो बना देते तुम्हारे बदले फ़रिश्ते धरती में, जो एक-दूसरे का स्थान लेते।

Verse 61 — Surah Az-Zukhruf 43:61

तथा वास्तव में, वह (ईसा) एक बड़ा लक्षण[1] हैं प्रलय का। अतः, कदापि संदेह न करो प्रलय के विषय में और मेरी ही बात मानो। यही सीधी राह है।

Verse 62 — Surah Az-Zukhruf 43:62

तथा तुम्हें कदापि न रोक दे शैतान। निश्चय वह तुम्हारा खुला शत्रु है।

Verse 63 — Surah Az-Zukhruf 43:63

और जब आ गया ईसा खुली निशानियाँ लेकर, तो कहाः मैं लाया हूँ तुम्हारे पास ज्ञान और ताकि उजागर कर दूँ तुम्हारे लिए वह कुछ बातें, जिनमें तुम विभेद कर रहे हो। अतः, अल्लाह से डरो और मेरा ही कहा मानो।

Verse 64 — Surah Az-Zukhruf 43:64

वास्तव में, अल्लाह ही मेरा पालनहार तथा तुम्हारा पालनहार है। अतः, उसी की वंदना (इबादत) करो यही सीधी राह है।

Verse 65 — Surah Az-Zukhruf 43:65

फिर विभेद कर लिया गिरोहों[1] ने आपस में। तो विनाश है उनके लिए जिन्होंने अत्याचार किया, दुःखदायी दिन की यातना से।

Verse 66 — Surah Az-Zukhruf 43:66

क्या वे बस इसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं कि प्रलय उनपर सहसा आ पड़े और उन्हें (उसका) संवेदन (भी) न हो

Verse 67 — Surah Az-Zukhruf 43:67

सभी मित्र उस दिन एक-दूसरे के शत्रु हो जायेंगे, आज्ञाकारियों के सिवा।

Verse 68 — Surah Az-Zukhruf 43:68

हे मेरे भक्तो! कोई भय नहीं है तुमपर आज और न तुम उदासीन होगे।

Verse 69 — Surah Az-Zukhruf 43:69

जो ईमान लाये हमारी आयतों पर तथा आज्ञाकारी बनकर रहे।

Verse 70 — Surah Az-Zukhruf 43:70

प्रवेश कर जाओ स्वर्ग में, तुम तथा तुम्हारी पत्नियाँ। तुम्हें प्रसन्न रखा जायेगा।

Verse 71 — Surah Az-Zukhruf 43:71

फिरायी जायेंगी उनपर सोने की थालें तथा प्याले और उसमें वह सब कुछ होगा, जिसे उनका मन चाहेगा और जिसे उनकी आँखें देखकर आनन्द लेंगी और तुमसब उसमें सदैव रहोगे।

Verse 72 — Surah Az-Zukhruf 43:72

और ये स्वर्ग है, जिसके तुम उत्तराधिकारी बनाये गये हो, अपने कर्मों के बदले, जो तुम कर रहे थे।

Verse 73 — Surah Az-Zukhruf 43:73

तुम्हारे लिए इसमें बहुत-से मेवे हैं जिनमें से तुम खाते रहोगे।

Verse 74 — Surah Az-Zukhruf 43:74

निःसंदेह अपराधी नरक की यातना में सदावासी होंगे।

Verse 75 — Surah Az-Zukhruf 43:75

उनसे (यातना) हल्की नहीं की जायेगी तथा वे उसमें निराश होंगे।

Verse 76 — Surah Az-Zukhruf 43:76

और हमने अत्याचार नहीं किया उनपर, परन्तु वही अत्याचारी थे।

Verse 77 — Surah Az-Zukhruf 43:77

तथा वे पुकारेंगे कि हे मालिक![1] हमारा काम ही तमाम कर दे तेरा परालनहार। वह कहेगाः तुम्हें इसी दशा में रहना है।

Verse 78 — Surah Az-Zukhruf 43:78

(अल्लाह कहेगाः) हम तुम्हारे पास सत्य[1] लाये, किन्तु तुममें से अधिक्तर को सत्य अप्रिय था।

Verse 79 — Surah Az-Zukhruf 43:79

क्या उन्होंने किसी बात का निर्णय कर लिया है?[1] तो हम भी निर्णय कर देंगे।

Verse 80 — Surah Az-Zukhruf 43:80

क्या वे समझते हैं कि हम नहीं सुनते हैं उनकी गुप्त बातों तथा प्रामर्श को? क्यों नहीं, बल्कि हमारे फ़रिश्ते उनके पास ही लिख रहे हैं।

Verse 81 — Surah Az-Zukhruf 43:81

(हे नबी!) आप उनसे कह दें कि यदि अत्यंत कृपाशील (अल्लाह) की कोई संतान होती, तो सबसे पहले मैं उसका पुजारी होता।

Verse 82 — Surah Az-Zukhruf 43:82

पवित्र है आकाशों तथा धरती का पालनहार, सिंहासन का स्वामी उन बातों से, जो वे कहते हैं

Verse 83 — Surah Az-Zukhruf 43:83

तो आप उन्हें छोड़ दें, वे वाद-विवाद तथा खेल-कूद करते रहें, यहाँ तक कि अपने उस दिन से मिल जायें, जिससे उन्हें डराया जा रहा है।

Verse 84 — Surah Az-Zukhruf 43:84

वही है, जो आकाश में वंदनीय और धरती में वंदनीय है और वही ह़िक्मत और ज्ञान वाला है।

Verse 85 — Surah Az-Zukhruf 43:85

शुभ है वह, जिसके अधिकार में आकाशों तथा धरती का राज्य है तथा जो कुछ दोनों के मध्य है तथा उसी के पास प्रलय का ज्ञान है और उसी की ओर तुमसब प्रत्यागत किये जाओगे।

Verse 86 — Surah Az-Zukhruf 43:86

तथा नहीं अधिकार रखते हैं, जिन्हें वे पुकारते हैं अल्लाह के अतिरिक्त, सिफ़ारिश का। हाँ, (सिफ़ारिश के योग्य वे हैं) जो सत्य[1] की गवाही दें और (उसे) जानते भी हों।

Verse 87 — Surah Az-Zukhruf 43:87

और यदि आप उनसे प्रश्न करें कि किसने पैदा किया है उन्हें? तो वे अवश्य कहेंगे कि अल्लाह ने। तो फिर वे कहाँ फिरे जा रहे हैं

Verse 88 — Surah Az-Zukhruf 43:88

तथा रसूल की ये बात कि, हे मेरे पालनहार! ये वे लोग हैं, जो ईमान नहीं लाते।

Verse 89 — Surah Az-Zukhruf 43:89

तो आप उनसे विमुख हो जायें तथा कह दें कि सलाम[1] है। शीघ्र ही उन्हें ज्ञान हो जायेगा।