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Hindi - Chapter 98 - Al-Bayyinah

Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink

Verse 1 — Surah Al-Bayyinah 98:1

अह्ले किताब के काफ़िर और मुश्रिक लोग ईमान लाने वाले नहीं थे जब तक कि उनके पास खुला प्रमाम न आ जाये।

Verse 2 — Surah Al-Bayyinah 98:2

अर्थात अल्लाह का एक रसूल, जो पवित्र ग्रन्थ पढ़कर सुनाये।

Verse 3 — Surah Al-Bayyinah 98:3

जिसमें उचित आदेश है।

Verse 4 — Surah Al-Bayyinah 98:4

और जिन लोगों को ग्रन्थ दिये गये, उन्होंने इस खुले प्रमाण के आ जाने के पश्चात ही मतभेद किया।

Verse 5 — Surah Al-Bayyinah 98:5

और उन्हें केवल यही आदेश दिया गया था कि वे धर्म को शुध्द रखें और सबको तज कर केवल अल्लाह की उपासना करें, नमाज़ अदा करें और ज़कात दें और यही शाश्त धर्म है।

Verse 6 — Surah Al-Bayyinah 98:6

निःसंदेह, जो लोग अह्ले किताब में से काफ़िर हो गये तथा मुश्रिक (मिश्रणवादी), तो वे सदा नरक की आग में रहेंगे और वही दुष्टतम जन हैं।

Verse 7 — Surah Al-Bayyinah 98:7

जो लोग ईमान लाये तथा सदाचार करते रहे, तो वही सर्वश्रेष्ठ जन हैं।

Verse 8 — Surah Al-Bayyinah 98:8

उनका प्रतिफल उनके पालनहार की ओर से सदा रहने वाले बाग़ हैं। जिनके नीचे नहरें बहती होंगी। वे उनमें सदा निवास करेंगे। अल्लाह उनसे प्रसन्न हुआ और वे अल्लाह से प्रसन्न हुए। ये उसके लिए है, जो अपने पालनहार से डरा।