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Hindi - Chapter 15 - Al-Hijr

Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink

Verse 1 — Surah Al-Hijr 15:1

अलिफ़॰ लाम॰ रा॰। यह किताब अर्थात स्पष्ट क़ुरआन की आयतें हैं

Verse 2 — Surah Al-Hijr 15:2

ऐसे समय आएँगे जब इनकार करनेवाले कामना करेंगे कि क्या ही अच्छा होता कि हम मुस्लिम (आज्ञाकारी) होते

Verse 3 — Surah Al-Hijr 15:3

छोड़ो उन्हें खाएँ और मज़े उड़ाएँ और (लम्बी) आशा उन्हें भुलावे में डाले रखे। उन्हें जल्द ही मालूम हो जाएगा

Verse 4 — Surah Al-Hijr 15:4

हमने जिस बस्ती को भी विनष्ट किया है, उसके लिए अनिवार्यतः एक निश्चित फ़ैसला रहा है

Verse 5 — Surah Al-Hijr 15:5

किसी समुदाय के लोग न अपने निश्चि‍त समय से आगे बढ़ सकते है और न वे पीछे रह सकते है

Verse 6 — Surah Al-Hijr 15:6

वे कहते है, "ऐ व्यक्ति, जिसपर अनुस्मरण अवतरित हुआ, तुम निश्चय ही दीवाने हो

Verse 7 — Surah Al-Hijr 15:7

यदि तुम सच्चे हो तो हमारे समक्ष फ़रिश्तों को क्यों नहीं ले आते

Verse 8 — Surah Al-Hijr 15:8

फ़रिश्तों को हम केवल सत्य के प्रयोजन हेतु उतारते है और उस समय लोगों को मुहलत नहीं मिलेगी

Verse 9 — Surah Al-Hijr 15:9

यह अनुसरण निश्चय ही हमने अवतरित किया है और हम स्वयं इसके रक्षक हैं

Verse 10 — Surah Al-Hijr 15:10

तुमसे पहले कितने ही विगत गिरोंहों में हम रसूल भेज चुके है

Verse 11 — Surah Al-Hijr 15:11

कोई भी रसूल उनके पास ऐसा नहीं आया, जिसका उन्होंने उपहास न किया हो

Verse 12 — Surah Al-Hijr 15:12

इसी तरह हम अपराधियों के दिलों में इसे उतारते है

Verse 13 — Surah Al-Hijr 15:13

वे इसे मानेंगे नहीं। पहले के लोगों की मिसालें गुज़र चुकी हैं

Verse 14 — Surah Al-Hijr 15:14

यदि हम उनपर आकाश से कोई द्वार खोल दें और वे दिन-दहाड़े उसमें चढ़ने भी लगें

Verse 15 — Surah Al-Hijr 15:15

फिर भी वे यही कहेंगे, "हमारी आँखें मदमाती हैं, बल्कि हम लोगों पर जादू कर दिया गया है

Verse 16 — Surah Al-Hijr 15:16

हमने आकाश में बुर्ज (तारा-समूह) बनाए और हमने उसे देखनेवालों के लिए सुसज्जित भी किया

Verse 17 — Surah Al-Hijr 15:17

और हर फिटकारे हुए शैतान से उसे सुरक्षित रखा

Verse 18 — Surah Al-Hijr 15:18

यह और बात है कि किसी ने चोरी-छिपे कुछ सुनगुन ले लिया तो एक प्रत्यक्ष अग्निशिखा ने भी झपटकर उसका पीछा किया

Verse 19 — Surah Al-Hijr 15:19

और हमने धरती को फैलाया और उसमें अटल पहाड़ डाल दिए और उसमें हर चीज़ नपे-तुले अन्दाज़ में उगाई

Verse 20 — Surah Al-Hijr 15:20

और उसमें तुम्हारे गुज़र-बसर के सामान निर्मित किए, और उनको भी जिनको रोज़ी देनेवाले तुम नहीं हो

Verse 21 — Surah Al-Hijr 15:21

कोई भी चीज़ तो ऐसी नहीं है जिसके भंडार हमारे पास न हों, फिर भी हम उसे एक ज्ञात (निश्चिंत) मात्रा के साथ उतारते है

Verse 22 — Surah Al-Hijr 15:22

हम ही वर्षा लानेवाली हवाओं को भेजते है। फिर आकाश से पानी बरसाते है और उससे तुम्हें सिंचित करते है। उसके ख़जानादार तुम नहीं हो

Verse 23 — Surah Al-Hijr 15:23

हम ही जीवन और मृत्यु देते है और हम ही उत्तराधिकारी रह जाते है

Verse 24 — Surah Al-Hijr 15:24

हम तुम्हारे पहले के लोगों को भी जानते है और बाद के आनेवालों को भी हम जानते है

Verse 25 — Surah Al-Hijr 15:25

तुम्हारा रब ही है, जो उन्हें इकट्ठा करेगा। निस्संदेह वह तत्वदर्शी, सर्वज्ञ है

Verse 26 — Surah Al-Hijr 15:26

हमने मनुष्य को सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से बनाया है

Verse 27 — Surah Al-Hijr 15:27

और उससे पहले हम जिन्नों को लू रूपी अग्नि से पैदा कर चुके थे

Verse 28 — Surah Al-Hijr 15:28

याद करो जब तुम्हारे रब ने फ़रिश्तों से कहा, "मैं सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से एक मनुष्य पैदा करनेवाला हूँ

Verse 29 — Surah Al-Hijr 15:29

तो जब मैं उसे पूरा बना चुकूँ और उसमें अपनी रूह फूँक दूँ तो तुम उसके आगे सजदे में गिर जाना

Verse 30 — Surah Al-Hijr 15:30

अतएव सब के सब फ़रिश्तो ने सजदा किया

Verse 31 — Surah Al-Hijr 15:31

सिवाय इबलीस के। उसने सजदा करनेवालों के साथ शामिल होने से इनकार कर दिया

Verse 32 — Surah Al-Hijr 15:32

कहा, "ऐ इबलीस! तुझे क्या हुआ कि तू सजदा करनेवालों में शामिल नहीं हुआ

Verse 33 — Surah Al-Hijr 15:33

उसने कहा, "मैं ऐसा नहीं हूँ कि मैं उस मनुष्य को सजदा करूँ जिसको तू ने सड़े हुए गारे की खनखनाती हुए मिट्टी से बनाया।

Verse 34 — Surah Al-Hijr 15:34

कहा, "अच्छा, तू निकल जा यहाँ से, क्योंकि तुझपर फिटकार है

Verse 35 — Surah Al-Hijr 15:35

निश्चय ही बदले के दिन तक तुझ पर धिक्कार है।

Verse 36 — Surah Al-Hijr 15:36

उसने कहा, "मेरे रब! फिर तू मुझे उस दिन तक के लिए मुहलत दे, जबकि सब उठाए जाएँगे।

Verse 37 — Surah Al-Hijr 15:37

कहा, "अच्छा, तुझे मुहलत है

Verse 38 — Surah Al-Hijr 15:38

उस दिन तक के लिए जिसका समय ज्ञात एवं नियत है।

Verse 39 — Surah Al-Hijr 15:39

उसने कहा, "मेरे रब! इसलिए कि तूने मुझे सीधे मार्ग से विचलित कर दिया है, अतः मैं भी धरती में उनके लिए मनमोहकता पैदा करूँगा और उन सबको बहकाकर रहूँगा

Verse 40 — Surah Al-Hijr 15:40

सिवाय उनके जो तेरे चुने हुए बन्दे होंगे।

Verse 41 — Surah Al-Hijr 15:41

कहा, "मुझ तक पहुँचने का यही सीधा मार्ग है

Verse 42 — Surah Al-Hijr 15:42

मेरे बन्दों पर तो तेरा कुछ ज़ोर न चलेगा, सिवाय उन बहके हुए लोगों को जो तेरे पीछे हो लें

Verse 43 — Surah Al-Hijr 15:43

निश्चय ही जहन्नम ही का ऐसे समस्त लोगों से वादा है

Verse 44 — Surah Al-Hijr 15:44

उसके सात द्वार है। प्रत्येक द्वार के लिए एक ख़ास हिस्सा होगा।

Verse 45 — Surah Al-Hijr 15:45

निस्संदेह डर रखनेवाले बाग़ों और स्रोतों में होंगे

Verse 46 — Surah Al-Hijr 15:46

प्रवेश करो इनमें निर्भयतापूर्वक सलामती के साथ

Verse 47 — Surah Al-Hijr 15:47

उनके सीनों में जो मन-मुटाव होगा उसे हम दूर कर देंगे। वे भाई-भाई बनकर आमने-सामने तख़्तों पर होंगे

Verse 48 — Surah Al-Hijr 15:48

उन्हें वहाँ न तो कोई थकान और तकलीफ़ पहुँचेगी औऱ न वे वहाँ से कभी निकाले ही जाएँगे

Verse 49 — Surah Al-Hijr 15:49

मेरे बन्दों को सूचित कर दो कि मैं अत्यन्त क्षमाशील, दयावान हूँ

Verse 50 — Surah Al-Hijr 15:50

और यह कि मेरी यातना भी अत्यन्त दुखदायिनी यातना है

Verse 51 — Surah Al-Hijr 15:51

और उन्हें इबराहीम के अतिथियों का वृत्तान्त सुनाओ

Verse 52 — Surah Al-Hijr 15:52

जब वे उसके यहाँ आए और उन्होंने सलाम किया तो उसने कहा, "हमें तो तुमसे डर लग रहा है।

Verse 53 — Surah Al-Hijr 15:53

वे बोले, "डरो नहीं, हम तुम्हें एक ज्ञानवान पुत्र की शुभ सूचना देते है।

Verse 54 — Surah Al-Hijr 15:54

उसने कहा, "क्या तुम मुझे शुभ सूचना दे रहे हो, इस अवस्था में कि मेरा बुढापा आ गया है? तो अब मुझे किस बात की शुभ सूचना दे रहे हो

Verse 55 — Surah Al-Hijr 15:55

उन्होंने कहा, "हम तुम्हें सच्ची शुभ सूचना दे रहे हैं, तो तुम निराश न हो

Verse 56 — Surah Al-Hijr 15:56

उसने कहा, "अपने रब की दयालुता से पथभ्रष्टों के सिवा और कौन निराश होगा

Verse 57 — Surah Al-Hijr 15:57

उसने कहा, "ऐ दूतो, तुम किस अभियान पर आए हो

Verse 58 — Surah Al-Hijr 15:58

वे बोले, "हम तो एक अपराधी क़ौम की ओर भेजे गए है

Verse 59 — Surah Al-Hijr 15:59

सिवाय लूत के घरवालों के। उन सबको तो हम बचा लेंगे

Verse 60 — Surah Al-Hijr 15:60

सिवाय उसकी पत्नी के - हमने निश्चित कर दिया है, वह तो पीछे रह जानेवालों में रहेंगी।

Verse 61 — Surah Al-Hijr 15:61

फिर जब ये दूत लूत के यहाँ पहुँचे

Verse 62 — Surah Al-Hijr 15:62

तो उसने कहा, "तुम तो अपरिचित लोग हो।

Verse 63 — Surah Al-Hijr 15:63

उन्होंने कहा, "नहीं, बल्कि हम तो तुम्हारे पास वही चीज़ लेकर आए है, जिसके विषय में वे सन्देह कर रहे थे

Verse 64 — Surah Al-Hijr 15:64

और हम तुम्हारे पास यक़ीनी चीज़ लेकर आए है, और हम बिलकुल सच कह रहे है

Verse 65 — Surah Al-Hijr 15:65

अतएव अब तुम अपने घरवालों को लेकर रात्रि के किसी हिस्से में निकल जाओ, और स्वयं उन सबके पीछे-पीछे चलो। और तुममें से कोई भी पीछे मुड़कर न देखे। बस चले जाओ, जिधर का तुम्हे आदेश है।

Verse 66 — Surah Al-Hijr 15:66

हमने उसे अपना यह फ़ैसला पहुँचा दिया कि प्रातः होते-होते उनकी जड़ कट चुकी होगी

Verse 67 — Surah Al-Hijr 15:67

इतने में नगर के लोग ख़ुश-ख़ुश आ पहुँचे

Verse 68 — Surah Al-Hijr 15:68

उसने कहा, "ये मेरे अतिथि है। मेरी फ़ज़ीहत मत करना

Verse 69 — Surah Al-Hijr 15:69

अल्लाह का डर ऱखो, मुझे रुसवा न करो।

Verse 70 — Surah Al-Hijr 15:70

उन्होंने कहा, "क्या हमने तुम्हें दुनिया भर के लोगों का ज़िम्मा लेने से रोका नहीं था

Verse 71 — Surah Al-Hijr 15:71

उसने कहा, "तुमको यदि कुछ करना है, तो ये मेरी (क़ौम की) बेटियाँ (विधितः विवाह के लिए) मौजूद है।

Verse 72 — Surah Al-Hijr 15:72

तुम्हारे जीवन की सौगन्ध, वे अपनी मस्ती में खोए हुए थे

Verse 73 — Surah Al-Hijr 15:73

अन्ततः पौ फटते-फटते एक भयंकर आवाज़ ने उन्हें आ लिया

Verse 74 — Surah Al-Hijr 15:74

और हमने उस बस्ती को तलपट कर दिया, और उनपर कंकरीले पत्थर बरसाए

Verse 75 — Surah Al-Hijr 15:75

निश्चय ही इसमें भापनेवालों के लिए निशानियाँ है

Verse 76 — Surah Al-Hijr 15:76

और वह (बस्ती) सार्वजनिक मार्ग पर है

Verse 77 — Surah Al-Hijr 15:77

निश्चय ही इसमें मोमिनों के लिए एक बड़ी निशानी है

Verse 78 — Surah Al-Hijr 15:78

और निश्चय ही ऐसा वाले भी अत्याचारी थे

Verse 79 — Surah Al-Hijr 15:79

फिर हमने उनसे भी बदला लिया, और ये दोनों (भू-भाग) खुले मार्ग पर स्थित है

Verse 80 — Surah Al-Hijr 15:80

हिज्रवाले भी रसूलों को झुठला चुके है

Verse 81 — Surah Al-Hijr 15:81

हमने तो उन्हें अपनी निशानियाँ प्रदान की थी, परन्तु वे उनकी उपेक्षा ही करते रहे

Verse 82 — Surah Al-Hijr 15:82

वे बड़ी बेफ़िक्री से पहाड़ो को काट-काटकर घर बनाते थे

Verse 83 — Surah Al-Hijr 15:83

अन्ततः एक भयानक आवाज़ ने प्रातः होते- होते उन्हें आ लिया

Verse 84 — Surah Al-Hijr 15:84

फिर जो कुछ वे कमाते रहे, वह उनके कुछ काम न आ सका

Verse 85 — Surah Al-Hijr 15:85

हमने तो आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके मध्य है, सोद्देश्य पैदा किया है, और वह क़ियामत की घड़ी तो अनिवार्यतः आनेवाली है। अतः तुम भली प्रकार दरगुज़र (क्षमा) से काम लो

Verse 86 — Surah Al-Hijr 15:86

निश्चय ही तुम्हारा रब ही बड़ा पैदा करनेवाला, सब कुछ जाननेवाला है

Verse 87 — Surah Al-Hijr 15:87

हमने तुम्हें सात 'मसानी' का समूह यानी महान क़ुरआन दिया

Verse 88 — Surah Al-Hijr 15:88

जो कुछ सुख-सामग्री हमने उनमें से विभिन्न प्रकार के लोगों को दी है, तुम उसपर अपनी आँखें न पसारो और न उनपर दुखी हो, तुम तो अपनी भुजाएँ मोमिनों के लिए झुकाए रखो

Verse 89 — Surah Al-Hijr 15:89

और कह दो, "मैं तो साफ़-साफ़ चेतावनी देनेवाला हूँ।

Verse 90 — Surah Al-Hijr 15:90

जिस प्रकार हमने हिस्सा-बख़रा करनेवालों पर उतारा था

Verse 91 — Surah Al-Hijr 15:91

जिन्होंने (अपने) क़ुरआन को टुकड़े-टुकड़े कर डाला

Verse 92 — Surah Al-Hijr 15:92

अब तुम्हारे रब की क़सम! हम अवश्य ही उन सबसे उसके विषय में पूछेंगे

Verse 93 — Surah Al-Hijr 15:93

जो कुछ वे करते रहे।

Verse 94 — Surah Al-Hijr 15:94

अतः तु्म्हें जिस चीज़ का आदेश हुआ है, उसे हाँक-पुकारकर बयान कर दो, और मुशरिको की ओर ध्यान न दो

Verse 95 — Surah Al-Hijr 15:95

उपहास करनेवालों के लिए हम तुम्हारी ओर से काफ़ी है

Verse 96 — Surah Al-Hijr 15:96

जो अल्लाह के साथ दूसरों को पूज्य-प्रभु ठहराते है, तो शीघ्र ही उन्हें मालूम हो जाएगा

Verse 97 — Surah Al-Hijr 15:97

हम जानते है कि वे जो कुछ कहते है, उससे तुम्हारा दिल तंग होता है

Verse 98 — Surah Al-Hijr 15:98

तो तुम अपने रब का गुणगान करो और सजदा करनेवालों में सम्मिलित रहो

Verse 99 — Surah Al-Hijr 15:99

और अपने रब की बन्दगी में लगे रहो, यहाँ तक कि जो यक़ीनी है, वह तुम्हारे सामने आ जाए