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Hindi - Chapter 20 - Ta-Ha

Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink

Verse 1 — Surah Ta-Ha 20:1

ता॰ हा॰।

Verse 2 — Surah Ta-Ha 20:2

हमने तुमपर यह क़ुरआन इसलिए नहीं उतारा कि तुम मशक़्क़त में पड़ जाओ

Verse 3 — Surah Ta-Ha 20:3

यह तो बस एक अनुस्मृति है, उसके लिए जो डरे

Verse 4 — Surah Ta-Ha 20:4

भली-भाँति अवतरित हुआ है उस सत्ता की ओर से, जिसने पैदा किया है धरती और उच्च आकाशों को

Verse 5 — Surah Ta-Ha 20:5

वह रहमान है, जो राजासन पर विराजमान हुआ

Verse 6 — Surah Ta-Ha 20:6

उसी का है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है और जो कुछ इन दोनों के मध्य है और जो कुछ आर्द्र मिट्टी के नीचे है

Verse 7 — Surah Ta-Ha 20:7

तुम चाहे बात पुकार कर कहो (या चुपके से), वह तो छिपी हुई और अत्यन्त गुप्त बात को भी जानता है

Verse 8 — Surah Ta-Ha 20:8

अल्लाह, कि उसके सिवा कोई पूज्य-प्रभू नहीं। उसके नाम बहुत ही अच्छे हैं।

Verse 9 — Surah Ta-Ha 20:9

क्या तुम्हें मूसा की भी ख़बर पहुँची

Verse 10 — Surah Ta-Ha 20:10

जबकि उसने एक आग देखी तो उसने अपने घरवालों से कहा, "ठहरो! मैंने एक आग देखी है। शायद कि तुम्हारे लिए उसमें से कोई अंगारा ले आऊँ या उस आग पर मैं मार्ग का पता पा लूँ।

Verse 11 — Surah Ta-Ha 20:11

फिर जब वह वहाँ पहुँचा तो पुकारा गया, "ऐ मूसा

Verse 12 — Surah Ta-Ha 20:12

मैं ही तेरा रब हूँ। अपने जूते उतार दे। तू पवित्र घाटी 'तुवा' में है

Verse 13 — Surah Ta-Ha 20:13

मैंने तुझे चुन लिया है। अतः सुन, जो कुछ प्रकाशना की जाती है

Verse 14 — Surah Ta-Ha 20:14

निस्संदेह मैं ही अल्लाह हूँ। मेरे सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। अतः तू मेरी बन्दगी कर और मेरी याद के लिए नमाज़ क़ायम कर

Verse 15 — Surah Ta-Ha 20:15

निश्चय ही वह (क़ियामत की) घड़ी आनेवाली है - शीघ्र ही उसे लाऊँगा, उसे छिपाए रखता हूँ - ताकि प्रत्येक व्यक्ति जो प्रयास वह करता है, उसका बदला पाए

Verse 16 — Surah Ta-Ha 20:16

अतः जो कोई उसपर ईमान नहीं लाता और अपनी वासना के पीछे पड़ा है, वह तुझे उससे रोक न दे, अन्यथा तू विनष्ट हो जाएगा

Verse 17 — Surah Ta-Ha 20:17

और ऐ मूसा! यह तेरे दाहिने हाथ में क्या है

Verse 18 — Surah Ta-Ha 20:18

उसने कहा, "यह मेरी लाठी है। मैं इसपर टेक लगाता हूँ और इससे अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूँ और इससे मेरी दूसरी ज़रूरतें भी पूरी होती है।

Verse 19 — Surah Ta-Ha 20:19

कहा, "डाल दे उसे, ऐ मूसा

Verse 20 — Surah Ta-Ha 20:20

अतः उसने डाल दिया। सहसा क्या देखते है कि वह एक साँप है, जो दौड़ रहा है

Verse 21 — Surah Ta-Ha 20:21

कहा, "इसे पकड़ ले और डर मत। हम इसे इसकी पहली हालत पर लौटा देंगे

Verse 22 — Surah Ta-Ha 20:22

और अपने हाथ अपने बाज़ू की ओर समेट ले। वह बिना किसी ऐब के रौशन दूसरी निशानी के रूप में निकलेगा

Verse 23 — Surah Ta-Ha 20:23

इसलिए कि हम तुझे अपनी बड़ी निशानियाँ दिखाएँ

Verse 24 — Surah Ta-Ha 20:24

तू फ़िरऔन के पास जा। वह बहुत सरकश हो गया है।

Verse 25 — Surah Ta-Ha 20:25

उसने निवेदन किया, "मेरे रब! मेरा सीना मेरे लिए खोल दे

Verse 26 — Surah Ta-Ha 20:26

और मेरे काम को मेरे लिए आसान कर दे

Verse 27 — Surah Ta-Ha 20:27

और मेरी ज़बान की गिरह खोल दे।

Verse 28 — Surah Ta-Ha 20:28

कि वे मेरी बात समझ सकें

Verse 29 — Surah Ta-Ha 20:29

और मेरे लिए अपने घरवालों में से एक सहायक नियुक्त कर दें

Verse 30 — Surah Ta-Ha 20:30

हारून को, जो मेरा भाई है

Verse 31 — Surah Ta-Ha 20:31

उसके द्वारा मेरी कमर मज़बूत कर

Verse 32 — Surah Ta-Ha 20:32

और उसे मेरे काम में शरीक कर दें

Verse 33 — Surah Ta-Ha 20:33

कि हम अधिक से अधिक तेरी तसबीह करें

Verse 34 — Surah Ta-Ha 20:34

और तुझे ख़ूब याद करें

Verse 35 — Surah Ta-Ha 20:35

निश्चय ही तू हमें खूब देख रहा है।

Verse 36 — Surah Ta-Ha 20:36

कहा, "दिया गया तुझे जो तूने माँगा, ऐ मूसा

Verse 37 — Surah Ta-Ha 20:37

हम तो तुझपर एक बार और भी उपकार कर चुके है

Verse 38 — Surah Ta-Ha 20:38

जब हमने तेरी माँ के दिल में यह बात डाली थी, जो अब प्रकाशना की जा रही है

Verse 39 — Surah Ta-Ha 20:39

कि उसको सन्दूक में रख दे; फिर उसे दरिया में डाल दे; फिर दरिया उसे तट पर डाल दे कि उसे मेरा शत्रु और उसका शत्रु उठा ले। मैंने अपनी ओर से तुझपर अपना प्रेम डाला। (ताकि तू सुरक्षित रहे) और ताकि मेरी आँख के सामने तेरा पालन-पोषण हो

Verse 40 — Surah Ta-Ha 20:40

याद कर जबकि तेरी बहन जाती और कहती थी, क्या मैं तुम्हें उसका पता बता दूँ जो इसका पालन-पोषण अपने ज़िम्मे ले ले? इस प्रकार हमने फिर तुझे तेरी माँ के पास पहुँचा दिया, ताकि उसकी आँख ठंड़ी हो और वह शोकाकुल न हो। और हमने तुझे भली-भाँति परखा। फिर तू कई वर्ष मदयन के लोगों में ठहरा रहा। फिर ऐ मूसा! तू ख़ास समय पर आ गया है

Verse 41 — Surah Ta-Ha 20:41

हमने तुझे अपने लिए तैयार किया है

Verse 42 — Surah Ta-Ha 20:42

जो, तू और तेरी भाई मेरी निशानियो के साथ; और मेरी याद में ढ़ीले मत पड़ना

Verse 43 — Surah Ta-Ha 20:43

जाओ दोनों, फ़िरऔन के पास, वह सरकश हो गया है

Verse 44 — Surah Ta-Ha 20:44

उससे नर्म बात करना, कदाचित वह ध्यान दे या डरे।

Verse 45 — Surah Ta-Ha 20:45

दोनों ने कहा, "ऐ हमारे रब! हमें इसका भय है कि वह हमपर ज़्यादती करे या सरकशी करने लग जाए।

Verse 46 — Surah Ta-Ha 20:46

कहा, "डरो नहीं, मै तुम्हारे साथ हूँ। सुनता और देखता हूँ

Verse 47 — Surah Ta-Ha 20:47

अतः जाओ, उसके पास और कहो, हम तेरे रब के रसूल है। इसराईल की सन्तान को हमारे साथ भेज दे। और उन्हें यातना न दे। हम तेरे पास तेरे रब की निशानी लेकर आए है। और सलामती है उसके लिए जो संमार्ग का अनुसरण करे

Verse 48 — Surah Ta-Ha 20:48

निस्संदेह हमारी ओर प्रकाशना हुई है कि यातना उसके लिए है, जो झुठलाए और मुँह फेरे।

Verse 49 — Surah Ta-Ha 20:49

उसने कहा, "अच्छा, तुम दोनों का रब कौन है, मूसा

Verse 50 — Surah Ta-Ha 20:50

कहा, "हमारा रब वह है जिसने हर चीज़ को उसकी आकृति दी, फिर तदनुकूव निर्देशन किया।

Verse 51 — Surah Ta-Ha 20:51

उसने कहा, "अच्छा तो उन नस्लों का क्या हाल है, जो पहले थी

Verse 52 — Surah Ta-Ha 20:52

कहा, "उसका ज्ञान मेरे रब के पास एक किताब में सुरक्षित है। मेरा रब न चूकता है और न भूलता है।

Verse 53 — Surah Ta-Ha 20:53

वही है जिसने तुम्हारे लिए धरती को पालना (बिछौना) बनाया और उसने तुम्हारे लिए रास्ते निकाले और आकाश से पानी उतारा। फिर हमने उसके द्वारा विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे निकाले

Verse 54 — Surah Ta-Ha 20:54

खाओ और अपने चौपायों को भी चराओ! निस्संदेह इसमें बुद्धिमानों के लिए बहुत-सी निशानियाँ है

Verse 55 — Surah Ta-Ha 20:55

उसी से हमने तुम्हें पैदा किया और उसी में हम तुम्हें लौटाते है और उसी से तुम्हें दूसरी बार निकालेंगे।

Verse 56 — Surah Ta-Ha 20:56

और हमने फ़िरऔन को अपनी सब निशानियाँ दिखाई, किन्तु उसने झुठलाया और इनकार किया।

Verse 57 — Surah Ta-Ha 20:57

उसने कहा, "ऐ मूसा! क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि अपने जादू से हमको हमारे अपने भूभाग से निकाल दे

Verse 58 — Surah Ta-Ha 20:58

अच्छा, हम भी तेरे पास ऐसा ही जादू लाते है। अब हमारे और अपने बीच एक निश्चित स्थान ठहरा ले, कोई बीच की जगह, न हम इसके विरुद्ध जाएँ और न तू।

Verse 59 — Surah Ta-Ha 20:59

कहा, "उत्सव का दिन तुम्हारे वादे का है और यह कि लोग दिन चढ़े इकट्ठे हो जाएँ।

Verse 60 — Surah Ta-Ha 20:60

तब फ़िरऔन ने पलटकर अपने सारे हथकंडे जुटाए। और आ गया

Verse 61 — Surah Ta-Ha 20:61

मूसा ने उन लोगों से कहा, "तबाही है तुम्हारी; झूठ घड़कर अल्लाह पर न थोपो कि वह तुम्हें एक यातना से विनष्ट कर दे और झूठ जिस किसी ने भी घड़कर थोपा, वह असफल रहा।

Verse 62 — Surah Ta-Ha 20:62

इसपर उन्होंने परस्पर बड़ा मतभेद किया औऱ और चुपके-चुपके कानाफूसी की

Verse 63 — Surah Ta-Ha 20:63

कहने लगे, "ये दोनों जादूगर है, चाहते है कि अपने जादू से तुम्हें तुम्हारे भूभाग से निकाल बाहर करें। और तुम्हारी उत्तम और उच्च प्रणाली को तहस-नहस करके रख दे।

Verse 64 — Surah Ta-Ha 20:64

अतः तुम सब मिलकर अपना उपाय जुटा लो, फिर पंक्तिबद्ध होकर आओ। आज तो प्रभावी रहा, वही सफल है।

Verse 65 — Surah Ta-Ha 20:65

वे बोले, "ऐ मूसा! या तो तुम फेंको या फिर हम पहले फेंकते हैं।

Verse 66 — Surah Ta-Ha 20:66

कहा, "नहीं, बल्कि तुम्हीं फेंको।" फिर अचानक क्या देखते है कि उनकी रस्सियाँ और लाठियाँ उनके जादू से उनके ख़याल में दौड़ती हुई प्रतीत हुई

Verse 67 — Surah Ta-Ha 20:67

और मूसा अपने जी में डरा

Verse 68 — Surah Ta-Ha 20:68

हमने कहा, "मत डर! निस्संदेह तू ही प्रभावी रहेगा।

Verse 69 — Surah Ta-Ha 20:69

और डाल दे जो तेरे दाहिने हाथ में है। जो कुछ उन्होंने रचा है, वह उसे निगल जाएगा। जो कुछ उन्होंने रचा है, वह तो बस जादूगर का स्वांग है और जादूगर सफल नहीं होता, चाहे वह जैसे भी आए।

Verse 70 — Surah Ta-Ha 20:70

अन्ततः जादूगर सजदे में गिर पड़े, बोले, "हम हारून और मूसा के रब पर ईमान ले आए।

Verse 71 — Surah Ta-Ha 20:71

उसने कहा, "तुमने मान लिया उसको, इससे पहले कि मैं तुम्हें इसकी अनुज्ञा देता? निश्चय ही यह तुम सबका प्रमुख है, जिसने जादू सिखाया है। अच्छा, अब मैं तुम्हारा हाथ और पाँव विपरीत दिशाओं से कटवा दूँगा और खंजूर के तनों पर तुम्हें सूली दे दूँगा। तब तुम्हें अवश्य ही मालूम हो जाएगा कि हममें से किसकी यातना अधिक कठोर और स्थायी है

Verse 72 — Surah Ta-Ha 20:72

उन्होंने कहा, "जो स्पष्ट निशानियाँ हमारे सामने आ चुकी है उनके मुक़ाबले में सौगंध है उस सत्ता की, जिसने हमें पैदा किया है, हम कदापि तुझे प्राथमिकता नहीं दे सकते। तो जो कुछ तू फ़ैसला करनेवाला है, कर ले। तू बस इसी सांसारिक जीवन का फ़ैसला कर सकता है

Verse 73 — Surah Ta-Ha 20:73

हम तो अपने रब पर ईमान ले आए, ताकि वह हमारी खताओं को माफ़ कर दे औऱ इस जादू को भी जिसपर तूने हमें बाध्य किया। अल्लाह की उत्तम और शेष रहनेवाला है।

Verse 74 — Surah Ta-Ha 20:74

सत्य यह है कि जो कोई अपने रब के पास अपराधी बनकर आया उसके लिए जहन्नम है, जिसमें वह न मरेगा और न जिएगा

Verse 75 — Surah Ta-Ha 20:75

और जो कोई उसके पास मोमिन होकर आया, जिसने अच्छे कर्म किए होंगे, तो ऐसे लोगों के लिए तो ऊँचे दर्जें है

Verse 76 — Surah Ta-Ha 20:76

अदन के बाग़ है, जिनके नीचें नहरें बहती होंगी। उनमें वे सदैव रहेंगे। यह बदला है उसका जिसने स्वयं को विकसित किया

Verse 77 — Surah Ta-Ha 20:77

और हमने मूसा की ओर प्रकाशना की, "रातों रात मेरे बन्दों को लेकर निकल पड़, और उनके लिए दरिया में सूखा मार्ग निकाल ले। न तो तुझे पीछा किए जाने औऱ न पकड़े जाने का भय हो और न किसी अन्य चीज़ से तुझे डर लगे।

Verse 78 — Surah Ta-Ha 20:78

फ़िरऔन ने अपनी सेना के साथ उनका पीछा किया। अन्ततः पानी उनपर छा गया, जैसाकि उसे उनपर छा जाना था

Verse 79 — Surah Ta-Ha 20:79

फ़िरऔन ने अपनी क़ौम को पथभ्रष्ट किया और मार्ग न दिखाया

Verse 80 — Surah Ta-Ha 20:80

ऐ ईसराईल की सन्तान! हमने तुम्हें तुम्हारे शत्रु से छुटकारा दिया और तुमसे तूर के दाहिने छोर का वादा किया और तुमपर मग्न और सलवा उतारा

Verse 81 — Surah Ta-Ha 20:81

खाओ, जो कुछ पाक अच्छी चीज़े हमने तुम्हें प्रदान की है, किन्तु इसमें हद से आगे न बढ़ो कि तुमपर मेरा प्रकोप टूट पड़े और जिस किसी पर मेरा प्रकोप टूटा, वह तो गिरकर ही रहा

Verse 82 — Surah Ta-Ha 20:82

और जो तौबा कर ले और ईमान लाए और अच्छा कर्म करे, फिर सीधे मार्ग पर चलता रहे, उसके लिए निश्चय ही मैं अत्यन्त क्षमाशील हूँ।

Verse 83 — Surah Ta-Ha 20:83

और अपनी क़ौम को छोड़कर तुझे शीघ्र आने पर किस चीज़ ने उभारा, ऐ मूसा

Verse 84 — Surah Ta-Ha 20:84

उसने कहा, "वे मेरे पीछे ही और मैं जल्दी बढ़कर आया तेरी ओर, ऐ रब! ताकि तू राज़ी हो जाए।

Verse 85 — Surah Ta-Ha 20:85

कहा, "अच्छा, तो हमने तेरे पीछे तेरी क़ौम के लोगों को आज़माइश में डाल दिया है। और सामरी ने उन्हें पथभ्रष्ट कर डाला।

Verse 86 — Surah Ta-Ha 20:86

तब मूसा अत्यन्त क्रोध और खेद में डूबा हुआ अपनी क़ौम के लोगों की ओर पलटा। कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगों! क्या तुमसे तुम्हारे रब ने अच्छा वादा नहीं किया था? क्या तुमपर लम्बी मुद्दत गुज़र गई या तुमने यही चाहा कि तुमपर तुम्हारे रब का प्रकोप ही टूटे कि तुमने मेरे वादे के विरुद्ध आचरण किया

Verse 87 — Surah Ta-Ha 20:87

उन्होंने कहा, "हमने आपसे किए हुए वादे के विरुद्ध अपने अधिकार से कुछ नहीं किया, बल्कि लोगों के ज़ेवरों के बोझ हम उठाए हुए थे, फिर हमने उनको (आग में) फेंक दिया, सामरी ने इसी तरह प्रेरित किया था।

Verse 88 — Surah Ta-Ha 20:88

और उसने उनके लिए एक बछड़ा ढालकर निकाला, एक धड़ जिसकी आवाज़ बैल की थी। फिर उन्होंने कहा, "यही तुम्हारा इष्ट-पूज्य है और मूसा का भी इष्ट -पूज्य है, किन्तु वह भूल गया है।

Verse 89 — Surah Ta-Ha 20:89

क्या वे देखते न थे कि न वह किसी बात का उत्तर देता है और न उसे उनकी हानि का कुछ अधिकार प्राप्त है और न लाभ का

Verse 90 — Surah Ta-Ha 20:90

और हारून इससे पहले उनसे कह भी चुका था कि "मेरी क़ौम के लोगों! तुम इसके कारण बस फ़ितने में पड़ गए हो। तुम्हारा रब तो रहमान है। अतः तुम मेरा अनुसरण करो और मेरी बात मानो।

Verse 91 — Surah Ta-Ha 20:91

उन्होंने कहा, "जब तक मूसा लौटकर हमारे पास न आ जाए, हम तो इससे ही लगे बैठे रहेंगे।

Verse 92 — Surah Ta-Ha 20:92

उसने कहा, "ऐ हारून! जब तुमने देखा कि ये पथभ्रष्ट हो गए है, तो किस चीज़ ने तुम्हें रोका

Verse 93 — Surah Ta-Ha 20:93

कि तुमने मेरा अनुसरण न किया? क्या तुमने मेरे आदेश की अवहेलना की

Verse 94 — Surah Ta-Ha 20:94

उसने कहा, "ऐ मेरी माँ के बेटे! मेरी दाढ़ी न पकड़ और न मेरा सिर! मैं डरा कि तू कहेंगा कि तूने इसराईल की सन्तान में फूट डाल दी और मेरी बात पर ध्यान न दिया।

Verse 95 — Surah Ta-Ha 20:95

(मूसा ने) कहा, "ऐ सामरी! तेरा क्या मामला है

Verse 96 — Surah Ta-Ha 20:96

उसने कहा, "मुझे उसकी सूझ प्राप्त हुई, जिसकी सूझ उन्हें प्राप्त॥ न हुई। फिर मैंने रसूल के पद-चिन्ह से एक मुट्ठी उठा ली। फिर उसे डाल दिया और मेरे जी ने मुझे कुछ ऐसा ही सुझाया।

Verse 97 — Surah Ta-Ha 20:97

कहा, "अच्छा, तू जा! अब इस जीवन में तेरे लिए यही है कि कहता रहे, कोई छुए नहीं! और निश्चित वादा है, जो तेरे लिए एक निश्चित वादा है, जो तुझपर से कदापि न टलेगा। और देख अपने इष्ट-पूज्य को जिसपर तू रीझा-जमा बैठा था! हम उसे जला डालेंगे, फिर उसे चूर्ण-विचूर्ण करके दरिया में बिखेर देंगे।

Verse 98 — Surah Ta-Ha 20:98

तुम्हारा पूज्य-प्रभु तो बस वही अल्लाह है, जिसके अतिरिक्त कोई पूज्य-प्रभु नहीं। वह अपने ज्ञान से हर चीज़ पर हावी है।

Verse 99 — Surah Ta-Ha 20:99

इस प्रकार विगत वृत्तांत हम तुम्हें सुनाते है और हमने तुम्हें अपने पास से एक अनुस्मृति प्रदान की है

Verse 100 — Surah Ta-Ha 20:100

जिस किसी ने उससे मुँह मोड़ा, वह निश्चय ही क़ियामत के दिन एक बोझ उठाएगा

Verse 101 — Surah Ta-Ha 20:101

ऐसे दिन सदैव इसी वबाल में पड़े रहेंगे और क़ियामत के दिन उनके हक़ में यह बहुत ही बुरा बोझ सिद्ध होगा

Verse 102 — Surah Ta-Ha 20:102

जिस दिन सूर फूँका जाएगा और हम अपराधियों को उस दिन इस दशा में इकट्ठा करेंगे कि उनकी आँखे नीली पड़ गई होंगी

Verse 103 — Surah Ta-Ha 20:103

वे आपस में चुपके-चुपके कहेंगे कि "तुम बस दस ही दिन ठहरे हो।

Verse 104 — Surah Ta-Ha 20:104

हम भली-भाँति जानते है जो कुछ वे कहेंगे, जबकि उनका सबसे अच्छी सम्मतिवाला कहेगा, "तुम तो बस एक ही दिन ठहरे हो।

Verse 105 — Surah Ta-Ha 20:105

वे तुमसे पर्वतों के विषय में पूछते है। कह दो, "मेरा रब उन्हें छूल की तरह उड़ा देगा

Verse 106 — Surah Ta-Ha 20:106

और धरती को एक समतल चटियल मैदान बनाकर छोड़ेगा

Verse 107 — Surah Ta-Ha 20:107

तुम उसमें न कोई सिलवट देखोगे और न ऊँच-नीच।

Verse 108 — Surah Ta-Ha 20:108

उस दिन वे पुकारनेवाले के पीछे चल पड़ेंगे और उसके सामने कोई अकड़ न दिखाई जा सकेगी। आवाज़े रहमान के सामने दब जाएँगी। एक हल्की मन्द आवाज़ के अतिरिक्त तुम कुछ न सुनोगे

Verse 109 — Surah Ta-Ha 20:109

उस दिन सिफ़ारिश काम न आएगी। यह और बात है कि किसी के लिए रहमान अनुज्ञा दे और उसके लिए बात करने को पसन्द करे

Verse 110 — Surah Ta-Ha 20:110

वह जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है, किन्तु वे अपने ज्ञान से उसपर हावी नहीं हो सकते

Verse 111 — Surah Ta-Ha 20:111

चेहरे उस जीवन्त, शाश्वत सत्ता के आगे झुकें होंगे। असफल हुआ वह जिसने ज़ुल्म का बोझ उठाया

Verse 112 — Surah Ta-Ha 20:112

किन्तु जो कोई अच्छे कर्म करे और हो वह मोमिन, तो उसे न तो किसी ज़ुल्म का भय होगा और न हक़ मारे जाने का

Verse 113 — Surah Ta-Ha 20:113

और इस प्रकार हमने इसे अरबी क़ुरआन के रूप में अवतरित किया है और हमने इसमें तरह-तरह से चेतावनी दी है, ताकि वे डर रखें या यह उन्हें होश दिलाए

Verse 114 — Surah Ta-Ha 20:114

अतः सर्वोच्च है अल्लाह, सच्चा सम्राट! क़ुरआन के (फ़ैसले के) सिलसिले में जल्दी न करो, जब तक कि वह पूरा न हो जाए। तेरी ओर उसकी प्रकाशना हो रही है। और कहो, "मेरे रब, मुझे ज्ञान में अभिवृद्धि प्रदान कर।

Verse 115 — Surah Ta-Ha 20:115

और हमने इससे पहले आदम से वचन लिया था, किन्तु वह भूल गया और हमने उसमें इरादे की मज़बूती न पाई

Verse 116 — Surah Ta-Ha 20:116

और जब हमने फ़रिश्तों से कहा, "आदम को सजदा करो।" तो उन्होंने सजदा किया सिवाय इबलीस के, वह इनकार कर बैठा

Verse 117 — Surah Ta-Ha 20:117

इसपर हमने कहा, "ऐ आदम! निश्चय ही यह तुम्हारा और तुम्हारी पत्नी का शत्रु है। ऐसा न हो कि तुम दोनों को जन्नत से निकलवा दे और तुम तकलीफ़ में पड़ जाओ

Verse 118 — Surah Ta-Ha 20:118

तुम्हारे लिए तो ऐसा है कि न तुम यहाँ भूखे रहोगे और न नंगे

Verse 119 — Surah Ta-Ha 20:119

और यह कि न यहाँ प्यासे रहोगे और न धूप की तकलीफ़ उठाओगे।

Verse 120 — Surah Ta-Ha 20:120

फिर शैतान ने उसे उकसाया। कहने लगा, "ऐ आदम! क्या मैं तुझे शाश्वत जीवन के वृक्ष का पता दूँ और ऐसे राज्य का जो कभी जीर्ण न हो

Verse 121 — Surah Ta-Ha 20:121

अन्ततः उन दोनों ने उसमें से खा लिया, जिसके परिणामस्वरूप उनकी छिपाने की चीज़े उनके आगे खुल गई और वे दोनों अपने ऊपर जन्नत के पत्ते जोड-जोड़कर रखने लगे। और आदम ने अपने रब की अवज्ञा की, तो वह मार्ग से भटक गया

Verse 122 — Surah Ta-Ha 20:122

इसके पश्चात उसके रब ने उसे चुन लिया और दोबारा उसकी ओर ध्यान दिया और उसका मार्गदर्शन किया

Verse 123 — Surah Ta-Ha 20:123

कहा, "तुम दोनों के दोनों यहाँ से उतरो! तुम्हारे कुछ लोग कुछ के शत्रु होंगे। फिर यदि मेरी ओर से तुम्हें मार्गदर्शन पहुँचे, तो जिस किसी ने मेरे मार्गदर्शन का अनुपालन किया, वह न तो पथभ्रष्ट होगा और न तकलीफ़ में पड़ेगा

Verse 124 — Surah Ta-Ha 20:124

और जिस किसी ने मेरी स्मृति से मुँह मोडा़ तो उसका जीवन संकीर्ण होगा और क़ियामत के दिन हम उसे अंधा उठाएँगे।

Verse 125 — Surah Ta-Ha 20:125

वह कहेगा, "ऐ मेरे रब! तूने मुझे अंधा क्यों उठाया, जबकि मैं आँखोंवाला था

Verse 126 — Surah Ta-Ha 20:126

वह कहेगा, "इसी प्रकार (तू संसार में अंधा रहा था) । तेरे पास मेरी आयतें आई थी, तो तूने उन्हें भूला दिया था। उसी प्रकार आज तुझे भुलाया जा रहा है।

Verse 127 — Surah Ta-Ha 20:127

इसी प्रकार हम उसे बदला देते है जो मर्यादा का उल्लंघन करे और अपने रब की आयतों पर ईमान न लाए। और आख़िरत की यातना तो अत्यन्त कठोर और अधिक स्थायी है

Verse 128 — Surah Ta-Ha 20:128

फिर क्या उनको इससे भी मार्ग न मिला कि हम उनसे पहले कितनी ही नस्लों को विनष्ट कर चुके है, जिनकी बस्तियों में वे चलते-फिरते है? निस्संदेह बुद्धिमानों के लिए इसमें बहुत-सी निशानियाँ है

Verse 129 — Surah Ta-Ha 20:129

यदि तेरे रब की ओर से पहले ही एक बात निश्चित न हो गई होती और एक अवधि नियत न की जा चुकी होती, तो अवश्य ही उन्हें यातना आ पकड़ती

Verse 130 — Surah Ta-Ha 20:130

अतः जो कुछ वे कहते है उसपर धैर्य से काम लो और अपने रब का गुणगान करो, सूर्योदय से पहले और उसके डूबने से पहले, और रात की घड़ियों में भी तसबीह करो, और दिन के किनारों पर भी, ताकि तुम राज़ी हो जाओ

Verse 131 — Surah Ta-Ha 20:131

और उसकी ओर आँख उठाकर न देखो, जो कुछ हमने उनमें से विभिन्न लोगों को उपभोग के लिए दे रखा है, ताकि हम उसके द्वारा उन्हें आज़माएँ। वह तो बस सांसारिक जीवन की शोभा है। तुम्हारे रब की रोज़ी उत्तम भी है और स्थायी भी

Verse 132 — Surah Ta-Ha 20:132

और अपने लोगों को नमाज़ का आदेश करो और स्वयं भी उसपर जमे रहो। हम तुमसे कोई रोज़ी नहीं माँगते। रोज़ी हम ही तुम्हें देते है, और अच्छा परिणाम तो धर्मपरायणता ही के लिए निश्चित है

Verse 133 — Surah Ta-Ha 20:133

और वे कहते है कि "यह अपने रब की ओर से हमारे पास कोई निशानी क्यों नहीं लाता?" क्या उनके पास उसका स्पष्ट प्रमाण नहीं आ गया, जो कुछ कि पहले की पुस्तकों में उल्लिखित है

Verse 134 — Surah Ta-Ha 20:134

यदि हम उसके पहले इन्हें किसी यातना से विनष्ट कर देते तो ये कहते कि "ऐ हमारे रब, तूने हमारे पास कोई रसूल क्यों न भेजा कि इससे पहले कि हम अपमानित और रुसवा होते, तेरी आयतों का अनुपालन करने लगते

Verse 135 — Surah Ta-Ha 20:135

कह दो, "हर एक प्रतीक्षा में है। अतः अब तुम भी प्रतीक्षा करो। शीघ्र ही तुम जान लोगे कि कौन सीधे मार्गवाला है और किनको मार्गदर्शन प्राप्त है।