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Hindi - Chapter 23 - Al-Muminun
Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink
Verse 1 — Surah Al-Muminun 23:1
सफल हो गए ईमानवाले
Verse 2 — Surah Al-Muminun 23:2
जो अपनी नमाज़ों में विनम्रता अपनाते है
Verse 3 — Surah Al-Muminun 23:3
और जो व्यर्थ बातों से पहलू बचाते है
Verse 4 — Surah Al-Muminun 23:4
और जो ज़कात अदा करते है
Verse 5 — Surah Al-Muminun 23:5
और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करते है
Verse 6 — Surah Al-Muminun 23:6
सिवाय इस सूरत के कि अपनी पत्नि यों या लौंडियों के पास जाएँ कि इसपर वे निन्दनीय नहीं है
Verse 7 — Surah Al-Muminun 23:7
परन्तु जो कोई इसके अतिरिक्त कुछ और चाहे तो ऐसे ही लोग सीमा उल्लंघन करनेवाले है।
Verse 8 — Surah Al-Muminun 23:8
और जो अपनी अमानतों और अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रखते है
Verse 9 — Surah Al-Muminun 23:9
और जो अपनी नमाज़ों की रक्षा करते हैं
Verse 10 — Surah Al-Muminun 23:10
वही वारिस होने वाले है
Verse 11 — Surah Al-Muminun 23:11
जो फ़िरदौस की विरासत पाएँगे। वे उसमें सदैव रहेंगे
Verse 12 — Surah Al-Muminun 23:12
हमने मनुष्य को मिट्टी के सत से बनाया
Verse 13 — Surah Al-Muminun 23:13
फिर हमने उसे एक सुरक्षित ठहरने की जगह टपकी हुई बूँद बनाकर रखा
Verse 14 — Surah Al-Muminun 23:14
फिर हमने उस बूँद को लोथड़े का रूप दिया; फिर हमने उस लोथड़े को बोटी का रूप दिया; फिर हमने उन हड्डियों पर मांस चढाया; फिर हमने उसे एक दूसरा ही सर्जन रूप देकर खड़ा किया। अतः बहुत ही बरकतवाला है अल्लाह, सबसे उत्तम स्रष्टा
Verse 15 — Surah Al-Muminun 23:15
फिर तुम अवश्य मरनेवाले हो
Verse 16 — Surah Al-Muminun 23:16
फिर क़ियामत के दिन तुम निश्चय ही उठाए जाओगे
Verse 17 — Surah Al-Muminun 23:17
और हमने तुम्हारे ऊपर सात रास्ते बनाए है। और हम सृष्टि-कार्य से ग़ाफ़िल नहीं
Verse 18 — Surah Al-Muminun 23:18
और हमने आकाश से एक अंदाज़े के साथ पानी उतारा। फिर हमने उसे धरती में ठहरा दिया, और उसे विलुप्त करने की सामर्थ्य भी हमें प्राप्त है
Verse 19 — Surah Al-Muminun 23:19
फिर हमने उसके द्वारा तुम्हारे लिए खजूरो और अंगूरों के बाग़ पैदा किए। तुम्हारे लिए उनमें बहुत-से फल है (जिनमें तुम्हारे लिए कितने ही लाभ है) और उनमें से तुम खाते हो
Verse 20 — Surah Al-Muminun 23:20
और वह वृक्ष भी जो सैना पर्वत से निकलता है, जो तेल और खानेवालों के लिए सालन लिए हुए उगता है
Verse 21 — Surah Al-Muminun 23:21
और निश्चय ही तुम्हारे लिए चौपायों में भी एक शिक्षा है। उनके पेटों में जो कुछ है उसमें से हम तुम्हें पिलाते है। औऱ तुम्हारे लिए उनमें बहुत-से फ़ायदे है और उन्हें तुम खाते भी हो
Verse 22 — Surah Al-Muminun 23:22
और उनपर और नौकाओं पर तुम सवार होते हो
Verse 23 — Surah Al-Muminun 23:23
हमने नूह को उसकी क़ौम की ओर भेजा तो उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! अल्लाह की बन्दगी करो। उसके सिवा तुम्हारा और कोई इष्ट-पूज्य नहीं है तो क्या तुम डर नहीं रखते
Verse 24 — Surah Al-Muminun 23:24
इसपर उनकी क़ौम के सरदार, जिन्होंने इनकार किया था, कहने लगे, "यह तो बस तुम्हीं जैसा एक मनुष्य है। चाहता है कि तुमपर श्रेष्ठता प्राप्त करे।""अल्लाह यदि चाहता तो फ़रिश्ते उतार देता। यह बात तो हमने अपने अगले बाप-दादा के समयों से सुनी ही नहीं
Verse 25 — Surah Al-Muminun 23:25
यह तो बस एक उन्मादग्रस्त व्यक्ति है। अतः एक समय तक इसकी प्रतीक्षा कर लो।
Verse 26 — Surah Al-Muminun 23:26
उसने कहा, "ऐ मेरे रब! इन्होंने मुझे जो झुठलाया है, इसपर तू मेरी सहायता कर।
Verse 27 — Surah Al-Muminun 23:27
तब हमने उसकी ओर प्रकाशना की कि "हमारी आँखों के सामने और हमारी प्रकाशना के अनुसार नौका बना और फिर जब हमारा आदेश आ जाए और तूफ़ान उमड़ पड़े तो प्रत्येक प्रजाति में से एक-एक जोड़ा उसमें रख ले और अपने लोगों को भी, सिवाय उनके जिनके विरुद्ध पहले फ़ैसला हो चुका है। और अत्याचारियों के विषय में मुझसे बात न करना। वे तो डूबकर रहेंगे
Verse 28 — Surah Al-Muminun 23:28
फिर जब तू नौका पर सवार हो जाए और तेरे साथी भी तो कह, प्रशंसा है अल्लाह की, जिसने हमें ज़ालिम लोगों से छुटकारा दिया
Verse 29 — Surah Al-Muminun 23:29
और कह, ऐ मेरे रब! मुझे बरकतवाली जगह उतार। और तू सबसे अच्छा मेज़बान है।
Verse 30 — Surah Al-Muminun 23:30
निस्संदेह इसमें कितनी ही निशानियाँ हैं और परीक्षा तो हम करते ही है
Verse 31 — Surah Al-Muminun 23:31
फिर उनके पश्चात हमने एक दूसरी नस्ल को उठाया
Verse 32 — Surah Al-Muminun 23:32
और उनमें हमने स्वयं उन्हीं में से एक रसूल भेजा कि "अल्लाह की बन्दगी करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई इष्ट-पूज्य नहीं। तो क्या तुम डर नहीं रखते
Verse 33 — Surah Al-Muminun 23:33
उसकी क़ौम के सरदार, जिन्होंने इनकार किया और आख़िरत के मिलन को झूठलाया और जिन्हें हमने सांसारिक जीवन में सुख प्रदान किया था, कहने लगे, "यह तो बस तुम्हीं जैसा एक मनुष्य है। जो कुछ तुम खाते हो, वही यह भी खाता है और जो कुछ तुम पीते हो, वही यह भी पीता है
Verse 34 — Surah Al-Muminun 23:34
यदि तुम अपने ही जैसे एक मनुष्य के आज्ञाकारी हुए तो निश्चय ही तुम घाटे में पड़ गए
Verse 35 — Surah Al-Muminun 23:35
क्या यह तुमसे वादा करता है कि जब तुम मरकर मिट्टी और हड़्डियाँ होकर रह जाओगे तो तुम निकाले जाओगे
Verse 36 — Surah Al-Muminun 23:36
दूर की बात है, बहुत दूर की, जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है
Verse 37 — Surah Al-Muminun 23:37
वह तो बस हमारा सांसारिक जीवन ही है। (यहीं) हम मरते और जीते है। हम कोई दोबारा उठाए जानेवाले नहीं है
Verse 38 — Surah Al-Muminun 23:38
वह तो बस एक ऐसा व्यक्ति है जिसने अल्लाह पर झूठ घड़ा है। हम उसे कदापि माननेवाले नहीं।
Verse 39 — Surah Al-Muminun 23:39
उसने कहा, "ऐ मेरे रब! उन्होंने जो मुझे झुठलाया, उसपर तू मेरी सहायता कर।
Verse 40 — Surah Al-Muminun 23:40
कहा, "शीघ्र ही वे पछताकर रहेंगे।
Verse 41 — Surah Al-Muminun 23:41
फिर घटित होनेवाली बात के अनुसार उन्हें एक प्रचंड आवाज़ ने आ लिया और हमने उन्हें कूड़ा-कर्कट बनाकर रख दिया। अतः फिटकार है, ऐसे अत्याचारी लोगों पर
Verse 42 — Surah Al-Muminun 23:42
फिर हमने उनके पश्चात दूसरी नस्लों को उठाया
Verse 43 — Surah Al-Muminun 23:43
कोई समुदाय न तो अपने निर्धारित समय से आगे बढ़ सकता है और न पीछे रह सकता है
Verse 44 — Surah Al-Muminun 23:44
फिर हमने निरन्तर अपने रसूल भेजे। जब भी किसी समुदाय के पास उसका रसूल आया, तो उसके लोगों ने उसे झुठला दिया। अतः हम एक दूसरे के पीछे (विनाश के लिए) लगाते चले गए और हमने उन्हें ऐसा कर दिया कि वे कहानियाँ होकर रह गए। फिटकार हो उन लोगों पर जो ईमान न लाएँ
Verse 45 — Surah Al-Muminun 23:45
फिर हमने मूसा और उसके भाई हारून को अपनी निशानियों और खुले प्रमाण के साथ फ़िरऔन और उसके सरदारों की ओर भेजा।
Verse 46 — Surah Al-Muminun 23:46
किन्तु उन्होंने अहंकार किया। वे थे ही सरकश लोग
Verse 47 — Surah Al-Muminun 23:47
तो व कहने लगे, "क्या हम अपने ही जैसे दो मनुष्यों की बात मान लें, जबकि उनकी क़ौम हमारी ग़ुलाम भी है
Verse 48 — Surah Al-Muminun 23:48
अतः उन्होंने उन दोनों को झुठला दिया और विनष्ट होनेवालों में सम्मिलित होकर रहे
Verse 49 — Surah Al-Muminun 23:49
और हमने मूसा को किताब प्रदान की, ताकि वे लोग मार्ग पा सकें
Verse 50 — Surah Al-Muminun 23:50
और मरयम के बेटे और उसकी माँ को हमने एक निशानी बनाया। और हमने उन्हें रहने योग्य स्रोतबाली ऊँची जगह शरण दी
Verse 51 — Surah Al-Muminun 23:51
ऐ पैग़म्बरो! अच्छी पाक चीज़े खाओ और अच्छा कर्म करो। जो कुछ तुम करते हो उसे मैं जानता हूँ
Verse 52 — Surah Al-Muminun 23:52
और निश्चय ही यह तुम्हारा समुदाय, एक ही समुदाय है और मैं तुम्हारा रब हूँ। अतः मेरा डर रखो।
Verse 53 — Surah Al-Muminun 23:53
किन्तु उन्होंने स्वयं अपने मामले (धर्म) को परस्पर टुकड़े-टुकड़े कर डाला। हर गिरोह उसी पर खुश है, जो कुछ उसके पास है
Verse 54 — Surah Al-Muminun 23:54
अच्छा तो उन्हें उनकी अपनी बेहोशी में डूबे हुए ही एक समय तक छोड़ दो
Verse 55 — Surah Al-Muminun 23:55
क्या वे समझते है कि हम जो उनकी धन और सन्तान से सहायता किए जा रहे है
Verse 56 — Surah Al-Muminun 23:56
तो यह उनके भलाइयों में कोई जल्दी कर रहे है
Verse 57 — Surah Al-Muminun 23:57
नहीं, बल्कि उन्हें इसका एहसास नहीं है। निश्चय ही जो लोग अपने रब के भय से काँपते रहते हैं
Verse 58 — Surah Al-Muminun 23:58
और जो लोग अपने रब की आयतों पर ईमान लाते है
Verse 59 — Surah Al-Muminun 23:59
और जो लोग अपने रब के साथ किसी को साझी नहीं ठहराते
Verse 60 — Surah Al-Muminun 23:60
और जो लोग देते है, जो कुछ देते है और हाल यह होता है कि दिल उनके काँप रहे होते है, इसलिए कि उन्हें अपने रब की ओर पलटना है
Verse 61 — Surah Al-Muminun 23:61
यही वे लोग है, जो भलाइयों में जल्दी करते है और यही उनके लिए अग्रसर रहनेवाले है।
Verse 62 — Surah Al-Muminun 23:62
हम किसी व्यक्ति पर उसकी समाई (क्षमता) से बढ़कर ज़िम्मेदारी का बोझ नहीं डालते और हमारे पास एक किताब है, जो ठीक-ठीक बोलती है, और उनपर ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
Verse 63 — Surah Al-Muminun 23:63
बल्कि उनके दिल इसकी (सत्य धर्म की) ओर से हटकर (वसवसों और गफ़लतों आदि के) भँवर में पडे हुए है और उससे (ईमानवालों की नीति से) हटकर उनके कुछ और ही काम है। वे उन्हीं को करते रहेंगे
Verse 64 — Surah Al-Muminun 23:64
यहाँ तक कि जब हम उनके खुशहाल लोगों को यातना में पकड़ेगे तो क्या देखते है कि वे विलाप और फ़रियाद कर रहे है
Verse 65 — Surah Al-Muminun 23:65
(कहा जाएगा,) "आज चिल्लाओ मत, तुम्हें हमारी ओर से कोई सहायता मिलनेवाली नहीं
Verse 66 — Surah Al-Muminun 23:66
तुम्हें मेरी आयतें सुनाई जाती थीं, तो तुम अपनी एड़ियों के बल फिर जाते थे।
Verse 67 — Surah Al-Muminun 23:67
हाल यह था कि इसके कारण स्वयं को बड़ा समझते थे, उसे एक कहानी कहनेवाला ठहराकर छोड़ चलते थे
Verse 68 — Surah Al-Muminun 23:68
क्या उन्होंने इस वाणी पर विचार नहीं किया या उनके पास वह चीज़ आ गई जो उनके पहले बाप-दादा के पास न आई थी
Verse 69 — Surah Al-Muminun 23:69
या उन्होंने अपने रसूल को पहचाना नहीं, इसलिए उसका इनकार कर रहे है
Verse 70 — Surah Al-Muminun 23:70
या वे कहते है, "उसे उन्माद हो गया है।" नहीं, बल्कि वह उनके पास सत्य लेकर आया है। किन्तु उनमें अधिकांश को सत्य अप्रिय है
Verse 71 — Surah Al-Muminun 23:71
और यदि सत्य कहीं उनकी इच्छाओं के पीछे चलता तो समस्त आकाश और धरती और जो भी उनमें है, सबमें बिगाड़ पैदा हो जाता। नहीं, बल्कि हम उनके पास उनके हिस्से की अनुस्मृति लाए है। किन्तु वे अपनी अनुस्मृति से कतरा रहे है
Verse 72 — Surah Al-Muminun 23:72
या तुम उनसे कुथ शुल्क माँग रहे हो? तुम्हारे रब का दिया ही उत्तम है। और वह सबसे अच्छी रोज़ी देनेवाला है
Verse 73 — Surah Al-Muminun 23:73
और वास्तव में तुम उन्हें सीधे मार्ग की ओर बुला रहे हो
Verse 74 — Surah Al-Muminun 23:74
किन्तु जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते वे इस मार्ग से हटकर चलना चाहते है
Verse 75 — Surah Al-Muminun 23:75
यदि हम (किसी आज़माइश में डालने के पश्चात) उनपर दया करते और जिस तकलीफ़ में वे होते उसे दूर कर देते तो भी वे अपनी सरकशी में हठात बहकते रहते
Verse 76 — Surah Al-Muminun 23:76
यद्यपि हमने उन्हें यातना में पकड़ा, फिर भी वे अपने रब के आगे न तो झुके और न वे गिड़गिड़ाते ही थे
Verse 77 — Surah Al-Muminun 23:77
यहाँ तक कि जब हम उनपर कठोर यातना का द्वार खोल दें तो क्या देखेंगे कि वे उसमें निराश होकर रह गए है
Verse 78 — Surah Al-Muminun 23:78
और वही है जिसने तुम्हारे लिए कान और आँखे और दिल बनाए। तुम कृतज्ञता थोड़े ही दिखाते हो
Verse 79 — Surah Al-Muminun 23:79
वही है जिसने तुम्हें धरती में पैदा करके फैलाया और उसी की ओर तुम इकट्ठे होकर जाओगे
Verse 80 — Surah Al-Muminun 23:80
और वही है जो जीवन प्रदान करता और मृत्यु देता है और रात और दिन का उलट-फेर उसी के अधिकार में है। फिर क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते
Verse 81 — Surah Al-Muminun 23:81
नहीं, बल्कि वे लोग वहीं कुछ करते है जो उनके पहले के लोग कह चुके है
Verse 82 — Surah Al-Muminun 23:82
उन्होंने कहा, "क्या जब हम मरकर मिट्टी और हड्डियाँ होकर रह जाएँगे , तो क्या हमें दोबारा जीवित करके उठाया जाएगा
Verse 83 — Surah Al-Muminun 23:83
यह वादा तो हमसे और इससे पहले हमारे बाप-दादा से होता आ रहा है। कुछ नहीं, यह तो बस अगलों की कहानियाँ है।
Verse 84 — Surah Al-Muminun 23:84
कहो, "यह धरती और जो भी इसमें आबाद है, वे किसके है, बताओ यदि तुम जानते हो
Verse 85 — Surah Al-Muminun 23:85
वे बोल पड़ेगे, "अल्लाह के!" कहो, "फिर तुम होश में क्यों नहीं आते
Verse 86 — Surah Al-Muminun 23:86
कहो, "सातों आकाशों का मालिक और महान राजासन का स्वामीकौन है
Verse 87 — Surah Al-Muminun 23:87
वे कहेंगे, "सब अल्लाह के है।" कहो, "फिर डर क्यों नहीं रखते
Verse 88 — Surah Al-Muminun 23:88
कहो, "हर चीज़ की बादशाही किसके हाथ में है, वह जो शरण देता है औऱ जिसके मुक़ाबले में कोई शरण नहीं मिल सकती, बताओ यजि तुम जानते हो
Verse 89 — Surah Al-Muminun 23:89
वे बोल पड़ेगे, "अल्लाह की।" कहो, "फिर कहाँ से तुमपर जादू चल जाता है
Verse 90 — Surah Al-Muminun 23:90
नहीं, बल्कि हम उनके पास सत्य लेकर आए है और निश्चय ही वे झूठे है
Verse 91 — Surah Al-Muminun 23:91
अल्लाह ने अपना कोई बेटा नहीं बनाया और न उसके साथ कोई अन्य पूज्य-प्रभु है। ऐसा होता तो प्रत्येक पूज्य-प्रभु अपनी सृष्टि को लेकर अलग हो जाता और उनमें से एक-दूसरे पर चढ़ाई कर देता। महान और उच्च है अल्लाह उन बातों से, जो वे बयान करते है
Verse 92 — Surah Al-Muminun 23:92
जाननेवाला है छुपे और खुले का। सो वह उच्चतर है वह शिर्क से जो वे करते है
Verse 93 — Surah Al-Muminun 23:93
कहो, "ऐ मेरे रब! जिस चीज़ का वादा उनसे किया जा रहा है, वह यदि तू मुझे दिखाए
Verse 94 — Surah Al-Muminun 23:94
तो मेरे रब! मुझे उन अत्याचारी लोगों में सम्मिलित न करना।
Verse 95 — Surah Al-Muminun 23:95
निश्चय ही हमें इसकी सामर्थ्य प्राप्त है कि हम उनसे जो वादा कर रहे है, वह तुम्हें दिखा दें।
Verse 96 — Surah Al-Muminun 23:96
बुराई को उस ढंग से दूर करो, जो सबसे उत्तम हो। हम भली-भाँति जानते है जो कुछ बातें वे बनाते है
Verse 97 — Surah Al-Muminun 23:97
और कहो, "ऐ मेरे रब! मैं शैतान की उकसाहटों से तेरी शरण चाहता हूँ
Verse 98 — Surah Al-Muminun 23:98
और मेरे रब! मैं इससे भी तेरी शरण चाहता हूँ कि वे मेरे पास आएँ।
Verse 99 — Surah Al-Muminun 23:99
यहाँ तक कि जब उनमें से किसी की मृत्यु आ गई तो वह कहेगा, "ऐ मेरे रब! मुझे लौटा दे। - ताकि जिस (संसार) को मैं छोड़ आया हूँ
Verse 100 — Surah Al-Muminun 23:100
उसमें अच्छा कर्म करूँ।" कुछ नहीं, यह तो बस एक (व्यर्थ) बात है जो वह कहेगा और उनके पीछे से लेकर उस दिन तक एक रोक लगी हुई है, जब वे दोबारा उठाए जाएँगे
Verse 101 — Surah Al-Muminun 23:101
फिर जब सूर (नरसिंघा) में फूँक मारी जाएगी तो उस दिन उनके बीच रिश्ते-नाते शेष न रहेंगे, और न वे एक-दूसरे को पूछेंगे
Verse 102 — Surah Al-Muminun 23:102
फिर जिनके पलड़े भारी हुए तॊ वही हैं जो सफल।
Verse 103 — Surah Al-Muminun 23:103
रहे वे लोग जिनके पलड़े हल्के हुए, तो वही है जिन्होंने अपने आपको घाटे में डाला। वे सदैव जहन्नम में रहेंगे
Verse 104 — Surah Al-Muminun 23:104
आग उनके चेहरों को झुलसा देगी और उसमें उनके मुँह विकृत हो रहे होंगे
Verse 105 — Surah Al-Muminun 23:105
(कहा जाएगा,) "क्या तुम्हें मेरी आयातें सुनाई नहीं जाती थी, तो तुम उन्हें झुठलाते थे
Verse 106 — Surah Al-Muminun 23:106
वे कहेंगे, "ऐ हमारे रब! हमारा दुर्भाग्य हमपर प्रभावी हुआ और हम भटके हुए लोग थे
Verse 107 — Surah Al-Muminun 23:107
हमारे रब! हमें यहाँ से निकाल दे! फिर हम दोबारा ऐसा करें तो निश्चय ही हम अत्याचारी होंगे।
Verse 108 — Surah Al-Muminun 23:108
वह कहेगा, "फिटकारे हुए तिरस्कृत, इसी में पड़े रहो और मुझसे बात न करो
Verse 109 — Surah Al-Muminun 23:109
मेरे बन्दों में कुछ लोग थे, जो कहते थे, हमारे रब! हम ईमान ले आए। अतः तू हमें क्षमा कर दे और हमपर दया कर। तू सबसे अच्छा दया करनेवाला है
Verse 110 — Surah Al-Muminun 23:110
तो तुमने उनका उपहास किया, यहाँ तक कि उनके कारण तुम मेरी याद को भुला बैठे और तुम उनपर हँसते रहे
Verse 111 — Surah Al-Muminun 23:111
आज मैंने उनके धैर्य का यह बदला प्रदान किया कि वही है जो सफलता को प्राप्त हुए।
Verse 112 — Surah Al-Muminun 23:112
वह कहेगाः “तुम धरती में कितने वर्ष रहे”
Verse 113 — Surah Al-Muminun 23:113
वॆ कहेंगेः , "एक दिन या एक दिन का कुछ भाग। गणना करनेवालों से पूछ लीजिए।
Verse 114 — Surah Al-Muminun 23:114
वह कहेगा, "तुम ठहरे थोड़े ही, क्या अच्छा होता तुम जानते होते
Verse 115 — Surah Al-Muminun 23:115
तो क्या तुमने यह समझा था कि हमने तुम्हें व्यर्थ पैदा किया है और यह कि तुम्हें हमारी और लौटना नहीं है
Verse 116 — Surah Al-Muminun 23:116
तो सर्वोच्च है अल्लाह, सच्चा सम्राट! उसके सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं, स्वामी है महिमाशाली सिंहासन का
Verse 117 — Surah Al-Muminun 23:117
और जो कोई अल्लाह के साथ किसी दूसरे पूज्य को पुकारे, जिसके लिए उसके पास कोई प्रमाम नहीं, तो बस उसका हिसाब उसके रब के पास है। निश्चय ही इनकार करनेवाले कभी सफल नहीं होगे
Verse 118 — Surah Al-Muminun 23:118
और कहो, "मेरे रब! मुझे क्षमा कर दे और दया कर। तू तो सबसे अच्छा दया करनेवाला है।