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Hindi - Chapter 44 - Ad-Dukhan

Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink

Verse 1 — Surah Ad-Dukhan 44:1

हा॰ मीम॰

Verse 2 — Surah Ad-Dukhan 44:2

गवाह है स्पष्ट किताब

Verse 3 — Surah Ad-Dukhan 44:3

निस्संदेह हमने उसे एक बरकत भरी रात में अवतरित किया है। - निश्चय ही हम सावधान करनेवाले है।

Verse 4 — Surah Ad-Dukhan 44:4

उस (रात) में तमाम तत्वदर्शिता युक्त मामलों का फ़ैसला किया जाता है

Verse 5 — Surah Ad-Dukhan 44:5

हमारे यहाँ से आदेश के रूप में। निस्संदेह रसूलों को भेजनेवाले हम ही है।

Verse 6 — Surah Ad-Dukhan 44:6

तुम्हारे रब की दयालुता के कारण। निस्संदेह वही सब कुछ सुननेवाला, जाननेवाला है

Verse 7 — Surah Ad-Dukhan 44:7

आकाशों और धरती का रब और जो कुछ उन दोनों के बीच है उसका भी, यदि तुम विश्वास रखनेवाले हो (तो विश्वास करो कि किताब का अवतरण अल्लाह की दयालुता है)

Verse 8 — Surah Ad-Dukhan 44:8

उसके अतिरिक्त कोई पूज्य-प्रभु नहीं; वही जीवित करता और मारता है; तुम्हारा रब और तुम्हारे अगले बाप-दादों का रब है

Verse 9 — Surah Ad-Dukhan 44:9

बल्कि वे संदेह में पड़े रहे हैं

Verse 10 — Surah Ad-Dukhan 44:10

अच्छा तो तुम उस दिन की प्रतीक्षा करो, जब आकाश प्रत्यक्ष धुँआ लाएगा।

Verse 11 — Surah Ad-Dukhan 44:11

वह लोगों का ढाँक लेगा। यह है दुखद यातना

Verse 12 — Surah Ad-Dukhan 44:12

वे कहेंगे, "ऐ हमारे रब! हमपर से यातना हटा दे। हम ईमान लाते है।

Verse 13 — Surah Ad-Dukhan 44:13

अब उनके होश में आने का मौक़ा कहाँ बाक़ी रहा। उनका हाल तो यह है कि उनके पास साफ़-साफ़ बतानेवाला एक रसूल आ चुका है।

Verse 14 — Surah Ad-Dukhan 44:14

फिर उन्होंने उसकी ओर से मुँह मोड़ लिया और कहने लगे, "यह तो एक सिखाया-पढ़ाया दीवाना है।

Verse 15 — Surah Ad-Dukhan 44:15

हम यातना थोड़ा हटा देते है तो तुम पुनः फिर जाते हो।

Verse 16 — Surah Ad-Dukhan 44:16

याद रखो, जिस दिन हम बड़ी पकड़ पकड़ेंगे, तो निश्चय ही हम बदला लेकर रहेंगे

Verse 17 — Surah Ad-Dukhan 44:17

उनसे पहले हम फ़िरऔन की क़ौम के लोगों को परीक्षा में डाल चुके हैं, जबकि उनके पास एक अत्यन्त सज्जन रसूल आया

Verse 18 — Surah Ad-Dukhan 44:18

कि "तुम अल्लाह के बन्दों को मेरे हवाले कर दो। निश्चय ही मै तुम्हारे लिए एक विश्वसनीय रसूल हूँ

Verse 19 — Surah Ad-Dukhan 44:19

और अल्लाह के मुक़ाबले में सरकशी न करो, मैं तुम्हारे लिए एक स्पष्ट प्रमाण लेकर आया हूँ

Verse 20 — Surah Ad-Dukhan 44:20

और मैं इससे अपने रब और तुम्हारे रब की शरण ले चुका हूँ कि तुम मुझ पर पथराव करके मार डालो

Verse 21 — Surah Ad-Dukhan 44:21

किन्तु यदि तुम मेरी बात नहीं मानते तो मुझसे अलग हो जाओ

Verse 22 — Surah Ad-Dukhan 44:22

अन्ततः उसने अपने रब को पुकारा कि "ये अपराधी लोग है।

Verse 23 — Surah Ad-Dukhan 44:23

अच्छा तुम रातों रात मेरे बन्दों को लेकर चले जाओ। निश्चय ही तुम्हारा पीछा किया जाएगा

Verse 24 — Surah Ad-Dukhan 44:24

और सागर को स्थिर छोड़ दो। वे तो एक सेना दल हैं, डूब जानेवाले।

Verse 25 — Surah Ad-Dukhan 44:25

वे छोड़ गये कितनॆ ही बाग़ और स्रोत

Verse 26 — Surah Ad-Dukhan 44:26

और ख़ेतियां और उत्तम आवास

Verse 27 — Surah Ad-Dukhan 44:27

और सुख सामग्री जिनमें वे मज़े कर रहे थे।

Verse 28 — Surah Ad-Dukhan 44:28

हम ऐसा ही मामला करते है, और उन चीज़ों का वारिस हमने दूसरे लोगों को बनाया

Verse 29 — Surah Ad-Dukhan 44:29

फिर न तो आकाश और धरती ने उनपर विलाप किया और न उन्हें मुहलत ही मिली

Verse 30 — Surah Ad-Dukhan 44:30

इस प्रकार हमने इसराईल की सन्तान को अपमानजनक यातना से

Verse 31 — Surah Ad-Dukhan 44:31

अर्थात फ़िरऔन से छुटकारा दिया। निश्चय ही वह मर्यादाहीन लोगों में से बड़ा ही सरकश था

Verse 32 — Surah Ad-Dukhan 44:32

और हमने (उनकी स्थिति को) जानते हुए उन्हें सारे संसारवालों के मुक़ाबले मं चुन लिया

Verse 33 — Surah Ad-Dukhan 44:33

और हमने उन्हें निशानियों के द्वारा वह चीज़ दी जिसमें स्पष्ट परीक्षा थी

Verse 34 — Surah Ad-Dukhan 44:34

ये लोग बड़ी दृढ़तापूर्वक कहते है

Verse 35 — Surah Ad-Dukhan 44:35

बस यह हमारी पहली मृत्यु ही है, हम दोबारा उठाए जानेवाले नहीं हैं

Verse 36 — Surah Ad-Dukhan 44:36

तो ले आओ हमारे बाप-दादा को, यदि तुम सच्चे हो

Verse 37 — Surah Ad-Dukhan 44:37

क्या वे अच्छे है या तुब्बा की क़ौम या वे लोग जो उनसे पहले गुज़र चुके है? हमने उन्हें विनष्ट कर दिया, निश्चय ही वे अपराधी थे

Verse 38 — Surah Ad-Dukhan 44:38

हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है उन्हें खेल नहीं बनाया

Verse 39 — Surah Ad-Dukhan 44:39

हमने उन्हें हक़ के साथ पैदा किया, किन्तु उनमें से अधिककर लोग जानते नहीं

Verse 40 — Surah Ad-Dukhan 44:40

निश्चय ही फ़ैसले का दिन उन सबका नियत समय है

Verse 41 — Surah Ad-Dukhan 44:41

जिस दिन कोई अपना किसी अपने के कुछ काम न आएगा और न कोई सहायता पहुँचेगी

Verse 42 — Surah Ad-Dukhan 44:42

सिवाय उस व्यक्ति के जिसपर अल्लाह दया करे। निश्चय ही वह प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है

Verse 43 — Surah Ad-Dukhan 44:43

निस्संदेह ज़क़्क़ूम का वृक्ष

Verse 44 — Surah Ad-Dukhan 44:44

गुनहगार का भोजन होगा

Verse 45 — Surah Ad-Dukhan 44:45

तेल की तलछट जैसा, वह पेटों में खौलता होगा

Verse 46 — Surah Ad-Dukhan 44:46

जैसे गर्म पानी खौलता है

Verse 47 — Surah Ad-Dukhan 44:47

पकड़ो उसे, और भड़कती हुई आग के बीच तक घसीट ले जाओ

Verse 48 — Surah Ad-Dukhan 44:48

फिर उसके सिर पर खौलते हुए पानी का यातना उंडेल दो

Verse 49 — Surah Ad-Dukhan 44:49

मज़ा चख, तू तो बड़ा बलशाली, सज्जन और आदरणीय है

Verse 50 — Surah Ad-Dukhan 44:50

यही तो है जिसके विषय में तुम संदेह करते थे।

Verse 51 — Surah Ad-Dukhan 44:51

निस्संदेह डर रखनेवाले निश्चिन्तता की जगह होंगे

Verse 52 — Surah Ad-Dukhan 44:52

बाग़ों और स्रोतों में

Verse 53 — Surah Ad-Dukhan 44:53

बारीक और गाढ़े रेशम के वस्त्र पहने हुए, एक-दूसरे के आमने-सामने उपस्थित होंगे

Verse 54 — Surah Ad-Dukhan 44:54

ऐसा ही उनके साथ मामला होगा। और हम साफ़ गोरी, बड़ी नेत्रोवाली स्त्रियों से उनका विवाह कर देंगे

Verse 55 — Surah Ad-Dukhan 44:55

वे वहाँ निश्चिन्तता के साथ हर प्रकार के स्वादिष्ट फल मँगवाते होंगे

Verse 56 — Surah Ad-Dukhan 44:56

वहाँ वे मृत्यु का मज़ा कभी न चखेगे। बस पहली मृत्यु जो हुई, सो हुई। और उसने उन्हें भड़कती हुई आग की यातना से बचा लिया

Verse 57 — Surah Ad-Dukhan 44:57

यह सब तुम्हारे रब के विशेष उदार अनुग्रह के कारण होगा, वही बड़ी सफलता है

Verse 58 — Surah Ad-Dukhan 44:58

हमने तो इस (क़ुरआन) को बस तुम्हारी भाषा में सहज एवं सुगम बना दिया है ताकि वे याददिहानी प्राप्त (करें)

Verse 59 — Surah Ad-Dukhan 44:59

अच्छा तुम भी प्रतीक्षा करो, वे भी प्रतीक्षा में हैं