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Hindi - Chapter 66 - At-Tahrim

Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink

Verse 4 — Surah At-Tahrim 66:4

यदि तुम दोनों अल्लाह की ओर रुजू हो तो तुम्हारे दिल तो झुक ही चुके हैं, किन्तु यदि तुम उसके विरुद्ध एक-दूसरे की सहायता करोगी तो अल्लाह उसकी संरक्षक है, और जिबरील और नेक ईमानवाले भी, और इसके बाद फ़रिश्ते भी उसके सहायक है