Back to Languages

Hindi - Chapter 74 - Al-Muddaththir

Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink

Verse 1 — Surah Al-Muddaththir 74:1

ऐ ओढ़ने लपेटनेवाले

Verse 2 — Surah Al-Muddaththir 74:2

उठो, और सावधान करने में लग जाओ

Verse 3 — Surah Al-Muddaththir 74:3

और अपने रब की बड़ाई ही करो

Verse 4 — Surah Al-Muddaththir 74:4

अपने दामन को पाक रखो

Verse 5 — Surah Al-Muddaththir 74:5

और गन्दगी से दूर ही रहो

Verse 6 — Surah Al-Muddaththir 74:6

अपनी कोशिशों को अधिक समझकर उसके क्रम को भंग न करो

Verse 7 — Surah Al-Muddaththir 74:7

और अपने रब के लिए धैर्य ही से काम लो

Verse 8 — Surah Al-Muddaththir 74:8

जब सूर में फूँक मारी जाएगी

Verse 9 — Surah Al-Muddaththir 74:9

तो जिस दिन ऐसा होगा, वह दिन बड़ा ही कठोर होगा

Verse 10 — Surah Al-Muddaththir 74:10

इनकार करनेवालो पर आसान न होगा

Verse 11 — Surah Al-Muddaththir 74:11

छोड़ दो मुझे और उसको जिसे मैंने अकेला पैदा किया

Verse 12 — Surah Al-Muddaththir 74:12

और उसे माल दिया दूर तक फैला हुआ

Verse 13 — Surah Al-Muddaththir 74:13

और उसके पास उपस्थित रहनेवाले बेटे दिए

Verse 14 — Surah Al-Muddaththir 74:14

और मैंने उसके लिए अच्छी तरह जीवन-मार्ग समतल किया

Verse 15 — Surah Al-Muddaththir 74:15

फिर वह लोभ रखता है कि मैं उसके लिए और अधिक दूँगा

Verse 16 — Surah Al-Muddaththir 74:16

कदापि नहीं, वह हमारी आयतों का दुश्मन है

Verse 17 — Surah Al-Muddaththir 74:17

शीघ्र ही मैं उसे घेरकर कठिन चढ़ाई चढ़वाऊँगा

Verse 18 — Surah Al-Muddaththir 74:18

उसने सोचा और अटकल से एक बात बनाई

Verse 19 — Surah Al-Muddaththir 74:19

तो विनष्ट हो, कैसी बात बनाई

Verse 20 — Surah Al-Muddaththir 74:20

फिर विनष्ट हो, कैसी बात बनाई

Verse 21 — Surah Al-Muddaththir 74:21

फिर नज़र दौड़ाई

Verse 22 — Surah Al-Muddaththir 74:22

फिर त्योरी चढ़ाई और मुँह बनाया

Verse 23 — Surah Al-Muddaththir 74:23

फिर पीठ फेरी और घमंड किया

Verse 24 — Surah Al-Muddaththir 74:24

अन्ततः बोला, "यह तो बस एक जादू है, जो पहले से चला आ रहा है

Verse 25 — Surah Al-Muddaththir 74:25

यह तो मात्र मनुष्य की वाणी है।

Verse 26 — Surah Al-Muddaththir 74:26

मैं शीघ्र ही उसे 'सक़र' (जहन्नम की आग) में झोंक दूँगा

Verse 27 — Surah Al-Muddaththir 74:27

और तुम्हें क्या पता की सक़र क्या है

Verse 28 — Surah Al-Muddaththir 74:28

वह न तरस खाएगी और न छोड़ेगी

Verse 29 — Surah Al-Muddaththir 74:29

खाल को झुलसा देनेवाली है

Verse 30 — Surah Al-Muddaththir 74:30

उसपर उन्नीस (कार्यकर्ता) नियुक्त है

Verse 31 — Surah Al-Muddaththir 74:31

और हमने उस आग पर नियुक्त रहनेवालों को फ़रिश्ते ही बनाया है, और हमने उनकी संख्या को इनकार करनेवालों के लिए मुसीबत और आज़माइश ही बनाकर रखा है। ताकि वे लोग जिन्हें किताब प्रदान की गई थी पूर्ण विश्वास प्राप्त करें, और वे लोग जो ईमान ले आए वे ईमान में और आगे बढ़ जाएँ। और जिन लोगों को किताब प्रदान की गई वे और ईमानवाले किसी संशय मे न पड़े, और ताकि जिनके दिलों मे रोग है वे और इनकार करनेवाले कहें, "इस वर्णन से अल्लाह का क्या अभिप्राय है?" इस प्रकार अल्लाह जिसे चाहता है पथभ्रष्ट कर देता है और जिसे चाहता हैं संमार्ग प्रदान करता है। और तुम्हारे रब की सेनाओं को स्वयं उसके सिवा कोई नहीं जानता, और यह तो मनुष्य के लिए मात्र एक शिक्षा-सामग्री है

Verse 32 — Surah Al-Muddaththir 74:32

कुछ नहीं, साक्षी है चाँद

Verse 33 — Surah Al-Muddaththir 74:33

और साक्षी है रात जबकि वह पीठ फेर चुकी

Verse 34 — Surah Al-Muddaththir 74:34

और प्रातःकाल जबकि वह पूर्णरूपेण प्रकाशित हो जाए।

Verse 35 — Surah Al-Muddaththir 74:35

निश्चय ही वह भारी (भयंकर) चीज़ों में से एक है

Verse 36 — Surah Al-Muddaththir 74:36

मनुष्यों के लिए सावधानकर्ता के रूप में

Verse 37 — Surah Al-Muddaththir 74:37

तुममें से उस व्यक्ति के लिए जो आगे बढ़ना या पीछे हटना चाहे

Verse 38 — Surah Al-Muddaththir 74:38

प्रत्येक व्यक्ति जो कुछ उसने कमाया उसके बदले रेहन (गिरवी) है

Verse 39 — Surah Al-Muddaththir 74:39

सिवाय दाएँवालों के

Verse 40 — Surah Al-Muddaththir 74:40

वे बाग़ों में होंगे, पूछ-ताछ कर रहे होंगे

Verse 41 — Surah Al-Muddaththir 74:41

अपराधियों के विषय में

Verse 42 — Surah Al-Muddaththir 74:42

तुम्हे क्या चीज़ सकंर (जहन्नम) में ले आई

Verse 43 — Surah Al-Muddaththir 74:43

वे कहेंगे, "हम नमाज़ अदा करनेवालों में से न थे।

Verse 44 — Surah Al-Muddaththir 74:44

और न हम मुहताज को खाना खिलाते थे

Verse 45 — Surah Al-Muddaththir 74:45

और व्यर्थ बात और कठ-हुज्जती में पड़े रहनेवालों के साथ हम भी उसी में लगे रहते थे।

Verse 46 — Surah Al-Muddaththir 74:46

और हम बदला दिए जाने के दिन को झुठलाते थे

Verse 47 — Surah Al-Muddaththir 74:47

यहाँ तक कि विश्वसनीय चीज़ (प्रलय-दिवस) में हमें आ लिया।

Verse 48 — Surah Al-Muddaththir 74:48

अतः सिफ़ारिश करनेवालों को कोई सिफ़ारिश उनको कुछ लाभ न पहुँचा सकेगी

Verse 49 — Surah Al-Muddaththir 74:49

आख़िर उन्हें क्या हुआ है कि वे नसीहत से कतराते है

Verse 50 — Surah Al-Muddaththir 74:50

मानो वे बिदके हुए जंगली गधे है

Verse 51 — Surah Al-Muddaththir 74:51

जो शेर से (डरकर) भागे है

Verse 52 — Surah Al-Muddaththir 74:52

नहीं, बल्कि उनमें से प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसे खुली किताबें दी जाएँ

Verse 53 — Surah Al-Muddaththir 74:53

कदापि नहीं, बल्कि ले आख़िरत से डरते नहीं

Verse 54 — Surah Al-Muddaththir 74:54

कुछ नहीं, वह तो एक अनुस्मति है

Verse 55 — Surah Al-Muddaththir 74:55

अब जो कोई चाहे इससे नसीहत हासिल करे

Verse 56 — Surah Al-Muddaththir 74:56

और वे नसीहत हासिल नहीं करेंगे। यह और बात है कि अल्लाह ही ऐसा चाहे। वही इस योग्य है कि उसका डर रखा जाए और इस योग्य भी कि क्षमा करे