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Hindi - Chapter 37 - As-Saffat

Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink

Verse 1 — Surah As-Saffat 37:1

(इबादत या जिहाद में) पर बाँधने वालों की (क़सम)

Verse 2 — Surah As-Saffat 37:2

फिर (बदों को बुराई से) झिड़क कर डाँटने वाले की (क़सम)

Verse 3 — Surah As-Saffat 37:3

फिर कुरान पढ़ने वालों की क़सम है

Verse 4 — Surah As-Saffat 37:4

तुम्हारा माबूद (यक़ीनी) एक ही है

Verse 5 — Surah As-Saffat 37:5

जो सारे आसमान ज़मीन का और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है (सबका) परवरदिगार है

Verse 6 — Surah As-Saffat 37:6

और (चाँद सूरज तारे के) तुलूउ व (गुरूब) के मक़ामात का भी मालिक है हम ही ने नीचे वाले आसमान को तारों की आरइश (जगमगाहट) से आरास्ता किया

Verse 7 — Surah As-Saffat 37:7

और (तारों को) हर सरकश शैतान से हिफ़ाज़त के वास्ते (भी पैदा किया)

Verse 8 — Surah As-Saffat 37:8

कि अब शैतान आलमे बाला की तरफ़ कान भी नहीं लगा सकते और (जहाँ सुन गुन लेना चाहा तो) हर तरफ़ से खदेड़ने के लिए शहाब फेके जाते हैं

Verse 9 — Surah As-Saffat 37:9

और उनके लिए पाएदार अज़ाब है

Verse 10 — Surah As-Saffat 37:10

मगर जो (शैतान शाज़ व नादिर फरिश्तों की) कोई बात उचक ले भागता है तो आग का दहकता हुआ तीर उसका पीछा करता है

Verse 11 — Surah As-Saffat 37:11

तो (ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि उनका पैदा करना ज्यादा दुश्वार है या उन (मज़कूरा) चीज़ों का जिनको हमने पैदा किया हमने तो उन लोगों को लसदार मिट्टी से पैदा किया

Verse 12 — Surah As-Saffat 37:12

बल्कि तुम (उन कुफ्फ़ार के इन्कार पर) ताज्जुब करते हो और वह लोग (तुमसे) मसख़रापन करते हैं

Verse 13 — Surah As-Saffat 37:13

और जब उन्हें समझाया जाता है तो समझते नहीं हैं

Verse 14 — Surah As-Saffat 37:14

और जब किसी मौजिजे क़ो देखते हैं तो (उससे) मसख़रापन करते हैं

Verse 15 — Surah As-Saffat 37:15

और कहते हैं कि ये तो बस खुला हुआ जादू है

Verse 16 — Surah As-Saffat 37:16

भला जब हम मर जाएँगे और ख़ाक और हड्डियाँ रह जाएँगे

Verse 17 — Surah As-Saffat 37:17

तो क्या हम या हमारे अगले बाप दादा फिर दोबारा क़ब्रों से उठा खड़े किए जाँएगे

Verse 18 — Surah As-Saffat 37:18

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ (ज़रूर उठाए जाओगे)

Verse 19 — Surah As-Saffat 37:19

और तुम ज़लील होगे और वह (क़यामत) तो एक ललकार होगी फिर तो वह लोग फ़ौरन ही (ऑंखे फाड़-फाड़ के) देखने लगेंगे

Verse 20 — Surah As-Saffat 37:20

और कहेंगे हाए अफसोस ये तो क़यामत का दिन है

Verse 21 — Surah As-Saffat 37:21

(जवाब आएगा) ये वही फैसले का दिन है जिसको तुम लोग (दुनिया में) झूठ समझते थे

Verse 22 — Surah As-Saffat 37:22

(और फ़रिश्तों को हुक्म होगा कि) जो लोग (दुनिया में) सरकशी करते थे उनको और उनके साथियों को और खुदा को छोड़कर जिनकी परसतिश करते हैं

Verse 23 — Surah As-Saffat 37:23

उनको (सबको) इकट्ठा करो फिर उन्हें जहन्नुम की राह दिखाओ

Verse 24 — Surah As-Saffat 37:24

और (हाँ ज़रा) उन्हें ठहराओ तो उनसे कुछ पूछना है

Verse 25 — Surah As-Saffat 37:25

(अरे कमबख्तों) अब तुम्हें क्या होगा कि एक दूसरे की मदद नहीं करते

Verse 26 — Surah As-Saffat 37:26

(जवाब क्या देंगे) बल्कि वह तो आज गर्दन झुकाए हुए हैं

Verse 27 — Surah As-Saffat 37:27

और एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे होकर बाहम पूछताछ करेंगे

Verse 28 — Surah As-Saffat 37:28

(और इन्सान शयातीन से) कहेंगे कि तुम ही तो हमारी दाहिनी तरफ से (हमें बहकाने को) चढ़ आते थे

Verse 29 — Surah As-Saffat 37:29

वह जवाब देगें (हम क्या जानें) तुम तो खुद ईमान लाने वाले न थे

Verse 30 — Surah As-Saffat 37:30

और (साफ़ तो ये है कि) हमारी तुम पर कुछ हुकूमत तो थी नहीं बल्कि तुम खुद सरकश लोग थे

Verse 31 — Surah As-Saffat 37:31

फिर अब तो लोगों पर हमारे परवरदिगार का (अज़ाब का) क़ौल पूरा हो गया कि अब हम सब यक़ीनन अज़ाब का मज़ा चखेंगे

Verse 32 — Surah As-Saffat 37:32

हम खुद गुमराह थे तो तुम को भी गुमराह किया

Verse 33 — Surah As-Saffat 37:33

ग़रज़ ये लोग सब के सब उस दिन अज़ाब में शरीक होगें

Verse 34 — Surah As-Saffat 37:34

और हम तो गुनाहगारों के साथ यूँ ही किया करते हैं ये लोग ऐसे (शरीर) थे

Verse 35 — Surah As-Saffat 37:35

कि जब उनसे कहा जाता था कि खुदा के सिवा कोई माबूद नहीं तो अकड़ा करते थे

Verse 36 — Surah As-Saffat 37:36

और ये लोग कहते थे कि क्या एक पागल शायर के लिए हम अपने माबूदों को छोड़ बैठें (अरे कम्बख्तों ये शायर या पागल नहीं)

Verse 37 — Surah As-Saffat 37:37

बल्कि ये तो हक़ बात लेकर आया है और (अगले) पैग़म्बरों की तसदीक़ करता है

Verse 38 — Surah As-Saffat 37:38

तुम लोग (अगर न मानोगे) तो ज़रूर दर्दनाक अज़ाब का मज़ा चखोगे

Verse 39 — Surah As-Saffat 37:39

और तुम्हें तो उसके किये का बदला दिया जाएगा जो (जो दुनिया में) करते रहे

Verse 40 — Surah As-Saffat 37:40

मगर खुदा के बरगुजीदा बन्दे

Verse 41 — Surah As-Saffat 37:41

उनके वास्ते (बेहिश्त में) एक मुक़र्रर रोज़ी होगी

Verse 42 — Surah As-Saffat 37:42

(और वह भी ऐसी वैसी नहीं) हर क़िस्म के मेवे

Verse 43 — Surah As-Saffat 37:43

और वह लोग बड़ी इज्ज़त से नेअमत के (लदे हुए)

Verse 44 — Surah As-Saffat 37:44

बाग़ों में तख्तों पर (चैन से) आमने सामने बैठे होगे

Verse 45 — Surah As-Saffat 37:45

उनमें साफ सफेद बुर्राक़ शराब के जाम का दौर चल रहा होगा

Verse 46 — Surah As-Saffat 37:46

जो पीने वालों को बड़ा मज़ा देगी

Verse 47 — Surah As-Saffat 37:47

(और फिर) न उस शराब में ख़ुमार की वजह से) दर्द सर होगा और न वह उस (के पीने) से मतवाले होंगे

Verse 48 — Surah As-Saffat 37:48

और उनके पहलू में (शर्म से) नीची निगाहें करने वाली बड़ी बड़ी ऑंखों वाली परियाँ होगी

Verse 49 — Surah As-Saffat 37:49

(उनकी) गोरी-गोरी रंगतों में हल्की सी सुर्ख़ी ऐसी झलकती होगी

Verse 50 — Surah As-Saffat 37:50

गोया वह अन्डे हैं जो छिपाए हुए रखे हो

Verse 51 — Surah As-Saffat 37:51

फिर एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे पाकर बाहम बातचीत करते करते उनमें से एक कहने वाला बोल उठेगा कि (दुनिया में) मेरा एक दोस्त था

Verse 52 — Surah As-Saffat 37:52

और (मुझसे) कहा करता था कि क्या तुम भी क़यामत की तसदीक़ करने वालों में हो

Verse 53 — Surah As-Saffat 37:53

(भला जब हम मर जाएँगे) और (सड़ गल कर) मिट्टी और हव्ी (होकर) रह जाएँगे तो क्या हमको दोबारा ज़िन्दा करके हमारे (आमाल का) बदला दिया जाएगा

Verse 54 — Surah As-Saffat 37:54

फिर अपने बेहश्त के साथियों से कहेगा

Verse 55 — Surah As-Saffat 37:55

तो क्या तुम लोग भी (मेरे साथ उसे झांक कर देखोगे) ग़रज़ झाँका तो उसे बीच जहन्नुम में (पड़ा हुआ) देखा

Verse 56 — Surah As-Saffat 37:56

(ये देख कर बेसाख्ता) बोल उठेगा कि खुदा की क़सम तुम तो मुझे भी तबाह करने ही को थे

Verse 57 — Surah As-Saffat 37:57

और अगर मेरे परवरदिगार का एहसान न होता तो मैं भी (इस वक्त) तेरी तरह जहन्नुम में गिरफ्तार किया गया होता

Verse 58 — Surah As-Saffat 37:58

(अब बताओ) क्या (मैं तुम से न कहता था) कि हम को इस पहली मौत के सिवा फिर मरना नहीं है

Verse 59 — Surah As-Saffat 37:59

और न हम पर (आख़ेरत) में अज़ाब होगा

Verse 60 — Surah As-Saffat 37:60

(तो तुम्हें यक़ीन न होता था) ये यक़ीनी बहुत बड़ी कामयाबी है

Verse 61 — Surah As-Saffat 37:61

ऐसी (ही कामयाबी) के वास्ते काम करने वालों को कारगुज़ारी करनी चाहिए

Verse 62 — Surah As-Saffat 37:62

भला मेहमानी के वास्ते ये (सामान) बेहतर है या थोहड़ का दरख्त (जो जहन्नुमियों के वास्ते होगा)

Verse 63 — Surah As-Saffat 37:63

जिसे हमने यक़ीनन ज़ालिमों की आज़माइश के लिए बनाया है

Verse 64 — Surah As-Saffat 37:64

ये वह दरख्त हैं जो जहन्नुम की तह में उगता है

Verse 65 — Surah As-Saffat 37:65

उसके फल ऐसे (बदनुमा) हैं गोया (हू बहू) साँप के फन जिसे छूते दिल डरे

Verse 66 — Surah As-Saffat 37:66

फिर ये (जहन्नुमी लोग) यक़ीनन उसमें से खाएँगे फिर उसी से अपने पेट भरेंगे

Verse 67 — Surah As-Saffat 37:67

फिर उसके ऊपर से उन को खूब खौलता हुआ पानी (पीप वग़ैरह में) मिला मिलाकर पीने को दिया जाएगा

Verse 68 — Surah As-Saffat 37:68

फिर (खा पीकर) उनको जहन्नुम की तरफ यक़ीनन लौट जाना होगा

Verse 69 — Surah As-Saffat 37:69

उन लोगों ने अपन बाप दादा को गुमराह पाया था

Verse 70 — Surah As-Saffat 37:70

ये लोग भी उनके पीछे दौड़े चले जा रहे हैं

Verse 71 — Surah As-Saffat 37:71

और उनके क़ब्ल अगलों में से बहुतेरे गुमराह हो चुके

Verse 72 — Surah As-Saffat 37:72

उन लोगों के डराने वाले (पैग़म्बरों) को भेजा था

Verse 73 — Surah As-Saffat 37:73

ज़रा देखो तो कि जो लोग डराए जा चुके थे उनका क्या बुरा अन्जाम हुआ

Verse 74 — Surah As-Saffat 37:74

मगर (हाँ) खुदा के निरे खरे बन्दे (महफूज़ रहे)

Verse 75 — Surah As-Saffat 37:75

और नूह ने (अपनी कौम से मायूस होकर) हमें ज़रूर पुकारा था (देखो हम) क्या खूब जवाब देने वाले थे

Verse 76 — Surah As-Saffat 37:76

और हमने उनको और उनके लड़के वालों को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी

Verse 77 — Surah As-Saffat 37:77

और हमने (उनमें वह बरकत दी कि) उनकी औलाद को (दुनिया में) बरक़रार रखा

Verse 78 — Surah As-Saffat 37:78

और बाद को आने वाले लोगों में उनका अच्छा चर्चा बाक़ी रखा

Verse 79 — Surah As-Saffat 37:79

कि सारी खुदायी में (हर तरफ से) नूह पर सलाम है

Verse 80 — Surah As-Saffat 37:80

हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं

Verse 81 — Surah As-Saffat 37:81

इसमें शक नहीं कि नूह हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों से थे

Verse 82 — Surah As-Saffat 37:82

फिर हमने बाक़ी लोगों को डुबो दिया

Verse 83 — Surah As-Saffat 37:83

और यक़ीनन उन्हीं के तरीक़ो पर चलने वालों में इबराहीम (भी) ज़रूर थे

Verse 84 — Surah As-Saffat 37:84

जब वह अपने परवरदिगार (कि इबादत) की तरफ (पहलू में) ऐसा दिल लिए हुए बढ़े जो (हर ऐब से पाक था)

Verse 85 — Surah As-Saffat 37:85

जब उन्होंने अपने (मुँह बोले) बाप और अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग किस चीज़ की परसतिश करते हो

Verse 86 — Surah As-Saffat 37:86

क्या खुदा को छोड़कर दिल से गढ़े हुए माबूदों की तमन्ना रखते हो

Verse 87 — Surah As-Saffat 37:87

फिर सारी खुदाई के पालने वाले के साथ तुम्हारा क्या ख्याल है

Verse 88 — Surah As-Saffat 37:88

फिर (एक ईद में उन लोगों ने चलने को कहा) तो इबराहीम ने सितारों की तरफ़ एक नज़र देखा

Verse 89 — Surah As-Saffat 37:89

और कहा कि मैं (अनक़रीब) बीमार पड़ने वाला हूँ

Verse 90 — Surah As-Saffat 37:90

तो वह लोग इबराहीम के पास से पीठ फेर फेर कर हट गए

Verse 91 — Surah As-Saffat 37:91

(बस) फिर तो इबराहीम चुपके से उनके बुतों की तरफ मुतावज्जे हुए और (तान से) कहा तुम्हारे सामने इतने चढ़ाव रखते हैं

Verse 92 — Surah As-Saffat 37:92

आख़िर तुम खाते क्यों नहीं (अरे तुम्हें क्या हो गया है)

Verse 93 — Surah As-Saffat 37:93

कि तुम बोलते तक नहीं

Verse 94 — Surah As-Saffat 37:94

फिर तो इबराहीम दाहिने हाथ से मारते हुए उन पर पिल पड़े (और तोड़-फोड़ कर एक बड़े बुत के गले में कुल्हाड़ी डाल दी)

Verse 95 — Surah As-Saffat 37:95

जब उन लोगों को ख़बर हुई तो इबराहीम के पास दौड़ते हुए पहुँचे

Verse 96 — Surah As-Saffat 37:96

इबराहीम ने कहा (अफ़सोस) तुम लोग उसकी परसतिश करते हो जिसे तुम लोग खुद तराश कर बनाते हो

Verse 97 — Surah As-Saffat 37:97

हालाँकि तुमको और जिसको तुम लोग बनाते हो (सबको) खुदा ही ने पैदा किया है (ये सुनकर) वह लोग (आपस में कहने लगे) इसके लिए (भट्टी की सी) एक इमारत बनाओ

Verse 98 — Surah As-Saffat 37:98

और (उसमें आग सुलगा कर उसी दहकती हुई आग में इसको डाल दो) फिर उन लोगों ने इबराहीम के साथ मक्कारी करनी चाही

Verse 99 — Surah As-Saffat 37:99

तो हमने (आग सर्द गुलज़ार करके) उन्हें नीचा दिखाया और जब (आज़र ने) इबराहीम को निकाल दिया तो बोले मैं अपने परवरदिगार की तरफ जाता हूँ

Verse 100 — Surah As-Saffat 37:100

वह अनक़रीब ही मुझे रूबरा कर देगा (फिर ग़रज की) परवरदिगार मुझे एक नेको कार (फरज़न्द) इनायत फरमा

Verse 101 — Surah As-Saffat 37:101

तो हमने उनको एक बड़े नरम दिले लड़के (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी

Verse 102 — Surah As-Saffat 37:102

फिर जब इस्माईल अपने बाप के साथ दौड़ धूप करने लगा तो (एक दफा) इबराहीम ने कहा बेटा खूब मैं (वही के ज़रिये क्या) देखता हूँ कि मैं तो खुद तुम्हें ज़िबाह कर रहा हूँ तो तुम भी ग़ौर करो तुम्हारी इसमें क्या राय है इसमाईल ने कहा अब्बा जान जो आपको हुक्म हुआ है उसको (बे तअम्मुल) कीजिए अगर खुदा ने चाहा तो मुझे आप सब्र करने वालों में से पाएगे

Verse 103 — Surah As-Saffat 37:103

फिर जब दोनों ने ये ठान ली और बाप ने बेटे को (ज़िबाह करने के लिए) माथे के बल लिटाया

Verse 104 — Surah As-Saffat 37:104

और हमने (आमादा देखकर) आवाज़ दी ऐ इबराहीम

Verse 105 — Surah As-Saffat 37:105

तुमने अपने ख्वाब को सच कर दिखाया अब तुम दोनों को बड़े मरतबे मिलेगें हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर देते हैं

Verse 106 — Surah As-Saffat 37:106

इसमें शक नहीं कि ये यक़ीनी बड़ा सख्त और सरीही इम्तिहान था

Verse 107 — Surah As-Saffat 37:107

और हमने इस्माईल का फ़िदया एक ज़िबाहे अज़ीम (बड़ी कुर्बानी) क़रार दिया

Verse 108 — Surah As-Saffat 37:108

और हमने उनका अच्छा चर्चा बाद को आने वालों में बाक़ी रखा है

Verse 109 — Surah As-Saffat 37:109

कि (सारी खुदायी में) इबराहीम पर सलाम (ही सलाम) हैं

Verse 110 — Surah As-Saffat 37:110

हम यूँ नेकी करने वालों को जज़ाए ख़ैर देते हैं

Verse 111 — Surah As-Saffat 37:111

बेशक इबराहीम हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों में थे

Verse 112 — Surah As-Saffat 37:112

और हमने इबराहीम को इसहाक़ (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी थी

Verse 113 — Surah As-Saffat 37:113

जो एक नेकोसार नबी थे और हमने खुद इबराहीम पर और इसहाक़ पर अपनी बरकत नाज़िल की और इन दोनों की नस्ल में बाज़ तो नेकोकार और बाज़ (नाफरमानी करके) अपनी जान पर सरीही सितम ढ़ाने वाला

Verse 114 — Surah As-Saffat 37:114

और हमने मूसा और हारून पर बहुत से एहसानात किए हैं

Verse 115 — Surah As-Saffat 37:115

और खुद दोनों को और इनकी क़ौम को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी

Verse 116 — Surah As-Saffat 37:116

और (फिरऔन के मुक़ाबले में) हमने उनकी मदद की तो (आख़िर) यही लोग ग़ालिब रहे

Verse 117 — Surah As-Saffat 37:117

और हमने उन दोनों को एक वाज़ेए उलम तालिब किताब (तौरेत) अता की

Verse 118 — Surah As-Saffat 37:118

और दोनों को सीधी राह की हिदायत फ़रमाई

Verse 119 — Surah As-Saffat 37:119

और बाद को आने वालों में उनका ज़िक्रे ख़ैर बाक़ी रखा

Verse 120 — Surah As-Saffat 37:120

कि (हर जगह) मूसा और हारून पर सलाम (ही सलाम) है

Verse 121 — Surah As-Saffat 37:121

हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं

Verse 122 — Surah As-Saffat 37:122

बेशक ये दोनों हमारे (ख़ालिस ईमानदार बन्दों में से थे)

Verse 123 — Surah As-Saffat 37:123

और इसमें शक नहीं कि इलियास यक़ीनन पैग़म्बरों में से थे

Verse 124 — Surah As-Saffat 37:124

जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते

Verse 125 — Surah As-Saffat 37:125

क्या तुम लोग बाल (बुत) की परसतिश करते हो और खुदा को छोड़े बैठे हो जो सबसे बेहतर पैदा करने वाला है

Verse 126 — Surah As-Saffat 37:126

और (जो) तुम्हारा परवरदिगार और तुम्हारे अगले बाप दादाओं का (भी) परवरदिगार है

Verse 127 — Surah As-Saffat 37:127

तो उसे लोगों ने झुठला दिया तो ये लोग यक़ीनन (जहन्नुम) में गिरफ्तार किए जाएँगे

Verse 128 — Surah As-Saffat 37:128

मगर खुदा के निरे खरे बन्दे महफूज़ रहेंगे

Verse 129 — Surah As-Saffat 37:129

और हमने उनका ज़िक्र ख़ैर बाद को आने वालों में बाक़ी रखा

Verse 130 — Surah As-Saffat 37:130

कि (हर तरफ से) आले यासीन पर सलाम (ही सलाम) है

Verse 131 — Surah As-Saffat 37:131

हम यक़ीनन नेकी करने वालों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं

Verse 132 — Surah As-Saffat 37:132

बेशक वह हमारे (ख़ालिस) ईमानदार बन्दों में थे

Verse 133 — Surah As-Saffat 37:133

और इसमें भी शक नहीं कि लूत यक़ीनी पैग़म्बरों में से थे

Verse 134 — Surah As-Saffat 37:134

जब हमने उनको और उनके लड़के वालों सब को नजात दी

Verse 135 — Surah As-Saffat 37:135

मगर एक (उनकी) बूढ़ी बीबी जो पीछे रह जाने वालों ही में थीं

Verse 136 — Surah As-Saffat 37:136

फिर हमने बाक़ी लोगों को तबाह व बर्बाद कर दिया

Verse 137 — Surah As-Saffat 37:137

और ऐ अहले मक्का तुम लोग भी उन पर से (कभी) सुबह को और (कभी) शाम को (आते जाते गुज़रते हो)

Verse 138 — Surah As-Saffat 37:138

तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते

Verse 139 — Surah As-Saffat 37:139

और इसमें शक नहीं कि यूनुस (भी) पैग़म्बरों में से थे

Verse 140 — Surah As-Saffat 37:140

(वह वक्त याद करो) जब यूनुस भाग कर एक भरी हुई कश्ती के पास पहुँचे

Verse 141 — Surah As-Saffat 37:141

तो (अहले कश्ती ने) कुरआ डाला तो (उनका ही नाम निकला) यूनुस ने ज़क उठायी (और दरिया में गिर पड़े)

Verse 142 — Surah As-Saffat 37:142

तो उनको एक मछली निगल गयी और यूनुस खुद (अपनी) मलामत कर रहे थे

Verse 143 — Surah As-Saffat 37:143

फिर अगर यूनुस (खुदा की) तसबीह (व ज़िक्र) न करते

Verse 144 — Surah As-Saffat 37:144

तो रोज़े क़यामत तक मछली के पेट में रहते

Verse 145 — Surah As-Saffat 37:145

फिर हमने उनको (मछली के पेट से निकाल कर) एक खुले मैदान में डाल दिया

Verse 146 — Surah As-Saffat 37:146

और (वह थोड़ी देर में) बीमार निढाल हो गए थे और हमने उन पर साये के लिए एक कद्दू का दरख्त उगा दिया

Verse 147 — Surah As-Saffat 37:147

और (इसके बाद) हमने एक लाख बल्कि (एक हिसाब से) ज्यादा आदमियों की तरफ (पैग़म्बर बना कर भेजा)

Verse 148 — Surah As-Saffat 37:148

तो वह लोग (उन पर) ईमान लाए फिर हमने (भी) एक ख़ास वक्त तक उनको चैन से रखा

Verse 149 — Surah As-Saffat 37:149

तो (ऐ रसूल) उन कुफ्फ़ार से पूछो कि क्या तुम्हारे परवरदिगार के लिए बेटियाँ हैं और उनके लिए बेटे

Verse 150 — Surah As-Saffat 37:150

(क्या वाक़ई) हमने फरिश्तों की औरतें बनाया है और ये लोग (उस वक्त) मौजूद थे

Verse 151 — Surah As-Saffat 37:151

ख़बरदार (याद रखो कि) ये लोग यक़ीनन अपने दिल से गढ़-गढ़ के कहते हैं कि खुदा औलाद वाला है

Verse 152 — Surah As-Saffat 37:152

और ये लोग यक़ीनी झूठे हैं

Verse 153 — Surah As-Saffat 37:153

क्या खुदा ने (अपने लिए) बेटियों को बेटों पर तरजीह दी है

Verse 154 — Surah As-Saffat 37:154

(अरे कम्बख्तों) तुम्हें क्या जुनून हो गया है तुम लोग (बैठे-बैठे) कैसा फैसला करते हो

Verse 155 — Surah As-Saffat 37:155

तो क्या तुम (इतना भी) ग़ौर नहीं करते

Verse 156 — Surah As-Saffat 37:156

या तुम्हारे पास (इसकी) कोई वाज़ेए व रौशन दलील है

Verse 157 — Surah As-Saffat 37:157

तो अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो अपनी किताब पेश करो

Verse 158 — Surah As-Saffat 37:158

और उन लोगों ने खुदा और जिन्नात के दरमियान रिश्ता नाता मुक़र्रर किया है हालाँकि जिन्नात बखूबी जानते हैं कि वह लोग यक़ीनी (क़यामत में बन्दों की तरह) हाज़िर किए जाएँगे

Verse 159 — Surah As-Saffat 37:159

ये लोग जो बातें बनाया करते हैं इनसे खुदा पाक साफ़ है

Verse 160 — Surah As-Saffat 37:160

मगर खुदा के निरे खरे बन्दे (ऐसा नहीं कहते)

Verse 161 — Surah As-Saffat 37:161

ग़रज़ तुम लोग खुद और तुम्हारे माबूद

Verse 162 — Surah As-Saffat 37:162

उसके ख़िलाफ (किसी को) बहका नहीं सकते

Verse 163 — Surah As-Saffat 37:163

मगर उसको जो जहन्नुम में झोंका जाने वाला है

Verse 164 — Surah As-Saffat 37:164

और फरिश्ते या आइम्मा तो ये कहते हैं कि मैं हर एक का एक दरजा मुक़र्रर है

Verse 165 — Surah As-Saffat 37:165

और हम तो यक़ीनन (उसकी इबादत के लिए) सफ बाँधे खड़े रहते हैं

Verse 166 — Surah As-Saffat 37:166

और हम तो यक़ीनी (उसकी) तस्बीह पढ़ा करते हैं

Verse 167 — Surah As-Saffat 37:167

अगरचे ये कुफ्फार (इस्लाम के क़ब्ल) कहा करते थे

Verse 168 — Surah As-Saffat 37:168

कि अगर हमारे पास भी अगले लोगों का तज़किरा (किसी किताबे खुदा में) होता

Verse 169 — Surah As-Saffat 37:169

तो हम भी खुदा के निरे खरे बन्दे ज़रूर हो जाते

Verse 170 — Surah As-Saffat 37:170

(मगर जब किताब आयी) तो उन लोगों ने उससे इन्कार किया ख़ैर अनक़रीब (उसका नतीजा) उन्हें मालूम हो जाएगा

Verse 171 — Surah As-Saffat 37:171

और अपने ख़ास बन्दों पैग़म्बरों से हमारी बात पक्की हो चुकी है

Verse 172 — Surah As-Saffat 37:172

कि इन लोगों की (हमारी बारगाह से) यक़ीनी मदद की जाएगी

Verse 173 — Surah As-Saffat 37:173

और हमारा लश्कर तो यक़ीनन ग़ालिब रहेगा

Verse 174 — Surah As-Saffat 37:174

तो (ऐ रसूल) तुम उनसे एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो

Verse 175 — Surah As-Saffat 37:175

और इनको देखते रहो तो ये लोग अनक़रीब ही (अपना नतीजा) देख लेगे

Verse 176 — Surah As-Saffat 37:176

तो क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी कर रहे हैं

Verse 177 — Surah As-Saffat 37:177

फिर जब (अज़ाब) उनकी अंगनाई में उतर पडेग़ा तो जो लोग डराए जा चुके हैं उनकी भी क्या बुरी सुबह होगी

Verse 178 — Surah As-Saffat 37:178

और उन लोगों से एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो

Verse 179 — Surah As-Saffat 37:179

और देखते रहो ये लोग तो खुद अनक़रीब ही अपना अन्जाम देख लेगें

Verse 180 — Surah As-Saffat 37:180

ये लोग जो बातें (खुदा के बारे में) बनाया करते हैं उनसे तुम्हारा परवरदिगार इज्ज़त का मालिक पाक साफ है

Verse 181 — Surah As-Saffat 37:181

और पैग़म्बरों पर (दुरूद) सलाम हो

Verse 182 — Surah As-Saffat 37:182

और कुल तारीफ खुदा ही के लिए सज़ावार हैं जो सारे जहाँन का पालने वाला है