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Hindi - Chapter 53 - An-Najm

Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink

Verse 1 — Surah An-Najm 53:1

तारे की क़सम जब टूटा

Verse 2 — Surah An-Najm 53:2

कि तुम्हारे रफ़ीक़ (मोहम्मद) न गुमराह हुए और न बहके

Verse 3 — Surah An-Najm 53:3

और वह तो अपनी नफ़सियानी ख्वाहिश से कुछ भी नहीं कहते

Verse 4 — Surah An-Najm 53:4

ये तो बस वही है जो भेजी जाती है

Verse 5 — Surah An-Najm 53:5

इनको निहायत ताक़तवर (फ़रिश्ते जिबरील) ने तालीम दी है

Verse 6 — Surah An-Najm 53:6

जो बड़ा ज़बरदस्त है और जब ये (आसमान के) ऊँचे (मुशरक़ो) किनारे पर था तो वह अपनी (असली सूरत में) सीधा खड़ा हुआ

Verse 7 — Surah An-Najm 53:7

फिर करीब हो (और आगे) बढ़ा

Verse 8 — Surah An-Najm 53:8

(फिर जिबरील व मोहम्मद में) दो कमान का फ़ासला रह गया

Verse 9 — Surah An-Najm 53:9

बल्कि इससे भी क़रीब था

Verse 10 — Surah An-Najm 53:10

ख़ुदा ने अपने बन्दे की तरफ जो 'वही' भेजी सो भेजी

Verse 11 — Surah An-Najm 53:11

तो जो कुछ उन्होने देखा उनके दिल ने झूठ न जाना

Verse 12 — Surah An-Najm 53:12

तो क्या वह (रसूल) जो कुछ देखता है तुम लोग उसमें झगड़ते हो

Verse 13 — Surah An-Najm 53:13

और उन्होने तो उस (जिबरील) को एक बार (शबे मेराज) और देखा है

Verse 14 — Surah An-Najm 53:14

सिदरतुल मुनतहा के नज़दीक

Verse 15 — Surah An-Najm 53:15

उसी के पास तो रहने की बेहिश्त है

Verse 16 — Surah An-Najm 53:16

जब छा रहा था सिदरा पर जो छा रहा था

Verse 17 — Surah An-Najm 53:17

(उस वक्त भी) उनकी ऑंख न तो और तरफ़ माएल हुई और न हद से आगे बढ़ी

Verse 18 — Surah An-Najm 53:18

और उन्होने यक़ीनन अपने परवरदिगार (की क़ुदरत) की बड़ी बड़ी निशानियाँ देखीं

Verse 19 — Surah An-Najm 53:19

तो भला तुम लोगों ने लात व उज्ज़ा और तीसरे पिछले मनात को देखा

Verse 20 — Surah An-Najm 53:20

भला ये ख़ुदा हो सकते हैं

Verse 21 — Surah An-Najm 53:21

क्या तुम्हारे तो बेटे हैं और उसके लिए बेटियाँ

Verse 22 — Surah An-Najm 53:22

ये तो बहुत बेइन्साफ़ी की तक़सीम है

Verse 23 — Surah An-Najm 53:23

ये तो बस सिर्फ नाम ही नाम है जो तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने गढ़ लिए हैं, ख़ुदा ने तो इसकी कोई सनद नाज़िल नहीं की ये लोग तो बस अटकल और अपनी नफ़सानी ख्वाहिश के पीछे चल रहे हैं हालॉकि उनके पास उनके परवरदिगार की तरफ से हिदायत भी आ चुकी है

Verse 24 — Surah An-Najm 53:24

क्या जिस चीज़ की इन्सान तमन्ना करे वह उसे ज़रूर मिलती है

Verse 25 — Surah An-Najm 53:25

आख़ेरत और दुनिया तो ख़ास ख़ुदा ही के एख्तेयार में हैं

Verse 26 — Surah An-Najm 53:26

और आसमानों में बहुत से फरिश्ते हैं जिनकी सिफ़ारिश कुछ भी काम न आती, मगर ख़ुदा जिसके लिए चाहे इजाज़त दे दे और पसन्द करे उसके बाद (सिफ़ारिश कर सकते हैं)

Verse 27 — Surah An-Najm 53:27

जो लोग आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते वह फ़रिश्तों के नाम रखते हैं औरतों के से नाम हालॉकि उन्हें इसकी कुछ ख़बर नहीं

Verse 28 — Surah An-Najm 53:28

वह लोग तो बस गुमान (ख्याल) के पीछे चल रहे हैं, हालॉकि गुमान यक़ीन के बदले में कुछ भी काम नहीं आया करता

Verse 29 — Surah An-Najm 53:29

तो जो हमारी याद से रदगिरदानी करे ओर सिर्फ दुनिया की ज़िन्दगी ही का तालिब हो तुम भी उससे मुँह फेर लो

Verse 30 — Surah An-Najm 53:30

उनके इल्म की यही इन्तिहा है तुम्हारा परवरदिगार, जो उसके रास्ते से भटक गया उसको भी ख़ूब जानता है, और जो राहे रास्त पर है उनसे भी ख़ूब वाक़िफ है

Verse 31 — Surah An-Najm 53:31

और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है, ताकि जिन लोगों ने बुराई की हो उनको उनकी कारस्तानियों की सज़ा दे और जिन लोगों ने नेकी की है (उनकी नेकी की जज़ा दे)

Verse 32 — Surah An-Najm 53:32

जो सग़ीरा गुनाहों के सिवा कबीरा गुनाहों से और बेहयाई की बातों से बचे रहते हैं बेशक तुम्हारा परवरदिगार बड़ी बख्यिश वाला है वही तुमको ख़ूब जानता है जब उसने तुमको मिटटी से पैदा किया और जब तुम अपनी माँ के पेट में बच्चे थे तो (तकब्बुर) से अपने नफ्स की पाकीज़गी न जताया करो जो परहेज़गार है उसको वह ख़ूब जानता है

Verse 33 — Surah An-Najm 53:33

भला (ऐ रसूल) तुमने उस शख़्श को भी देखा जिसने रदगिरदानी की

Verse 34 — Surah An-Najm 53:34

और थोड़ा सा (ख़ुदा की राह में) दिया और फिर बन्द कर दिया

Verse 35 — Surah An-Najm 53:35

क्या उसके पास इल्मे ग़ैब है कि वह देख रहा है

Verse 36 — Surah An-Najm 53:36

क्या उसको उन बातों की ख़बर नहीं पहुँची जो मूसा के सहीफ़ों में है

Verse 37 — Surah An-Najm 53:37

और इबराहीम के (सहीफ़ों में)

Verse 38 — Surah An-Najm 53:38

जिन्होने (अपना हक़) (पूरा अदा) किया इन सहीफ़ों में ये है, कि कोई शख़्श दूसरे (के गुनाह) का बोझ नहीं उठाएगा

Verse 39 — Surah An-Najm 53:39

और ये कि इन्सान को वही मिलता है जिसकी वह कोशिश करता है

Verse 40 — Surah An-Najm 53:40

और ये कि उनकी कोशिश अनक़रीेब ही (क़यामत में) देखी जाएगी

Verse 41 — Surah An-Najm 53:41

फिर उसका पूरा पूरा बदला दिया जाएगा

Verse 42 — Surah An-Najm 53:42

और ये कि (सबको आख़िर) तुम्हारे परवरदिगार ही के पास पहुँचना है

Verse 43 — Surah An-Najm 53:43

और ये कि वही हँसाता और रूलाता है

Verse 44 — Surah An-Najm 53:44

और ये कि वही मारता और जिलाता है

Verse 45 — Surah An-Najm 53:45

और ये कि वही नर और मादा दो किस्म (के हैवान) नुत्फे से जब (रहम में) डाला जाता है

Verse 46 — Surah An-Najm 53:46

पैदा करता है

Verse 47 — Surah An-Najm 53:47

और ये कि उसी पर (कयामत में) दोबारा उठाना लाज़िम है

Verse 48 — Surah An-Najm 53:48

और ये कि वही मालदार बनाता है और सरमाया अता करता है

Verse 49 — Surah An-Najm 53:49

और ये कि वही योअराए का मालिक है

Verse 50 — Surah An-Najm 53:50

और ये कि उसी ने पहले (क़ौमे) आद को हलाक किया

Verse 51 — Surah An-Najm 53:51

और समूद को भी ग़रज़ किसी को बाक़ी न छोड़ा

Verse 52 — Surah An-Najm 53:52

और (उसके) पहले नूह की क़ौम को बेशक ये लोग बड़े ही ज़ालिम और बड़े ही सरकश थे

Verse 53 — Surah An-Najm 53:53

और उसी ने (क़ौमे लूत की) उलटी हुई बस्तियों को दे पटका

Verse 54 — Surah An-Najm 53:54

(फिर उन पर) जो छाया सो छाया

Verse 55 — Surah An-Najm 53:55

तो तू (ऐ इन्सान आख़िर) अपने परवरदिगार की कौन सी नेअमत पर शक़ किया करेगा

Verse 56 — Surah An-Najm 53:56

ये (मोहम्मद भी अगले डराने वाले पैग़म्बरों में से एक डरने वाला) पैग़म्बर है

Verse 57 — Surah An-Najm 53:57

कयामत क़रीब आ गयी

Verse 58 — Surah An-Najm 53:58

ख़ुदा के सिवा उसे कोई टाल नहीं सकता

Verse 59 — Surah An-Najm 53:59

तो क्या तुम लोग इस बात से ताज्जुब करते हो और हँसते हो

Verse 60 — Surah An-Najm 53:60

और रोते नहीं हो

Verse 61 — Surah An-Najm 53:61

और तुम इस क़दर ग़ाफ़िल हो तो ख़ुदा के आगे सजदे किया करो

Verse 62 — Surah An-Najm 53:62

और (उसी की) इबादत किया करो (62) सजदा