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Hindi - Chapter 56 - Al-Waqiah

Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink

Verse 1 — Surah Al-Waqiah 56:1

जब क़यामत बरपा होगी और उसके वाक़िया होने में ज़रा झूट नहीं

Verse 2 — Surah Al-Waqiah 56:2

उस वक्त लोगों में फ़र्क ज़ाहिर होगा

Verse 3 — Surah Al-Waqiah 56:3

कि किसी को पस्त करेगी किसी को बुलन्द

Verse 4 — Surah Al-Waqiah 56:4

जब ज़मीन बड़े ज़ोरों में हिलने लगेगी

Verse 5 — Surah Al-Waqiah 56:5

और पहाड़ (टकरा कर) बिल्कुल चूर चूर हो जाएँगे

Verse 6 — Surah Al-Waqiah 56:6

फिर ज़र्रे बन कर उड़ने लगेंगे

Verse 7 — Surah Al-Waqiah 56:7

और तुम लोग तीन किस्म हो जाओगे

Verse 8 — Surah Al-Waqiah 56:8

तो दाहिने हाथ (में आमाल नामा लेने) वाले (वाह) दाहिने हाथ वाले क्या (चैन में) हैं

Verse 9 — Surah Al-Waqiah 56:9

और बाएं हाथ (में आमाल नामा लेने) वाले (अफ़सोस) बाएं हाथ वाले क्या (मुसीबत में) हैं

Verse 10 — Surah Al-Waqiah 56:10

और जो आगे बढ़ जाने वाले हैं (वाह क्या कहना) वह आगे ही बढ़ने वाले थे

Verse 11 — Surah Al-Waqiah 56:11

यही लोग (ख़ुदा के) मुक़र्रिब हैं

Verse 12 — Surah Al-Waqiah 56:12

आराम व आसाइश के बाग़ों में बहुत से

Verse 13 — Surah Al-Waqiah 56:13

तो अगले लोगों में से होंगे

Verse 14 — Surah Al-Waqiah 56:14

और कुछ थोडे से पिछले लोगों में से मोती

Verse 15 — Surah Al-Waqiah 56:15

और याक़ूत से जड़े हुए सोने के तारों से बने हुए

Verse 16 — Surah Al-Waqiah 56:16

तख्ते पर एक दूसरे के सामने तकिए लगाए (बैठे) होंगे

Verse 17 — Surah Al-Waqiah 56:17

नौजवान लड़के जो (बेहिश्त में) हमेशा (लड़के ही बने) रहेंगे

Verse 18 — Surah Al-Waqiah 56:18

(शरबत वग़ैरह के) सागर और चमकदार टोंटीदार कंटर और शफ्फ़ाफ़ शराब के जाम लिए हुए उनके पास चक्कर लगाते होंगे

Verse 19 — Surah Al-Waqiah 56:19

जिसके (पीने) से न तो उनको (ख़ुमार से) दर्दसर होगा और न वह बदहवास मदहोश होंगे

Verse 20 — Surah Al-Waqiah 56:20

और जिस क़िस्म के मेवे पसन्द करें

Verse 21 — Surah Al-Waqiah 56:21

और जिस क़िस्म के परिन्दे का गोश्त उनका जी चाहे (सब मौजूद है)

Verse 22 — Surah Al-Waqiah 56:22

और बड़ी बड़ी ऑंखों वाली हूरें

Verse 23 — Surah Al-Waqiah 56:23

जैसे एहतेयात से रखे हुए मोती

Verse 24 — Surah Al-Waqiah 56:24

ये बदला है उनके (नेक) आमाल का

Verse 25 — Surah Al-Waqiah 56:25

वहाँ न तो बेहूदा बात सुनेंगे और न गुनाह की बात

Verse 26 — Surah Al-Waqiah 56:26

(फहश) बस उनका कलाम सलाम ही सलाम होगा

Verse 27 — Surah Al-Waqiah 56:27

और दाहिने हाथ वाले (वाह) दाहिने हाथ वालों का क्या कहना है

Verse 28 — Surah Al-Waqiah 56:28

बे काँटे की बेरो और लदे गुथे हुए

Verse 29 — Surah Al-Waqiah 56:29

केलों और लम्बी लम्बी छाँव

Verse 30 — Surah Al-Waqiah 56:30

और झरनो के पानी

Verse 31 — Surah Al-Waqiah 56:31

और अनारों

Verse 32 — Surah Al-Waqiah 56:32

मेवो में होंगें

Verse 33 — Surah Al-Waqiah 56:33

जो न कभी खत्म होंगे और न उनकी कोई रोक टोक

Verse 34 — Surah Al-Waqiah 56:34

और ऊँचे ऊँचे (नरम गद्दो के) फ़र्शों में (मज़े करते) होंगे

Verse 35 — Surah Al-Waqiah 56:35

(उनको) वह हूरें मिलेंगी जिसको हमने नित नया पैदा किया है

Verse 36 — Surah Al-Waqiah 56:36

तो हमने उन्हें कुँवारियाँ प्यारी प्यारी हमजोलियाँ बनाया

Verse 37 — Surah Al-Waqiah 56:37

ये सब सामान

Verse 38 — Surah Al-Waqiah 56:38

दाहिने हाथ (में नामए आमाल लेने) वालों के वास्ते है

Verse 39 — Surah Al-Waqiah 56:39

(इनमें) बहुत से तो अगले लोगों में से

Verse 40 — Surah Al-Waqiah 56:40

और बहुत से पिछले लोगों में से

Verse 41 — Surah Al-Waqiah 56:41

और बाएं हाथ (में नामए आमाल लेने) वाले (अफसोस) बाएं हाथ वाले क्या (मुसीबत में) हैं

Verse 42 — Surah Al-Waqiah 56:42

(दोज़ख़ की) लौ और खौलते हुए पानी

Verse 43 — Surah Al-Waqiah 56:43

और काले सियाह धुएँ के साये में होंगे

Verse 44 — Surah Al-Waqiah 56:44

जो न ठन्डा और न ख़ुश आइन्द

Verse 45 — Surah Al-Waqiah 56:45

ये लोग इससे पहले (दुनिया में) ख़ूब ऐश उड़ा चुके थे

Verse 46 — Surah Al-Waqiah 56:46

और बड़े गुनाह (शिर्क) पर अड़े रहते थे

Verse 47 — Surah Al-Waqiah 56:47

और कहा करते थे कि भला जब हम मर जाएँगे और (सड़ गल कर) मिटटी और हडिडयाँ (ही हडिडयाँ) रह जाएँगे

Verse 48 — Surah Al-Waqiah 56:48

तो क्या हमें या हमारे अगले बाप दादाओं को फिर उठना है

Verse 49 — Surah Al-Waqiah 56:49

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगले और पिछले

Verse 50 — Surah Al-Waqiah 56:50

सब के सब रोजे मुअय्यन की मियाद पर ज़रूर इकट्ठे किए जाएँगे

Verse 51 — Surah Al-Waqiah 56:51

फिर तुमको बेशक ऐ गुमराहों झुठलाने वालों

Verse 52 — Surah Al-Waqiah 56:52

यक़ीनन (जहन्नुम में) थोहड़ के दरख्तों में से खाना होगा

Verse 53 — Surah Al-Waqiah 56:53

तो तुम लोगों को उसी से (अपना) पेट भरना होगा

Verse 54 — Surah Al-Waqiah 56:54

फिर उसके ऊपर खौलता हुआ पानी पीना होगा

Verse 55 — Surah Al-Waqiah 56:55

और पियोगे भी तो प्यासे ऊँट का सा (डग डगा के) पीना

Verse 56 — Surah Al-Waqiah 56:56

क़यामत के दिन यही उनकी मेहमानी होगी

Verse 57 — Surah Al-Waqiah 56:57

तुम लोगों को (पहली बार भी) हम ही ने पैदा किया है

Verse 58 — Surah Al-Waqiah 56:58

फिर तुम लोग (दोबार की) क्यों नहीं तस्दीक़ करते

Verse 59 — Surah Al-Waqiah 56:59

तो जिस नुत्फे क़ो तुम (औरतों के रहम में डालते हो) क्या तुमने देख भाल लिया है क्या तुम उससे आदमी बनाते हो या हम बनाते हैं

Verse 60 — Surah Al-Waqiah 56:60

हमने तुम लोगों में मौत को मुक़र्रर कर दिया है और हम उससे आजिज़ नहीं हैं

Verse 61 — Surah Al-Waqiah 56:61

कि तुम्हारे ऐसे और लोग बदल डालें और तुम लोगों को इस (सूरत) में पैदा करें जिसे तुम मुत्तलक़ नहीं जानते

Verse 62 — Surah Al-Waqiah 56:62

और तुमने पैहली पैदाइश तो समझ ही ली है (कि हमने की) फिर तुम ग़ौर क्यों नहीं करते

Verse 63 — Surah Al-Waqiah 56:63

भला देखो तो कि जो कुछ तुम लोग बोते हो क्या

Verse 64 — Surah Al-Waqiah 56:64

तुम लोग उसे उगाते हो या हम उगाते हैं अगर हम चाहते

Verse 65 — Surah Al-Waqiah 56:65

तो उसे चूर चूर कर देते तो तुम बातें ही बनाते रह जाते

Verse 66 — Surah Al-Waqiah 56:66

कि (हाए) हम तो (मुफ्त) तावान में फॅसे (नहीं)

Verse 67 — Surah Al-Waqiah 56:67

हम तो बदनसीब हैं

Verse 68 — Surah Al-Waqiah 56:68

तो क्या तुमने पानी पर भी नज़र डाली जो (दिन रात) पीते हो

Verse 69 — Surah Al-Waqiah 56:69

क्या उसको बादल से तुमने बरसाया है या हम बरसाते हैं

Verse 70 — Surah Al-Waqiah 56:70

अगर हम चाहें तो उसे खारी बना दें तो तुम लोग यक्र क्यों नहीं करते

Verse 71 — Surah Al-Waqiah 56:71

तो क्या तुमने आग पर भी ग़ौर किया जिसे तुम लोग लकड़ी से निकालते हो

Verse 72 — Surah Al-Waqiah 56:72

क्या उसके दरख्त को तुमने पैदा किया या हम पैदा करते हैं

Verse 73 — Surah Al-Waqiah 56:73

हमने आग को (जहन्नुम की) याद देहानी और मुसाफिरों के नफे के (वास्ते पैदा किया)

Verse 74 — Surah Al-Waqiah 56:74

तो (ऐ रसूल) तुम अपने बुज़ुर्ग परवरदिगार की तस्बीह करो

Verse 75 — Surah Al-Waqiah 56:75

तो मैं तारों के मनाज़िल की क़सम खाता हूँ

Verse 76 — Surah Al-Waqiah 56:76

और अगर तुम समझो तो ये बड़ी क़सम है

Verse 77 — Surah Al-Waqiah 56:77

कि बेशक ये बड़े रूतबे का क़ुरान है

Verse 78 — Surah Al-Waqiah 56:78

जो किताब (लौहे महफूज़) में (लिखा हुआ) है

Verse 79 — Surah Al-Waqiah 56:79

इसको बस वही लोग छूते हैं जो पाक हैं

Verse 80 — Surah Al-Waqiah 56:80

सारे जहाँ के परवरदिगार की तरफ से (मोहम्मद पर) नाज़िल हुआ है

Verse 81 — Surah Al-Waqiah 56:81

तो क्या तुम लोग इस कलाम से इन्कार रखते हो

Verse 82 — Surah Al-Waqiah 56:82

और तुमने अपनी रोज़ी ये करार दे ली है कि (उसको) झुठलाते हो

Verse 83 — Surah Al-Waqiah 56:83

तो क्या जब जान गले तक पहुँचती है

Verse 84 — Surah Al-Waqiah 56:84

और तुम उस वक्त (क़ी हालत) पड़े देखा करते हो

Verse 85 — Surah Al-Waqiah 56:85

और हम इस (मरने वाले) से तुमसे भी ज्यादा नज़दीक होते हैं लेकिन तुमको दिखाई नहीं देता

Verse 86 — Surah Al-Waqiah 56:86

तो अगर तुम किसी के दबाव में नहीं हो

Verse 87 — Surah Al-Waqiah 56:87

तो अगर (अपने दावे में) तुम सच्चे हो तो रूह को फेर क्यों नहीं देते

Verse 88 — Surah Al-Waqiah 56:88

पस अगर वह (मरने वाला ख़ुदा के) मुक़र्रेबीन से है

Verse 89 — Surah Al-Waqiah 56:89

तो (उस के लिए) आराम व आसाइश है और ख़ुशबूदार फूल और नेअमत के बाग़

Verse 90 — Surah Al-Waqiah 56:90

और अगर वह दाहिने हाथ वालों में से है

Verse 91 — Surah Al-Waqiah 56:91

तो (उससे कहा जाएगा कि) तुम पर दाहिने हाथ वालों की तरफ़ से सलाम हो

Verse 92 — Surah Al-Waqiah 56:92

और अगर झुठलाने वाले गुमराहों में से है

Verse 93 — Surah Al-Waqiah 56:93

तो (उसकी) मेहमानी खौलता हुआ पानी है

Verse 94 — Surah Al-Waqiah 56:94

और जहन्नुम में दाखिल कर देना

Verse 95 — Surah Al-Waqiah 56:95

बेशक ये (ख़बर) यक़ीनन सही है

Verse 96 — Surah Al-Waqiah 56:96

तो (ऐ रसूल) तुम अपने बुज़ुर्ग परवरदिगार की तस्बीह करो