Back to LanguagesPrevious ChapterNext Chapter
Hindi - Chapter 68 - Al-Qalam
Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink
Verse 1 — Surah Al-Qalam 68:1
नून क़लम की और उस चीज़ की जो लिखती हैं (उसकी) क़सम है
Verse 2 — Surah Al-Qalam 68:2
कि तुम अपने परवरदिगार के फ़ज़ल (व करम) से दीवाने नहीं हो
Verse 3 — Surah Al-Qalam 68:3
और तुम्हारे वास्ते यक़ीनन वह अज्र है जो कभी ख़त्म ही न होगा
Verse 4 — Surah Al-Qalam 68:4
और बेशक तुम्हारे एख़लाक़ बड़े आला दर्जे के हैं
Verse 5 — Surah Al-Qalam 68:5
तो अनक़रीब ही तुम भी देखोगे और ये कुफ्फ़ार भी देख लेंगे
Verse 6 — Surah Al-Qalam 68:6
कि तुममें दीवाना कौन है
Verse 7 — Surah Al-Qalam 68:7
बेशक तुम्हारा परवरदिगार इनसे ख़ूब वाक़िफ़ है जो उसकी राह से भटके हुए हैं और वही हिदायत याफ्ता लोगों को भी ख़ूब जानता है
Verse 8 — Surah Al-Qalam 68:8
तो तुम झुठलाने वालों का कहना न मानना
Verse 9 — Surah Al-Qalam 68:9
वह लोग ये चाहते हैं कि अगर तुम नरमी एख्तेयार करो तो वह भी नरम हो जाएँ
Verse 10 — Surah Al-Qalam 68:10
और तुम (कहीं) ऐसे के कहने में न आना जो बहुत क़समें खाता ज़लील औक़ात ऐबजू
Verse 11 — Surah Al-Qalam 68:11
जो आला दर्जे का चुग़लख़ोर माल का बहुत बख़ील
Verse 12 — Surah Al-Qalam 68:12
हद से बढ़ने वाला गुनेहगार तुन्द मिजाज़
Verse 13 — Surah Al-Qalam 68:13
और उसके अलावा बदज़ात (हरमज़ादा) भी है
Verse 14 — Surah Al-Qalam 68:14
चूँकि माल बहुत से बेटे रखता है
Verse 15 — Surah Al-Qalam 68:15
जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं तो बोल उठता है कि ये तो अगलों के अफ़साने हैं
Verse 16 — Surah Al-Qalam 68:16
हम अनक़रीब इसकी नाक पर दाग़ लगाएँगे
Verse 17 — Surah Al-Qalam 68:17
जिस तरह हमने एक बाग़ वालों का इम्तेहान लिया था उसी तरह उनका इम्तेहान लिया जब उन्होने क़समें खा खाकर कहा कि सुबह होते हम उसका मेवा ज़रूर तोड़ डालेंगे
Verse 18 — Surah Al-Qalam 68:18
और इन्शाअल्लाह न कहा
Verse 19 — Surah Al-Qalam 68:19
तो ये लोग पड़े सो ही रहे थे कि तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (रातों रात) एक बला चक्कर लगा गयी
Verse 20 — Surah Al-Qalam 68:20
तो वह (सारा बाग़ जलकर) ऐसा हो गया जैसे बहुत काली रात
Verse 21 — Surah Al-Qalam 68:21
फिर ये लोग नूर के तड़के लगे बाहम गुल मचाने
Verse 22 — Surah Al-Qalam 68:22
कि अगर तुमको फल तोड़ना है तो अपने बाग़ में सवेरे से चलो
Verse 23 — Surah Al-Qalam 68:23
ग़रज़ वह लोग चले और आपस में चुपके चुपके कहते जाते थे
Verse 24 — Surah Al-Qalam 68:24
कि आज यहाँ तुम्हारे पास कोई फ़क़ीर न आने पाए
Verse 25 — Surah Al-Qalam 68:25
तो वह लोग रोक थाम के एहतमाम के साथ फल तोड़ने की ठाने हुए सवेरे ही जा पहुँचे
Verse 26 — Surah Al-Qalam 68:26
फिर जब उसे (जला हुआ सियाह) देखा तो कहने लगे हम लोग भटक गए
Verse 27 — Surah Al-Qalam 68:27
(ये हमारा बाग़ नहीं फिर ये सोचकर बोले) बात ये है कि हम लोग बड़े बदनसीब हैं
Verse 28 — Surah Al-Qalam 68:28
जो उनमें से मुनसिफ़ मिजाज़ था कहने लगा क्यों मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम लोग (ख़ुदा की) तसबीह क्यों नहीं करते
Verse 29 — Surah Al-Qalam 68:29
वह बोले हमारा परवरदिगार पाक है बेशक हमीं ही कुसूरवार हैं
Verse 30 — Surah Al-Qalam 68:30
फिर लगे एक दूसरे के मुँह दर मुँह मलामत करने
Verse 31 — Surah Al-Qalam 68:31
(आख़िर) सबने इक़रार किया कि हाए अफसोस बेशक हम ही ख़ुद सरकश थे
Verse 32 — Surah Al-Qalam 68:32
उम्मीद है कि हमारा परवरदिगार हमें इससे बेहतर बाग़ इनायत फ़रमाए हम अपने परवरदिगार की तरफ रूजू करते हैं
Verse 33 — Surah Al-Qalam 68:33
(देखो) यूँ अज़ाब होता है और आख़ेरत का अज़ाब तो इससे कहीं बढ़ कर है अगर ये लोग समझते हों
Verse 34 — Surah Al-Qalam 68:34
बेशक परहेज़गार लोग अपने परवरदिगार के यहाँ ऐशो आराम के बाग़ों में होंगे
Verse 35 — Surah Al-Qalam 68:35
तो क्या हम फरमाबरदारों को नाफ़रमानो के बराबर कर देंगे
Verse 36 — Surah Al-Qalam 68:36
(हरगिज़ नहीं) तुम्हें क्या हो गया है तुम तुम कैसा हुक्म लगाते हो
Verse 37 — Surah Al-Qalam 68:37
या तुम्हारे पास कोई ईमानी किताब है जिसमें तुम पढ़ लेते हो
Verse 38 — Surah Al-Qalam 68:38
कि जो चीज़ पसन्द करोगे तुम को वहाँ ज़रूर मिलेगी
Verse 39 — Surah Al-Qalam 68:39
या तुमने हमसे क़समें ले रखी हैं जो रोज़े क़यामत तक चली जाएगी कि जो कुछ तुम हुक्म दोगे वही तुम्हारे लिए ज़रूर हाज़िर होगा
Verse 40 — Surah Al-Qalam 68:40
उनसे पूछो तो कि उनमें इसका कौन ज़िम्मेदार है
Verse 41 — Surah Al-Qalam 68:41
या (इस बाब में) उनके और लोग भी शरीक हैं तो अगर ये लोग सच्चे हैं तो अपने शरीकों को सामने लाएँ
Verse 42 — Surah Al-Qalam 68:42
जिस दिन पिंडली खोल दी जाए और (काफ़िर) लोग सजदे के लिए बुलाए जाएँगे तो (सजदा) न कर सकेंगे
Verse 43 — Surah Al-Qalam 68:43
उनकी ऑंखें झुकी हुई होंगी रूसवाई उन पर छाई होगी और (दुनिया में) ये लोग सजदे के लिए बुलाए जाते और हटटे कटटे तन्दरूस्त थे
Verse 44 — Surah Al-Qalam 68:44
तो मुझे उस कलाम के झुठलाने वाले से समझ लेने दो हम उनको आहिस्ता आहिस्ता इस तरह पकड़ लेंगे कि उनको ख़बर भी न होगी
Verse 45 — Surah Al-Qalam 68:45
और मैं उनको मोहलत दिये जाता हूँ बेशक मेरी तदबीर मज़बूत है
Verse 46 — Surah Al-Qalam 68:46
(ऐ रसूल) क्या तुम उनसे (तबलीग़े रिसालत का) कुछ सिला माँगते हो कि उन पर तावान का बोझ पड़ रहा है
Verse 47 — Surah Al-Qalam 68:47
या उनके इस ग़ैब (की ख़बर) है कि ये लोग लिख लिया करते हैं
Verse 48 — Surah Al-Qalam 68:48
तो तुम अपने परवरदिगार के हुक्म के इन्तेज़ार में सब्र करो और मछली (का निवाला होने) वाले (यूनुस) के ऐसे न हो जाओ कि जब वह ग़ुस्से में भरे हुए थे और अपने परवरदिगार को पुकारा
Verse 49 — Surah Al-Qalam 68:49
अगर तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी उनकी यावरी न करती तो चटियल मैदान में डाल दिए जाते और उनका बुरा हाल होता
Verse 50 — Surah Al-Qalam 68:50
तो उनके परवरदिगार ने उनको बरगुज़ीदा करके नेकोकारों से बना दिया
Verse 51 — Surah Al-Qalam 68:51
और कुफ्फ़ार जब क़ुरान को सुनते हैं तो मालूम होता है कि ये लोग तुम्हें घूर घूर कर (राह रास्त से) ज़रूर फिसला देंगे
Verse 52 — Surah Al-Qalam 68:52
और कहते हैं कि ये तो सिड़ी हैं और ये (क़ुरान) तो सारे जहाँन की नसीहत है