Back to Languages

Hindi - Chapter 70 - Al-Maarij

Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink

Verse 1 — Surah Al-Maarij 70:1

एक माँगने वाले ने काफिरों के लिए होकर रहने वाले अज़ाब को माँगा

Verse 2 — Surah Al-Maarij 70:2

जिसको कोई टाल नहीं सकता

Verse 3 — Surah Al-Maarij 70:3

जो दर्जे वाले ख़ुदा की तरफ से (होने वाला) था

Verse 4 — Surah Al-Maarij 70:4

जिसकी तरफ फ़रिश्ते और रूहुल अमीन चढ़ते हैं (और ये) एक दिन में इतनी मुसाफ़त तय करते हैं जिसका अन्दाज़ा पचास हज़ार बरस का होगा

Verse 5 — Surah Al-Maarij 70:5

तो तुम अच्छी तरह इन तक़लीफों को बरदाश्त करते रहो

Verse 6 — Surah Al-Maarij 70:6

वह (क़यामत) उनकी निगाह में बहुत दूर है

Verse 7 — Surah Al-Maarij 70:7

और हमारी नज़र में नज़दीक है

Verse 8 — Surah Al-Maarij 70:8

जिस दिन आसमान पिघले हुए ताँबे का सा हो जाएगा

Verse 9 — Surah Al-Maarij 70:9

और पहाड़ धुनके हुए ऊन का सा

Verse 10 — Surah Al-Maarij 70:10

बावजूद कि एक दूसरे को देखते होंगे

Verse 11 — Surah Al-Maarij 70:11

कोई किसी दोस्त को न पूछेगा गुनेहगार तो आरज़ू करेगा कि काश उस दिन के अज़ाब के बदले उसके बेटों

Verse 12 — Surah Al-Maarij 70:12

और उसकी बीवी और उसके भाई

Verse 13 — Surah Al-Maarij 70:13

और उसके कुनबे को जिसमें वह रहता था

Verse 14 — Surah Al-Maarij 70:14

और जितने आदमी ज़मीन पर हैं सब को ले ले और उसको छुटकारा दे दें

Verse 15 — Surah Al-Maarij 70:15

(मगर) ये हरगिज़ न होगा

Verse 16 — Surah Al-Maarij 70:16

जहन्नुम की वह भड़कती आग है कि खाल उधेड़ कर रख देगी

Verse 17 — Surah Al-Maarij 70:17

(और) उन लोगों को अपनी तरफ बुलाती होगी

Verse 18 — Surah Al-Maarij 70:18

जिन्होंने (दीन से) पीठ फेरी और मुँह मोड़ा और (माल जमा किया)

Verse 19 — Surah Al-Maarij 70:19

और बन्द कर रखा बेशक इन्सान बड़ा लालची पैदा हुआ है

Verse 20 — Surah Al-Maarij 70:20

जब उसे तक़लीफ छू भी गयी तो घबरा गया

Verse 21 — Surah Al-Maarij 70:21

और जब उसे ज़रा फराग़ी हासिल हुई तो बख़ील बन बैठा

Verse 22 — Surah Al-Maarij 70:22

मगर जो लोग नमाज़ पढ़ते हैं

Verse 23 — Surah Al-Maarij 70:23

जो अपनी नमाज़ का इल्तज़ाम रखते हैं

Verse 24 — Surah Al-Maarij 70:24

और जिनके माल में माँगने वाले और न माँगने वाले के

Verse 25 — Surah Al-Maarij 70:25

लिए एक मुक़र्रर हिस्सा है

Verse 26 — Surah Al-Maarij 70:26

और जो लोग रोज़े जज़ा की तस्दीक़ करते हैं

Verse 27 — Surah Al-Maarij 70:27

और जो लोग अपने परवरदिगार के अज़ाब से डरते रहते हैं

Verse 28 — Surah Al-Maarij 70:28

बेशक उनको परवरदिगार के अज़ाब से बेख़ौफ न होना चाहिए

Verse 29 — Surah Al-Maarij 70:29

और जो लोग अपनी शर्मगाहों को अपनी बीवियों और अपनी लौन्डियों के सिवा से हिफाज़त करते हैं

Verse 30 — Surah Al-Maarij 70:30

तो इन लोगों की हरगिज़ मलामत न की जाएगी

Verse 31 — Surah Al-Maarij 70:31

तो जो लोग उनके सिवा और के ख़ास्तगार हों तो यही लोग हद से बढ़ जाने वाले हैं

Verse 32 — Surah Al-Maarij 70:32

और जो लोग अपनी अमानतों और अहदों का लेहाज़ रखते हैं

Verse 33 — Surah Al-Maarij 70:33

और जो लोग अपनी यहादतों पर क़ायम रहते हैं

Verse 34 — Surah Al-Maarij 70:34

और जो लोग अपनी नमाज़ो का ख्याल रखते हैं

Verse 35 — Surah Al-Maarij 70:35

यही लोग बेहिश्त के बाग़ों में इज्ज़त से रहेंगे

Verse 36 — Surah Al-Maarij 70:36

तो (ऐ रसूल) काफिरों को क्या हो गया है

Verse 37 — Surah Al-Maarij 70:37

कि तुम्हारे पास गिरोह गिरोह दाहिने से बाएँ से दौड़े चले आ रहे हैं

Verse 38 — Surah Al-Maarij 70:38

क्या इनमें से हर शख़्श इस का मुतमइनी है कि चैन के बाग़ (बेहिश्त) में दाख़िल होगा

Verse 39 — Surah Al-Maarij 70:39

हरगिज़ नहीं हमने उनको जिस (गन्दी) चीज़ से पैदा किया ये लोग जानते हैं

Verse 40 — Surah Al-Maarij 70:40

तो मैं मशरिकों और मग़रिबों के परवरदिगार की क़सम खाता हूँ कि हम ज़रूर इस बात की कुदरत रखते हैं

Verse 41 — Surah Al-Maarij 70:41

कि उनके बदले उनसे बेहतर लोग ला (बसाएँ) और हम आजिज़ नहीं हैं

Verse 42 — Surah Al-Maarij 70:42

तो तुम उनको छोड़ दो कि बातिल में पड़े खेलते रहें यहाँ तक कि जिस दिन का उनसे वायदा किया जाता है उनके सामने आ मौजूद हो

Verse 43 — Surah Al-Maarij 70:43

उसी दिन ये लोग कब्रों से निकल कर इस तरह दौड़ेंगे गोया वह किसी झन्डे की तरफ दौड़े चले जाते हैं

Verse 44 — Surah Al-Maarij 70:44

(निदामत से) उनकी ऑंखें झुकी होंगी उन पर रूसवाई छाई हुई होगी ये वही दिन है जिसका उनसे वायदा किया जाता था