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Hindi - Chapter 84 - Al-Inshiqaq
Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink
Verse 1 — Surah Al-Inshiqaq 84:1
जब आसमान फट जाएगा
Verse 2 — Surah Al-Inshiqaq 84:2
और अपने परवरदिगार का हुक्म बजा लाएगा और उसे वाजिब भी यही है
Verse 3 — Surah Al-Inshiqaq 84:3
और जब ज़मीन (बराबर करके) तान दी जाएगी
Verse 4 — Surah Al-Inshiqaq 84:4
और जो कुछ उसमें है उगल देगी और बिल्कुल ख़ाली हो जाएगी
Verse 5 — Surah Al-Inshiqaq 84:5
और अपने परवरदिगार का हुक्म बजा लाएगी
Verse 6 — Surah Al-Inshiqaq 84:6
और उस पर लाज़िम भी यही है (तो क़यामत आ जाएगी) ऐ इन्सान तू अपने परवरदिगार की हुज़ूरी की कोशिश करता है
Verse 7 — Surah Al-Inshiqaq 84:7
तो तू (एक न एक दिन) उसके सामने हाज़िर होगा फिर (उस दिन) जिसका नामाए आमाल उसके दाहिने हाथ में दिया जाएगा
Verse 8 — Surah Al-Inshiqaq 84:8
उससे तो हिसाब आसान तरीके से लिया जाएगा
Verse 9 — Surah Al-Inshiqaq 84:9
और (फिर) वह अपने (मोमिनीन के) क़बीले की तरफ ख़ुश ख़ुश पलटेगा
Verse 10 — Surah Al-Inshiqaq 84:10
लेकिन जिस शख़्श को उसका नामए आमल उसकी पीठ के पीछे से दिया जाएगा
Verse 11 — Surah Al-Inshiqaq 84:11
वह तो मौत की दुआ करेगा
Verse 12 — Surah Al-Inshiqaq 84:12
और जहन्नुम वासिल होगा
Verse 13 — Surah Al-Inshiqaq 84:13
ये शख़्श तो अपने लड़के बालों में मस्त रहता था
Verse 14 — Surah Al-Inshiqaq 84:14
और समझता था कि कभी (ख़ुदा की तरफ) फिर कर जाएगा ही नहीं
Verse 15 — Surah Al-Inshiqaq 84:15
हाँ उसका परवरदिगार यक़ीनी उसको देख भाल कर रहा है
Verse 16 — Surah Al-Inshiqaq 84:16
तो मुझे शाम की मुर्ख़ी की क़सम
Verse 17 — Surah Al-Inshiqaq 84:17
और रात की और उन चीज़ों की जिन्हें ये ढाँक लेती है
Verse 18 — Surah Al-Inshiqaq 84:18
और चाँद की जब पूरा हो जाए
Verse 19 — Surah Al-Inshiqaq 84:19
कि तुम लोग ज़रूर एक सख्ती के बाद दूसरी सख्ती में फँसोगे
Verse 20 — Surah Al-Inshiqaq 84:20
तो उन लोगों को क्या हो गया है कि ईमान नहीं ईमान नहीं लाते
Verse 21 — Surah Al-Inshiqaq 84:21
और जब उनके सामने क़ुरान पढ़ा जाता है तो (ख़ुदा का) सजदा नहीं करते (21) (सजदा)
Verse 22 — Surah Al-Inshiqaq 84:22
बल्कि काफ़िर लोग तो (और उसे) झुठलाते हैं
Verse 23 — Surah Al-Inshiqaq 84:23
और जो बातें ये लोग अपने दिलों में छिपाते हैं ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है
Verse 24 — Surah Al-Inshiqaq 84:24
तो (ऐ रसूल) उन्हें दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो
Verse 25 — Surah Al-Inshiqaq 84:25
मगर जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे अच्छे काम किए उनके लिए बेइन्तिहा अज्र (व सवाब है)