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Hindi - Chapter 86 - At-Tariq
Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink
Verse 1 — Surah At-Tariq 86:1
आसमान और रात को आने वाले की क़सम
Verse 2 — Surah At-Tariq 86:2
और तुमको क्या मालूम रात को आने वाला क्या है
Verse 3 — Surah At-Tariq 86:3
(वह) चमकता हुआ तारा है
Verse 4 — Surah At-Tariq 86:4
(इस बात की क़सम) कि कोई शख़्श ऐसा नहीं जिस पर निगेहबान मुक़र्रर नहीं
Verse 5 — Surah At-Tariq 86:5
तो इन्सान को देखना चाहिए कि वह किस चीज़ से पैदा हुआ हैं
Verse 6 — Surah At-Tariq 86:6
वह उछलते हुए पानी (मनी) से पैदा हुआ है
Verse 7 — Surah At-Tariq 86:7
जो पीठ और सीने की हड्डियों के बीच में से निकलता है
Verse 8 — Surah At-Tariq 86:8
बेशक ख़ुदा उसके दोबारा (पैदा) करने पर ज़रूर कुदरत रखता है
Verse 9 — Surah At-Tariq 86:9
जिस दिन दिलों के भेद जाँचे जाएँगे
Verse 10 — Surah At-Tariq 86:10
तो (उस दिन) उसका न कुछ ज़ोर चलेगा और न कोई मददगार होगा
Verse 11 — Surah At-Tariq 86:11
चक्कर (खाने) वाले आसमान की क़सम
Verse 12 — Surah At-Tariq 86:12
और फटने वाली (ज़मीन की क़सम)
Verse 13 — Surah At-Tariq 86:13
बेशक ये क़ुरान क़ौले फ़ैसल है
Verse 14 — Surah At-Tariq 86:14
और लग़ो नहीं है
Verse 15 — Surah At-Tariq 86:15
बेशक ये कुफ्फ़ार अपनी तदबीर कर रहे हैं
Verse 16 — Surah At-Tariq 86:16
और मैं अपनी तद्बीर कर रहा हूँ
Verse 17 — Surah At-Tariq 86:17
तो काफ़िरों को मोहलत दो बस उनको थोड़ी सी मोहलत दो