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Hindi - Chapter 89 - Al-Fajr
Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink
Verse 1 — Surah Al-Fajr 89:1
सुबह की क़सम
Verse 2 — Surah Al-Fajr 89:2
और दस रातों की
Verse 3 — Surah Al-Fajr 89:3
और ज़ुफ्त व ताक़ की
Verse 4 — Surah Al-Fajr 89:4
और रात की जब आने लगे
Verse 5 — Surah Al-Fajr 89:5
अक्लमन्द के वास्ते तो ज़रूर बड़ी क़सम है (कि कुफ्फ़ार पर ज़रूर अज़ाब होगा)
Verse 6 — Surah Al-Fajr 89:6
क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे आद के साथ क्या किया
Verse 7 — Surah Al-Fajr 89:7
यानि इरम वाले दराज़ क़द
Verse 8 — Surah Al-Fajr 89:8
जिनका मिसल तमाम (दुनिया के) शहरों में कोई पैदा ही नहीं किया गया
Verse 9 — Surah Al-Fajr 89:9
और समूद के साथ (क्या किया) जो वादी (क़रा) में पत्थर तराश कर घर बनाते थे
Verse 10 — Surah Al-Fajr 89:10
और फिरऔन के साथ (क्या किया) जो (सज़ा के लिए) मेख़े रखता था
Verse 11 — Surah Al-Fajr 89:11
ये लोग मुख़तलिफ़ शहरों में सरकश हो रहे थे
Verse 12 — Surah Al-Fajr 89:12
और उनमें बहुत से फ़साद फैला रखे थे
Verse 13 — Surah Al-Fajr 89:13
तो तुम्हारे परवरदिगार ने उन पर अज़ाब का कोड़ा लगाया
Verse 14 — Surah Al-Fajr 89:14
बेशक तुम्हारा परवरदिगार ताक में है
Verse 15 — Surah Al-Fajr 89:15
लेकिन इन्सान जब उसको उसका परवरदिगार (इस तरह) आज़माता है कि उसको इज्ज़त व नेअमत देता है, तो कहता है कि मेरे परवरदिगार ने मुझे इज्ज़त दी है
Verse 16 — Surah Al-Fajr 89:16
मगर जब उसको (इस तरह) आज़माता है कि उस पर रोज़ी को तंग कर देता है बोल उठता है कि मेरे परवरदिगार ने मुझे ज़लील किया
Verse 17 — Surah Al-Fajr 89:17
हरगिज़ नहीं बल्कि तुम लोग न यतीम की ख़ातिरदारी करते हो
Verse 18 — Surah Al-Fajr 89:18
और न मोहताज को खाना खिलाने की तरग़ीब देते हो
Verse 19 — Surah Al-Fajr 89:19
और मीरारा के माल (हलाल व हराम) को समेट कर चख जाते हो
Verse 20 — Surah Al-Fajr 89:20
और माल को बहुत ही अज़ीज़ रखते हो
Verse 21 — Surah Al-Fajr 89:21
सुन रखो कि जब ज़मीन कूट कूट कर रेज़ा रेज़ा कर दी जाएगी
Verse 22 — Surah Al-Fajr 89:22
और तुम्हारे परवरदिगार का हुक्म और फ़रिश्ते कतार के कतार आ जाएँगे
Verse 23 — Surah Al-Fajr 89:23
और उस दिन जहन्नुम सामने कर दी जाएगी उस दिन इन्सान चौंकेगा मगर अब चौंकना कहाँ (फ़ायदा देगा)
Verse 24 — Surah Al-Fajr 89:24
(उस वक्त) क़हेगा कि काश मैने अपनी (इस) ज़िन्दगी के वास्ते कुछ पहले भेजा होता
Verse 25 — Surah Al-Fajr 89:25
तो उस दिन ख़ुदा ऐसा अज़ाब करेगा कि किसी ने वैसा अज़ाब न किया होगा
Verse 26 — Surah Al-Fajr 89:26
और न कोई उसके जकड़ने की तरह जकड़ेगा
Verse 27 — Surah Al-Fajr 89:27
(और कुछ लोगों से कहेगा) ऐ इत्मेनान पाने वाली जान
Verse 28 — Surah Al-Fajr 89:28
अपने परवरदिगार की तरफ़ चल तू उससे ख़ुश वह तुझ से राज़ी
Verse 29 — Surah Al-Fajr 89:29
तो मेरे (ख़ास) बन्दों में शामिल हो जा
Verse 30 — Surah Al-Fajr 89:30
और मेरे बेहिश्त में दाख़िल हो जा