क्या वे विचार नहीं करते कि जिस अल्लाह ने आकाशों तथा धरती की उत्पत्ति की है, वह समर्थ है इस बात पर कि उनके जैसी उत्पत्ति कर दे[1]? तथा उसने उनके लिए एक निर्धारित अवधि बनायी है, जिसमें कोई संदेह नहीं। फिर भी अत्याचारियों ने कुफ़्र के सिवा अस्वीकार ही किया।