(हे नबी!) हम आपके मुख को बार-बार आकाश की ओर फिरते देख रहे हैं। तो हम अवश्य आपको उस क़िबले (काबा) की ओर फेर देंगे, जिससे आप प्रसन्न हो जायें। तो (अब) अपने मुख मस्जिदे ह़राम की ओर फेर लो[1] तथा (हे मुसलमानों!) तुम भी जहाँ रहो, उसी की ओर मुख किया करो और निश्चय अह्ले किताब जानते हैं कि ये उनके पालनहार की ओर से सत्य है[2] और अल्लाह उनके कर्मों से असूचित नहीं है।