रमज़ान का महीना वह है, जिसमें क़ुर्आन उतारा गया, जो सब मानव के लिए मार्गदर्शन है तथा मार्गदर्शन और सत्योसत्य के बीच अन्तर करने के खुले प्रमाण रखता है। अतः जो व्यक्ति इस महीने में उपस्थित[1] हो, वह उसका रोज़ा रखे, फिर यदि तुममें से कोई रोगी[2] अथवा यात्रा[3] पर हो, तो उसे दूसरे दिनों में गिनती पुरी करनी चाहिए। अल्लाह तुम्हारे लिए सुविधा चाहता है, तंगी (असुविधा) नहीं चाहता और चाहता है कि तुम गिनती पूरी करो तथा इस बातपर अल्लाह की महिमा का वर्णन करो कि उसने तुम्हें मार्गदर्शन दिया और (इस प्रकार) तुम उसके कृतज्ञ[4] बन सको।