तुम्हारे लिए रोज़े की रात में अपनी स्त्रियों से सहवास ह़लाल (उचित) कर दिया गया है। वे तुम्हारा वस्त्र[1] हैं तथा तुम उनका वस्त्र हो, अल्लाह को ज्ञान हो गया है कि तुम अपना उपभोग[2] कर रहे थे। उसने तुम्हारी तौबा (क्षमा याचना) स्वीकार कर ली तथा तुम्हें क्षमा कर दिया। अब उनसे (रात्रि में) सहवास करो और अल्लाह के (अपने भाग्य में) लिखे की खोज करो और रात्रि में खाओ तथा पिओ, यहाँ तक की भोर की सफेद धारी रात की काली धारी से उजागर हो[3] जाये, फिर रोज़े को रात्रि (सूर्यास्त) तक पूरा करो और उनसे सहवास न करो, जब मस्जिदों में ऐतिकाफ़ (एकान्तवास) में रहो। ये अल्लाह की सीमायें हैं, इनके समीप भी न जाओ। इसी प्रकार अल्लाह लोगों के लिए अपनी आयतों को उजागर करता है, ताकि वे (उनके उल्लंघन से) बचें।