तथा मुश्रिक[1] स्त्रियों से तुम विवाह न करो, जब तक वे ईमान न लायें और ईमान वाली दासी मुश्रिक स्त्री से उत्तम है, यद्यपि वह तुम्हारे मन को भा रही हो और अपनी स्त्रियों का निकाह़ मुश्रिकों से न करो, जब तक वे ईमान न लायें और ईमान वाला दास मुश्रिक से उत्तम है, यद्यपि वह तुम्हें भा रहा हो। वे तुम्हें अग्नि की ओर बुलाते हैं तथा अल्लाह स्वर्ग और क्षमा की ओर बुला रहा है और (अल्लाह) सभी मानव के लिए अपनी आयतें (आदेश) उजागर कर रहा है, ताकि वह शिक्षा ग्रहन करें।