अथवा उस व्यक्ति के प्रकार, जो एक ऐसी नगरी से गुज़रा, जो अपनी छतों सहित ध्वस्त पड़ी थी? उसने कहाः अल्लाह इसके ध्वस्त हो जाने के पश्चात् इसे कैसे जीवित (आबाद) करेगा? फिर अल्लाह ने उसे सौ वर्ष तक मौत दे दी। फिर उसे जीवित किया और कहाः तुम कितनी अवधि तक मुर्दा पड़े रहे? उसने कहाः एक दिन अथवा दिन के कुछ क्षण। (अल्लाह ने) कहाः बल्कि तुम सौ वर्ष तक पड़े रहे। अपने खाने पीने को देखो कि तनिक परिवर्तन नहीं हुआ है तथा अपने गधे की ओर देखो, ताकी हम तुम्हें लोगों के लिए एक निशानी (चिन्ह) बना दें तथा (गधे की) अस्थियों को देखो कि हम उन्हें कैसे खड़ा करते हैं और उनपर कैसे माँस चढ़ाते हैं? इस प्रकार जब उसके समक्ष बातें उजागर हो गयीं, तो वह[1] पुकार उठा कि मझे (प्रत्यक्ष) ज्ञान हो गया कि अल्लाह जो चाहे, कर सकता है।