और यदि तुम यात्रा में रहो तथा लिखने के लिए किसी को न पाओ, तो धरोहर रख दो और यदि तुममें परस्पर एक-दूसरे पर भरोसा हो, (तो धरोहर की भी आवश्यक्ता नहीं,) जिसपर अमानत (उधार) है, वह उसे चुका दे तथा अल्लाह (अपने पालनहार) से डरे और साक्ष्य न छुपाओ और जो उसे छुपायेगा, उसका दिल पापी है तथा तुम जो करते हो, अल्लाह सब जानता है।