रसूल उस चीज़ पर ईमान लाया, जो उसके लिए अल्लाह की ओर से उतारी गई तथा सब ईमान वाले उसपर ईमान लाये। वे सब अल्लाह तथा उसके फ़रिश्तों और उसकी सब पुस्तकों एवं रसूलों पर ईमान लाये। (वे कहते हैः) हम उसके रसूलों में से किसी के बीच अन्तर नहीं करते। हमने सुना और हम आज्ञाकारी हो गये। हे हमारे पालनहार! हमें क्षमा कर दे और हमें तेरे ही पास[1] आना है।