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Hindi - Chapter 2 - Al-Baqarah

Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink

Verse 85 — Surah Al-Baqarah 2:85

फिर[1] तुम वही हो, जो अपनों की हत्या कर रहे हो तथा अपनों में से एक गिरोह को उनके घरों से निकाल रहे हो और पाप तथा अत्याचार के साथ उनके विरुध्द सहायता करते हो और यदि वे बंदी होकर तुम्हारे पास आयें, तो उनका अर्थदण्ड चुकाते हो, जबकि उन्हें निकालना ही तुमपर ह़राम (अवैध) था, तो क्या तुम पुस्तक के कुछ भाग पर ईमान रखते हो और कुछ का इन्कार करते हो? फिर तुममें से जो ऐसा करते हों, तो उनका दण्ड क्या है, इसके सिवा कि सांसारिक जीवन में अपमान तथा प्रलय के दिन अति कड़ी यातना की ओर फेरे जायें? और अल्लाह तुम्हारे करतूतों से निश्चेत नहीं है