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Hindi - Chapter 20 - Ta-Ha

Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink

Verse 1 — Surah Ta-Ha 20:1

Verse 2 — Surah Ta-Ha 20:2

हमने नहीं अवतरित किया है आपपर क़ुर्आन इस लिए कि आप दुःखी हों[1]।

Verse 3 — Surah Ta-Ha 20:3

परन्तु ये उसकी शिक्षा के लिए है, जो डरता[1] हो।

Verse 4 — Surah Ta-Ha 20:4

उतारा जाना उस ओर से है, जिसने उत्पत्ति की है धरती तथा उच्च आकाशों की।

Verse 5 — Surah Ta-Ha 20:5

जो अत्यंत कृपाशील, अर्श पर स्थिर है।

Verse 6 — Surah Ta-Ha 20:6

उसी का[1] है, जो आकाशों, जो धरती में, जो दोनों के बीच तथा जो भूमि के नीचे है।

Verse 7 — Surah Ta-Ha 20:7

यदि तुम उच्च स्वर में बात करो, तो वास्तव में, वह जानता है भेद को तथा अत्यधिक छुपे भेद को।

Verse 8 — Surah Ta-Ha 20:8

वही अल्लाह है, नहीं है कोई वंदनीय (पूज्य) परन्तु वही। उसी के उत्तम नाम हैं।

Verse 9 — Surah Ta-Ha 20:9

और (हे नबी!) क्या आपको मूसा की बात पहुँची

Verse 10 — Surah Ta-Ha 20:10

जब उसने देखी एक अग्नि, फिर कहा अपने परिवार सेः रुको, मैंने एक अग्नि देखी है, सम्भव है कि मैं तुम्हारे पास उसका कोई अंगार लाऊँ अथवा पा जाऊँ आग पर मार्ग की कोई सूचना[1]।

Verse 11 — Surah Ta-Ha 20:11

फिर जब वहाँ पहुँचा, तो पुकारा गयाः हे मूसा

Verse 12 — Surah Ta-Ha 20:12

वास्तव में, मैं ही तेरा पालनहार हूँ, तू उतार दे अपने दोनों जूते, क्योंकि तू पवित्र वादी (उपत्यका) "तुवा" में है।

Verse 13 — Surah Ta-Ha 20:13

और मैंने तुझे चुन[1] लिया है। अतः ध्यान से सुन, जो वह़्यी की जा रही है।

Verse 14 — Surah Ta-Ha 20:14

निःसंदेह मैं ही अल्लाह हूँ, मेरे सिवा कोई पूज्य नहीं, तो मेरी ही इबादत (वंदना) कर तथा मेरे स्मरण (याद) के लिए नमाज़ की स्थापना[1] कर।

Verse 15 — Surah Ta-Ha 20:15

निश्चय प्रलय आने वाली है, मैं उसे गुप्त रखना चाहता हूँ, ताकि प्रतिकार (बदला) दिया जाये, प्रत्येक प्राणी को उसके प्रयास के अनुसार।

Verse 16 — Surah Ta-Ha 20:16

अतः, तुम्हें न रोक दे, उस ( के विश्वास) से, जो उसपर ईमान (विश्वास) नहीं रखता और अनुसरण किया अपनी इच्छा का, अन्यथा तेरा नाश हो जायेगा।

Verse 17 — Surah Ta-Ha 20:17

और हे मूसा! ये तेरे दाहिने हाथ में क्या है

Verse 18 — Surah Ta-Ha 20:18

उत्तर दियाः ये मेरी लाठी है; मैं इसपर सहारा लेता हूँ, इससे अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूँ तथा मेरी इसमें दूसरी आवश्यक्तायें (भी) हैं।

Verse 19 — Surah Ta-Ha 20:19

कहाः इसे फेंकिए, हे मूसा

Verse 20 — Surah Ta-Ha 20:20

तो उसने उसे फेंक दिया और सहसा वह एक सर्प थी, जो दोड़ रहा था।

Verse 21 — Surah Ta-Ha 20:21

कहाः पकड़ ले इसे, और डर नहीं, हम इसे फेर देंगे, इसकी प्रथम स्थिति की ओर।

Verse 22 — Surah Ta-Ha 20:22

और अपना हाथ लगा दे अपनी कांख (बग़ल) की ओर, वह निकलेगा चमकता हुआ बिना किसी रोग के, ये दूसरा चमत्कार है।

Verse 23 — Surah Ta-Ha 20:23

ताकि हम तुझे दिखायें, अपनी बड़ी निशानियाँ।

Verse 24 — Surah Ta-Ha 20:24

तुम फ़िरऔन के पास जाओ, वह विद्रोही हो गया है।

Verse 25 — Surah Ta-Ha 20:25

मूसा ने प्रार्थना कीः हे मेरे पालनहार! खोल दे, मेरे लिए मेरा सीना।

Verse 26 — Surah Ta-Ha 20:26

तथा सरल कर दे, मेरे लिए मेरा काम।

Verse 27 — Surah Ta-Ha 20:27

और खोल दे, मेरी ज़ुबान की गाँठ।

Verse 28 — Surah Ta-Ha 20:28

ताकि लोग मेरी बात समझें।

Verse 29 — Surah Ta-Ha 20:29

तथा बना दे, मेरा एक सहायक मेरे परिवार में से।

Verse 30 — Surah Ta-Ha 20:30

मेरे भीई हारून को।

Verse 31 — Surah Ta-Ha 20:31

उसके द्वारा दृढ़ कर दे मेरी शक्ति को।

Verse 32 — Surah Ta-Ha 20:32

और साझी बना दे, उसे मेरे काम में।

Verse 33 — Surah Ta-Ha 20:33

ताकि हम दोनों तेरी पवित्रता का गान अधिक करें।

Verse 34 — Surah Ta-Ha 20:34

तथा तुझे अधिक स्मरण (याद) करें।

Verse 35 — Surah Ta-Ha 20:35

निःसंदेह, तू हमें भली प्रकार देखने-भालने वाला है।

Verse 36 — Surah Ta-Ha 20:36

अल्लाह ने कहाः हे मूसा! तेरी सब माँग पूरी कर दी गयी।

Verse 37 — Surah Ta-Ha 20:37

और हम उपकार कर चुके हैं तुमपर एक बार और[1] (भी)।

Verse 38 — Surah Ta-Ha 20:38

जब हमने उतार दिया, तेरी माँ के दिल में, जिसकी वह़्यी (प्रकाश्ना) की जा रही है।

Verse 39 — Surah Ta-Ha 20:39

कि इसे रख दे ताबूत (सन्दूक़) में, फिर उसे नदी में डाल दे, फिर नदी उसे किनारे लगा देगी, जिसे उठा लेगा मेरा शत्रु तथा उसका शत्रु[1] और मैंने डाल दिया तुझपर अपनी ओर से विशेष[2] प्रेम, ताकि तेरा पालन-पोषण मेरी रक्षा में हो।

Verse 40 — Surah Ta-Ha 20:40

जब चल रही थी तेरी बहन[1], फिर कह रही थीः क्या मैं तुम्हें उसे बता दूँ, जो इसका लालन-पालन करे? फिर हमने पुनः तुम्हें पहुँचा दिया तुम्हारी माँ के पास, ताकि उसकी आँख ठण्डी हो और उदासीन न हो तथा हे मूसा! तूने मार दिया एक व्यक्ति को, तो हमने तुझे मुक्त कर दिया चिन्ता[2] से और हमने तेरी भली-भाँति परीक्षा ली। फिर तू रह गया वर्षों मद्यन के लोगों में, फिर तू (मद्यन से) अपने निश्चित समय पर आ गया।

Verse 41 — Surah Ta-Ha 20:41

और मैंने बना लिया है तुझे विश्ष अपने लिए।

Verse 42 — Surah Ta-Ha 20:42

जा तू और तेरा भाई, मेरी निशानियाँ लेकर और दोनों आलस्य न करना मेरे स्मरण (याद) में।

Verse 43 — Surah Ta-Ha 20:43

तुम दोनों फ़िरऔन के पास जाओ, वास्तव में, वह उल्लंघन कर गया है।

Verse 44 — Surah Ta-Ha 20:44

फिर उससे कोमल बोल बोलो, कदाचित् वह शिक्षा ग्रहण करे अथवा डरे।

Verse 45 — Surah Ta-Ha 20:45

दोनों ने कहाः हे हमारे पालनहार! हमें भय है कि वह हमपर अत्याचार अथवा अतिक्रमण कर दे।

Verse 46 — Surah Ta-Ha 20:46

उस (अल्लाह) ने कहाः तुम भय न करो, मैं तुम दोनों के साथ हूँ, सुनता तथा देखता हूँ।

Verse 47 — Surah Ta-Ha 20:47

तुम उसके पास जाओ और कहो कि हम तेरे पालनहार के रसूल हैं। अतः, हमारे साथ बनी इस्राईल को जाने दे और उन्हें यातना न दे, हम तेरे पास तेरे पालनहार की निशानी लाये हैं और शान्ति उसके लिए है, जो मार्गदर्शन का अनुसरण करे।

Verse 48 — Surah Ta-Ha 20:48

वास्तव में, हमारी ओर वह़्यी (प्रकाशना) की गई है कि यातना उसी के लिए है, जो झुठलाये और मुख फेरे।

Verse 49 — Surah Ta-Ha 20:49

उसने कहाः हे मूसा! कौन है तुम दोनों का पालनहार

Verse 50 — Surah Ta-Ha 20:50

मूसा ने कहाः हमारा पालनहार वह है, जिसने प्रत्येक वस्तु को उसका विशेष रूप प्रदान किया, फिर मार्गदर्शन[1] दिया।

Verse 51 — Surah Ta-Ha 20:51

उसने कहाः फिर उनकी दशा क्या होनी है, जो पूर्व के लोग हैं

Verse 52 — Surah Ta-Ha 20:52

मूसा ने कहाः उसका ज्ञान मेरे पालनहार के पास एक लेख्य में सुरक्षित है, मेरा पालनहार न तो चूकता है और न[1] भूलता है।

Verse 53 — Surah Ta-Ha 20:53

जिसने तुम्हारे लिए धरती को बिस्तर बनाया और तुम्हारे चलने के लिए उसमें मार्ग बनाये और तुम्हारे लिए आकाश से जल बरसाया, फिर उसके द्वारा विभिन्न प्रकार की उपज निकाली।

Verse 54 — Surah Ta-Ha 20:54

तुम स्वयं खाओ तथा अपने पशुओं को चराओ, वस्तुतः, इसमें बहुत-सी निशानियाँ हैं बुध्दिमानों के लिए।

Verse 55 — Surah Ta-Ha 20:55

इसी (धरती) से हमने तुम्हारी उत्पत्ति की है, इसीमें तुम्हें वापस ले जायेंगे और इसीसे तुम सबको पुनः[1] निकालेंगे।

Verse 56 — Surah Ta-Ha 20:56

और हमने उसे दिखा दी अपनी सभी निशानियाँ, फिर भी उसने झुठला दिया और नहीं माना।

Verse 57 — Surah Ta-Ha 20:57

उसने कहाः क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि हमें हमारी धरती (देश) से अपने जादू (के बल) से निकाल दे, हे मूसा

Verse 58 — Surah Ta-Ha 20:58

फिर तो हम तेरे पास अवश्य इसीके समान जादू लायेंगे, अतः हमारे और अपने बीच एक समय निर्धारित कर ले, जिसके विरुध्द न हम करेंगे और न तुम, एक खुले मैदान में।

Verse 59 — Surah Ta-Ha 20:59

मूसा ने कहाः तुम्हारा निर्धारित समय शोभा (उत्सव) का दिन[1] है तथा ये कि लोग दिन चढ़े एकत्र हो जायेँ।

Verse 60 — Surah Ta-Ha 20:60

फिर फ़िरऔन लौट गया,[1] अपने हथकण्डे एकत्र किये और फिर आया।

Verse 61 — Surah Ta-Ha 20:61

मूसा ने उन (जादूगरों) से कहाः तुम्हारा विनाश हो! अल्लाह पर मिथ्या आरोप न लगाओ कि वह तुम्हारा किसी यातना द्वारा सर्वनाश कर दे और वह निष्फल ही रहा है, जिसने मिथ्यारोपण किया।

Verse 62 — Surah Ta-Ha 20:62

फिर[1] उनके बीच विवाद हो गया और वे चुपके-चुपके गुप्त मंत्रणा करने लगे।

Verse 63 — Surah Ta-Ha 20:63

कुछ ने कहाः ये दोनों वास्तव में, जादूगर हैं, दोनों चाहते हैं कि तुम्हें तुम्हारी धरती से अपने जादू द्वारा निकाल दें और तुम्हारी आदर्श प्रणाली का अन्त कर दें।

Verse 64 — Surah Ta-Ha 20:64

अतः अपने सब उपाय एकत्र कर लो, फिर एक पंक्ति में होकर आ जाओ और आज वही सफल हो गया, जो ऊपर रहा।

Verse 65 — Surah Ta-Ha 20:65

उन्होंने कहाः हे मूसा! तू फेंकता है या पहले हम फेंकें

Verse 66 — Surah Ta-Ha 20:66

मूसा ने कहाः बल्कि तुम्हीं फेंको। फिर उनकी रस्सियाँ तथा लाठियाँ उसे लग रही थीं कि उनके जादू (के बल) से दौड़ रही हैं।

Verse 67 — Surah Ta-Ha 20:67

इससे मूसा अपने मन में डर गया[1]।

Verse 68 — Surah Ta-Ha 20:68

हमने कहाः डर मत, तूही ऊपर रहेगा।

Verse 69 — Surah Ta-Ha 20:69

और फेंक दे, जो तेरे दायें हाथ में है, वह निगल जायेगा, जो कुछ उन्होंने बनाया है। वह केवल जादू का स्वाँग बनाकर लाए हैं तथा जादूगर सफल नहीं होता, जहाँ से आये।

Verse 70 — Surah Ta-Ha 20:70

अन्ततः, जादूगर सज्दे में गिर गये, उन्होंने कहा कि हम ईमान लाये हारून तथा मूसा के पालनहार पर।

Verse 71 — Surah Ta-Ha 20:71

फ़िरऔन बालाः क्या तुमने उसका विश्वास कर लिया, इससे पूर्व कि मैं तुम्हें आज्ञा दूँ? वास्तव में, वह तुम्हारा बड़ा (गुरू) है, जिसने तुम्हें जादू सिखाया है। तो मैं अवश्य कटवा दूँगा तुम्हारे हाथों तथा पावों को, विपरीत दिशा[1] से और तुम्हें सूली दे दूँगा खजूर के तनों पर तथा तुम्हें अवश्य ज्ञान हो जायेगा कि हममें से किसकी यातना अधिक कड़ी तथा स्थायी है।

Verse 72 — Surah Ta-Ha 20:72

उन्होंने कहाः हम तुझे कभी उन खुली निशानियों (तर्कों) पर प्रधानता नहीं देंगे, जो हमारे पास आ गयी हैं और न उस (अल्लाह) पर, जिसने हमें पैदा किया है, तू जो करना चाहे, कर ले, तू बस इसी सांसारिक जीवन में आदेश दे सकता है।

Verse 73 — Surah Ta-Ha 20:73

हम तो अपने पालनहार पर ईमान लाये हैं, ताकि वह क्षमा कर दे, हमारे लिए, हमारे पापों को तथा जिस जादू पर तूने हमें बाध्य किया और अल्लाह सर्वोत्तम तथा अनन्त[1] है।

Verse 74 — Surah Ta-Ha 20:74

वास्तव में, जो जायेगा अपने पालनहार के पास पापी बनकर, तो उसी के लिए नरक है, जिसमें न वह मरेगा और न जीवित रहेगा[1]।

Verse 75 — Surah Ta-Ha 20:75

तथा जो उसके पास ईमान लेकर आयेगा, तो उन्हीं के लिए उच्च श्रेणियाँ होंगी।

Verse 76 — Surah Ta-Ha 20:76

स्थायी स्वर्ग, जिनमें नहरें बहती होंगी, जिनमें सदा वासी होंगे और यही उसका प्रतिफल है, जो पवित्र हो गया।

Verse 77 — Surah Ta-Ha 20:77

और हमने मूसी की ओर वह़्यी की कि रातों-रात चल पड़ मेरे भक्तों को लेकर और उनके लिए सागर में सूखा मार्ग बना ले[1], तुझे पा लिए जाने का कोई भय नहीं होगा और न डरेगा।

Verse 78 — Surah Ta-Ha 20:78

फिर उनका पीछा किया फ़िरऔन ने अपनी सेना के साथ, तो उनपर सागर छा गया, जैसा कुछ छा गया।

Verse 79 — Surah Ta-Ha 20:79

और कुपथ कर दिया फ़िरऔन ने अपनी जाति को और सुपथ नहीं दिखाया।

Verse 80 — Surah Ta-Ha 20:80

हे इस्राईल के पुत्रो! हमने तुम्हें मुक्त कर दिया तुम्हारे शत्रु से और वचन दिया तुम्हें तूर पर्वत से दाहिनी[1] ओर का तथा तुमपर उतारा "मन्न" तथा "सल्वा"[2]।

Verse 81 — Surah Ta-Ha 20:81

खाओ उन स्वच्छ चीज़ों में से, जो जीविका हमने तुम्हें दी है तथा उल्लंघन न करो उसमें, अन्यथा उतर जायेगा तुमपर मेरा प्रकोप तथा जिसपर उतर जायेगा मेरा प्रकोप, तो निःसंदेह वह गिर गया।

Verse 82 — Surah Ta-Ha 20:82

और मैं निश्चय बड़ा क्षमाशील हूँ उसके लिए, जिसने क्षमा याचना की तथा ईमान लाया और सदाचार किया फिर सुपथ पर रहा।

Verse 83 — Surah Ta-Ha 20:83

और हे मूसा! क्या चीज़ तुम्हें ले आई अपनी जाति से पहले

Verse 84 — Surah Ta-Ha 20:84

उसने कहाः वे मेरे पीछे आ ही रहे हैं और मैं तेरी सेवा में शीघ्र आ गया, हे मेरे पालनहार! ताकि तू प्रसन्न हो जाये।

Verse 85 — Surah Ta-Ha 20:85

अल्लाह ने कहाः हमने परीक्षा में डाल दिया तेरी जाति को तेरे (आने के) पश्चात् और कुपथ कर दिया है उन्हें सामरी[1] ने।

Verse 86 — Surah Ta-Ha 20:86

तो मूसा वापस आया अपनी जाति की ओर अति क्रुध्द-शोकातुर होकर। उसने कहाः हे मेरी जाति के लोगो! क्या तुम्हें वचन नहीं दिया था तुम्हारे पालनहार ने एक अच्छा वचन[1]? तो क्या तुम्हें बहुत दिन लग[2] गये? अथवा तुमने चाहा कि उतर जाये कोई प्रकोप तुम्हारे पालनहार की ओर से? अतः तुमने मेरे वचन[3] को भंग कर दिया।

Verse 87 — Surah Ta-Ha 20:87

उन्होंने उत्तर दिया हमने नहीं भंग किया है तेरा वचन अपनी इच्छा से, परन्तु हमपर लाद दिया गया था जाति[1] के आभूषणों का बोझ, तो हमने उसे फेंक[2] दिया और ऐसे ही फेंक[3] दिया सामरी ने।

Verse 88 — Surah Ta-Ha 20:88

फिर वह[1] निकाल लाया उनके लिए एक बछड़े की मूर्ति, जिसकी गाय जैसी ध्वनि (आवाज़) थी, तो सबने कहाः ये है तुम्हारा पूज्य तथा मूसा का पूज्य, (परन्तु) मूसा इसे भूल गया है।

Verse 89 — Surah Ta-Ha 20:89

तो क्या वे नहीं देखते कि वह न उनकी किसी बात की उत्तर देता है और न अधिकार रखता है, उनके लिए किसी हानि का, न किसी लाभ का

Verse 90 — Surah Ta-Ha 20:90

और कह दिया था हारून ने इससे पहले ही कि हे मेरी जाति के लोगो! तुम्हारी परीक्षा की गयी है इसके द्वारा और वास्तव में तुम्हारा पालनहार अत्यंत कृपाशील है। अतः मेरा अनुसरण करो तथा मेरे आदेश का पालन करो।

Verse 91 — Surah Ta-Ha 20:91

उन्होंने कहाः हमसब उसी के पुजारी रहेंगे, जब तक (तूर से) हमारे पास मूसा वापस न आ जाये।

Verse 92 — Surah Ta-Ha 20:92

मूसा ने कहाः हे हारून! किस बात ने तुझे रोक दिया, जब तूने उन्हें देखा कि कुपथ हो गये

Verse 93 — Surah Ta-Ha 20:93

कि मेरा अनुसरण न करे? क्या तूने अवज्ञा कर दी मेरे आदेश की

Verse 94 — Surah Ta-Ha 20:94

उसने कहाः मेरे माँ जाये भाई! मेरी दाढ़ी न पकड़ और न मेरा सिर। वास्तव में, मुझे भय हुआ कि आप कहेंगे कि तूने विभेद उत्पन्न कर दिया बनी इस्राईल में और[1] प्रतीक्षा नहीं की मेरी बात (आदेश) की।

Verse 95 — Surah Ta-Ha 20:95

(मूसा ने) पूछाः तेरा समाचार क्या है, हे सामरी

Verse 96 — Surah Ta-Ha 20:96

उसने कहाः मैंने वह चीज़ देखी, जिसे उन्होंने नहीं देखा, तो मैंने ले ली एक मुट्ठी रसूल के पद्चिन्ह से, फिर उसे फेंक दिया और इसी प्रकार सुझा दिया मुझे[1] मेरे मन ने।

Verse 97 — Surah Ta-Ha 20:97

मूसा ने कहाः जा तेरे लिए जीवन में ये होना है कि तू कहता रहेः मुझे स्पर्श न करना[1]। तथा तेरे लिए एक और[2] वचन है, जिसके विरुध्द कदापि न होगा और अपने पूज्य को देख, जिसका पुजारी बना रहा, हम अवश्य उसे जला देंगे, फिर उसे उड़ा देंगे नदी में चूर-चूर करके।

Verse 98 — Surah Ta-Ha 20:98

निःसंदेह तुम सभी का पूज्य, बस अल्लाह है, कोई पूज्य नहीं है, उसके सिवा। वह समोये हुए है, प्रत्येक वस्तु को (अपने) ज्ञान में।

Verse 99 — Surah Ta-Ha 20:99

इसी प्रकार, (हे नबी!) हम आपके समक्ष विगत समाचारों में से कुछ का वर्णन कर रहे हैं और हमने आपको प्रदान कर दी है अपने पास से एक शिक्षा (क़ुर्आन)।

Verse 100 — Surah Ta-Ha 20:100

जो उससे मुँह फेरेगा, तो वह निश्चय प्रलय के दिन लादे हुए होगा, भारी[1] बोझ।

Verse 101 — Surah Ta-Ha 20:101

वे सदा रहन वाले होंगे उसमें और प्रलय के दिन उनके लिए बुरा बोझ होगा।

Verse 102 — Surah Ta-Ha 20:102

जिस दिन फूंक दिया जायेगा सूर[1] (नरसिंघा) में, और हम एकत्र कर देंगे उस दिन पापियों को, इस दशा में कि उनकी आँखें (भय से) नीली होंगी।

Verse 103 — Surah Ta-Ha 20:103

वे आपस में चुपके-चुपके कहेंगे कि तुम (संसार में) बस दस दिन रहे हो।

Verse 104 — Surah Ta-Ha 20:104

हम भली-भाँति जानते हैं, जो कुछ वे कहेंगे, जिस समय कहेगा उनमें से सबसे चतुर कि तुम केवल एक ही दिन रहे[1] हो।

Verse 105 — Surah Ta-Ha 20:105

वे आपसे प्रश्न कर रहे हैं पर्वतों के संबन्ध में? आप कह दें कि उड़ा देगा उन्हें मेरा पालनहार चूर-चूर करके।

Verse 106 — Surah Ta-Ha 20:106

फिर धरती को छोड़ देगा, समतल मैदान बनाकर।

Verse 107 — Surah Ta-Ha 20:107

तुम नहीं देखोगे उसमें कोई टेढ़ापन और न नीच-ऊँच।

Verse 108 — Surah Ta-Ha 20:108

उस दिन लोग पीछे चलेंगे पुकारने वाले के, कोई उससे कतरायेगा नहीं और धीमी हो जायेँगी आवाजें अत्यंत कृपाशील के लिए, फिर तुम नहीं सुनोगे कानाफूँसी की आवाज़ के सिवा।

Verse 109 — Surah Ta-Ha 20:109

उस दिन लाभ नहीं देगी सिफ़ारिश, परन्तु जिसे आज्ञा दे अत्यंत कृपाशील और प्रसन्न हो उसके[1] लिए बात करने से।

Verse 110 — Surah Ta-Ha 20:110

वह जानता है, जो कुछ उनके आगे तथा पीछे है और वे उसका पूरा ज्ञान नहीं रखते।

Verse 111 — Surah Ta-Ha 20:111

तथा सभी के सिर झुक जायेंगे, जीवित नित्य स्थायी (अल्लाह) के लिए और निश्चय वह निष्फल हो गया, जिसने अत्याचार लाद[1] लिया।

Verse 112 — Surah Ta-Ha 20:112

तथा जो सदाचार करेगा और वह ईमान वाला भी हो, तो वह नहीं डरेगा अत्याचार से, न अधिकार हनन से।

Verse 113 — Surah Ta-Ha 20:113

और इसी प्रकार, हमने इस अरबी क़ुर्आन को अवतरित किया है तथा विभिन्न प्रकार से वर्णन कर दिया है उसमें चेतावनी का, ताकि लोग आज्ञाकारी हो जायेँ अथवा वह उनके लिए उत्पन्न कर दे एक शिक्षा।

Verse 114 — Surah Ta-Ha 20:114

अतः, उच्च है अल्लाह वास्तविक स्वामी और (हे नबी!) आप शीघ्रता[1] न करें क़ुर्आन के साथ इससे पूर्व कि पूरी कर दी जाये आपकी ओर इसकी वह़्यी (प्रकाशना) तथा प्रार्थना करें कि हे मेरे पालनहार! मुझे अधिक ज्ञान प्रदान कर।

Verse 115 — Surah Ta-Ha 20:115

और हमने आदेश दिया आदम को इससे पहले, तो वह भूल गया और हमने नहीं पाया उसमें कोई दृढ़ संकल्प[1]।

Verse 116 — Surah Ta-Ha 20:116

तथा जब हमने कहा फ़रिश्तों से कि सज्दा करो आदम को, तो सबने सज्दा किया इब्लीस के सिवा, उसने इन्कार कर दिया।

Verse 117 — Surah Ta-Ha 20:117

तब हमने कहाः हे आदम! वास्तव में, ये शत्रु है तेरा और तेरी पत्नी का, तो ऐसा न हो कि तुम दोनों को निकलवा दे स्वर्ग से और तू आपदा में पड़ जाये।

Verse 118 — Surah Ta-Ha 20:118

यहाँ तुझे ये सुविधा है कि न भूखा रहता है और न नग्न रहता है।

Verse 119 — Surah Ta-Ha 20:119

और न प्यासा होता है और न तुझे धूप सताती है।

Verse 120 — Surah Ta-Ha 20:120

तो फुसलाया उसे शैतान ने, कहाः हे आदम! क्या मैं तुझे न बताऊँ, शाश्वत जीवन का वृक्ष तथा ऐसा राज्य, जो पतनशील न हो

Verse 121 — Surah Ta-Ha 20:121

तो दोनों ने उस (वृक्ष) से खा लिया, फिर उनके गुप्तांग उन दोनों के लिए खुल गये और दोनों चिपकाने लगे अपने ऊपर स्वर्ग के पत्ते और आदम अवज्ञा कर गया अपने पालनहार की और कुपथ हो गया।

Verse 122 — Surah Ta-Ha 20:122

फिर उस (अल्लाह) ने उसे चुन लिया और उसे क्षमा कर दिया और सुपथ दिखा दिया।

Verse 123 — Surah Ta-Ha 20:123

कहाः तुम दोनों (आदम तथा शैतान) यहाँ से उतर जाओ, तुम एक-दूसरे के शत्रु हो। अब यदि आये तुम्हारे पास मेरी ओर से मार्गदर्शन, तो जो अनुपालन करेगा मेरे मार्गदर्शन का, वह कुपथ नहीं होगा और न दुर्भाग्य ग्रस्त होगा।

Verse 124 — Surah Ta-Ha 20:124

तथा जो मुख फेर लेगा मेरे स्मरण से, तो उसी का सांसारिक जीवन संकीर्ण (तंग)[1] होगा तथा हम उसे उठायेंगे प्रलय के दिन अन्धा करके।

Verse 125 — Surah Ta-Ha 20:125

वह कहेगाः मेरे पालनहार! मुझे अन्धा क्यों उठाया, मैं तो (संसार में) आँखों वाला था

Verse 126 — Surah Ta-Ha 20:126

अल्लाह कहेगाः इसी प्रकार, तेरे पास हमारी आयतें आयीं, तो तूने उन्हें भुला दिया। अतः इसी प्रकार, आज तू भुला दिया जायेगा।

Verse 127 — Surah Ta-Ha 20:127

तथा इसी प्रकार, हम बदला देते हैं उसे, जो सीमा का उल्लंघन करे और ईमान न लाये अपने पालनहार की आयतों पर और निश्चय आख़िरत की यातना अति कड़ी तथा अधिक स्थायी है।

Verse 128 — Surah Ta-Ha 20:128

तो क्या उन्हें मार्गदर्शन नहीं दिया इस बात ने कि हमने ध्वस्त कर दिया, इनसे पहले बहुत-सी जातियों को, जो चल-फिर रही थीं अपनी बस्तियों में, निःसंदेह इसमें निशानियाँ हैं बुध्दिमानों के लिए।

Verse 129 — Surah Ta-Ha 20:129

और यदि, एक बात पहले से निश्चित न होती आपके पालनहार की ओर से, तो यातना आ चुकी होती और एक निर्धारित समय न होता[1]।

Verse 130 — Surah Ta-Ha 20:130

अतः आप सहन करें उनकी बातों को तथा अपने पालनहार की पवित्रता का वर्णन उसकी प्रशंसा के साथ करते रहें, सूर्योदय से पहले[1], सुर्यास्त से[2] पहले, रात्रि के क्षणों[3] में और दिन के किनारों[4] में, ताकि आप प्रसन्न हो जायेँ।

Verse 131 — Surah Ta-Ha 20:131

और कदापि न देखिए आप, उस आनन्द की ओर, जो हमने उन[1] में से विभिन्न प्रकार के लोगों को दे रखा है, वे सांसारिक जीवन की शोभा है, ताकि हम उनकी परीक्षा लें और आपके पालनहार का प्रदान[2] ही उत्तम तथा अति स्थायी है।

Verse 132 — Surah Ta-Ha 20:132

और आप अपने परिवार को नमाज़ का आदेश दें और स्वयं भी उसपर स्थित रहें, हम आपसे कोई जीविका नहीं माँगते, हम ही आपको जीविका प्रदान करते हैं और अच्छा परिणाम आज्ञाकारियों के लिए है।

Verse 133 — Surah Ta-Ha 20:133

तथा उन्होंने कहाः क्यों वह हमारे पास कोई निशानी अपने पालनहार की ओर से नहीं लाता? क्या उनके पास उसका प्रत्यक्ष प्रमाण (क़र्आन) नहीं आ गया, जिसमें अगली पुस्तकों की (शिक्षायें) हैं

Verse 134 — Surah Ta-Ha 20:134

और यदि हम ध्वस्त कर देते उन्हें, किसी यातना से, इससे[1] पहले, तो वे अवश्य कहते कि हे हमारे पालनहार! तूने हमारी ओर कोई रसूल क्यों नहीं भेजा कि हम तेरी आयतों का अनुपालन करते, इससे पहले कि हम अपमानित और हीन होते।

Verse 135 — Surah Ta-Ha 20:135

आप कह दें कि प्रत्येक, (परिणाम की) प्रतीक्षा में है। अतः तुमभी प्रतीक्षा करो, शीघ्र ही तुम्हें ज्ञान हो जायेगा कि कौन सीधी राह वाले हैं, और किसने सीधी राह पायी है।