Back to Languages

Hindi - Chapter 31 - Luqman

Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink

Verse 15 — Surah Luqman 31:15

और यदि वे दोनों दबाव डालें तुमपर कि तुम साझी बनाओ मेरा उसे, जिसका तुम्हें कोई ज्ञान नहीं, तो न[1] मानो उन दोनों की बात और उनके साथ रहो संसार[2] में सुचारु रूप से तथा राह चलो उसकी, जो ध्यानमग्न हो मेरी ओर, फिर मेरी ही ओर तुम्हें फिरकर आना है, तो मैं तुम्हें सूचित कर दूँगा उससे, जो तुम कर रहे थे।