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Hindi - Chapter 32 - As-Sajdah

Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink

Verse 1 — Surah As-Sajdah 32:1

अलिफ लाम मीम।

Verse 2 — Surah As-Sajdah 32:2

इस पुस्तक का उतारना, जिसमें कोई संदेह नहीं पूरे संसार के पालनहार की ओर से है।

Verse 3 — Surah As-Sajdah 32:3

क्या वे कहते हैं कि इसे, इसने घड़ लिया है? बल्कि ये सत्य है आपके पालनहार की ओर से, ताकि आप सावधान करें उन लोगों को, जिन[1] के पास नहीं आया है कोई सावधान करने वाला आपसे पहले। संभव है वे सीधी राह पर आ जायें।

Verse 4 — Surah As-Sajdah 32:4

अल्लाह वही है, जिसने पैदा किया आकाशों तथा धरती को और जो दोनों के मध्य है, छः दिनों में। फिर स्थित हो गया अर्श पर। नहीं है उसके सिवा तुम्हारा कोई संरक्षक और न कोई अभिस्तावक (सिफ़ारिशी), तो क्या तुम शिक्षा नहीं लेते

Verse 5 — Surah As-Sajdah 32:5

वह उपाय करता है प्रत्येक कार्य की आकाश से धरती तक, फिर प्रत्येक कार्य, ऊपर उसके पास जाता है, एक दिन में, जिसका माप एक हज़ार वर्ष है, तुम्हारी गणना से।

Verse 6 — Surah As-Sajdah 32:6

वही है ज्ञानी छुपे तथा खुले का, अति प्रभुत्वशाली, दयावान्।

Verse 7 — Surah As-Sajdah 32:7

जिनने सुन्दर बनाई प्रत्येक चीज़, जो उत्पन्न की और आरंभ की मनुष्य की उत्पत्ति मिट्टी से।

Verse 8 — Surah As-Sajdah 32:8

फिर बनाया उसका वंश एक तुच्छ जल के निचोड़ (वीर्य) से।

Verse 9 — Surah As-Sajdah 32:9

फिर बराबर किया उसे और फूंक दिया उसमें अपनी आत्मा (प्राण) तथा बनाये तुम्हारे लिए कान और आँख तथा दिल। तुम कम ही कृतज्ञ होते हो।

Verse 10 — Surah As-Sajdah 32:10

तथा उन्होंने कहाः क्या जब हम खो जायेंगे धरती में, तो क्या हम नई उत्पत्ति में होंगे? बल्कि वे अपने पालनहार से मिलने का इन्कार करने वाले हैं।

Verse 11 — Surah As-Sajdah 32:11

आप कह दें कि तुम्हारा प्राण निकाल लेगा मौत का फ़रिश्ता, जो तुमपर नियुक्त किया गया है, फिर अपने पालनहार की ओर फेर दिये जाओगे।

Verse 12 — Surah As-Sajdah 32:12

और यदि आप देखते, जब अपराधी अपने सिर झुकाये होंगे अपने पालनहार के समक्ष, (वे कह रहे होंगेः) हे हमारे पालनहार! हमने देख लिया और सुन लिया, अतः, हमें फेर दे (संसार में) हम सदाचार करेंगे। हमें पूरा विश्वास हो गया।

Verse 13 — Surah As-Sajdah 32:13

और यदि हम चाहते, तो प्रदान कर देते प्रत्येक प्राणी को उसका मार्गदर्शन। परन्तु, मेरी ये बात सत्य होकर रही कि मैं अवश्य भरूँगा नरक को जिन्नों तथा मानव से।

Verse 14 — Surah As-Sajdah 32:14

तो चखो, अपने भूल जाने के कारण अपने इस दिन के मिलने को, हमने (भी) तुम्हें भुला दिया[1] है। चखो, सदा की यातना उसके बदले, जो तुम कर रहे थे।

Verse 15 — Surah As-Sajdah 32:15

हमारी आयतों पर बस वही ईमान लाते हैं, जिनको जब समझाया जाये उनसे, तो गिर जाते हैं सज्दा करते हुए और पवित्रता का गान करते हैं, अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ और अभिमान नहीं करते।

Verse 16 — Surah As-Sajdah 32:16

अलग रहते हैं उनके पार्शव (पहलू) बिस्तर से, वह प्रार्थना करते रहते हैं अपने पालनहार से भय तथा आशा रखते हुए तथा उसमें से, जो हमने उन्हें प्रदान किया है, दान करते रहते हैं।

Verse 17 — Surah As-Sajdah 32:17

तो नहीं जानता कोई प्राणी उसे, जो हमने छुपा रखा है उनके लिए आँखों की ठण्डक[1] उसके प्रतिफल में, जो वह कर रहे थे।

Verse 18 — Surah As-Sajdah 32:18

फिर क्या, जो ईमान वाला हो, उसके समान है, जो अवज्ञाकारी हो? वे सब समान नहीं हो सकेंगे।

Verse 19 — Surah As-Sajdah 32:19

जो ईमान लाये तथा सदाचार किये, तो उन्हीं के लिए स्थायी स्वर्ग हैं, अतिथि सत्कार के लिए, उसके बदले, जो वे करते रहे।

Verse 20 — Surah As-Sajdah 32:20

और जो अवज्ञा कर गये, उनका आवास नरक है। जब-जब वे निकलना चाहेंगे उसमें से, तो फेर दिये जायेंगे उसमें तथा कहा जायेगा उनसे कि चखो उस अग्नि की यातना, जिसे तुम झुठला रहे थे।

Verse 21 — Surah As-Sajdah 32:21

और हम अवश्य चखायेंगे उन्हें सांसारिक यातना, बड़ी यातना से पूर्व ताकि वे फिर[1] आयें।

Verse 22 — Surah As-Sajdah 32:22

और उससे अधिक अत्याचारी कौन है, जिसे शिक्षा दी जाये उसके पालनहार की आयतों द्वारा, फिर विमुख हो जाये उनसे? वास्तव में, हम अपराधियों से बदला लेने वाले हैं।

Verse 23 — Surah As-Sajdah 32:23

तथा हमने मूसा को प्रदान की (तौरात) तो आप न हों किसी संदेह में, उस[1] से मिलने में तथा बनाया हमने उसे (तौरात को) मार्गदर्शन इस्राईल की संतान के लिए।

Verse 24 — Surah As-Sajdah 32:24

तो हमने उनमें से अग्रणी बनाये, जो मार्गदर्शन देते रहे हमारे आदेश द्वारा, जब उन्होंने सहन किया तथा हमारी आयतों पर विश्वास[1] करते रहे।

Verse 25 — Surah As-Sajdah 32:25

वस्तुतः, आपका पालनहार ही निर्णय करेगा, उनके बीच प्रलय के दिन जिसमें वे विभेद करते रहे।

Verse 26 — Surah As-Sajdah 32:26

तो क्या मार्गदर्शन नहीं कराया उन्हें कि हमने ध्वस्त कर दिया इससे पूर्व बहुत-से युग के लोगों को, जो चल-फिर रहे थे अपने घरों में। वास्तव में, इसमें बहुत-सी निशानियाँ (शिक्षायें) हैं, तो क्या वे सुनते नहीं हैं

Verse 27 — Surah As-Sajdah 32:27

क्या उन्होंने नहीं देखा कि हम बहा ले जाते हैं, जल को, सूखी भूमि की ओर, फिर उपजाते हैं उसके द्वारा खेतियाँ, खाते हैं जिनमें से उनके चौपाये तथा वे स्वयं। तो क्या वे ग़ौर नहीं करते

Verse 28 — Surah As-Sajdah 32:28

तथा कहते हैं कि कब होगा वह निर्णय यदि तुम सच्चे हो

Verse 29 — Surah As-Sajdah 32:29

आप कह दें: निर्णय के दिन लाभ नहीं देगा काफ़िरों को, उनका ईमान लाना[1] और न उन्हें अवसर दिया जायेगा।

Verse 30 — Surah As-Sajdah 32:30

अतः, आप विमुख हो जायें उनसे तथा प्रतीक्षा करें। ये भी प्रतीक्षा करने वाले हैं।