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Hindi - Chapter 34 - Saba

Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink

Verse 1 — Surah Saba 34:1

सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसके अधिकार में है, जो आकाशों तथा धरती में है और उसी की प्रशंसा है आख़िरत (परलोक) में और वही उपाय जानने वाला, सबसे सूचित है।

Verse 2 — Surah Saba 34:2

वह जानता है, जो कुछ घुसता है धरती के भीतर तथा जो[1] निकलता है उससे तथा जो उतरता है आकाश[2] से और चढ़ता है उसमें[3] तथा वह अति दयावान्, क्षमी है।

Verse 3 — Surah Saba 34:3

तथा कहा काफ़िरों ने कि हमपर प्रलय नहीं आयेगी। आप कह दें: क्यों नहीं? मेरे पालनहार की शपथ! -वह तुमपर अवश्य आयेगी- जो परोक्ष का ज्ञानी है। नहीं छुपा रह सकता उससे कण बराबर (भी) आकाशों तथा धरती में, न उससे छोटी कोई चीज़ और न बड़ी, किन्तु, वह खुली पुस्तक में (अंकित) है।

Verse 4 — Surah Saba 34:4

ताकि[1] वह बदला दे उन्हें, जो ईमान लाये तथा सुकर्म किये। उन्हीं के लिए क्षमा तथा सम्मानित जीविका है।

Verse 5 — Surah Saba 34:5

तथा जिन्होंने प्रयत्न किये हमारी आयतों में विवश[1] करने का, तो यही हैं, जिनके लिए यातना है अति घोर दुःखदायी।

Verse 6 — Surah Saba 34:6

तथा (साक्षात) देख[1] लेंगे वे जिन्हें उसका ज्ञान दिया गया है, जो अवतरित किया गया है आपकी ओर आपके पालनहार की ओर से। वही सत्य है तथा सुपथ दर्शाता है, अति प्रभुत्वशाली, प्रशंसित का सुपथ।

Verse 7 — Surah Saba 34:7

तथा काफ़िरों ने कहाः क्या हम तुम्हें एक ऐसे व्यक्ति को बतायें, जो तुम्हें सूचना देता है कि जब तुम पूर्णतः चूर-चूर हो जाओगे, तो अवश्य तुम एक नई उत्पत्ति में होगे

Verse 8 — Surah Saba 34:8

उसने बना ली है अल्लाह पर एक मिथ्या बात अथवा वह पागल हो गया है। बल्कि जो विश्वास (ईमान) नहीं रखते आख़िरत (परलोक) पर, वे यातना[1] तथा दूर के कुपथ में हैं।

Verse 9 — Surah Saba 34:9

क्या उन्होंने नहीं देखा उसकी ओर, जो उनके आगे तथा उनके पीछे आकाश और धरती है। यदि हम चाहें, तो धंसा दें उनके सहित धरती को अथवा गिरा दें उनपर कोई खण्ड आकाश से। वास्तव में, इसमें एक बड़ी निशानी है प्रत्येक भक्त के लिए, जो ध्यानमग्न हो।

Verse 10 — Surah Saba 34:10

तथा हमने प्रदान किया दावूद को अपना कुछ अनुग्रह,[1] हे पर्वतो! सरुचि महिमा गान करो[2] उसके साथ तथा हे पक्षियो! तथा हमने कोमल कर दिया उसके लिए लाहा को।

Verse 11 — Surah Saba 34:11

कि बनाओ भरपूर कवचें तथा अनुमान रखो उसकी कड़ियों का तथा सदाचार करो। जो कुछ तुम कर रहे हो, उसे मैं देख रहा हूँ।

Verse 12 — Surah Saba 34:12

तथा ( हमने वश में कर दिया) सुलैमान[1] के लिए वायु को। उसका प्रातः चलना एक महीने का तथा संध्या का चलना एक महीने का[2] होता था तथा हमने बहा दिये उसके लिए तांबे के स्रोत तथा कुछ जिन्न कार्यरत थे उसके समक्ष, उसके पालनहार की अनुमति से तथा उनमें से जो फिरेगा हमारे आदेश से, तो हम चखायेंगे[3] उसे भड़कती अग्नि की यातना।

Verse 13 — Surah Saba 34:13

वह बनाते थे उसके लिए, जो वह चाहता था; भवन (मस्जिदें), चित्र, बड़े लगन जलाशयों (तालाबों) के समान तथा भारी देगें, जो हिल न सकें। हे दावूद के परिजनो! कर्म करो कृतज्ञ होकर और मेरे भक्तों में थोड़े ही कृतज्ञ होते हैं।

Verse 14 — Surah Saba 34:14

फिर जब हमने उस (सुलैमान) पर मौत का निर्णय कर दिया, तो जिन्नों को उनके मरण पर एक घुन के सिवा किसी ने सूचित नहीं किया, जो उसकी छड़ी खा रहा था।[1] फिर जब वह गिर गया, तो जिन्नों पर ये बात खुली कि यदि वे परोक्ष का ज्ञान रखते, तो इस अपमानकारी[2] यातना में नहीं पड़े रहते।

Verse 15 — Surah Saba 34:15

सबा[1] की जाति के लिए उनकी बस्तियों में एक निशानी[2] थीः बाग़ थे दायें और बायें। खाओ अपने पालनहार का दिया हुआ और उसके कृतज्ञ रहो। स्वच्छ नगर है तथा अति क्षमि पालनहार।

Verse 16 — Surah Saba 34:16

परन्तु, उन्होंने मुँह फेर लिया, तो हमने भेज दी उनपर बाँध तोड़ बाढ़ तथा बदल दिया हमने उनके दो बाग़ों को, दो कड़वे फलों के बाग़ों और झाऊ तथा कुछ बैरी से।

Verse 17 — Surah Saba 34:17

ये कुफल दिया हमने उनके कृतघ्न होने के कारण तथा हम कृतघ्नों ही को कुफल दिया करते हैं।

Verse 18 — Surah Saba 34:18

और हमने बना दी थी उनके बीच तथा उनकी बस्तियों के बीच, जिनमें हमने सम्पन्नता[1] प्रदान की थी, खुली बस्तियाँ तथा नियत कर दिया था उनमें, चलने का स्थान[2] (कि) चलो उसमें रात्रि तथा दिनों के समय शान्त[3] होकर।

Verse 19 — Surah Saba 34:19

तो उन्होंने कहाः हे हमारे पालनहार! दूरी[1] करदे हमारी यात्राओं के बीच तथा उन्होंने अत्याचार किया अपने ऊपर। अन्ततः, हमने उन्हें कहानियाँ[2] बना दिया और तित्तर-वित्तर कर दिया। वास्तव में, इसमें कई निशानियाँ (शिक्षायें) हैं प्रत्येक अति धैर्यवान, कृतज्ञ के लिए।

Verse 20 — Surah Saba 34:20

तथा सच कर दिया इब्लीस ने उनपर अपना अंकलन।[1] तो उन्होंने अनुसरण किया उसका एक समुदाय को छोड़कर ईमान वालों के।

Verse 21 — Surah Saba 34:21

और नहीं था उसका उनपर कुछ अधिकार (दबाव), किन्तु, ताकि हम जान लें कि कौन ईमान रखता है आख़िरत (परलोक) पर उनमें से, जो उसके विषय में किसी संदेह में हैं तथा आपका पालनहार प्रत्येक चीज़ का निरीक्षक है।

Verse 22 — Surah Saba 34:22

आप कह दें: उन्हें पुकारो[1] जिन्हें तुम (पूज्य) समझते हो अल्लाह के सिवा। वह नहीं अधिकार रखते कण बराबर भी, न आकाशों में न धरती में तथा नहीं है उनका उन दोनों में कोई भाग और नहीं है उस अल्लाह का उनमें से कोई सहायक।

Verse 23 — Surah Saba 34:23

तथा नहीं लाभ देगी अभिस्तावना (सिफ़ारिश) अल्लाह के पास, परन्तु जिसके लिए अनुमति देगा।[1] यहाँ[2] तक कि जब दूर कर दिया जाता है उद्वेग उनके दिलों से, तो वे (फ़रिश्ते) कहते हैं कि तुम्हारे पालनहार ने क्या कहा? वे कहते हैं कि सत्य कहा तथा वह अति उच्च, महान है।

Verse 24 — Surah Saba 34:24

आप (मुश्रिकों) से प्रश्न करें कि कौन जीविका प्रदान करता है तुम्हें, आकाशों[1] तथा धरती से? आप कह दें कि अल्लाह! तथा हम अथवा तुम अवश्य सुपथ पर हैं अथवा खुले कुपथ में हैं।

Verse 25 — Surah Saba 34:25

आप कह दें: तुमसे नहीं प्रश्न किया जायेगा हमारे अपराधों के विषय में और न हमसे प्रश्न किया जायेगा, तुम्हारे कर्मों के[1] संबन्ध में।

Verse 26 — Surah Saba 34:26

आप कह दें कि एकत्र[1] कर देगा हमें हमारा पालनहार। फिर निर्णय कर देगा हमारे बीच सत्य के साथ तथा वही अति निर्णयकारी, सर्वज्ञ है।

Verse 27 — Surah Saba 34:27

आप कह दें कि तनिक मुझे उन्हें दिखा दो, जिन्हें तुमने मिला दिया है अल्लाह के साथ साझी[1] बनाकर? ऐसा कदापि नहीं। बल्कि वही अल्लाह है अत्यंत प्रभावशाली तथा गुणी।

Verse 28 — Surah Saba 34:28

तथा नहीं भेजा है हमने आप[1] को, परन्तु सब मनुष्यों के लिए शुभ सूचना देने तथा सचेत करने वाला बनाकर। किन्तु, अधिक्तर लोग ज्ञान नहीं रखते।

Verse 29 — Surah Saba 34:29

तथा वह कहते[1] हैं कि ये वचन कब पूरा होगा, यदि तुम सत्यवादी हो

Verse 30 — Surah Saba 34:30

आप उनसे कह दें कि एक दिन वचन का निश्चित[1] है। वे नहीं पीछे होंगे उससे क्षण भर और न आगे होंगे।

Verse 31 — Surah Saba 34:31

तथा काफ़िरों ने कहा कि हम कदापि ईमान नहीं लायेंगे इस क़ुर्आन पर और न उसपर, जो इससे पूर्व की पुस्तक हैं और यदि आप देखेंगे इन अत्याचारियों को खड़े हुए अपने पालनहार के समक्ष, तो वे दोषारोपण कर रहे होंगे एक-दूसरे पर। जो निर्बल समझे जा रहे थे, वे कहेंगे उनसे, जो बड़े बन रहे थेः यदि तुम न होते, तो हम अवश्य ईमान लाने वालों[1] में होते।

Verse 32 — Surah Saba 34:32

वे कहेंगे जो बड़े बने हुए थे, उनसे, जो निर्बल समझे जा रहे थेः क्या हमने तुम्हे रोका सुपथ से, जब वह तुम्हारे पास आया? बल्कि तुमही अपराधी थे।

Verse 33 — Surah Saba 34:33

तथा कहेंगे जो निर्बल होंगे, उनसे, जो बड़े (अहंकारी) होंगेःबल्कि रात-दिन के षड्यंत्र[1] ने (ऐसा किया), जब तुम हमें आदेश दे रहे थे कि हम कुफ़्र करें अल्लाह के साथ तथा बनायें उसके साझी तथा वे अपने मन में पछतायेंगे, जब यातना देखेंगे और हम तौक़ डाल देंगे उनके गलों में, जो काफ़िर हो गये, वे नहीं बदला दिये जायेंगे, परन्तु उसी का, जो वे कर रहे थे

Verse 34 — Surah Saba 34:34

और नहीं भेजा हमने किसी बस्ती में कोई सचेतकर्ता (नबी), परन्तु कहा उसके सम्पन्न लोगों नेः हम जिस चीज़ के साथ तुम भेजे गये हो, उसे नहीं मानते हैं।

Verse 35 — Surah Saba 34:35

तथा कहा कि हम अधिक हैं तुमसे धन और संतान में तथा हम यातना ग्रस्त होने वाले नहीं हैं।

Verse 36 — Surah Saba 34:36

आप कह दें कि वास्तव में, मेरा पालनहार फैला देता है जीविका को, जिसके लिए चाहता है और नापकर देता है। किन्तु, अधिक्तर लोग ज्ञान नहीं रखते।

Verse 37 — Surah Saba 34:37

और तुम्हारे धन और तुम्हारी संतान ऐसी नहीं हैं कि तुम्हें हमारे कुछ समीप[1] कर दें। परन्तु, जो ईमान लाये तथा सदाचार करे, तो यही हैं, जिनके लिए दोहरा प्रतिफल है और यही ऊँचे भवनों में शान्त रहने वाले हैं।

Verse 38 — Surah Saba 34:38

तथा जो प्रयास करते हैं हमारी आयतों में विवश करने के लिए,[1] तो वही यातना में ग्रस्त होंगे।

Verse 39 — Surah Saba 34:39

आप कह दें: मेरा पालनहार ही फैलाता है जीविका को जिसके लिए चाहता है, अपने भक्तों में से और तंग करता है उसके लिए और जो भी तुम दान करोगे, तो वह उसका पूरा बदला देगा और वही उत्तम जीविका देने वाला है।

Verse 40 — Surah Saba 34:40

तथा जिस दिन एकत्र करेगा उनसब को, फिर कहेगा फ़रिश्तों सेः क्या यही तुम्हारी इबादत (वंदना) कर रहे थे।

Verse 41 — Surah Saba 34:41

वह कहेंगेः तू पवित्र है! तू ही हमारा संरक्षक है, न कि ये। बल्कि ये इबादत करते रहे जिन्नों[1] की। इनमें अधिक्तर उन्हींपर ईमान लाने वाले हैं।

Verse 42 — Surah Saba 34:42

तो आज तुम[1] में से कोई एक-दूसरे को लाभ अथवा हानि पहुँचाने का अधिकार नहीं रखेगा तथा हम कह देंगे अत्याचारियों से कि तुम अग्नि की यातना चखो, जिसे तुम झुठला रहे थे।

Verse 43 — Surah Saba 34:43

और जब सुनाई जाती हैं उनके समक्ष हमारी खुली आयतें, तो कहते हैं: ये तो एक पुरुष है, जो चाहता है कि तुम्हें रोक दे उन पूज्यों से, जिनकी इबादत करते रहे हैं तुम्हारे पूर्वज तथा उन्होंने कहा कि ये तो बस एक झूठी बनायी हुई बात है तथा कहा काफ़िरों ने इस सत्य को कि ये तो बस एक प्रत्यक्ष (खुला) जादू है।

Verse 44 — Surah Saba 34:44

जबकि हमने नहीं प्रदान की है इन (मक्का वासियों) को कोई पुस्तक, जिसे ये पढ़ते हों तथा न हमने भेजा है इनकी ओर आपसे पहले कोई सचेत करने वाला।

Verse 45 — Surah Saba 34:45

तथा झुठलाया था इनसे पूर्व के लोगों ने और नहीं पहुँचे ये उसके दसवें भाग को भी, जो हमने प्रदान किया था उन्हें। तो उन्होंने झुठला दिया मेरे रसूलों को, अन्ततः, मेरा इन्कार कैसा रहा

Verse 46 — Surah Saba 34:46

आप कह दें कि मैं बस तुम्हें एक बात की नसीह़त कर रहा हूँ कि तुम अल्लाह के लिए दो-दो तथा अकेले-अकेले खड़े हो जाओ। फिर सोचो। तुम्हारे साथी को कोई पागलपन नहीं है।[1] वह तो बस सचेत करने वाले हैं तुम्हें, आगामी कड़ी यातना से।

Verse 47 — Surah Saba 34:47

आप कह दें: मैंने तुमसे कोई बदला माँगा है, तो वह तुम्हारे[1] ही लिए है। मेरा बदला तो बस अल्लाह पर है और वह प्रत्येक वस्तु पर साक्षी है।

Verse 48 — Surah Saba 34:48

आप कह दें कि मेरा पालनहार वह़्यी करता है सत्य की। वह परोक्षों का अति ज्ञानी है।

Verse 49 — Surah Saba 34:49

आप कह दें कि सत्य आ गया और असत्य न (कुछ का) आरंभ कर सकता है और न (उसे) पुनः ला सकता है।

Verse 50 — Surah Saba 34:50

आप कह दें कि यदि मैं कुपथ हो गया, तो मेरे कुपथ होने का (भार) मुझपर है और यदि मैं सुपथ पर हूँ, तो उस वह़्यी के कारण जिसे मेरी ओर मेरा पालनहार उतार रहा है। वह सब कुछ सुनने वाला, समीप है।

Verse 51 — Surah Saba 34:51

तथा यदि आप देखेंगे, जब वे घबराये हुए[1] होंगे, तो उनके खो जाने का कोई उपाय न होगा तथा पकड़ लिए जायेंगे समीप स्थान से।

Verse 52 — Surah Saba 34:52

और कहेंगेः हम उस[1] पर ईमान लाये तथा कहाँ हाथ आ सकता है उनके (ईमान), इतने दूर स्थान[2] से

Verse 53 — Surah Saba 34:53

जबकि उन्होंने कुफ़्र कर दिया पहले उसके साथ और तीर मारते रहे बिन देखे, दूर[1] से।

Verse 54 — Surah Saba 34:54

और रोक बना दी जायेगी उनके तथा उसके बीच, जिसकी वे कामना करेंगे जैसे किया गया इनके जैसों के साथ, इससे पहले। वास्तव में, वे संदेह में पड़े थे।