सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसके अधिकार में है, जो आकाशों तथा धरती में है और उसी की प्रशंसा है आख़िरत (परलोक) में और वही उपाय जानने वाला, सबसे सूचित है।
तथा कहा काफ़िरों ने कि हमपर प्रलय नहीं आयेगी। आप कह दें: क्यों नहीं? मेरे पालनहार की शपथ! -वह तुमपर अवश्य आयेगी- जो परोक्ष का ज्ञानी है। नहीं छुपा रह सकता उससे कण बराबर (भी) आकाशों तथा धरती में, न उससे छोटी कोई चीज़ और न बड़ी, किन्तु, वह खुली पुस्तक में (अंकित) है।
तथा (साक्षात) देख[1] लेंगे वे जिन्हें उसका ज्ञान दिया गया है, जो अवतरित किया गया है आपकी ओर आपके पालनहार की ओर से। वही सत्य है तथा सुपथ दर्शाता है, अति प्रभुत्वशाली, प्रशंसित का सुपथ।
तथा काफ़िरों ने कहाः क्या हम तुम्हें एक ऐसे व्यक्ति को बतायें, जो तुम्हें सूचना देता है कि जब तुम पूर्णतः चूर-चूर हो जाओगे, तो अवश्य तुम एक नई उत्पत्ति में होगे
उसने बना ली है अल्लाह पर एक मिथ्या बात अथवा वह पागल हो गया है। बल्कि जो विश्वास (ईमान) नहीं रखते आख़िरत (परलोक) पर, वे यातना[1] तथा दूर के कुपथ में हैं।
क्या उन्होंने नहीं देखा उसकी ओर, जो उनके आगे तथा उनके पीछे आकाश और धरती है। यदि हम चाहें, तो धंसा दें उनके सहित धरती को अथवा गिरा दें उनपर कोई खण्ड आकाश से। वास्तव में, इसमें एक बड़ी निशानी है प्रत्येक भक्त के लिए, जो ध्यानमग्न हो।
तथा ( हमने वश में कर दिया) सुलैमान[1] के लिए वायु को। उसका प्रातः चलना एक महीने का तथा संध्या का चलना एक महीने का[2] होता था तथा हमने बहा दिये उसके लिए तांबे के स्रोत तथा कुछ जिन्न कार्यरत थे उसके समक्ष, उसके पालनहार की अनुमति से तथा उनमें से जो फिरेगा हमारे आदेश से, तो हम चखायेंगे[3] उसे भड़कती अग्नि की यातना।
वह बनाते थे उसके लिए, जो वह चाहता था; भवन (मस्जिदें), चित्र, बड़े लगन जलाशयों (तालाबों) के समान तथा भारी देगें, जो हिल न सकें। हे दावूद के परिजनो! कर्म करो कृतज्ञ होकर और मेरे भक्तों में थोड़े ही कृतज्ञ होते हैं।
फिर जब हमने उस (सुलैमान) पर मौत का निर्णय कर दिया, तो जिन्नों को उनके मरण पर एक घुन के सिवा किसी ने सूचित नहीं किया, जो उसकी छड़ी खा रहा था।[1] फिर जब वह गिर गया, तो जिन्नों पर ये बात खुली कि यदि वे परोक्ष का ज्ञान रखते, तो इस अपमानकारी[2] यातना में नहीं पड़े रहते।
सबा[1] की जाति के लिए उनकी बस्तियों में एक निशानी[2] थीः बाग़ थे दायें और बायें। खाओ अपने पालनहार का दिया हुआ और उसके कृतज्ञ रहो। स्वच्छ नगर है तथा अति क्षमि पालनहार।
परन्तु, उन्होंने मुँह फेर लिया, तो हमने भेज दी उनपर बाँध तोड़ बाढ़ तथा बदल दिया हमने उनके दो बाग़ों को, दो कड़वे फलों के बाग़ों और झाऊ तथा कुछ बैरी से।
और हमने बना दी थी उनके बीच तथा उनकी बस्तियों के बीच, जिनमें हमने सम्पन्नता[1] प्रदान की थी, खुली बस्तियाँ तथा नियत कर दिया था उनमें, चलने का स्थान[2] (कि) चलो उसमें रात्रि तथा दिनों के समय शान्त[3] होकर।
तो उन्होंने कहाः हे हमारे पालनहार! दूरी[1] करदे हमारी यात्राओं के बीच तथा उन्होंने अत्याचार किया अपने ऊपर। अन्ततः, हमने उन्हें कहानियाँ[2] बना दिया और तित्तर-वित्तर कर दिया। वास्तव में, इसमें कई निशानियाँ (शिक्षायें) हैं प्रत्येक अति धैर्यवान, कृतज्ञ के लिए।
और नहीं था उसका उनपर कुछ अधिकार (दबाव), किन्तु, ताकि हम जान लें कि कौन ईमान रखता है आख़िरत (परलोक) पर उनमें से, जो उसके विषय में किसी संदेह में हैं तथा आपका पालनहार प्रत्येक चीज़ का निरीक्षक है।
आप कह दें: उन्हें पुकारो[1] जिन्हें तुम (पूज्य) समझते हो अल्लाह के सिवा। वह नहीं अधिकार रखते कण बराबर भी, न आकाशों में न धरती में तथा नहीं है उनका उन दोनों में कोई भाग और नहीं है उस अल्लाह का उनमें से कोई सहायक।
तथा नहीं लाभ देगी अभिस्तावना (सिफ़ारिश) अल्लाह के पास, परन्तु जिसके लिए अनुमति देगा।[1] यहाँ[2] तक कि जब दूर कर दिया जाता है उद्वेग उनके दिलों से, तो वे (फ़रिश्ते) कहते हैं कि तुम्हारे पालनहार ने क्या कहा? वे कहते हैं कि सत्य कहा तथा वह अति उच्च, महान है।
आप (मुश्रिकों) से प्रश्न करें कि कौन जीविका प्रदान करता है तुम्हें, आकाशों[1] तथा धरती से? आप कह दें कि अल्लाह! तथा हम अथवा तुम अवश्य सुपथ पर हैं अथवा खुले कुपथ में हैं।
आप कह दें कि तनिक मुझे उन्हें दिखा दो, जिन्हें तुमने मिला दिया है अल्लाह के साथ साझी[1] बनाकर? ऐसा कदापि नहीं। बल्कि वही अल्लाह है अत्यंत प्रभावशाली तथा गुणी।
तथा काफ़िरों ने कहा कि हम कदापि ईमान नहीं लायेंगे इस क़ुर्आन पर और न उसपर, जो इससे पूर्व की पुस्तक हैं और यदि आप देखेंगे इन अत्याचारियों को खड़े हुए अपने पालनहार के समक्ष, तो वे दोषारोपण कर रहे होंगे एक-दूसरे पर। जो निर्बल समझे जा रहे थे, वे कहेंगे उनसे, जो बड़े बन रहे थेः यदि तुम न होते, तो हम अवश्य ईमान लाने वालों[1] में होते।
तथा कहेंगे जो निर्बल होंगे, उनसे, जो बड़े (अहंकारी) होंगेःबल्कि रात-दिन के षड्यंत्र[1] ने (ऐसा किया), जब तुम हमें आदेश दे रहे थे कि हम कुफ़्र करें अल्लाह के साथ तथा बनायें उसके साझी तथा वे अपने मन में पछतायेंगे, जब यातना देखेंगे और हम तौक़ डाल देंगे उनके गलों में, जो काफ़िर हो गये, वे नहीं बदला दिये जायेंगे, परन्तु उसी का, जो वे कर रहे थे
और तुम्हारे धन और तुम्हारी संतान ऐसी नहीं हैं कि तुम्हें हमारे कुछ समीप[1] कर दें। परन्तु, जो ईमान लाये तथा सदाचार करे, तो यही हैं, जिनके लिए दोहरा प्रतिफल है और यही ऊँचे भवनों में शान्त रहने वाले हैं।
आप कह दें: मेरा पालनहार ही फैलाता है जीविका को जिसके लिए चाहता है, अपने भक्तों में से और तंग करता है उसके लिए और जो भी तुम दान करोगे, तो वह उसका पूरा बदला देगा और वही उत्तम जीविका देने वाला है।
तो आज तुम[1] में से कोई एक-दूसरे को लाभ अथवा हानि पहुँचाने का अधिकार नहीं रखेगा तथा हम कह देंगे अत्याचारियों से कि तुम अग्नि की यातना चखो, जिसे तुम झुठला रहे थे।
और जब सुनाई जाती हैं उनके समक्ष हमारी खुली आयतें, तो कहते हैं: ये तो एक पुरुष है, जो चाहता है कि तुम्हें रोक दे उन पूज्यों से, जिनकी इबादत करते रहे हैं तुम्हारे पूर्वज तथा उन्होंने कहा कि ये तो बस एक झूठी बनायी हुई बात है तथा कहा काफ़िरों ने इस सत्य को कि ये तो बस एक प्रत्यक्ष (खुला) जादू है।
तथा झुठलाया था इनसे पूर्व के लोगों ने और नहीं पहुँचे ये उसके दसवें भाग को भी, जो हमने प्रदान किया था उन्हें। तो उन्होंने झुठला दिया मेरे रसूलों को, अन्ततः, मेरा इन्कार कैसा रहा
आप कह दें कि मैं बस तुम्हें एक बात की नसीह़त कर रहा हूँ कि तुम अल्लाह के लिए दो-दो तथा अकेले-अकेले खड़े हो जाओ। फिर सोचो। तुम्हारे साथी को कोई पागलपन नहीं है।[1] वह तो बस सचेत करने वाले हैं तुम्हें, आगामी कड़ी यातना से।
आप कह दें कि यदि मैं कुपथ हो गया, तो मेरे कुपथ होने का (भार) मुझपर है और यदि मैं सुपथ पर हूँ, तो उस वह़्यी के कारण जिसे मेरी ओर मेरा पालनहार उतार रहा है। वह सब कुछ सुनने वाला, समीप है।