वही है, जिसने निरक्षरों[1] में एक रसूल भेजा उन्हीं में से। जो पढ़कर सुनाते हैं उन्हें अल्लाह की आयतें और पवित्र करते हैं उन्हें तथा शिक्षा देते हैं उन्हें पुस्तक (क़ुर्आन) तथा तत्वदर्शिता (सुन्नत)[2] की। यद्यपि वे इससे पूर्व खुले कुपथ में थे।
उनकी दशा जिनपर तौरात का भार रखा गया, फिर तदानुसार कर्म नहीं किया, उस गधे के समान है, जिसके ऊपर पुस्तकें[1] लदी हुई हों। बुरा है उस जाति का उदाहरण, जिन्होंने झुठला दिया अल्लाह की आयतों को और अल्लाह मार्गदर्शन नहीं देता अत्याचारियों को।
आप कह दें कि जिस मौत से तुम भाग रहे हो, वह अवश्य तुमसे मिलकर रहेगी। फिर तुम अवश्य फेर दिये जाओगे परोक्ष (छुपे) तथा प्रत्यक्ष (खुले) के ज्ञानी की ओर। फिर वह तुम्हें सूचित कर देगा उससे, जो तुम करते हो।
हे ईमान वालो! जब अज़ान दी जाये नमाज़ के लिए जुमुआ के दिन, तो दौड़[1] जाओ अल्लाह की याद की ओर तथा त्याग दो क्रय-विक्रय।[2] ये उत्तम है तुम्हारे लिए, यदि तुम जानो।
और जब वे देख लेते हैं कोई व्यापार अथवा खेल, तो उसकी ओर दौड़ पड़ते हैं।[1] तथा आपको छोड़ देते हैं खड़े। आप कह दें कि जो कुछ अल्लाह के पास है, वह उत्तम है खेल तथा व्यापार से और अल्लाह सर्वोत्तम जीविका प्रदान करने वाला है।