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Hindi - Chapter 81 - At-Takwir
Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink
Verse 1 — Surah At-Takwir 81:1
जब सूर्य लपेट दिया जायेगा।
Verse 2 — Surah At-Takwir 81:2
और जब तारे धुमिल हो जायेंगे।
Verse 3 — Surah At-Takwir 81:3
जब पर्वत चलाये जायेंगे।
Verse 4 — Surah At-Takwir 81:4
और जब दस महीने की गाभिन ऊँटनियाँ छोड़ दी जायेंगी।
Verse 5 — Surah At-Takwir 81:5
और जब वन् पशु एकत्र कर दिये जायेंगे।
Verse 6 — Surah At-Takwir 81:6
और जब सागर भड़काये जायेंगे।
Verse 7 — Surah At-Takwir 81:7
और जब प्राण जोड़ दिये जायेंगे।
Verse 8 — Surah At-Takwir 81:8
और जब जीवित गाड़ी गयी कन्या से प्रश्न किया जायेगाः
Verse 9 — Surah At-Takwir 81:9
कि वह किस अपराध के कारण वध की गयी।
Verse 10 — Surah At-Takwir 81:10
तथा जब कर्मपत्र फैला दिये जायेंगे।
Verse 11 — Surah At-Takwir 81:11
और जब आकाश की खाल उतार दी जायेगी।
Verse 12 — Surah At-Takwir 81:12
और जब नरक दहकाई जायेगी।
Verse 13 — Surah At-Takwir 81:13
और जब स्वर्ग समीप लाई जायेगी।
Verse 14 — Surah At-Takwir 81:14
तो प्रत्येक प्राणी जान लेगा कि वह क्या लेकर आया है।
Verse 15 — Surah At-Takwir 81:15
मैं शपथ लेता हूँ उन तारों की, जो पीछे हट जाते हैं।
Verse 16 — Surah At-Takwir 81:16
जो चलते-चलते छुप जाते हैं।
Verse 17 — Surah At-Takwir 81:17
और रात की (शपथ), जब समाप्त होने लगती है।
Verse 18 — Surah At-Takwir 81:18
तथा भोर की, जब उजाला होने लगता है।
Verse 19 — Surah At-Takwir 81:19
ये (क़ुर्आन) एक मान्यवर स्वर्ग दूत का लाया हुआ कथन है।
Verse 20 — Surah At-Takwir 81:20
जो शक्तिशाली है। अर्श (सिंहासन) के मालिक के पास उच्च पद वाला है।
Verse 21 — Surah At-Takwir 81:21
जिसकी बात मानी जाती है और बड़ा अमानतदार है।
Verse 22 — Surah At-Takwir 81:22
और तुम्हारा साथी उन्मत नहीं है।
Verse 23 — Surah At-Takwir 81:23
उसने उसे आकाश में खुले रूप से देखा है।
Verse 24 — Surah At-Takwir 81:24
वह परोक्ष (ग़ैब) की बात बताने में प्रलोभी नहीं है।
Verse 25 — Surah At-Takwir 81:25
ये धिक्कारी शैतान का कथन नहीं है।
Verse 26 — Surah At-Takwir 81:26
फिर तुम कहाँ जा रहे हो
Verse 27 — Surah At-Takwir 81:27
ये संसार वासियों के लिए एक स्मृति (शास्त्र) है।
Verse 28 — Surah At-Takwir 81:28
तुममें से उसके लिए, जो सुधरना चाहता हो।
Verse 29 — Surah At-Takwir 81:29
तथा तुम विश्व के पालनहार के चाहे बिना कुछ नहीं कर सकते।