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    Hindi - Chapter 96

    Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari

    Verse 1

    अपने पालनहार के नाम से पढ़, जिसने पैदा किया।

    Verse 2

    जिस ने मनुष्य को रक्त को लोथड़े से पैदा किया।

    Verse 3

    पढ़, और तेरा पालनहार बड़ा दया वाला है।

    Verse 4

    जिस ने लेखनी के द्वारा ज्ञान सिखाया।

    Verse 5

    इन्सान को उसका ज्ञान दिया जिस को वह नहीं जानता था।

    Verse 6

    वास्तव में, इन्सान सरकशी करता है।

    Verse 7

    इसलिए कि वह स्वयं को निश्चिन्त (धनवान) समझता है।

    Verse 8

    निःसंदेह, फिर तेरे पालनहार की ओर पलट कर जाना है।

    Verse 9

    क्या तुमने उसे देखा जो रोकता है।

    Verse 10

    एक भक्त को, जब वह नमाज़ अदा करे।

    Verse 11

    भला देखो तो, यदि वह सीधे मार्ग पर हो।

    Verse 12

    या अल्लाह से डरने का आदेश देता हो

    Verse 13

    और देखो तो, यदि उसने झुठलाया तथा मुँह फेरा हो

    Verse 14

    क्या वह नहीं जानता कि अल्लाह उसे देख रहा है

    Verse 15

    निश्चय यदि वह नहीं रुकता, तो हम उसे माथे के बल घसेटेंगे।

    Verse 16

    झूठे और पापी माथे के बल।

    Verse 17

    तो वह अपनी सभा को बुला ले।

    Verse 18

    हम भी नरक के फ़रिश्तों को बुलायेंगे।

    Verse 19

    (हे भक्त) कदापि उसकी बात न सुनो तथा सज्दा करो और मेरे समीप हो जाओ।