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Hindi - Chapter 102 - At-Takathur
Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink
Verse 1 — Surah At-Takathur 102:1
तुम्हें एक-दूसरे के मुक़ाबले में बहुतायत के प्रदर्शन और घमंड ने ग़फ़़लत में डाल रखा है
Verse 2 — Surah At-Takathur 102:2
यहाँ तक कि तुम क़ब्रिस्तानों में पहुँच गए
Verse 3 — Surah At-Takathur 102:3
कुछ नहीं, तुम शीघ्र ही जान लोगे
Verse 4 — Surah At-Takathur 102:4
फिर, कुछ नहीं, तुम्हें शीघ्र ही मालूम हो जाएगा
Verse 5 — Surah At-Takathur 102:5
कुछ नहीं, अगर तुम विश्वसनीय ज्ञान के रूप में जान लो! (तो तुम धन-दौलत के पुजारी न बनो)
Verse 6 — Surah At-Takathur 102:6
अवश्य ही तुम भड़कती आग से दो-चार होगे
Verse 7 — Surah At-Takathur 102:7
फिर सुनो, उसे अवश्य देखोगे इस दशा में कि वह यथावत विश्वास होगा
Verse 8 — Surah At-Takathur 102:8
फिर निश्चय ही उस दिन तुमसे नेमतों के बारे में पूछा जाएगा