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Hindi - Chapter 26 - Ash-Shuara
Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink
Verse 1 — Surah Ash-Shuara 26:1
ता॰ सीन॰ मीम॰
Verse 2 — Surah Ash-Shuara 26:2
ये स्पष्ट किताब की आयतें है
Verse 3 — Surah Ash-Shuara 26:3
शायद इसपर कि वे ईमान नहीं लाते, तुम अपने प्राण ही खो बैठोगे
Verse 4 — Surah Ash-Shuara 26:4
यदि हम चाहें तो उनपर आकाश से एक निशानी उतार दें। फिर उनकी गर्दनें उसके आगे झुकी रह जाएँ
Verse 5 — Surah Ash-Shuara 26:5
उनके पास रहमान की ओर से जो नवीन अनुस्मृति भी आती है, वे उससे मुँह फेर ही लेते है
Verse 6 — Surah Ash-Shuara 26:6
अब जबकि वे झुठला चुके है, तो शीघ्र ही उन्हें उसकी हक़ीकत मालूम हो जाएगी, जिसका वे मज़ाक़ उड़ाते रहे है
Verse 7 — Surah Ash-Shuara 26:7
क्या उन्होंने धरती को नहीं देखा कि हमने उसमें कितने ही प्रकार की उमदा चीज़ें पैदा की है
Verse 8 — Surah Ash-Shuara 26:8
निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है, इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
Verse 9 — Surah Ash-Shuara 26:9
और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
Verse 10 — Surah Ash-Shuara 26:10
और जबकि तुम्हारे रह ने मूसा को पुकारा कि "ज़ालिम लोगों के पास जा
Verse 11 — Surah Ash-Shuara 26:11
फ़िरऔन की क़ौम के पास - क्या वे डर नहीं रखते
Verse 12 — Surah Ash-Shuara 26:12
उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मुझे डर है कि वे मुझे झुठला देंगे
Verse 13 — Surah Ash-Shuara 26:13
और मेरा सीना घुटता है और मेरी ज़बान नहीं चलती। इसलिए हारून की ओर भी संदेश भेज दे
Verse 14 — Surah Ash-Shuara 26:14
और मुझपर उनके यहाँ के एक गुनाह का बोझ भी है। इसलिए मैं डरता हूँ कि वे मुझे मार डालेंगे।
Verse 15 — Surah Ash-Shuara 26:15
कहा, "कदापि नहीं, तुम दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ। हम तुम्हारे साथ है, सुनने को मौजूद है
Verse 16 — Surah Ash-Shuara 26:16
अतः तुम दोनो फ़िरऔन को पास जाओ और कहो कि हम सारे संसार के रब के भेजे हुए है
Verse 17 — Surah Ash-Shuara 26:17
कि तू इसराईल की सन्तान को हमारे साथ जाने दे।
Verse 18 — Surah Ash-Shuara 26:18
(फ़िरऔन ने) कहा, "क्या हमने तुझे जबकि तू बच्चा था, अपने यहाँ पाला नहीं था? और तू अपनी अवस्था के कई वर्षों तक हमारे साथ रहा
Verse 19 — Surah Ash-Shuara 26:19
और तूने अपना वह काम किया, जो किया। तू बड़ा ही कृतघ्न है।
Verse 20 — Surah Ash-Shuara 26:20
कहा, ऐसा तो मुझसे उस समय हुआ जबकि मैं चूक गया था
Verse 21 — Surah Ash-Shuara 26:21
फिर जब मुझे तुम्हारा भय हुआ तो मैं तुम्हारे यहाँ से भाग गया। फिर मेरे रब ने मुझे निर्णय-शक्ति प्रदान की और मुझे रसूलों में सम्मिलित किया
Verse 22 — Surah Ash-Shuara 26:22
यही वह उदार अनुग्रह है जिसका रहमान तू मुझपर जताता है कि तूने इसराईल की सन्तान को ग़ुलाम बना रखा है।
Verse 23 — Surah Ash-Shuara 26:23
फ़िरऔन ने कहा, "और यह सारे संसार का रब क्या होता है
Verse 24 — Surah Ash-Shuara 26:24
उसने कहा, "आकाशों और धरती का रब और जो कुछ इन दोनों का मध्य है उसका भी, यदि तुम्हें यकीन हो।
Verse 25 — Surah Ash-Shuara 26:25
उसने अपने आस-पासवालों से कहा, "क्या तुम सुनते नहीं हो
Verse 26 — Surah Ash-Shuara 26:26
कहा, "तुम्हारा रब और तुम्हारे अगले बाप-दादा का रब।
Verse 27 — Surah Ash-Shuara 26:27
बोला, "निश्चय ही तुम्हारा यह रसूल, जो तुम्हारी ओर भेजा गया है, बिलकुल ही पागल है।
Verse 28 — Surah Ash-Shuara 26:28
उसने कहा, "पूर्व और पश्चिम का रब और जो कुछ उनके बीच है उसका भी, यदि तुम कुछ बुद्धि रखते हो।
Verse 29 — Surah Ash-Shuara 26:29
बोला, "यदि तूने मेरे सिवा किसी और को पूज्य एवं प्रभु बनाया, तो मैं तुझे बन्दी बनाकर रहूँगा।
Verse 30 — Surah Ash-Shuara 26:30
उसने कहा, "क्या यदि मैं तेरे पास एक स्पष्ट चीज़ ले आऊँ तब भी
Verse 31 — Surah Ash-Shuara 26:31
बोलाः “अच्छा वह ले आ; यदि तू सच्चा है” ।
Verse 32 — Surah Ash-Shuara 26:32
फिर उसने अपनी लाठी डाल दी, तो अचानक क्या देखते है कि वह एक प्रत्यक्ष अज़गर है
Verse 33 — Surah Ash-Shuara 26:33
और उसने अपना हाथ बाहर खींचा तो फिर क्या देखते है कि वह देखनेवालों के सामने चमक रहा है
Verse 34 — Surah Ash-Shuara 26:34
उसने अपने आस-पास के सरदारों से कहा, "निश्चय ही यह एक बड़ा ही प्रवीण जादूगर है
Verse 35 — Surah Ash-Shuara 26:35
चाहता है कि अपने जादू से तुम्हें तुम्हारी अपनी भूमि से निकाल बाहर करें; तो अब तुम क्या कहते हो
Verse 36 — Surah Ash-Shuara 26:36
उन्होंने कहा, "इसे और इसके भाई को अभी टाले रखिए, और एकत्र करनेवालों को नगरों में भेज दीजिए
Verse 37 — Surah Ash-Shuara 26:37
कि वे प्रत्येक प्रवीण जादूगर को आपके पास ले आएँ।
Verse 38 — Surah Ash-Shuara 26:38
अतएव एक निश्चित दिन के नियत समय पर जादूगर एकत्र कर लिए गए
Verse 39 — Surah Ash-Shuara 26:39
और लोगों से कहा गया, "क्या तुम भी एकत्र होते हो
Verse 40 — Surah Ash-Shuara 26:40
कदाचित हम जादूगरों ही के अनुयायी रह जाएँ, यदि वे विजयी हुए
Verse 41 — Surah Ash-Shuara 26:41
फिर जब जादूगर आए तो उन्होंने फ़िरऔन से कहा, "क्या हमारे लिए कोई प्रतिदान भी है, यदि हम प्रभावी रहे
Verse 42 — Surah Ash-Shuara 26:42
उसने कहा, "हाँ, और निश्चित ही तुम तो उस समय निकटतम लोगों में से हो जाओगे।
Verse 43 — Surah Ash-Shuara 26:43
मूसा ने उनसे कहा, "डालो, जो कुछ तुम्हें डालना है।
Verse 44 — Surah Ash-Shuara 26:44
तब उन्होंने अपनी रस्सियाँ और लाठियाँ डाल दी और बोले, "फ़िरऔन के प्रताप से हम ही विजयी रहेंगे।
Verse 45 — Surah Ash-Shuara 26:45
फिर मूसा ने अपनी लाठी फेकी तो क्या देखते है कि वह उसे स्वाँग को, जो वे रचाते है, निगलती जा रही है
Verse 46 — Surah Ash-Shuara 26:46
इसपर जादूगर सजदे में गिर पड़े
Verse 47 — Surah Ash-Shuara 26:47
वे बोल उठे, "हम सारे संसार के रब पर ईमान ले आए
Verse 48 — Surah Ash-Shuara 26:48
मूसा और हारून के रब पर
Verse 49 — Surah Ash-Shuara 26:49
उसने कहा, "तुमने उसको मान लिया, इससे पहले कि मैं तुम्हें अनुमति देता। निश्चय ही वह तुम सबका प्रमुख है, जिसने तुमको जादू सिखाया है। अच्छा, शीघ्र ही तुम्हें मालूम हुआ जाता है! मैं तुम्हारे हाथ और पाँव विपरीत दिशाओं से कटवा दूँगा और तुम सभी को सूली पर चढ़ा दूँगा।
Verse 50 — Surah Ash-Shuara 26:50
उन्होंने कहा, "कुछ हरज नहीं; हम तो अपने रब ही की ओर पलटकर जानेवाले है
Verse 51 — Surah Ash-Shuara 26:51
हमें तो इसी की लालसा है कि हमारा रब हमारी ख़ताओं को क्षमा कर दें, क्योंकि हम सबसे पहले ईमान लाए।
Verse 52 — Surah Ash-Shuara 26:52
हमने मूसा की ओर प्रकाशना की, "मेरे बन्दों को लेकर रातों-रात निकल जा। निश्चय ही तुम्हारा पीछा किया जाएगा।
Verse 53 — Surah Ash-Shuara 26:53
इसपर फ़िरऔन ने एकत्र करनेवालों को नगर में भेजा
Verse 54 — Surah Ash-Shuara 26:54
कि "यह गिरे-पड़े थोड़े लोगों का एक गिरोह है
Verse 55 — Surah Ash-Shuara 26:55
और ये हमें क्रुद्ध कर रहे है।
Verse 56 — Surah Ash-Shuara 26:56
और हम चौकन्ना रहनेवाले लोग है।
Verse 57 — Surah Ash-Shuara 26:57
इस प्रकार हम उन्हें बाग़ों और स्रोतों
Verse 58 — Surah Ash-Shuara 26:58
और ख़जानों और अच्छे स्थान से निकाल लाए
Verse 59 — Surah Ash-Shuara 26:59
ऐसा ही हम करते है और इनका वारिस हमने इसराईल की सन्तान को बना दिया
Verse 60 — Surah Ash-Shuara 26:60
सुबह-तड़के उन्होंने उनका पीछा किया
Verse 61 — Surah Ash-Shuara 26:61
फिर जब दोनों गिरोहों ने एक-दूसरे को देख लिया तो मूसा के साथियों ने कहा, "हम तो पकड़े गए
Verse 62 — Surah Ash-Shuara 26:62
उसने कहा, "कदापि नहीं, मेरे साथ मेरा रब है। वह अवश्य मेरा मार्गदर्शन करेगा।
Verse 63 — Surah Ash-Shuara 26:63
तब हमने मूसा की ओर प्रकाशना की, "अपनी लाठी सागर पर मार।
Verse 64 — Surah Ash-Shuara 26:64
और हम दूसरों को भी निकट ले आए
Verse 65 — Surah Ash-Shuara 26:65
हमने मूसा को और उन सबको जो उसके साथ थे, बचा लिया
Verse 66 — Surah Ash-Shuara 26:66
और दूसरों को डूबो दिया
Verse 67 — Surah Ash-Shuara 26:67
निस्संदेह इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
Verse 68 — Surah Ash-Shuara 26:68
और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
Verse 69 — Surah Ash-Shuara 26:69
और उन्हें इबराहीम का वृत्तान्त सुनाओ
Verse 70 — Surah Ash-Shuara 26:70
जबकि उसने अपने बाप और अपनी क़ौंम के लोगों से कहा, "तुम क्या पूजते हो
Verse 71 — Surah Ash-Shuara 26:71
उन्होंने कहा, "हम बुतों की पूजा करते है, हम तो उन्हीं की सेवा में लगे रहेंगे।
Verse 72 — Surah Ash-Shuara 26:72
उसने कहा, "क्या ये तुम्हारी सुनते है, जब तुम पुकारते हो
Verse 73 — Surah Ash-Shuara 26:73
या ये तुम्हें कुछ लाभ या हानि पहुँचाते है
Verse 74 — Surah Ash-Shuara 26:74
उन्होंने कहा, "नहीं, बल्कि हमने तो अपने बाप-दादा को ऐसा ही करते पाया है।
Verse 75 — Surah Ash-Shuara 26:75
उसने कहा, "क्या तुमने उनपर विचार भी किया कि जिन्हें तुम पूजते हो
Verse 76 — Surah Ash-Shuara 26:76
तुम और तुम्हारे पहले के बाप-दादा
Verse 77 — Surah Ash-Shuara 26:77
वे सब तो मेरे शत्रु है, सिवाय सारे संसार के रब के
Verse 78 — Surah Ash-Shuara 26:78
जिसने मुझे पैदा किया और फिर वही मेरा मार्गदर्शन करता है
Verse 79 — Surah Ash-Shuara 26:79
और वही है जो मुझे खिलाता और पिलाता है
Verse 80 — Surah Ash-Shuara 26:80
और जब मैं बीमार होता हूँ, तो वही मुझे अच्छा करता है
Verse 81 — Surah Ash-Shuara 26:81
और वही है जो मुझे मारेगा, फिर मुझे जीवित करेगा
Verse 82 — Surah Ash-Shuara 26:82
और वही है जिससे मुझे इसकी आकांक्षा है कि बदला दिए जाने के दिन वह मेरी ख़ता माफ़ कर देगा
Verse 83 — Surah Ash-Shuara 26:83
ऐ मेरे रब! मुझे निर्णय-शक्ति प्रदान कर और मुझे योग्य लोगों के साथ मिला।
Verse 84 — Surah Ash-Shuara 26:84
और बाद के आनेवालों में से मुझे सच्ची ख़्याति प्रदान कर
Verse 85 — Surah Ash-Shuara 26:85
और मुझे नेमत भरी जन्नत के वारिसों में सम्मिलित कर
Verse 86 — Surah Ash-Shuara 26:86
और मेरे बाप को क्षमा कर दे। निश्चय ही वह पथभ्रष्ट लोगों में से है
Verse 87 — Surah Ash-Shuara 26:87
और मुझे उस दिन रुसवा न कर, जब लोग जीवित करके उठाए जाएँगे।
Verse 88 — Surah Ash-Shuara 26:88
जिस दिन न माल काम आएगा और न औलाद
Verse 89 — Surah Ash-Shuara 26:89
सिवाय इसके कि कोई भला-चंगा दिल लिए हुए अल्लाह के पास आया हो।
Verse 90 — Surah Ash-Shuara 26:90
और डर रखनेवालों के लिए जन्नत निकट लाई जाएगी
Verse 91 — Surah Ash-Shuara 26:91
और भडकती आग पथभ्रष्टि लोगों के लिए प्रकट कर दी जाएगी
Verse 92 — Surah Ash-Shuara 26:92
और उनसे कहा जाएगा, "कहाँ है वे जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते रहे हो
Verse 93 — Surah Ash-Shuara 26:93
क्या वे तुम्हारी कुछ सहायता कर रहे है या अपना ही बचाव कर सकते है
Verse 94 — Surah Ash-Shuara 26:94
फिर वे उसमें औंधे झोक दिए जाएँगे, वे और बहके हुए लोग
Verse 95 — Surah Ash-Shuara 26:95
और इबलीस की सेनाएँ, सबके सब।
Verse 96 — Surah Ash-Shuara 26:96
वे वहाँ आपस में झगड़ते हुए कहेंगे
Verse 97 — Surah Ash-Shuara 26:97
अल्लाह की क़सम! निश्चय ही हम खुली गुमराही में थे
Verse 98 — Surah Ash-Shuara 26:98
जबकि हम तुम्हें सारे संसार के रब के बराबर ठहरा रहे थे
Verse 99 — Surah Ash-Shuara 26:99
और हमें तो बस उन अपराधियों ने ही पथभ्रष्ट किया
Verse 100 — Surah Ash-Shuara 26:100
अब न हमारा कोई सिफ़ारिशी है
Verse 101 — Surah Ash-Shuara 26:101
और न घनिष्ट मित्र
Verse 102 — Surah Ash-Shuara 26:102
क्या ही अच्छा होता कि हमें एक बार फिर पलटना होता, तो हम मोमिनों में से हो जाते
Verse 103 — Surah Ash-Shuara 26:103
निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकरतर माननेवाले नहीं
Verse 104 — Surah Ash-Shuara 26:104
और निस्संदेह तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
Verse 105 — Surah Ash-Shuara 26:105
नूह की क़ौम ने रसूलों को झुठलाया
Verse 106 — Surah Ash-Shuara 26:106
जबकि उनसे उनके भाई नूह ने कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते
Verse 107 — Surah Ash-Shuara 26:107
निस्संदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ
Verse 108 — Surah Ash-Shuara 26:108
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरा कहा मानो
Verse 109 — Surah Ash-Shuara 26:109
मैं इस काम के बदले तुमसे कोई बदला नहीं माँगता। मेरा बदला तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है
Verse 110 — Surah Ash-Shuara 26:110
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो।
Verse 111 — Surah Ash-Shuara 26:111
उन्होंने कहा, "क्या हम तेरी बात मान लें, जबकि तेरे पीछे तो अत्यन्त नीच लोग चल रहे है
Verse 112 — Surah Ash-Shuara 26:112
उसने कहा, "मुझे क्या मालूम कि वे क्या करते रहे है
Verse 113 — Surah Ash-Shuara 26:113
उनका हिसाब तो बस मेरे रब के ज़िम्मे है। क्या ही अच्छा होता कि तुममें चेतना होती।
Verse 114 — Surah Ash-Shuara 26:114
और मैं ईमानवालों को धुत्कारनेवाला नहीं हूँ।
Verse 115 — Surah Ash-Shuara 26:115
मैं तो बस स्पष्ट रूप से एक सावधान करनेवाला हूँ।
Verse 116 — Surah Ash-Shuara 26:116
उन्होंने कहा, "यदि तू बाज़ न आया ऐ नूह, तो तू संगसार होकर रहेगा।
Verse 117 — Surah Ash-Shuara 26:117
उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मेरी क़ौम के लोगों ने तो मुझे झुठला दिया
Verse 118 — Surah Ash-Shuara 26:118
अब मेरे और उनके बीच दो टूक फ़ैसला कर दे और मुझे और जो ईमानवाले मेरे साथ है, उन्हें बचा ले
Verse 119 — Surah Ash-Shuara 26:119
अतः हमने उसे और जो उसके साथ भरी हुई नौका में थे बचा लिया
Verse 120 — Surah Ash-Shuara 26:120
और उसके पश्चात शेष लोगों को डूबो दिया
Verse 121 — Surah Ash-Shuara 26:121
निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
Verse 122 — Surah Ash-Shuara 26:122
और निस्संदेह तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
Verse 123 — Surah Ash-Shuara 26:123
आद ने रसूलों को झूठलाया
Verse 124 — Surah Ash-Shuara 26:124
जबकि उनके भाई हूद ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते
Verse 125 — Surah Ash-Shuara 26:125
मैं तो तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ
Verse 126 — Surah Ash-Shuara 26:126
अतः तुम अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा मानो
Verse 127 — Surah Ash-Shuara 26:127
मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता। मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़ि्म्मे है।
Verse 128 — Surah Ash-Shuara 26:128
क्या तुम प्रत्येक उच्च स्थान पर व्यर्थ एक स्मारक का निर्माण करते रहोगे
Verse 129 — Surah Ash-Shuara 26:129
और भव्य महल बनाते रहोगे, मानो तुम्हें सदैव रहना है
Verse 130 — Surah Ash-Shuara 26:130
और जब किसी पर हाथ डालते हो तो बिलकुल निर्दय अत्याचारी बनकर हाथ डालते हो
Verse 131 — Surah Ash-Shuara 26:131
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो
Verse 132 — Surah Ash-Shuara 26:132
उसका डर रखो जिसने तुम्हें वे चीज़े पहुँचाई जिनको तुम जानते हो
Verse 133 — Surah Ash-Shuara 26:133
उसने तुम्हारी सहायता की चौपायों और बेटों से
Verse 134 — Surah Ash-Shuara 26:134
और बाग़ो और स्रोतो से
Verse 135 — Surah Ash-Shuara 26:135
निश्चय ही मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े दिन की यातना का भय है।
Verse 136 — Surah Ash-Shuara 26:136
उन्होंने कहा, "हमारे लिए बराबर है चाहे तुम नसीहत करो या नसीहत करने वाले न बनो।
Verse 137 — Surah Ash-Shuara 26:137
यह तो बस पहले लोगों की पुरानी आदत है
Verse 138 — Surah Ash-Shuara 26:138
और हमें कदापि यातना न दी जाएगी।
Verse 139 — Surah Ash-Shuara 26:139
अन्ततः उन्होंने उन्हें झुठला दिया जो हमने उनको विनष्ट कर दिया। बेशक इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
Verse 140 — Surah Ash-Shuara 26:140
और बेशक तुम्हारा रब ही है, जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
Verse 141 — Surah Ash-Shuara 26:141
समूद ने रसूलों को झुठलाया
Verse 142 — Surah Ash-Shuara 26:142
जबकि उसके भाई सालेह ने उससे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते
Verse 143 — Surah Ash-Shuara 26:143
निस्संदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ
Verse 144 — Surah Ash-Shuara 26:144
अतः तुम अल्लाह का डर रखो और मेरी बात मानो
Verse 145 — Surah Ash-Shuara 26:145
मैं इस काम पर तुमसे कोई बदला नहीं माँगता। मेरा बदला तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है
Verse 146 — Surah Ash-Shuara 26:146
क्या तुम यहाँ जो कुछ है उसके बीच, निश्चिन्त छोड़ दिए जाओगे
Verse 147 — Surah Ash-Shuara 26:147
बाग़ों और स्रोतों
Verse 148 — Surah Ash-Shuara 26:148
और खेतों और उन खजूरों में जिनके गुच्छे तरो ताज़ा और गुँथे हुए है
Verse 149 — Surah Ash-Shuara 26:149
तुम पहाड़ों को काट-काटकर इतराते हुए घर बनाते हो
Verse 150 — Surah Ash-Shuara 26:150
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो
Verse 151 — Surah Ash-Shuara 26:151
और उन हद से गुज़र जानेवालों की आज्ञा का पालन न करो
Verse 152 — Surah Ash-Shuara 26:152
जो धरती में बिगाड़ पैदा करते है, और सुधार का काम नहीं करते।
Verse 153 — Surah Ash-Shuara 26:153
उन्होंने कहा, "तू तो बस जादू का मारा हुआ है।
Verse 154 — Surah Ash-Shuara 26:154
तू बस हमारे ही जैसा एक आदमी है। यदि तू सच्चा है, तो कोई निशानी ले आ।
Verse 155 — Surah Ash-Shuara 26:155
उसने कहा, "यह ऊँटनी है। एक दिन पानी पीने की बारी इसकी है और एक नियत दिन की बारी पानी लेने की तुम्हारी है
Verse 156 — Surah Ash-Shuara 26:156
तकलीफ़ पहुँचाने के लिए इसे हाथ न लगाना, अन्यथा एक बड़े दिन की यातना तुम्हें आ लेगी।
Verse 157 — Surah Ash-Shuara 26:157
किन्तु उन्होंने उसकी कूचें काट दी। फिर पछताते रह गए
Verse 158 — Surah Ash-Shuara 26:158
अन्ततः यातना ने उन्हें आ दबोचा। निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
Verse 159 — Surah Ash-Shuara 26:159
और निस्संदेह तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयाशील है
Verse 160 — Surah Ash-Shuara 26:160
लूत की क़ौम के लोगों ने रसूलों को झुठलाया
Verse 161 — Surah Ash-Shuara 26:161
जबकि उनके भाई लूत ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते
Verse 162 — Surah Ash-Shuara 26:162
मैं तो तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ
Verse 163 — Surah Ash-Shuara 26:163
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो
Verse 164 — Surah Ash-Shuara 26:164
मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता, मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है
Verse 165 — Surah Ash-Shuara 26:165
क्या सारे संसारवालों में से तुम ही ऐसे हो जो पुरुषों के पास जाते हो
Verse 166 — Surah Ash-Shuara 26:166
और अपनी पत्नियों को, जिन्हें तुम्हारे रब ने तुम्हारे लिए पैदा किया, छोड़ देते हो? इतना ही नहीं, बल्कि तुम हद से आगे बढ़े हुए लोग हो।
Verse 167 — Surah Ash-Shuara 26:167
उन्होंने कहा, "यदि तू बाज़ न आया, ऐ लतू! तो तू अवश्य ही निकाल बाहर किया जाएगा।
Verse 168 — Surah Ash-Shuara 26:168
उसने कहा, "मैं तुम्हारे कर्म से अत्यन्त विरक्त हूँ।
Verse 169 — Surah Ash-Shuara 26:169
ऐ मेरे रब! मुझे और मेरे लोगों को, जो कुछ ये करते है उसके परिणाम से, बचा ले।
Verse 170 — Surah Ash-Shuara 26:170
अन्ततः हमने उसे और उसके सारे लोगों को बचा लिया
Verse 171 — Surah Ash-Shuara 26:171
सिवाय एक बुढ़िया के जो पीछे रह जानेवालों में थी
Verse 172 — Surah Ash-Shuara 26:172
फिर शेष दूसरे लोगों को हमने विनष्ट कर दिया।
Verse 173 — Surah Ash-Shuara 26:173
और हमने उनपर एक बरसात बरसाई। और यह चेताए हुए लोगों की बहुत ही बुरी वर्षा थी
Verse 174 — Surah Ash-Shuara 26:174
निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
Verse 175 — Surah Ash-Shuara 26:175
और निश्चय ही तुम्हारा रब बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
Verse 176 — Surah Ash-Shuara 26:176
अल-ऐकावालों ने रसूलों को झुठलाया
Verse 177 — Surah Ash-Shuara 26:177
जबकि शुऐब ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते
Verse 178 — Surah Ash-Shuara 26:178
मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ
Verse 179 — Surah Ash-Shuara 26:179
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो
Verse 180 — Surah Ash-Shuara 26:180
मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता। मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है
Verse 181 — Surah Ash-Shuara 26:181
तुम पूरा-पूरा पैमाना भरो और घाटा न दो
Verse 182 — Surah Ash-Shuara 26:182
और ठीक तराज़ू से तौलो
Verse 183 — Surah Ash-Shuara 26:183
और लोगों को उनकी चीज़ों में घाटा न दो और धरती में बिगाड़ और फ़साद मचाते मत फिरो
Verse 184 — Surah Ash-Shuara 26:184
उसका डर रखो जिसने तुम्हें और पिछली नस्लों को पैदा किया हैं।
Verse 185 — Surah Ash-Shuara 26:185
उन्होंने कहा, "तू तो बस जादू का मारा हुआ है
Verse 186 — Surah Ash-Shuara 26:186
और तू बस हमारे ही जैसा एक आदमी है और हम तो तुझे झूठा समझते है
Verse 187 — Surah Ash-Shuara 26:187
फिर तू हमपर आकाश को कोई टुकड़ा गिरा दे, यदि तू सच्चा है।
Verse 188 — Surah Ash-Shuara 26:188
उसने कहा, " मेरा रब भली-भाँति जानता है जो कुछ तुम कर रहे हो।
Verse 189 — Surah Ash-Shuara 26:189
किन्तु उन्होंने उसे झुठला दिया। फिर छायावाले दिन की यातना ने आ लिया। निश्चय ही वह एक बड़े दिन की यातना थी
Verse 190 — Surah Ash-Shuara 26:190
निस्संदेह इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
Verse 191 — Surah Ash-Shuara 26:191
और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है, जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
Verse 192 — Surah Ash-Shuara 26:192
निश्चय ही यह (क़ुरआन) सारे संसार के रब की अवतरित की हुई चीज़ है
Verse 193 — Surah Ash-Shuara 26:193
इसको लेकर तुम्हारे हृदय पर एक विश्वसनीय आत्मा उतरी है
Verse 194 — Surah Ash-Shuara 26:194
ताकि तुम सावधान करनेवाले हो
Verse 195 — Surah Ash-Shuara 26:195
स्पष्ट अरबी भाषा में
Verse 196 — Surah Ash-Shuara 26:196
और निस्संदेह यह पिछले लोगों की किताबों में भी मौजूद है
Verse 197 — Surah Ash-Shuara 26:197
क्या यह उनके लिए कोई निशानी नहीं है कि इसे बनी इसराईल के विद्वान जानते है
Verse 198 — Surah Ash-Shuara 26:198
यदि हम इसे ग़ैर अरबी भाषी पर भी उतारते
Verse 199 — Surah Ash-Shuara 26:199
और वह इसे उन्हें पढ़कर सुनाता तब भी वे इसे माननेवाले न होते
Verse 200 — Surah Ash-Shuara 26:200
इसी प्रकार हमने इसे अपराधियों के दिलों में पैठाया है
Verse 201 — Surah Ash-Shuara 26:201
वे इसपर ईमान लाने को नहीं, जब तक कि दुखद यातना न देख लें
Verse 202 — Surah Ash-Shuara 26:202
फिर जब वह अचानक उनपर आ जाएगी और उन्हें ख़बर भी न होगी
Verse 203 — Surah Ash-Shuara 26:203
तब वे कहेंगे, "क्या हमें कुछ मुहलत मिल सकती है
Verse 204 — Surah Ash-Shuara 26:204
तो क्या वे लोग हमारी यातना के लिए जल्दी मचा रहे है
Verse 205 — Surah Ash-Shuara 26:205
क्या तुमने कुछ विचार किया? यदि हम उन्हें कुछ वर्षों तक सुख भोगने दें
Verse 206 — Surah Ash-Shuara 26:206
फिर उनपर वह चीज़ आ जाए, जिससे उन्हें डराया जाता रहा है
Verse 207 — Surah Ash-Shuara 26:207
तो जो सुख उन्हें मिला होगा वह उनके कुछ काम न आएगा
Verse 208 — Surah Ash-Shuara 26:208
हमने किसी बस्ती को भी इसके बिना विनष्ट नहीं किया कि उसके लिए सचेत करनेवाले याददिहानी के लिए मौजूद रहे हैं।
Verse 209 — Surah Ash-Shuara 26:209
हम कोई ज़ालिम नहीं है
Verse 210 — Surah Ash-Shuara 26:210
इसे शैतान लेकर नहीं उतरे हैं।
Verse 211 — Surah Ash-Shuara 26:211
न यह उन्हें फबता ही है और न ये उनके बस का ही है
Verse 212 — Surah Ash-Shuara 26:212
वे तो इसके सुनने से भी दूर रखे गए है
Verse 213 — Surah Ash-Shuara 26:213
अतः अल्लाह के साथ दूसरे इष्ट-पूज्य को न पुकारना, अन्यथा तुम्हें भी यातना दी जाएगी
Verse 214 — Surah Ash-Shuara 26:214
और अपने निकटतम नातेदारों को सचेत करो
Verse 215 — Surah Ash-Shuara 26:215
और जो ईमानवाले तुम्हारे अनुयायी हो गए है, उनके लिए अपनी भुजाएँ बिछाए रखो
Verse 216 — Surah Ash-Shuara 26:216
किन्तु यदि वे तुम्हारी अवज्ञा करें तो कह दो, "जो कुछ तुम करते हो, उसकी ज़िम्मेदारी से मं1 बरी हूँ।
Verse 217 — Surah Ash-Shuara 26:217
और उस प्रभुत्वशाली और दया करनेवाले पर भरोसा रखो
Verse 218 — Surah Ash-Shuara 26:218
जो तुम्हें देख रहा होता है, जब तुम खड़े होते हो
Verse 219 — Surah Ash-Shuara 26:219
और सजदा करनेवालों में तुम्हारे चलत-फिरत को भी वह देखता है
Verse 220 — Surah Ash-Shuara 26:220
निस्संदेह वह भली-भाँति सुनता-जानता है
Verse 221 — Surah Ash-Shuara 26:221
क्या मैं तुम्हें बताऊँ कि शैतान किसपर उतरते है
Verse 222 — Surah Ash-Shuara 26:222
वे प्रत्येक ढोंग रचनेवाले गुनाहगार पर उतरते है
Verse 223 — Surah Ash-Shuara 26:223
वे कान लगाते है और उनमें से अधिकतर झूठे होते है
Verse 224 — Surah Ash-Shuara 26:224
रहे कवि, तो उनके पीछे बहके हुए लोग ही चला करते है।
Verse 225 — Surah Ash-Shuara 26:225
क्या तुमने देखा नहीं कि वे हर घाटी में बहके फिरते हैं
Verse 226 — Surah Ash-Shuara 26:226
और कहते वह है जो करते नहीं
Verse 227 — Surah Ash-Shuara 26:227
वे नहीं जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए और अल्लाह को अधिक .याद किया। औऱ इसके बाद कि उनपर ज़ुल्म किया गया तो उन्होंने उसका प्रतिकार किया और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया, उन्हें जल्द ही मालूम हो जाएगा कि वे किस जगह पलटते हैं