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Hindi - Chapter 33 - Al-Ahzab

Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink

Verse 58 — Surah Al-Ahzab 33:58

और जो लोग ईमानवाले पुरुषों और ईमानवाली स्त्रियों को, बिना इसके कि उन्होंने कुछ किया हो (आरोप लगाकर), दुख पहुँचाते है, उन्होंने तो बड़े मिथ्यारोपण और प्रत्यक्ष गुनाह का बोझ अपने ऊपर उठा लिया