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Hindi - Chapter 56 - Al-Waqiah
Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink
Verse 1 — Surah Al-Waqiah 56:1
जब घटित होनेवाली (घड़ी) घटित हो जाएगी
Verse 2 — Surah Al-Waqiah 56:2
उसके घटित होने में कुछ भी झुठ नहीं
Verse 3 — Surah Al-Waqiah 56:3
पस्त करनेवाली होगी, ऊँचा करनेवाली थी
Verse 4 — Surah Al-Waqiah 56:4
जब धरती थरथराकर काँप उठेगी
Verse 5 — Surah Al-Waqiah 56:5
और पहाड़ टूटकर चूर्ण-विचुर्ण हो जाएँगे
Verse 6 — Surah Al-Waqiah 56:6
कि वे बिखरे हुए धूल होकर रह जाएँगे
Verse 7 — Surah Al-Waqiah 56:7
और तुम लोग तीन प्रकार के हो जाओगे
Verse 8 — Surah Al-Waqiah 56:8
तो दाहिने हाथ वाले (सौभाग्यशाली), कैसे होंगे दाहिने हाथ वाले
Verse 9 — Surah Al-Waqiah 56:9
और बाएँ हाथ वाले (दुर्भाग्यशाली), कैसे होंगे बाएँ हाथ वाले
Verse 10 — Surah Al-Waqiah 56:10
और आगे बढ़ जानेवाले तो आगे बढ़ जानेवाले ही है
Verse 11 — Surah Al-Waqiah 56:11
वही (अल्लाह के) निकटवर्ती है
Verse 12 — Surah Al-Waqiah 56:12
नेमत भरी जन्नतों में होंगे
Verse 13 — Surah Al-Waqiah 56:13
अगलों में से तो बहुत-से होंगे
Verse 14 — Surah Al-Waqiah 56:14
किन्तु पिछलों में से कम ही
Verse 15 — Surah Al-Waqiah 56:15
जड़ित तख़्तो पर
Verse 16 — Surah Al-Waqiah 56:16
तकिया लगाए आमने-सामने होंगे
Verse 17 — Surah Al-Waqiah 56:17
उनके पास किशोर होंगे जो सदैव किशोरावस्था ही में रहेंगे
Verse 18 — Surah Al-Waqiah 56:18
प्याले और आफ़ताबे (जग) और विशुद्ध पेय से भरा हुआ पात्र लिए फिर रहे होंगे
Verse 19 — Surah Al-Waqiah 56:19
जिस (के पीने) से न तो उन्हें सिर दर्द होगा और न उनकी बुद्धि में विकार आएगा
Verse 20 — Surah Al-Waqiah 56:20
और स्वादिष्ट॥ फल जो वे पसन्द करें
Verse 21 — Surah Al-Waqiah 56:21
और पक्षी का मांस जो वे चाह
Verse 22 — Surah Al-Waqiah 56:22
और बड़ी आँखोंवाली हूरें
Verse 23 — Surah Al-Waqiah 56:23
मानो छिपाए हुए मोती हो
Verse 24 — Surah Al-Waqiah 56:24
यह सब उसके बदले में उन्हें प्राप्त होगा जो कुछ वे करते रहे
Verse 25 — Surah Al-Waqiah 56:25
उसमें वे न कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न गुनाह की बात
Verse 26 — Surah Al-Waqiah 56:26
सिवाय इस बात के कि "सलाम हो, सलाम हो
Verse 27 — Surah Al-Waqiah 56:27
रहे सौभाग्यशाली लोग, तो सौभाग्यशालियों का क्या कहना
Verse 28 — Surah Al-Waqiah 56:28
वे वहाँ होंगे जहाँ बिन काँटों के बेर होंगे
Verse 29 — Surah Al-Waqiah 56:29
और गुच्छेदार केले
Verse 30 — Surah Al-Waqiah 56:30
दूर तक फैली हुई छाँव
Verse 31 — Surah Al-Waqiah 56:31
बहता हुआ पानी
Verse 32 — Surah Al-Waqiah 56:32
बहुत-सा स्वादिष्ट; फल
Verse 33 — Surah Al-Waqiah 56:33
जिसका सिलसिला टूटनेवाला न होगा और न उसपर कोई रोक-टोक होगी
Verse 34 — Surah Al-Waqiah 56:34
उच्चकोटि के बिछौने होंगे
Verse 35 — Surah Al-Waqiah 56:35
(और वहाँ उनकी पत्नियों को) निश्चय ही हमने एक विशेष उठान पर उठान पर उठाया
Verse 36 — Surah Al-Waqiah 56:36
और हमने उन्हे कुँवारियाँ बनाया
Verse 37 — Surah Al-Waqiah 56:37
प्रेम दर्शानेवाली और समायु
Verse 38 — Surah Al-Waqiah 56:38
सौभाग्यशाली लोगों के लिए
Verse 39 — Surah Al-Waqiah 56:39
वे अगलों में से भी अधिक होगे
Verse 40 — Surah Al-Waqiah 56:40
और पिछलों में से भी अधिक होंगे
Verse 41 — Surah Al-Waqiah 56:41
रहे दुर्भाग्यशाली लोग, तो कैसे होंगे दुर्भाग्यशाली लोग
Verse 42 — Surah Al-Waqiah 56:42
गर्म हवा और खौलते हुए पानी में होंगे
Verse 43 — Surah Al-Waqiah 56:43
और काले धुएँ की छाँव में
Verse 44 — Surah Al-Waqiah 56:44
जो न ठंडी होगी और न उत्तम और लाभप्रद
Verse 45 — Surah Al-Waqiah 56:45
वे इससे पहले सुख-सम्पन्न थे
Verse 46 — Surah Al-Waqiah 56:46
और बड़े गुनाह पर अड़े रहते थे
Verse 47 — Surah Al-Waqiah 56:47
कहते थे, "क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी और हड्डियाँ होकर रहे जाएँगे, तो क्या हम वास्तव में उठाए जाएँगे
Verse 48 — Surah Al-Waqiah 56:48
और क्या हमारे पहले के बाप-दादा भी
Verse 49 — Surah Al-Waqiah 56:49
कह दो, "निश्चय ही अगले और पिछले भी
Verse 50 — Surah Al-Waqiah 56:50
एक नियत समय पर इकट्ठे कर दिए जाएँगे, जिसका दिन ज्ञात और नियत है
Verse 51 — Surah Al-Waqiah 56:51
फिर तुम ऐ गुमराहो, झुठलानेवालो
Verse 52 — Surah Al-Waqiah 56:52
ज़क्कूम के वृक्ष में से खाओंगे
Verse 53 — Surah Al-Waqiah 56:53
और उसी से पेट भरोगे
Verse 54 — Surah Al-Waqiah 56:54
और उसके ऊपर से खौलता हुआ पानी पीओगे
Verse 55 — Surah Al-Waqiah 56:55
और तौस लगे ऊँट की तरह पीओगे।
Verse 56 — Surah Al-Waqiah 56:56
यह बदला दिए जाने के दिन उनका पहला सत्कार होगा
Verse 57 — Surah Al-Waqiah 56:57
हमने तुम्हें पैदा किया; फिर तुम सच क्यों नहीं मानते
Verse 58 — Surah Al-Waqiah 56:58
तो क्या तुमने विचार किया जो चीज़ तुम टपकाते हो
Verse 59 — Surah Al-Waqiah 56:59
क्या तुम उसे आकार देते हो, या हम है आकार देनेवाले
Verse 60 — Surah Al-Waqiah 56:60
हमने तुम्हारे बीच मृत्यु को नियत किया है और हमारे बस से यह बाहर नहीं है
Verse 61 — Surah Al-Waqiah 56:61
कि हम तुम्हारे जैसों को बदल दें और तुम्हें ऐसी हालत में उठा खड़ा करें जिसे तुम जानते नहीं
Verse 62 — Surah Al-Waqiah 56:62
तुम तो पहली पैदाइश को जान चुके हो, फिर तुम ध्यान क्यों नहीं देते
Verse 63 — Surah Al-Waqiah 56:63
फिर क्या तुमने देखा तो कुछ तुम खेती करते हो
Verse 64 — Surah Al-Waqiah 56:64
क्या उसे तुम उगाते हो या हम उसे उगाते है
Verse 65 — Surah Al-Waqiah 56:65
यदि हम चाहें तो उसे चूर-चूर कर दें। फिर तुम बातें बनाते रह जाओ
Verse 66 — Surah Al-Waqiah 56:66
कि "हमपर उलटा डाँड पड़ गया
Verse 67 — Surah Al-Waqiah 56:67
बल्कि हम वंचित होकर रह गए
Verse 68 — Surah Al-Waqiah 56:68
फिर क्या तुमने उस पानी को देखा जिसे तुम पीते हो
Verse 69 — Surah Al-Waqiah 56:69
क्या उसे बादलों से तुमने पानी बरसाया या बरसानेवाले हम है
Verse 70 — Surah Al-Waqiah 56:70
यदि हम चाहें तो उसे अत्यन्त खारा बनाकर रख दें। फिर तुम कृतज्ञता क्यों नहीं दिखाते
Verse 71 — Surah Al-Waqiah 56:71
फिर क्या तुमने उस आग को देखा जिसे तुम सुलगाते हो
Verse 72 — Surah Al-Waqiah 56:72
क्या तुमने उसके वृक्ष को पैदा किया है या पैदा करनेवाले हम है
Verse 73 — Surah Al-Waqiah 56:73
हमने उसे एक अनुस्मृति और मरुभुमि के मुसाफ़िरों और ज़रूरतमन्दों के लिए लाभप्रद बनाया
Verse 74 — Surah Al-Waqiah 56:74
अतः तुम अपने महान रब के नाम की तसबीह करो
Verse 75 — Surah Al-Waqiah 56:75
अतः नहीं! मैं क़समों खाता हूँ सितारों की स्थितियों की
Verse 76 — Surah Al-Waqiah 56:76
और यह बहुत बड़ी गवाही है, यदि तुम जानो
Verse 77 — Surah Al-Waqiah 56:77
निश्चय ही यह प्रतिष्ठित क़ुरआन है
Verse 78 — Surah Al-Waqiah 56:78
एक सुरक्षित किताब में अंकित है।
Verse 79 — Surah Al-Waqiah 56:79
उसे केवल पाक-साफ़ व्यक्ति ही हाथ लगाते है
Verse 80 — Surah Al-Waqiah 56:80
उसका अवतरण सारे संसार के रब की ओर से है।
Verse 81 — Surah Al-Waqiah 56:81
फिर क्या तुम उस वाणी के प्रति उपेक्षा दर्शाते हो
Verse 82 — Surah Al-Waqiah 56:82
और तुम इसको अपनी वृत्ति बना रहे हो कि झुठलाते हो
Verse 83 — Surah Al-Waqiah 56:83
फिर ऐसा क्यों नहीं होता, जबकि प्राण कंठ को आ लगते है
Verse 84 — Surah Al-Waqiah 56:84
और उस समय तुम देख रहे होते हो
Verse 85 — Surah Al-Waqiah 56:85
और हम तुम्हारी अपेक्षा उससे अधिक निकट होते है। किन्तु तुम देखते नहीं –
Verse 86 — Surah Al-Waqiah 56:86
फिर ऐसा क्यों नहीं होता कि यदि तुम अधीन नहीं हो
Verse 87 — Surah Al-Waqiah 56:87
तो उसे (प्राण को) लौटा दो, यदि तुम सच्चे हो
Verse 88 — Surah Al-Waqiah 56:88
फिर यदि वह (अल्लाह के) निकटवर्तियों में से है
Verse 89 — Surah Al-Waqiah 56:89
तो (उसके लिए) आराम, सुख-सामग्री और सुगंध है, और नेमतवाला बाग़ है
Verse 90 — Surah Al-Waqiah 56:90
और यदि वह भाग्यशालियों में से है
Verse 91 — Surah Al-Waqiah 56:91
तो "सलाम है तुम्हें कि तुम सौभाग्यशाली में से हो।
Verse 92 — Surah Al-Waqiah 56:92
किन्तु यदि वह झुठलानेवालों, गुमराहों में से है
Verse 93 — Surah Al-Waqiah 56:93
तो उसका पहला सत्कार खौलते हुए पानी से होगा
Verse 94 — Surah Al-Waqiah 56:94
फिर भड़कती हुई आग में उन्हें झोंका जाना है
Verse 95 — Surah Al-Waqiah 56:95
निस्संदेह यही विश्वसनीय सत्य है
Verse 96 — Surah Al-Waqiah 56:96
अतः तुम अपने महान रब की तसबीह करो