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Hindi - Chapter 55 - Ar-Rahman

Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink

Verse 1 — Surah Ar-Rahman 55:1

रहमान ने

Verse 2 — Surah Ar-Rahman 55:2

क़ुरआन सिखाया

Verse 3 — Surah Ar-Rahman 55:3

उसी ने मनुष्य को पैदा किया

Verse 4 — Surah Ar-Rahman 55:4

उसे बोलना सिखाया

Verse 5 — Surah Ar-Rahman 55:5

सूर्य और चन्द्रमा एक हिसाब के पाबन्द है

Verse 6 — Surah Ar-Rahman 55:6

और तारे और वृक्ष सजदा करते है

Verse 7 — Surah Ar-Rahman 55:7

उसने आकाश को ऊँचा किया और संतुलन स्थापित किया

Verse 8 — Surah Ar-Rahman 55:8

कि तुम भी तुला में सीमा का उल्लंघन न करो

Verse 9 — Surah Ar-Rahman 55:9

न्याय के साथ ठीक-ठीक तौलो और तौल में कमी न करो।

Verse 10 — Surah Ar-Rahman 55:10

और धरती को उसने सृष्टल प्राणियों के लिए बनाया

Verse 11 — Surah Ar-Rahman 55:11

उसमें स्वादिष्ट फल है और खजूर के वृक्ष है, जिनके फल आवरणों में लिपटे हुए है

Verse 12 — Surah Ar-Rahman 55:12

और भुसवाले अनाज भी और सुगंधित बेल-बूटा भी

Verse 13 — Surah Ar-Rahman 55:13

तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 14 — Surah Ar-Rahman 55:14

उसने मनुष्य को ठीकरी जैसी खनखनाती हुए मिट्टी से पैदा किया

Verse 15 — Surah Ar-Rahman 55:15

और जिन्न को उसने आग की लपट से पैदा किया

Verse 16 — Surah Ar-Rahman 55:16

फिर तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 17 — Surah Ar-Rahman 55:17

वह दो पूर्व का रब है और दो पश्चिम का रब भी।

Verse 18 — Surah Ar-Rahman 55:18

फिर तुम दोनों अपने रब की महानताओं में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 19 — Surah Ar-Rahman 55:19

उसने दो समुद्रो को प्रवाहित कर दिया, जो आपस में मिल रहे होते है।

Verse 20 — Surah Ar-Rahman 55:20

उन दोनों के बीच एक परदा बाधक होता है, जिसका वे अतिक्रमण नहीं करते

Verse 21 — Surah Ar-Rahman 55:21

तो तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 22 — Surah Ar-Rahman 55:22

उन (समुद्रों) से मोती और मूँगा निकलता है।

Verse 23 — Surah Ar-Rahman 55:23

अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 24 — Surah Ar-Rahman 55:24

उसी के बस में है समुद्र में पहाड़ो की तरह उठे हुए जहाज़

Verse 25 — Surah Ar-Rahman 55:25

तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओग

Verse 26 — Surah Ar-Rahman 55:26

प्रत्येक जो भी इस (धरती) पर है, नाशवान है

Verse 27 — Surah Ar-Rahman 55:27

किन्तु तुम्हारे रब का प्रतापवान और उदार स्वरूप शेष रहनेवाला है

Verse 28 — Surah Ar-Rahman 55:28

अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगं

Verse 29 — Surah Ar-Rahman 55:29

आकाशों और धरती में जो भी है उसी से माँगता है। उसकी नित्य नई शान है

Verse 30 — Surah Ar-Rahman 55:30

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 31 — Surah Ar-Rahman 55:31

ऐ दोनों बोझों! शीघ्र ही हम तुम्हारे लिए निवृत हुए जाते है

Verse 32 — Surah Ar-Rahman 55:32

तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 33 — Surah Ar-Rahman 55:33

ऐ जिन्नों और मनुष्यों के गिरोह! यदि तुममें हो सके कि आकाशों और धरती की सीमाओं को पार कर सको, तो पार कर जाओ; तुम कदापि पार नहीं कर सकते बिना अधिकार-शक्ति के

Verse 34 — Surah Ar-Rahman 55:34

अतः तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 35 — Surah Ar-Rahman 55:35

अतः तुम दोनों पर अग्नि-ज्वाला और धुएँवाला अंगारा (पिघला ताँबा) छोड़ दिया जाएगा, फिर तुम मुक़ाबला न कर सकोगे।

Verse 36 — Surah Ar-Rahman 55:36

अतः तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 37 — Surah Ar-Rahman 55:37

फिर जब आकाश फट जाएगा और लाल चमड़े की तरह लाल हो जाएगा।

Verse 38 — Surah Ar-Rahman 55:38

अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 39 — Surah Ar-Rahman 55:39

फिर उस दिन न किसी मनुष्य से उसके गुनाह के विषय में पूछा जाएगा न किसी जिन्न से

Verse 40 — Surah Ar-Rahman 55:40

अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 41 — Surah Ar-Rahman 55:41

अपराधी अपने चहरों से पहचान लिए जाएँगे और उनके माथे के बालों और टाँगों द्वारा पकड़ लिया जाएगा

Verse 42 — Surah Ar-Rahman 55:42

अतः तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 43 — Surah Ar-Rahman 55:43

यही वह जहन्नम है जिसे अपराधी लोग झूठ ठहराते रहे है

Verse 44 — Surah Ar-Rahman 55:44

वे उनके और खौलते हुए पानी के बीच चक्कर लगा रहें होंगे

Verse 45 — Surah Ar-Rahman 55:45

फिर तुम दोनों अपने रब के सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 46 — Surah Ar-Rahman 55:46

किन्तु जो अपने रब के सामने खड़े होने का डर रखता होगा, उसके लिए दो बाग़ है।

Verse 47 — Surah Ar-Rahman 55:47

तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 48 — Surah Ar-Rahman 55:48

घनी डालियोंवाले

Verse 49 — Surah Ar-Rahman 55:49

अतः तुम दोनों अपने रब के उपकारों में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 50 — Surah Ar-Rahman 55:50

उन दोनो (बाग़ो) में दो प्रवाहित स्रोत है।

Verse 51 — Surah Ar-Rahman 55:51

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 52 — Surah Ar-Rahman 55:52

उन दोनों (बाग़ो) मे हर स्वादिष्ट फल की दो-दो किस्में हैं

Verse 53 — Surah Ar-Rahman 55:53

अतः तुम दोनो रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 54 — Surah Ar-Rahman 55:54

वे ऐसे बिछौनो पर तकिया लगाए हुए होंगे जिनके अस्तर गाढे रेशम के होंगे, और दोनों बाग़ो के फल झुके हुए निकट ही होंगे।

Verse 55 — Surah Ar-Rahman 55:55

अतः तुम अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 56 — Surah Ar-Rahman 55:56

उन (अनुकम्पाओं) में निगाह बचाए रखनेवाली (सुन्दर) स्त्रियाँ होंगी, जिन्हें उनसे पहले न किसी मनुष्य ने हाथ लगाया और न किसी जिन्न ने

Verse 57 — Surah Ar-Rahman 55:57

फिर तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 58 — Surah Ar-Rahman 55:58

मानो वे लाल (याकूत) और प्रवाल (मूँगा) है।

Verse 59 — Surah Ar-Rahman 55:59

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 60 — Surah Ar-Rahman 55:60

अच्छाई का बदला अच्छाई के सिवा और क्या हो सकता है

Verse 61 — Surah Ar-Rahman 55:61

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 62 — Surah Ar-Rahman 55:62

उन दोनों से हटकर दो और बाग़ है।

Verse 63 — Surah Ar-Rahman 55:63

फिर तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 64 — Surah Ar-Rahman 55:64

गहरे हरित

Verse 65 — Surah Ar-Rahman 55:65

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 66 — Surah Ar-Rahman 55:66

उन दोनों (बाग़ो) में दो स्रोत है जोश मारते हुए

Verse 67 — Surah Ar-Rahman 55:67

अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 68 — Surah Ar-Rahman 55:68

उनमें है स्वादिष्ट फल और खजूर और अनार

Verse 69 — Surah Ar-Rahman 55:69

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 70 — Surah Ar-Rahman 55:70

उनमें भली और सुन्दर स्त्रियाँ होंगी।

Verse 71 — Surah Ar-Rahman 55:71

तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 72 — Surah Ar-Rahman 55:72

हूरें (परम रूपवती स्त्रियाँ) ख़ेमों में रहनेवाली

Verse 73 — Surah Ar-Rahman 55:73

अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 74 — Surah Ar-Rahman 55:74

जिन्हें उससे पहले न किसी मनुष्य ने हाथ लगाया होगा और न किसी जिन्न ने।

Verse 75 — Surah Ar-Rahman 55:75

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 76 — Surah Ar-Rahman 55:76

वे हरे रेशमी गद्दो और उत्कृष्ट् और असाधारण क़ालीनों पर तकिया लगाए होंगे

Verse 77 — Surah Ar-Rahman 55:77

अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे

Verse 78 — Surah Ar-Rahman 55:78

बड़ा ही बरकतवाला नाम है तुम्हारे प्रतापवान और उदार रब का