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Hindi - Chapter 69 - Al-Haqqah
Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink
Verse 1 — Surah Al-Haqqah 69:1
होकर रहनेवाली
Verse 2 — Surah Al-Haqqah 69:2
क्या है वह होकर रहनेवाली
Verse 3 — Surah Al-Haqqah 69:3
और तुम क्या जानो कि क्या है वह होकर रहनेवाली
Verse 4 — Surah Al-Haqqah 69:4
समूद और आद ने उस खड़खड़ा देनेवाली (घटना) को झुठलाया
Verse 5 — Surah Al-Haqqah 69:5
फिर समूद तो एक हद से बढ़ जानेवाली आपदा से विनष्ट किए गए
Verse 6 — Surah Al-Haqqah 69:6
और रहे आद, तो वे एक अनियंत्रित प्रचंड वायु से विनष्ट कर दिए गए
Verse 7 — Surah Al-Haqqah 69:7
अल्लाह ने उसको सात रात और आठ दिन तक उन्मूलन के उद्देश्य से उनपर लगाए रखा। तो लोगों को तुम देखते कि वे उसमें पछाड़े हुए ऐसे पड़े है मानो वे खजूर के जर्जर तने हों
Verse 8 — Surah Al-Haqqah 69:8
अब क्या तुम्हें उनमें से कोई शेष दिखाई देता है
Verse 9 — Surah Al-Haqqah 69:9
और फ़िरऔन ने और उससे पहले के लोगों ने और तलपट हो जानेवाली बस्तियों ने यह ख़ता की
Verse 10 — Surah Al-Haqqah 69:10
उन्होंने अपने रब के रसूल की अवज्ञा की तो उसने उन्हें ऐसी पकड़ में ले लिया जो बड़ी कठोर थी
Verse 11 — Surah Al-Haqqah 69:11
जब पानी उमड़ आया तो हमने तुम्हें प्रवाहित नौका में सवार किया
Verse 12 — Surah Al-Haqqah 69:12
ताकि उसे तुम्हारे लिए हम शिक्षाप्रद यादगार बनाएँ और याद रखनेवाले कान उसे सुरक्षित रखें
Verse 13 — Surah Al-Haqqah 69:13
तो याद रखो जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी
Verse 14 — Surah Al-Haqqah 69:14
और धरती और पहाड़ों को उठाकर एक ही बार में चूर्ण-विचूर्ण कर दिया जाएगा
Verse 15 — Surah Al-Haqqah 69:15
तो उस दिन घटित होनेवाली घटना घटित हो जाएगी
Verse 16 — Surah Al-Haqqah 69:16
और आकाश फट जाएगा और उस दिन उसका बन्धन ढीला पड़ जाएगा
Verse 17 — Surah Al-Haqqah 69:17
और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे और उस दिन तुम्हारे रब के सिंहासन को आठ अपने ऊपर उठाए हुए होंगे
Verse 18 — Surah Al-Haqqah 69:18
उस दिन तुम लोग पेश किए जाओगे, तुम्हारी कोई छिपी बात छिपी न रहेगी
Verse 19 — Surah Al-Haqqah 69:19
फिर जिस किसी को उसका कर्म-पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया, तो वह कहेगा, "लो पढ़ो, मेरा कर्म-पत्र
Verse 20 — Surah Al-Haqqah 69:20
मैं तो समझता ही था कि मुझे अपना हिसाब मिलनेवाला है।
Verse 21 — Surah Al-Haqqah 69:21
अतः वह सुख और आनन्दमय जीवन में होगा
Verse 22 — Surah Al-Haqqah 69:22
उच्च जन्नत में
Verse 23 — Surah Al-Haqqah 69:23
जिसके फलों के गुच्छे झुके होंगे
Verse 24 — Surah Al-Haqqah 69:24
मज़े से खाओ और पियो उन कर्मों के बदले में जो तुमने बीते दिनों में किए है
Verse 25 — Surah Al-Haqqah 69:25
और रहा वह क्यक्ति जिसका कर्म-पत्र उसके बाएँ हाथ में दिया गया, वह कहेगा, "काश, मेरा कर्म-पत्र मुझे न दिया जाता
Verse 26 — Surah Al-Haqqah 69:26
और मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है
Verse 27 — Surah Al-Haqqah 69:27
ऐ काश, वह (मृत्यु) समाप्त करनेवाली होती
Verse 28 — Surah Al-Haqqah 69:28
मेरा माल मेरे कुछ काम न आया
Verse 29 — Surah Al-Haqqah 69:29
मेरा ज़ोर (सत्ता) मुझसे जाता रहा
Verse 30 — Surah Al-Haqqah 69:30
पकड़ो उसे और उसकी गरदन में तौक़ डाल दो
Verse 31 — Surah Al-Haqqah 69:31
फिर उसे भड़कती हुई आग में झोंक दो
Verse 32 — Surah Al-Haqqah 69:32
फिर उसे एक ऐसी जंजीर में जकड़ दो जिसकी माप सत्तर हाथ है
Verse 33 — Surah Al-Haqqah 69:33
वह न तो महिमावान अल्लाह पर ईमान रखता था
Verse 34 — Surah Al-Haqqah 69:34
और न मुहताज को खाना खिलाने पर उभारता था
Verse 35 — Surah Al-Haqqah 69:35
अतः आज उसका यहाँ कोई घनिष्ट मित्र नहीं
Verse 36 — Surah Al-Haqqah 69:36
और न ही धोवन के सिवा कोई भोजन है
Verse 37 — Surah Al-Haqqah 69:37
उसे ख़ताकारों (अपराधियों) के अतिरिक्त कोई नहीं खाता।
Verse 38 — Surah Al-Haqqah 69:38
अतः कुछ नहीं! मैं क़सम खाता हूँ उन चीज़ों की जो तुम देखते
Verse 39 — Surah Al-Haqqah 69:39
हो और उन चीज़ों को भी जो तुम नहीं देखते
Verse 40 — Surah Al-Haqqah 69:40
निश्चय ही वह एक प्रतिष्ठित रसूल की लाई हुई वाणी है
Verse 41 — Surah Al-Haqqah 69:41
वह किसी कवि की वाणी नहीं। तुम ईमान थोड़े ही लाते हो
Verse 42 — Surah Al-Haqqah 69:42
और न वह किसी काहिन का वाणी है। तुम होश से थोड़े ही काम लेते हो
Verse 43 — Surah Al-Haqqah 69:43
अवतरण है सारे संसार के रब की ओर से
Verse 44 — Surah Al-Haqqah 69:44
यदि वह (नबी) हमपर थोपकर कुछ बातें घड़ता
Verse 45 — Surah Al-Haqqah 69:45
तो अवश्य हम उसका दाहिना हाथ पकड़ लेते
Verse 46 — Surah Al-Haqqah 69:46
फिर उसकी गर्दन की रग काट देते
Verse 47 — Surah Al-Haqqah 69:47
और तुममें से कोई भी इससे रोकनेवाला न होता
Verse 48 — Surah Al-Haqqah 69:48
और निश्चय ही वह एक अनुस्मृति है डर रखनेवालों के लिए
Verse 49 — Surah Al-Haqqah 69:49
और निश्चय ही हम जानते है कि तुममें कितने ही ऐसे है जो झुठलाते है
Verse 50 — Surah Al-Haqqah 69:50
निश्चय ही वह इनकार करनेवालों के लिए सर्वथा पछतावा है
Verse 51 — Surah Al-Haqqah 69:51
और वह बिल्कुल विश्वसनीय सत्य है।
Verse 52 — Surah Al-Haqqah 69:52
अतः तुम अपने महिमावान रब के नाम की तसबीह (गुणगान) करो