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Hindi - Chapter 54 - Al-Qamar
Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink
Verse 1 — Surah Al-Qamar 54:1
क़यामत क़रीब आ गयी और चाँद दो टुकड़े हो गया
Verse 2 — Surah Al-Qamar 54:2
और अगर ये कुफ्फ़ार कोई मौजिज़ा देखते हैं, तो मुँह फेर लेते हैं, और कहते हैं कि ये तो बड़ा ज़बरदस्त जादू है
Verse 3 — Surah Al-Qamar 54:3
और उन लोगों ने झुठलाया और अपनी नफ़सियानी ख्वाहिशों की पैरवी की, और हर काम का वक्त मुक़र्रर है
Verse 4 — Surah Al-Qamar 54:4
और उनके पास तो वह हालात पहुँच चुके हैं जिनमें काफी तम्बीह थीं
Verse 5 — Surah Al-Qamar 54:5
और इन्तेहा दर्जे की दानाई मगर (उनको तो) डराना कुछ फ़ायदा नहीं देता
Verse 6 — Surah Al-Qamar 54:6
तो (ऐ रसूल) तुम भी उनसे किनाराकश रहो, जिस दिन एक बुलाने वाला (इसराफ़ील) एक अजनबी और नागवार चीज़ की तरफ़ बुलाएगा
Verse 7 — Surah Al-Qamar 54:7
तो (निदामत से) ऑंखें नीचे किए हुए कब्रों से निकल पड़ेंगे गोया वह फैली हुई टिड्डियाँ हैं
Verse 8 — Surah Al-Qamar 54:8
(और) बुलाने वाले की तरफ गर्दनें बढ़ाए दौड़ते जाते होंगे, कुफ्फ़ार कहेंगे ये तो बड़ा सख्त दिन है
Verse 9 — Surah Al-Qamar 54:9
इनसे पहले नूह की क़ौम ने भी झुठलाया था, तो उन्होने हमारे (ख़ास) बन्दे (नूह) को झुठलाया, और कहने लगे ये तो दीवाना है
Verse 10 — Surah Al-Qamar 54:10
और उनको झिड़कियाँ भी दी गयीं, तो उन्होंने अपने परवरदिगार से दुआ की कि (बारे इलाहा मैं) इनके मुक़ाबले में कमज़ोर हूँ
Verse 11 — Surah Al-Qamar 54:11
तो अब तू ही (इनसे) बदला ले तो हमने मूसलाधार पानी से आसमान के दरवाज़े खोल दिए
Verse 12 — Surah Al-Qamar 54:12
और ज़मीन से चश्में जारी कर दिए, तो एक काम के लिए जो मुक़र्रर हो चुका था (दोनों) पानी मिलकर एक हो गया
Verse 13 — Surah Al-Qamar 54:13
और हमने एक कश्ती पर जो तख्तों और कीलों से तैयार की गयी थी सवार किया
Verse 14 — Surah Al-Qamar 54:14
और वह हमारी निगरानी में चल रही थी (ये) उस शख़्श (नूह) का बदला लेने के लिए जिसको लोग न मानते थे
Verse 15 — Surah Al-Qamar 54:15
और हमने उसको एक इबरत बना कर छोड़ा तो कोई है जो इबरत हासिल करे
Verse 16 — Surah Al-Qamar 54:16
तो (उनको) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था
Verse 17 — Surah Al-Qamar 54:17
और हमने तो क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया है तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
Verse 18 — Surah Al-Qamar 54:18
आद (की क़ौम ने) (अपने पैग़म्बर) को झुठलाया तो (उनका) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था
Verse 19 — Surah Al-Qamar 54:19
हमने उन पर बहुत सख्त मनहूस दिन में बड़े ज़न्नाटे की ऑंधी चलायी
Verse 20 — Surah Al-Qamar 54:20
जो लोगों को (अपनी जगह से) इस तरह उखाड़ फेकती थी गोया वह उखड़े हुए खजूर के तने हैं
Verse 21 — Surah Al-Qamar 54:21
तो (उनको) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था
Verse 22 — Surah Al-Qamar 54:22
और हमने तो क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया, तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
Verse 23 — Surah Al-Qamar 54:23
(क़ौम) समूद ने डराने वाले (पैग़म्बरों) को झुठलाया
Verse 24 — Surah Al-Qamar 54:24
तो कहने लगे कि भला एक आदमी की जो हम ही में से हो उसकी पैरवीं करें ऐसा करें तो गुमराही और दीवानगी में पड़ गए
Verse 25 — Surah Al-Qamar 54:25
क्या हम सबमें बस उसी पर वही नाज़िल हुई है (नहीं) बल्कि ये तो बड़ा झूठा तअल्ली करने वाला है
Verse 26 — Surah Al-Qamar 54:26
उनको अनक़रीब कल ही मालूम हो जाएगा कि कौन बड़ा झूठा तकब्बुर करने वाला है
Verse 27 — Surah Al-Qamar 54:27
(ऐ सालेह) हम उनकी आज़माइश के लिए ऊँटनी भेजने वाले हैं तो तुम उनको देखते रहो और (थोड़ा) सब्र करो
Verse 28 — Surah Al-Qamar 54:28
और उनको ख़बर कर दो कि उनमें पानी की बारी मुक़र्रर कर दी गयी है हर (बारी वाले को अपनी) बारी पर हाज़िर होना चाहिए
Verse 29 — Surah Al-Qamar 54:29
तो उन लोगों ने अपने रफीक़ (क़ेदार) को बुलाया तो उसने पकड़ कर (ऊँटनी की) कूंचे काट डालीं
Verse 30 — Surah Al-Qamar 54:30
तो (देखो) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था
Verse 31 — Surah Al-Qamar 54:31
हमने उन पर एक सख्त चिंघाड़ (का अज़ाब) भेज दिया तो वह बाड़े वालो के सूखे हुए चूर चूर भूसे की तरह हो गए
Verse 32 — Surah Al-Qamar 54:32
और हमने क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया है तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
Verse 33 — Surah Al-Qamar 54:33
लूत की क़ौम ने भी डराने वाले (पैग़म्बरों) को झुठलाया
Verse 34 — Surah Al-Qamar 54:34
तो हमने उन पर कंकर भरी हवा चलाई मगर लूत के लड़के बाले को हमने उनको अपने फज़ल व करम से पिछले ही को बचा लिया
Verse 35 — Surah Al-Qamar 54:35
हम शुक्र करने वालों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं
Verse 36 — Surah Al-Qamar 54:36
और लूत ने उनको हमारी पकड़ से भी डराया था मगर उन लोगों ने डराते ही में शक़ किया
Verse 37 — Surah Al-Qamar 54:37
और उनसे उनके मेहमान (फ़रिश्ते) के बारे में नाजायज़ मतलब की ख्वाहिश की तो हमने उनकी ऑंखें अन्धी कर दीं तो मेरे अज़ाब और डराने का मज़ा चखो
Verse 38 — Surah Al-Qamar 54:38
और सुबह सवेरे ही उन पर अज़ाब आ गया जो किसी तरह टल ही नहीं सकता था
Verse 39 — Surah Al-Qamar 54:39
तो मेरे अज़ाब और डराने के (पड़े) मज़े चखो
Verse 40 — Surah Al-Qamar 54:40
और हमने तो क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
Verse 41 — Surah Al-Qamar 54:41
और फिरऔन के पास भी डराने वाले (पैग़म्बर) आए
Verse 42 — Surah Al-Qamar 54:42
तो उन लोगों ने हमारी कुल निशानियों को झुठलाया तो हमने उनको इस तरह सख्त पकड़ा जिस तरह एक ज़बरदस्त साहिबे क़ुदरत पकड़ा करता है
Verse 43 — Surah Al-Qamar 54:43
(ऐ अहले मक्का) क्या उन लोगों से भी तुम्हारे कुफ्फार बढ़ कर हैं या तुम्हारे वास्ते (पहली) किताबों में माफी (लिखी हुई) है
Verse 44 — Surah Al-Qamar 54:44
क्या ये लोग कहते हैं कि हम बहुत क़वी जमाअत हैं
Verse 45 — Surah Al-Qamar 54:45
अनक़रीब ही ये जमाअत शिकस्त खाएगी और ये लोग पीठ फेर कर भाग जाएँगे
Verse 46 — Surah Al-Qamar 54:46
बात ये है कि इनके वायदे का वक्त क़यामत है और क़यामत बड़ी सख्त और बड़ी तल्ख़ (चीज़) है
Verse 47 — Surah Al-Qamar 54:47
बेशक गुनाहगार लोग गुमराही और दीवानगी में (मुब्तिला) हैं
Verse 48 — Surah Al-Qamar 54:48
उस रोज़ ये लोग अपने अपने मुँह के बल (जहन्नुम की) आग में घसीटे जाएँगे (और उनसे कहा जाएगा) अब जहन्नुम की आग का मज़ा चखो
Verse 49 — Surah Al-Qamar 54:49
बेशक हमने हर चीज़ एक मुक़र्रर अन्दाज़ से पैदा की है
Verse 50 — Surah Al-Qamar 54:50
और हमारा हुक्म तो बस ऑंख के झपकने की तरह एक बात होती है
Verse 51 — Surah Al-Qamar 54:51
और हम तुम्हारे हम मशरबो को हलाक कर चुके हैं तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
Verse 52 — Surah Al-Qamar 54:52
और अगर चे ये लोग जो कुछ कर चुके हैं (इनके) आमाल नामों में (दर्ज) है
Verse 53 — Surah Al-Qamar 54:53
(यानि) हर छोटा और बड़ा काम लिख दिया गया है
Verse 54 — Surah Al-Qamar 54:54
बेशक परहेज़गार लोग (बेहिश्त के) बाग़ों और नहरों में
Verse 55 — Surah Al-Qamar 54:55
(यानि) पसन्दीदा मक़ाम में हर तरह की कुदरत रखने वाले बादशाह की बारगाह में (मुक़र्रिब) होंगे