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Hindi - Chapter 55 - Ar-Rahman

Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink

Verse 1 — Surah Ar-Rahman 55:1

बड़ा मेहरबान (ख़ुदा)

Verse 2 — Surah Ar-Rahman 55:2

उसी ने क़ुरान की तालीम फरमाई

Verse 3 — Surah Ar-Rahman 55:3

उसी ने इन्सान को पैदा किया

Verse 4 — Surah Ar-Rahman 55:4

उसी ने उनको (अपना मतलब) बयान करना सिखाया

Verse 5 — Surah Ar-Rahman 55:5

सूरज और चाँद एक मुक़र्रर हिसाब से चल रहे हैं

Verse 6 — Surah Ar-Rahman 55:6

और बूटियाँ बेलें, और दरख्त (उसी को) सजदा करते हैं

Verse 7 — Surah Ar-Rahman 55:7

और उसी ने आसमान बुलन्द किया और तराजू (इन्साफ) को क़ायम किया

Verse 8 — Surah Ar-Rahman 55:8

ताकि तुम लोग तराज़ू (से तौलने) में हद से तजाउज़ न करो

Verse 9 — Surah Ar-Rahman 55:9

और ईन्साफ के साथ ठीक तौलो और तौल कम न करो

Verse 10 — Surah Ar-Rahman 55:10

और उसी ने लोगों के नफे क़े लिए ज़मीन बनायी

Verse 11 — Surah Ar-Rahman 55:11

कि उसमें मेवे और खजूर के दरख्त हैं जिसके ख़ोशों में ग़िलाफ़ होते हैं

Verse 12 — Surah Ar-Rahman 55:12

और अनाज जिसके साथ भुस होता है और ख़ुशबूदार फूल

Verse 13 — Surah Ar-Rahman 55:13

तो (ऐ गिरोह जिन व इन्स) तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमतों को न मानोगे

Verse 14 — Surah Ar-Rahman 55:14

उसी ने इन्सान को ठीकरे की तरह खन खनाती हुई मिटटी से पैदा किया

Verse 15 — Surah Ar-Rahman 55:15

और उसी ने जिन्नात को आग के शोले से पैदा किया

Verse 16 — Surah Ar-Rahman 55:16

तो (ऐ गिरोह जिन व इन्स) तुम अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमतों से मुकरोगे

Verse 17 — Surah Ar-Rahman 55:17

वही जाड़े गर्मी के दोनों मशरिकों का मालिक है और दोनों मग़रिबों का (भी) मालिक है

Verse 18 — Surah Ar-Rahman 55:18

तो (ऐ जिनों) और (आदमियों) तुम अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे

Verse 19 — Surah Ar-Rahman 55:19

उसी ने दरिया बहाए जो बाहम मिल जाते हैं

Verse 20 — Surah Ar-Rahman 55:20

दो के दरमियान एक हद्दे फ़ासिल (आड़) है जिससे तजाउज़ नहीं कर सकते

Verse 21 — Surah Ar-Rahman 55:21

तो (ऐ जिन व इन्स) तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत को झुठलाओगे

Verse 22 — Surah Ar-Rahman 55:22

इन दोनों दरियाओं से मोती और मूँगे निकलते हैं

Verse 23 — Surah Ar-Rahman 55:23

(तो जिन व इन्स) तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमत को न मानोगे

Verse 24 — Surah Ar-Rahman 55:24

और जहाज़ जो दरिया में पहाड़ों की तरह ऊँचे खड़े रहते हैं उसी के हैं

Verse 25 — Surah Ar-Rahman 55:25

तो (ऐ जिन व इन्स) तुम अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत को झुठलाओगे

Verse 26 — Surah Ar-Rahman 55:26

जो (मख़लूक) ज़मीन पर है सब फ़ना होने वाली है

Verse 27 — Surah Ar-Rahman 55:27

और सिर्फ तुम्हारे परवरदिगार की ज़ात जो अज़मत और करामत वाली है बाक़ी रहेगी

Verse 28 — Surah Ar-Rahman 55:28

तो तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे

Verse 29 — Surah Ar-Rahman 55:29

और जितने लोग सारे आसमान व ज़मीन में हैं (सब) उसी से माँगते हैं वह हर रोज़ (हर वक्त) मख़लूक के एक न एक काम में है

Verse 30 — Surah Ar-Rahman 55:30

तो तुम दोनों अपने सरपरस्त की कौन कौन सी नेअमत से मुकरोगे

Verse 31 — Surah Ar-Rahman 55:31

(ऐ दोनों गिरोहों) हम अनक़रीब ही तुम्हारी तरफ मुतावज्जे होंगे

Verse 32 — Surah Ar-Rahman 55:32

तो तुम दोनों अपने पालने वाले की किस किस नेअमत को न मानोगे

Verse 33 — Surah Ar-Rahman 55:33

ऐ गिरोह जिन व इन्स अगर तुममें क़ुदरत है कि आसमानों और ज़मीन के किनारों से (होकर कहीं) निकल (कर मौत या अज़ाब से भाग) सको तो निकल जाओ (मगर) तुम तो बग़ैर क़ूवत और ग़लबे के निकल ही नहीं सकते (हालॉ कि तुममें न क़ूवत है और न ही ग़लबा)

Verse 34 — Surah Ar-Rahman 55:34

तो तुम अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत को झुठलाओगे

Verse 35 — Surah Ar-Rahman 55:35

(गुनाहगार जिनों और आदमियों जहन्नुम में) तुम दोनो पर आग का सब्ज़ शोला और सियाह धुऑं छोड़ दिया जाएगा तो तुम दोनों (किस तरह) रोक नहीं सकोगे

Verse 36 — Surah Ar-Rahman 55:36

फिर तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे

Verse 37 — Surah Ar-Rahman 55:37

फिर जब आसमान फट कर (क़यामत में) तेल की तरह लाल हो जाऐगा

Verse 38 — Surah Ar-Rahman 55:38

तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से मुकरोगे

Verse 39 — Surah Ar-Rahman 55:39

तो उस दिन न तो किसी इन्सान से उसके गुनाह के बारे में पूछा जाएगा न किसी जिन से

Verse 40 — Surah Ar-Rahman 55:40

तो तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत को न मानोगे

Verse 41 — Surah Ar-Rahman 55:41

गुनाहगार लोग तो अपने चेहरों ही से पहचान लिए जाएँगे तो पेशानी के पटटे और पाँव पकड़े (जहन्नुम में डाल दिये जाएँगे)

Verse 42 — Surah Ar-Rahman 55:42

आख़िर तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे

Verse 43 — Surah Ar-Rahman 55:43

(फिर उनसे कहा जाएगा) यही वह जहन्नुम है जिसे गुनाहगार लोग झुठलाया करते थे

Verse 44 — Surah Ar-Rahman 55:44

ये लोग दोज़ख़ और हद दरजा खौलते हुए पानी के दरमियान (बेक़रार दौड़ते) चक्कर लगाते फिरेंगे

Verse 45 — Surah Ar-Rahman 55:45

तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत को न मानोगे

Verse 46 — Surah Ar-Rahman 55:46

और जो शख्स अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से डरता रहा उसके लिए दो दो बाग़ हैं

Verse 47 — Surah Ar-Rahman 55:47

तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमत से इन्कार करोगे

Verse 48 — Surah Ar-Rahman 55:48

दोनों बाग़ (दरख्तों की) टहनियों से हरे भरे (मेवों से लदे) हुए

Verse 49 — Surah Ar-Rahman 55:49

फिर दोनों अपने सरपरस्त की किस किस नेअमतों को झुठलाओगे

Verse 50 — Surah Ar-Rahman 55:50

इन दोनों में दो चश्में जारी होंगें

Verse 51 — Surah Ar-Rahman 55:51

तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से मुकरोगे

Verse 52 — Surah Ar-Rahman 55:52

इन दोनों बाग़ों में सब मेवे दो दो किस्म के होंगे

Verse 53 — Surah Ar-Rahman 55:53

तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे

Verse 54 — Surah Ar-Rahman 55:54

यह लोग उन फ़र्शों पर जिनके असतर अतलस के होंगे तकिये लगाकर बैठे होंगे तो दोनों बाग़ों के मेवे (इस क़दर) क़रीब होंगे (कि अगर चाहे तो लगे हुए खालें)

Verse 55 — Surah Ar-Rahman 55:55

तो तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत को न मानोगे

Verse 56 — Surah Ar-Rahman 55:56

इसमें (पाक दामन ग़ैर की तरफ ऑंख उठा कर न देखने वाली औरतें होंगी जिनको उन से पहले न किसी इन्सान ने हाथ लगाया होगा) और जिन ने

Verse 57 — Surah Ar-Rahman 55:57

तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किन किन नेअमतों को झुठलाओगे

Verse 58 — Surah Ar-Rahman 55:58

(ऐसी हसीन) गोया वह (मुजस्सिम) याक़ूत व मूँगे हैं

Verse 59 — Surah Ar-Rahman 55:59

तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किन किन नेअमतों से मुकरोगे

Verse 60 — Surah Ar-Rahman 55:60

भला नेकी का बदला नेकी के सिवा कुछ और भी है

Verse 61 — Surah Ar-Rahman 55:61

फिर तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत को झुठलाओगे

Verse 62 — Surah Ar-Rahman 55:62

उन दोनों बाग़ों के अलावा दो बाग़ और हैं

Verse 63 — Surah Ar-Rahman 55:63

तो तुम दोनों अपने पालने वाले की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे

Verse 64 — Surah Ar-Rahman 55:64

दोनों निहायत गहरे सब्ज़ व शादाब

Verse 65 — Surah Ar-Rahman 55:65

तो तुम दोनों अपने सरपरस्त की किन किन नेअमतों को न मानोगे

Verse 66 — Surah Ar-Rahman 55:66

उन दोनों बाग़ों में दो चश्में जोश मारते होंगे

Verse 67 — Surah Ar-Rahman 55:67

तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से मुकरोगे

Verse 68 — Surah Ar-Rahman 55:68

उन दोनों में मेवें हैं खुरमें और अनार

Verse 69 — Surah Ar-Rahman 55:69

तो तुम दोनों अपने मालिक की किन किन नेअमतों को झुठलाओगे

Verse 70 — Surah Ar-Rahman 55:70

उन बाग़ों में ख़ुश ख़ुल्क और ख़ूबसूरत औरतें होंगी

Verse 71 — Surah Ar-Rahman 55:71

तो तुम दोनों अपने मालिक की किन किन नेअमतों को झुठलाओगे

Verse 72 — Surah Ar-Rahman 55:72

वह हूरें हैं जो ख़ेमों में छुपी बैठी हैं

Verse 73 — Surah Ar-Rahman 55:73

फिर तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमत से इन्कार करोगे

Verse 74 — Surah Ar-Rahman 55:74

उनसे पहले उनको किसी इन्सान ने उनको छुआ तक नहीं और न जिन ने

Verse 75 — Surah Ar-Rahman 55:75

फिर तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत से मुकरोगे

Verse 76 — Surah Ar-Rahman 55:76

ये लोग सब्ज़ कालीनों और नफीस व हसीन मसनदों पर तकिए लगाए (बैठे) होंगे

Verse 77 — Surah Ar-Rahman 55:77

फिर तुम अपने परवरदिगार की किन किन नेअमतों से इन्कार करोगे

Verse 78 — Surah Ar-Rahman 55:78

(ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार जो साहिबे जलाल व करामत है उसी का नाम बड़ा बाबरकत है