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Hindi - Chapter 74 - Al-Muddaththir

Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink

Verse 1 — Surah Al-Muddaththir 74:1

ऐ (मेरे) कपड़ा ओढ़ने वाले (रसूल) उठो

Verse 2 — Surah Al-Muddaththir 74:2

और लोगों को (अज़ाब से) डराओ

Verse 3 — Surah Al-Muddaththir 74:3

और अपने परवरदिगार की बड़ाई करो

Verse 4 — Surah Al-Muddaththir 74:4

और अपने कपड़े पाक रखो

Verse 5 — Surah Al-Muddaththir 74:5

और गन्दगी से अलग रहो

Verse 6 — Surah Al-Muddaththir 74:6

और इसी तरह एहसान न करो कि ज्यादा के ख़ास्तगार बनो

Verse 7 — Surah Al-Muddaththir 74:7

और अपने परवरदिगार के लिए सब्र करो

Verse 8 — Surah Al-Muddaththir 74:8

फिर जब सूर फूँका जाएगा

Verse 9 — Surah Al-Muddaththir 74:9

तो वह दिन काफ़िरों पर सख्त दिन होगा

Verse 10 — Surah Al-Muddaththir 74:10

आसान नहीं होगा

Verse 11 — Surah Al-Muddaththir 74:11

(ऐ रसूल) मुझे और उस शख़्श को छोड़ दो जिसे मैने अकेला पैदा किया

Verse 12 — Surah Al-Muddaththir 74:12

और उसे बहुत सा माल दिया

Verse 13 — Surah Al-Muddaththir 74:13

और नज़र के सामने रहने वाले बेटे (दिए)

Verse 14 — Surah Al-Muddaththir 74:14

और उसे हर तरह के सामान से वुसअत दी

Verse 15 — Surah Al-Muddaththir 74:15

फिर उस पर भी वह तमाअ रखता है कि मैं और बढ़ाऊँ

Verse 16 — Surah Al-Muddaththir 74:16

ये हरगिज़ न होगा ये तो मेरी आयतों का दुश्मन था

Verse 17 — Surah Al-Muddaththir 74:17

तो मैं अनक़रीब उस सख्त अज़ाब में मुब्तिला करूँगा

Verse 18 — Surah Al-Muddaththir 74:18

उसने फिक्र की और ये तजवीज़ की

Verse 19 — Surah Al-Muddaththir 74:19

तो ये (कम्बख्त) मार डाला जाए

Verse 20 — Surah Al-Muddaththir 74:20

उसने क्यों कर तजवीज़ की

Verse 21 — Surah Al-Muddaththir 74:21

फिर ग़ौर किया

Verse 22 — Surah Al-Muddaththir 74:22

फिर त्योरी चढ़ाई और मुँह बना लिया

Verse 23 — Surah Al-Muddaththir 74:23

फिर पीठ फेर कर चला गया और अकड़ बैठा

Verse 24 — Surah Al-Muddaththir 74:24

फिर कहने लगा ये बस जादू है जो (अगलों से) चला आता है

Verse 25 — Surah Al-Muddaththir 74:25

ये तो बस आदमी का कलाम है

Verse 26 — Surah Al-Muddaththir 74:26

(ख़ुदा का नहीं) मैं उसे अनक़रीब जहन्नुम में झोंक दूँगा

Verse 27 — Surah Al-Muddaththir 74:27

और तुम क्या जानों कि जहन्नुम क्या है

Verse 28 — Surah Al-Muddaththir 74:28

वह न बाक़ी रखेगी न छोड़ देगी

Verse 29 — Surah Al-Muddaththir 74:29

और बदन को जला कर सियाह कर देगी

Verse 30 — Surah Al-Muddaththir 74:30

उस पर उन्नीस (फ़रिश्ते मुअय्यन) हैं

Verse 31 — Surah Al-Muddaththir 74:31

और हमने जहन्नुम का निगेहबान तो बस फरिश्तों को बनाया है और उनका ये शुमार भी काफिरों की आज़माइश के लिए मुक़र्रर किया ताकि अहले किताब (फौरन) यक़ीन कर लें और मोमिनो का ईमान और ज्यादा हो और अहले किताब और मोमिनीन (किसी तरह) शक़ न करें और जिन लोगों के दिल में (निफ़ाक का) मर्ज़ है (वह) और काफिर लोग कह बैठे कि इस मसल (के बयान करने) से ख़ुदा का क्या मतलब है यूँ ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहता है हिदायत करता है और तुम्हारे परवरदिगार के लशकरों को उसके सिवा कोई नहीं जानता और ये तो आदमियों के लिए बस नसीहत है

Verse 32 — Surah Al-Muddaththir 74:32

सुन रखो (हमें) चाँद की क़सम

Verse 33 — Surah Al-Muddaththir 74:33

और रात की जब जाने लगे

Verse 34 — Surah Al-Muddaththir 74:34

और सुबह की जब रौशन हो जाए

Verse 35 — Surah Al-Muddaththir 74:35

कि वह (जहन्नुम) भी एक बहुत बड़ी (आफ़त) है

Verse 36 — Surah Al-Muddaththir 74:36

(और) लोगों के डराने वाली है

Verse 37 — Surah Al-Muddaththir 74:37

(सबके लिए नहीें बल्कि) तुममें से वह जो शख़्श (नेकी की तरफ़) आगे बढ़ना

Verse 38 — Surah Al-Muddaththir 74:38

और (बुराई से) पीछे हटना चाहे हर शख़्श अपने आमाल के बदले गिर्द है

Verse 39 — Surah Al-Muddaththir 74:39

मगर दाहिने हाथ (में नामए अमल लेने) वाले

Verse 40 — Surah Al-Muddaththir 74:40

(बेहिश्त के) बाग़ों में गुनेहगारों से बाहम पूछ रहे होंगे

Verse 41 — Surah Al-Muddaththir 74:41

कि आख़िर तुम्हें दोज़ख़ में कौन सी चीज़ (घसीट) लायी

Verse 42 — Surah Al-Muddaththir 74:42

वह लोग कहेंगे

Verse 43 — Surah Al-Muddaththir 74:43

कि हम न तो नमाज़ पढ़ा करते थे

Verse 44 — Surah Al-Muddaththir 74:44

और न मोहताजों को खाना खिलाते थे

Verse 45 — Surah Al-Muddaththir 74:45

और अहले बातिल के साथ हम भी बड़े काम में घुस पड़ते थे

Verse 46 — Surah Al-Muddaththir 74:46

और रोज़ जज़ा को झुठलाया करते थे (और यूँ ही रहे)

Verse 47 — Surah Al-Muddaththir 74:47

यहाँ तक कि हमें मौत आ गयी

Verse 48 — Surah Al-Muddaththir 74:48

तो (उस वक्त) उन्हें सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश कुछ काम न आएगी

Verse 49 — Surah Al-Muddaththir 74:49

और उन्हें क्या हो गया है कि नसीहत से मुँह मोड़े हुए हैं

Verse 50 — Surah Al-Muddaththir 74:50

गोया वह वहशी गधे हैं

Verse 51 — Surah Al-Muddaththir 74:51

कि येर से (दुम दबा कर) भागते हैं

Verse 52 — Surah Al-Muddaththir 74:52

असल ये है कि उनमें से हर शख़्श इसका मुतमइनी है कि उसे खुली हुई (आसमानी) किताबें अता की जाएँ

Verse 53 — Surah Al-Muddaththir 74:53

ये तो हरगिज़ न होगा बल्कि ये तो आख़ेरत ही से नहीं डरते

Verse 54 — Surah Al-Muddaththir 74:54

हाँ हाँ बेशक ये (क़ुरान सरा सर) नसीहत है

Verse 55 — Surah Al-Muddaththir 74:55

तो जो चाहे उसे याद रखे

Verse 56 — Surah Al-Muddaththir 74:56

और ख़ुदा की मशीयत के बग़ैर ये लोग याद रखने वाले नहीं वही (बन्दों के) डराने के क़ाबिल और बख्यिश का मालिक है