Back to Languages

Hindi - Chapter 75 - Al-Qiyamah

Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink

Verse 1 — Surah Al-Qiyamah 75:1

मैं रोजे क़यामत की क़सम खाता हूँ

Verse 2 — Surah Al-Qiyamah 75:2

(और बुराई से) मलामत करने वाले जी की क़सम खाता हूँ (कि तुम सब दोबारा) ज़रूर ज़िन्दा किए जाओगे

Verse 3 — Surah Al-Qiyamah 75:3

क्या इन्सान ये ख्याल करता है (कि हम उसकी हड्डियों को बोसीदा होने के बाद) जमा न करेंगे हाँ (ज़रूर करेंगें)

Verse 4 — Surah Al-Qiyamah 75:4

हम इस पर क़ादिर हैं कि हम उसकी पोर पोर दुरूस्त करें

Verse 5 — Surah Al-Qiyamah 75:5

मगर इन्सान तो ये जानता है कि अपने आगे भी (हमेशा) बुराई करता जाए

Verse 6 — Surah Al-Qiyamah 75:6

पूछता है कि क़यामत का दिन कब होगा

Verse 7 — Surah Al-Qiyamah 75:7

तो जब ऑंखे चकाचौन्ध में आ जाएँगी

Verse 8 — Surah Al-Qiyamah 75:8

और चाँद गहन में लग जाएगा

Verse 9 — Surah Al-Qiyamah 75:9

और सूरज और चाँद इकट्ठा कर दिए जाएँगे

Verse 10 — Surah Al-Qiyamah 75:10

तो इन्सान कहेगा आज कहाँ भाग कर जाऊँ

Verse 11 — Surah Al-Qiyamah 75:11

यक़ीन जानों कहीं पनाह नहीं

Verse 12 — Surah Al-Qiyamah 75:12

उस रोज़ तुम्हारे परवरदिगार ही के पास ठिकाना है

Verse 13 — Surah Al-Qiyamah 75:13

उस दिन आदमी को जो कुछ उसके आगे पीछे किया है बता दिया जाएगा

Verse 14 — Surah Al-Qiyamah 75:14

बल्कि इन्सान तो अपने ऊपर आप गवाह है

Verse 15 — Surah Al-Qiyamah 75:15

अगरचे वह अपने गुनाहों की उज्र व ज़रूर माज़ेरत पढ़ा करता रहे

Verse 16 — Surah Al-Qiyamah 75:16

(ऐ रसूल) वही के जल्दी याद करने वास्ते अपनी ज़बान को हरकत न दो

Verse 17 — Surah Al-Qiyamah 75:17

उसका जमा कर देना और पढ़वा देना तो यक़ीनी हमारे ज़िम्मे है

Verse 18 — Surah Al-Qiyamah 75:18

तो जब हम उसको (जिबरील की ज़बानी) पढ़ें तो तुम भी (पूरा) सुनने के बाद इसी तरह पढ़ा करो

Verse 19 — Surah Al-Qiyamah 75:19

फिर उस (के मुश्किलात का समझा देना भी हमारे ज़िम्में है)

Verse 20 — Surah Al-Qiyamah 75:20

मगर (लोगों) हक़ तो ये है कि तुम लोग दुनिया को दोस्त रखते हो

Verse 21 — Surah Al-Qiyamah 75:21

और आख़ेरत को छोड़े बैठे हो

Verse 22 — Surah Al-Qiyamah 75:22

उस रोज़ बहुत से चेहरे तो तरो ताज़ा बशबाब होंगे

Verse 23 — Surah Al-Qiyamah 75:23

(और) अपने परवरदिगार (की नेअमत) को देख रहे होंगे

Verse 24 — Surah Al-Qiyamah 75:24

और बहुतेरे मुँह उस दिन उदास होंगे

Verse 25 — Surah Al-Qiyamah 75:25

समझ रहें हैं कि उन पर मुसीबत पड़ने वाली है कि कमर तोड़ देगी

Verse 26 — Surah Al-Qiyamah 75:26

सुन लो जब जान (बदन से खिंच के) हँसली तक आ पहुँचेगी

Verse 27 — Surah Al-Qiyamah 75:27

और कहा जाएगा कि (इस वक्त) क़ोई झाड़ फूँक करने वाला है

Verse 28 — Surah Al-Qiyamah 75:28

और मरने वाले ने समझा कि अब (सबसे) जुदाई है

Verse 29 — Surah Al-Qiyamah 75:29

और (मौत की तकलीफ़ से) पिन्डली से पिन्डली लिपट जाएगी

Verse 30 — Surah Al-Qiyamah 75:30

उस दिन तुमको अपने परवरदिगार की बारगाह में चलना है

Verse 31 — Surah Al-Qiyamah 75:31

तो उसने (ग़फलत में) न (कलामे ख़ुदा की) तसदीक़ की न नमाज़ पढ़ी

Verse 32 — Surah Al-Qiyamah 75:32

मगर झुठलाया और (ईमान से) मुँह फेरा

Verse 33 — Surah Al-Qiyamah 75:33

अपने घर की तरफ इतराता हुआ चला

Verse 34 — Surah Al-Qiyamah 75:34

अफसोस है तुझ पर फिर अफसोस है फिर तुफ़ है

Verse 35 — Surah Al-Qiyamah 75:35

तुझ पर फिर तुफ़ है

Verse 36 — Surah Al-Qiyamah 75:36

क्या इन्सान ये समझता है कि वह यूँ ही छोड़ दिया जाएगा

Verse 37 — Surah Al-Qiyamah 75:37

क्या वह (इब्तेदन) मनी का एक क़तरा न था जो रहम में डाली जाती है

Verse 38 — Surah Al-Qiyamah 75:38

फिर लोथड़ा हुआ फिर ख़ुदा ने उसे बनाया

Verse 39 — Surah Al-Qiyamah 75:39

फिर उसे दुरूस्त किया फिर उसकी दो किस्में बनायीं (एक) मर्द और (एक) औरत

Verse 40 — Surah Al-Qiyamah 75:40

क्या इस पर क़ादिर नहीं कि (क़यामत में) मुर्दों को ज़िन्दा कर दे