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Hindi - Chapter 76 - Al-Insan
Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink
Verse 1 — Surah Al-Insan 76:1
बेशक इन्सान पर एक ऐसा वक्त अा चुका है कि वह कोई चीज़ क़ाबिले ज़िक्र न था
Verse 2 — Surah Al-Insan 76:2
हमने इन्सान को मख़लूत नुत्फे से पैदा किया कि उसे आज़माये तो हमने उसे सुनता देखता बनाया
Verse 3 — Surah Al-Insan 76:3
और उसको रास्ता भी दिखा दिया (अब वह) ख्वाह शुक्र गुज़ार हो ख्वाह नाशुक्रा
Verse 4 — Surah Al-Insan 76:4
हमने काफ़िरों के ज़ंजीरे, तौक और दहकती हुई आग तैयार कर रखी है
Verse 5 — Surah Al-Insan 76:5
बेशक नेकोकार लोग शराब के वह सागर पियेंगे जिसमें काफूर की आमेज़िश होगी ये एक चश्मा है जिसमें से ख़ुदा के (ख़ास) बन्दे पियेंगे
Verse 6 — Surah Al-Insan 76:6
और जहाँ चाहेंगे बहा ले जाएँगे
Verse 7 — Surah Al-Insan 76:7
ये वह लोग हैं जो नज़रें पूरी करते हैं और उस दिन से जिनकी सख्ती हर तरह फैली होगी डरते हैं
Verse 8 — Surah Al-Insan 76:8
और उसकी मोहब्बत में मोहताज और यतीम और असीर को खाना खिलाते हैं
Verse 9 — Surah Al-Insan 76:9
(और कहते हैं कि) हम तो तुमको बस ख़ालिस ख़ुदा के लिए खिलाते हैं हम न तुम से बदले के ख़ास्तगार हैं और न शुक्र गुज़ारी के
Verse 10 — Surah Al-Insan 76:10
हमको तो अपने परवरदिगार से उस दिन का डर है जिसमें मुँह बन जाएँगे (और) चेहरे पर हवाइयाँ उड़ती होंगी
Verse 11 — Surah Al-Insan 76:11
तो ख़ुदा उन्हें उस दिन की तकलीफ़ से बचा लेगा और उनको ताज़गी और ख़ुशदिली अता फरमाएगा
Verse 12 — Surah Al-Insan 76:12
और उनके सब्र के बदले (बेहिश्त के) बाग़ और रेशम (की पोशाक) अता फ़रमाएगा
Verse 13 — Surah Al-Insan 76:13
वहाँ वह तख्तों पर तकिए लगाए (बैठे) होंगे न वहाँ (आफताब की) धूप देखेंगे और न शिद्दत की सर्दी
Verse 14 — Surah Al-Insan 76:14
और घने दरख्तों के साए उन पर झुके हुए होंगे और मेवों के गुच्छे उनके बहुत क़रीब हर तरह उनके एख्तेयार में
Verse 15 — Surah Al-Insan 76:15
और उनके सामने चाँदी के साग़र और शीशे के निहायत शफ्फ़ाफ़ गिलास का दौर चल रहा होगा
Verse 16 — Surah Al-Insan 76:16
और शीशे भी (काँच के नहीं) चाँदी के जो ठीक अन्दाज़े के मुताबिक बनाए गए हैं
Verse 17 — Surah Al-Insan 76:17
और वहाँ उन्हें ऐसी शराब पिलाई जाएगी जिसमें जनजबील (के पानी) की आमेज़िश होगी
Verse 18 — Surah Al-Insan 76:18
ये बेहश्त में एक चश्मा है जिसका नाम सलसबील है
Verse 19 — Surah Al-Insan 76:19
और उनके सामने हमेशा एक हालत पर रहने वाले नौजवाल लड़के चक्कर लगाते होंगे कि जब तुम उनको देखो तो समझो कि बिखरे हुए मोती हैं
Verse 20 — Surah Al-Insan 76:20
और जब तुम वहाँ निगाह उठाओगे तो हर तरह की नेअमत और अज़ीमुश शान सल्तनत देखोगे
Verse 21 — Surah Al-Insan 76:21
उनके ऊपर सब्ज़ क्रेब और अतलस की पोशाक होगी और उन्हें चाँदी के कंगन पहनाए जाएँगे और उनका परवरदिगार उन्हें निहायत पाकीज़ा शराब पिलाएगा
Verse 22 — Surah Al-Insan 76:22
ये यक़ीनी तुम्हारे लिए होगा और तुम्हारी (कारगुज़ारियों के) सिले में और तुम्हारी कोशिश क़ाबिले शुक्र गुज़ारी है
Verse 23 — Surah Al-Insan 76:23
(ऐ रसूल) हमने तुम पर क़ुरान को रफ्ता रफ्ता करके नाज़िल किया
Verse 24 — Surah Al-Insan 76:24
तो तुम अपने परवरदिगार के हुक्म के इन्तज़ार में सब्र किए रहो और उन लोगों में से गुनाहगार और नाशुक्रे की पैरवी न करना
Verse 25 — Surah Al-Insan 76:25
सुबह शाम अपने परवरदिगार का नाम लेते रहो
Verse 26 — Surah Al-Insan 76:26
और कुछ रात गए उसका सजदा करो और बड़ी रात तक उसकी तस्बीह करते रहो
Verse 27 — Surah Al-Insan 76:27
ये लोग यक़ीनन दुनिया को पसन्द करते हैं और बड़े भारी दिन को अपने पसे पुश्त छोड़ बैठे हैं
Verse 28 — Surah Al-Insan 76:28
हमने उनको पैदा किया और उनके आज़ा को मज़बूत बनाया और अगर हम चाहें तो उनके बदले उन्हीं के जैसे लोग ले आएँ
Verse 29 — Surah Al-Insan 76:29
बेशक ये कुरान सरासर नसीहत है तो जो शख़्श चाहे अपने परवरदिगार की राह ले
Verse 30 — Surah Al-Insan 76:30
और जब तक ख़ुदा को मंज़ूर न हो तुम लोग कुछ भी चाह नहीं सकते बेशक ख़ुदा बड़ा वाक़िफकार दाना है
Verse 31 — Surah Al-Insan 76:31
जिसको चाहे अपनी रहमत में दाख़िल कर ले और ज़ालिमों के वास्ते उसने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है