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Hindi - Chapter 80 - Abasa
Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink
Verse 1 — Surah Abasa 80:1
वह अपनी बात पर चीं ब जबीं हो गया
Verse 2 — Surah Abasa 80:2
और मुँह फेर बैठा कि उसके पास नाबीना आ गया
Verse 3 — Surah Abasa 80:3
और तुमको क्या मालूम यायद वह (तालीम से) पाकीज़गी हासिल करता
Verse 4 — Surah Abasa 80:4
या वह नसीहत सुनता तो नसीहत उसके काम आती
Verse 5 — Surah Abasa 80:5
तो जो कुछ परवाह नहीं करता
Verse 6 — Surah Abasa 80:6
उसके तो तुम दरपै हो जाते हो हालॉकि अगर वह न सुधरे
Verse 7 — Surah Abasa 80:7
तो तुम ज़िम्मेदार नहीं
Verse 8 — Surah Abasa 80:8
और जो तुम्हारे पास लपकता हुआ आता है
Verse 9 — Surah Abasa 80:9
और (ख़ुदा से) डरता है
Verse 10 — Surah Abasa 80:10
तो तुम उससे बेरूख़ी करते हो
Verse 11 — Surah Abasa 80:11
देखो ये (क़ुरान) तो सरासर नसीहत है
Verse 12 — Surah Abasa 80:12
तो जो चाहे इसे याद रखे
Verse 13 — Surah Abasa 80:13
(लौहे महफूज़ के) बहुत मोअज़ज़िज औराक़ में (लिखा हुआ) है
Verse 14 — Surah Abasa 80:14
बुलन्द मरतबा और पाक हैं
Verse 15 — Surah Abasa 80:15
(ऐसे) लिखने वालों के हाथों में है
Verse 16 — Surah Abasa 80:16
जो बुज़ुर्ग नेकोकार हैं
Verse 17 — Surah Abasa 80:17
इन्सान हलाक हो जाए वह क्या कैसा नाशुक्रा है
Verse 18 — Surah Abasa 80:18
(ख़ुदा ने) उसे किस चीज़ से पैदा किया
Verse 19 — Surah Abasa 80:19
नुत्फे से उसे पैदा किया फिर उसका अन्दाज़ा मुक़र्रर किया
Verse 20 — Surah Abasa 80:20
फिर उसका रास्ता आसान कर दिया
Verse 21 — Surah Abasa 80:21
फिर उसे मौत दी फिर उसे कब्र में दफ़न कराया
Verse 22 — Surah Abasa 80:22
फिर जब चाहेगा उठा खड़ा करेगा
Verse 23 — Surah Abasa 80:23
सच तो यह है कि ख़ुदा ने जो हुक्म उसे दिया उसने उसको पूरा न किया
Verse 24 — Surah Abasa 80:24
तो इन्सान को अपने घाटे ही तरफ ग़ौर करना चाहिए
Verse 25 — Surah Abasa 80:25
कि हम ही ने (बादल) से पानी बरसाया
Verse 26 — Surah Abasa 80:26
फिर हम ही ने ज़मीन (दरख्त उगाकर) चीरी फाड़ी
Verse 27 — Surah Abasa 80:27
फिर हमने उसमें अनाज उगाया
Verse 28 — Surah Abasa 80:28
और अंगूर और तरकारियाँ
Verse 29 — Surah Abasa 80:29
और ज़ैतून और खजूरें
Verse 30 — Surah Abasa 80:30
और घने घने बाग़ और मेवे
Verse 31 — Surah Abasa 80:31
और चारा (ये सब कुछ) तुम्हारे और तुम्हारे
Verse 32 — Surah Abasa 80:32
चारपायों के फायदे के लिए (बनाया)
Verse 33 — Surah Abasa 80:33
तो जब कानों के परदे फाड़ने वाली (क़यामत) आ मौजूद होगी
Verse 34 — Surah Abasa 80:34
उस दिन आदमी अपने भाई
Verse 35 — Surah Abasa 80:35
और अपनी माँ और अपने बाप
Verse 36 — Surah Abasa 80:36
और अपने लड़के बालों से भागेगा
Verse 37 — Surah Abasa 80:37
उस दिन हर शख़्श (अपनी नजात की) ऐसी फ़िक्र में होगा जो उसके (मशग़ूल होने के) लिए काफ़ी हों
Verse 38 — Surah Abasa 80:38
बहुत से चेहरे तो उस दिन चमकते होंगे
Verse 39 — Surah Abasa 80:39
ख़न्दाँ शांदाँ (यही नेको कार हैं)
Verse 40 — Surah Abasa 80:40
और बहुत से चेहरे ऐसे होंगे जिन पर गर्द पड़ी होगी
Verse 41 — Surah Abasa 80:41
उस पर सियाही छाई हुई होगी
Verse 42 — Surah Abasa 80:42
यही कुफ्फ़ार बदकार हैं