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Hindi - Chapter 93 - Ad-Duhaa
Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink
Verse 1 — Surah Ad-Duhaa 93:1
(ऐ रसूल) पहर दिन चढ़े की क़सम
Verse 2 — Surah Ad-Duhaa 93:2
और रात की जब (चीज़ों को) छुपा ले
Verse 3 — Surah Ad-Duhaa 93:3
कि तुम्हारा परवरदिगार न तुमको छोड़ बैठा और (न तुमसे) नाराज़ हुआ
Verse 4 — Surah Ad-Duhaa 93:4
और तुम्हारे वास्ते आख़ेरत दुनिया से यक़ीनी कहीं बेहतर है
Verse 5 — Surah Ad-Duhaa 93:5
और तुम्हारा परवरदिगार अनक़रीब इस क़दर अता करेगा कि तुम ख़ुश हो जाओ
Verse 6 — Surah Ad-Duhaa 93:6
क्या उसने तुम्हें यतीम पाकर (अबू तालिब की) पनाह न दी (ज़रूर दी)
Verse 7 — Surah Ad-Duhaa 93:7
और तुमको एहकाम से नावाकिफ़ देखा तो मंज़िले मक़सूद तक पहुँचा दिया
Verse 8 — Surah Ad-Duhaa 93:8
और तुमको तंगदस्त देखकर ग़नी कर दिया
Verse 9 — Surah Ad-Duhaa 93:9
तो तुम भी यतीम पर सितम न करना
Verse 10 — Surah Ad-Duhaa 93:10
माँगने वाले को झिड़की न देना
Verse 11 — Surah Ad-Duhaa 93:11
और अपने परवरदिगार की नेअमतों का ज़िक्र करते रहना