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Hindi - Chapter 96 - Al-Alaq

Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink

Verse 1 — Surah Al-Alaq 96:1

(ऐ रसूल) अपने परवरदिगार का नाम लेकर पढ़ो जिसने हर (चीज़ को) पैदा किया

Verse 2 — Surah Al-Alaq 96:2

उस ने इन्सान को जमे हुए ख़ून से पैदा किया पढ़ो

Verse 3 — Surah Al-Alaq 96:3

और तुम्हारा परवरदिगार बड़ा क़रीम है

Verse 4 — Surah Al-Alaq 96:4

जिसने क़लम के ज़रिए तालीम दी

Verse 5 — Surah Al-Alaq 96:5

उसीने इन्सान को वह बातें बतायीं जिनको वह कुछ जानता ही न था

Verse 6 — Surah Al-Alaq 96:6

सुन रखो बेशक इन्सान जो अपने को ग़नी देखता है

Verse 7 — Surah Al-Alaq 96:7

तो सरकश हो जाता है

Verse 8 — Surah Al-Alaq 96:8

बेशक तुम्हारे परवरदिगार की तरफ (सबको) पलटना है

Verse 9 — Surah Al-Alaq 96:9

भला तुमने उस शख़्श को भी देखा

Verse 10 — Surah Al-Alaq 96:10

जो एक बन्दे को जब वह नमाज़ पढ़ता है तो वह रोकता है

Verse 11 — Surah Al-Alaq 96:11

भला देखो तो कि अगर ये राहे रास्त पर हो या परहेज़गारी का हुक्म करे

Verse 12 — Surah Al-Alaq 96:12

तो रोकना कैसा

Verse 13 — Surah Al-Alaq 96:13

भला देखो तो कि अगर उसने (सच्चे को) झुठला दिया और (उसने) मुँह फेरा

Verse 14 — Surah Al-Alaq 96:14

(तो नतीजा क्या होगा) क्या उसको ये मालूम नहीं कि ख़ुदा यक़ीनन देख रहा है

Verse 15 — Surah Al-Alaq 96:15

देखो अगर वह बाज़ न आएगा तो हम परेशानी के पट्टे पकड़ के घसीटेंगे

Verse 16 — Surah Al-Alaq 96:16

झूठे ख़तावार की पेशानी के पट्टे

Verse 17 — Surah Al-Alaq 96:17

तो वह अपने याराने जलसा को बुलाए हम भी जल्लाद फ़रिश्ते को बुलाएँगे

Verse 18 — Surah Al-Alaq 96:18

(ऐ रसूल) देखो हरगिज़ उनका कहना न मानना

Verse 19 — Surah Al-Alaq 96:19

और सजदे करते रहो और कुर्ब हासिल करो (19) (सजदा)